सीधा जवाब: लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने 1 से 30 नवंबर 2026 तक ‘सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा’ थीम पर यातायात माह शुरू किया है। रविवार, 1 नवंबर को पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने रिज़र्व पुलिस लाइन से क़रीब 400 बाइकर्स की रैली को हरी झंडी दिखाई। इस महीने ग़लत दिशा, ओवरस्पीड, नशे में ड्राइविंग और बिना हेलमेट जैसे उल्लंघनों पर सख़्ती होगी, और लोगों को गोल्डन ऑवर में घायलों की मदद के लिए गुड समैरिटन और राहवीर योजना के बारे में बताया जाएगा।
यातायात माह में क्या होगा
सवाललखनऊ के यातायात माह में पुलिस क्या करेगी?
जवाब: हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार ट्रैफ़िक पुलिस ने सड़क सुरक्षा के 5E (Education, Enforcement, Engineering, Emergency Care, Environment) पर आधारित कार्ययोजना बनाई है। स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों और सार्वजनिक जगहों पर जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, सेमिनार और क्विज़ होंगे। शुभारंभ पर संयुक्त पुलिस आयुक्त बब्लू कुमार, डीसीपी (लाइंस/ट्रैफ़िक) अनिल यादव, डीसीपी (मध्य) अर्पित विजयवर्गीय और आरटीओ प्रभात पांडेय मौजूद रहे।
किन उल्लंघनों पर सख़्ती
सवालयातायात माह में किन उल्लंघनों पर कार्रवाई होगी?
जवाब: HT के मुताबिक़ इन पर कार्रवाई होगी: बिना हेलमेट या बिना सीट बेल्ट; ओवरस्पीडिंग और ग़लत दिशा में गाड़ी चलाना; शराब पीकर गाड़ी चलाना और गाड़ी चलाते मोबाइल फ़ोन; ट्रिपल राइडिंग और नाबालिग़ का गाड़ी चलाना; अवैध पार्किंग; प्रेशर हॉर्न, काली फ़िल्म और बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियाँ।
- बिना हेलमेट या बिना सीट बेल्ट
- ओवरस्पीडिंग और ग़लत दिशा में गाड़ी चलाना
- शराब पीकर गाड़ी चलाना और गाड़ी चलाते मोबाइल फ़ोन
- ट्रिपल राइडिंग और नाबालिग़ का गाड़ी चलाना
- अवैध पार्किंग
- प्रेशर हॉर्न, काली फ़िल्म और बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियाँ
नशे में ड्राइविंग पर जुर्माना और सज़ा: नशे में ड्राइविंग: धारा 185, जुर्माना और जेल। ताज़ा जुर्मानों की सूची: ट्रैफ़िक चालान के ताज़ा जुर्माने।

गोल्डन ऑवर और राहवीर योजना
सवालहादसे में घायल की मदद करने पर क्या मिलता है?
जवाब: हादसे के बाद का पहला एक घंटा (गोल्डन ऑवर) सबसे अहम होता है। लखनऊ पुलिस इस महीने लोगों को बताएगी कि घायल को तुरंत अस्पताल पहुँचाने वाले को डरने की ज़रूरत नहीं है। राहवीर योजना: PIB (30 दिसंबर 2025) के अनुसार 21 अप्रैल 2025 के संशोधित दिशानिर्देशों से मदद करने वाले (राहवीर) का इनाम ₹5,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति घटना किया गया है।
- राहवीर योजना: PIB (30 दिसंबर 2025) के अनुसार 21 अप्रैल 2025 के संशोधित दिशानिर्देशों से मदद करने वाले (राहवीर) का इनाम ₹5,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति घटना किया गया है। एक घायल की मदद कई लोग करें, तो राशि बराबर बँटती है। हर साल 10 राष्ट्रीय पुरस्कार ₹1 लाख के भी दिए जाते हैं। पूरी प्रक्रिया: राहवीर योजना: ₹25,000 इनाम कैसे मिलता है।
- कानूनी सुरक्षा: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134A (2019 संशोधन) के तहत मदद करने वाले पर किसी सिविल या आपराधिक दायित्व की ज़िम्मेदारी नहीं डाली जा सकती, और अपनी पहचान बताना उसकी मर्ज़ी पर है।
- कैशलेस इलाज: PIB के अनुसार सड़क हादसा पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना 2025 में नामित अस्पतालों में ₹1.5 लाख तक, हादसे से 7 दिन तक इलाज मिलता है: PM-RAHAT कैशलेस इलाज कैसे मिलेगा।
हादसा दिखे तो क्या करें
सवालसड़क पर हादसा दिखे तो क्या करें?
जवाब: अपनी सुरक्षा पहले: गाड़ी किनारे रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ।; लखनऊ पुलिस की अपील के मुताबिक़ तुरंत 112 (आपात) या 108 (एंबुलेंस) पर सूचना दें।; घायल को बेवजह न हिलाएँ, ख़ासकर सिर-गर्दन की चोट में; ख़ून बह रहा हो तो साफ़ कपड़े से दबाएँ।; एंबुलेंस न मिले तो घायल को नज़दीकी अस्पताल पहुँचाएँ; अस्पताल या पुलिस से मदद की पावती लें, ताकि राहवीर इनाम के लिए नाम भेजा जा सके।
- अपनी सुरक्षा पहले: गाड़ी किनारे रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ।
- लखनऊ पुलिस की अपील के मुताबिक़ तुरंत 112 (आपात) या 108 (एंबुलेंस) पर सूचना दें।
- घायल को बेवजह न हिलाएँ, ख़ासकर सिर-गर्दन की चोट में; ख़ून बह रहा हो तो साफ़ कपड़े से दबाएँ।
- एंबुलेंस न मिले तो घायल को नज़दीकी अस्पताल पहुँचाएँ; अस्पताल या पुलिस से मदद की पावती लें, ताकि राहवीर इनाम के लिए नाम भेजा जा सके।
- आपात स्थिति में और क्या करें: आपात स्थिति में मदद कैसे करें।
मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं
सवालघायल की मदद करने पर क्या पुलिस परेशान कर सकती है?
जवाब: हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि "पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे"। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए।
| मदद करने वाले का अधिकार | इसका मतलब |
|---|---|
| तुरंत जाने की छूट | पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं |
| पहचान बताना ज़रूरी नहीं | पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता |
| अस्पताल का ख़र्च नहीं | अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता |
| पावती (रसीद) | नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है |
| गवाह बनना मर्ज़ी से | गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है |
नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।
हादसे की जगह पर पहले 10 मिनट: क्या करें
चोट लगने के बाद का पहला घंटा सबसे क़ीमती माना जाता है, इसलिए हादसे की जगह पर मौजूद आम लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। ज़रूरी है कि मदद करते हुए आप ख़ुद सुरक्षित रहें।
- अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
- 112 पर कॉल करें: जगह का नाम, नज़दीकी पहचान (पुल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किलोमीटर पत्थर) और घायलों की संख्या बताएँ।
- इंजन बंद कराएँ: हादसे वाली गाड़ी का इंजन बंद करवाएँ। ईंधन या गैस की गंध आए तो बीड़ी-सिगरेट और चिंगारी से दूर रहें।
- बिना ज़रूरत न हिलाएँ: गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो तो घायल को तभी हटाएँ जब आग या दूसरी गाड़ी से तुरंत ख़तरा हो।
- ख़ून रोकें: बहते ख़ून पर साफ़ कपड़े से लगातार दबाव रखें।
- होश में रखें: घायल से बात करते रहें, भीड़ हटाएँ ताकि हवा मिले। बेहोश व्यक्ति के मुँह में पानी न डालें।
- अस्पताल पहुँचाएँ: एम्बुलेंस देर से आए और घायल को ले जाना सुरक्षित हो, तो नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।
वीडियो बनाने से ज़्यादा ज़रूरी है मदद करना। अगर आप ख़ुद कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम सही जगह और जानकारी के साथ 112 पर कॉल ज़रूर करें।

निष्कर्ष
यातायात माह सिर्फ़ चालान का महीना नहीं है। लखनऊ पुलिस का ज़ोर इस बात पर भी है कि सड़क पर कोई घायल दिखे तो लोग रुकें और मदद करें, क्योंकि गोल्डन ऑवर में मिली मदद जान बचा सकती है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड Help in an Emergency Situations भी पढ़ सकते हैं।
गाड़ी पर लगा Rakshak Code QR हादसे की स्थिति में मददगार को गाड़ी मालिक के परिवार या इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँचने का रास्ता देता है, बिना किसी का नंबर सार्वजनिक किए।
आख़िरी अपडेट: 2 नवंबर 2026
स्रोत (Sources)
- Hindustan Times, Five-pronged road safety campaign rolled out in Lko; traffic offenders in focus (2 नवंबर 2026): https://www.hindustantimes.com/cities/lucknow-news/fivepronged-road-safety-campaign-rolled-out-in-lko-traffic-offenders-in-focus-101793557905877.html
- हिन्दुस्तान, यातायात माह शुरू, वाहन चालकों को पांच बिंदुओं पर सचेत करेंगे (1 नवंबर 2026): https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/lucknow/story-lucknow-traffic-month-2024-road-safety-awareness-campaign-launched-201793553958586.html
- PIB, Year End Review 2025 – Ministry of Road Transport & Highways (30 दिसंबर 2025): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2209837
- PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
- MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. लखनऊ में यातायात माह कब तक है?
1 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक।
2. राहवीर को कितना इनाम मिलता है?
₹25,000 प्रति घटना; कई मददगार हों तो राशि बराबर बँटती है। हर साल 10 राष्ट्रीय पुरस्कार ₹1 लाख के।
3. क्या घायल की मदद करने पर पुलिस परेशान करेगी?
धारा 134A मदद करने वाले को सिविल और आपराधिक दायित्व से सुरक्षा देती है; पहचान बताना भी ज़रूरी नहीं।
4. हादसे की सूचना किस नंबर पर दें?
लखनऊ पुलिस ने 112 (आपात) या 108 (एंबुलेंस) पर सूचना देने की अपील की है।
5. लखनऊ के यातायात माह की थीम क्या है?
हिन्दुस्तान के अनुसार इस बार की थीम ‘सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा’ है।


