सीधा जवाब: सड़क हादसे में घायल व्यक्ति का इलाज पैसे या काग़ज़ों के इंतज़ार में नहीं रुकना चाहिए। PIB (29 जनवरी 2026) के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम की धारा 162 के तहत अधिसूचित कैशलेस इलाज योजना में हर सड़क हादसा पीड़ित को ₹1.5 लाख तक, हादसे की तारीख़ से 7 दिन तक इलाज मिलता है। नामित अस्पताल में स्थिरीकरण इलाज ग़ैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे और जानलेवा मामलों में 48 घंटे तक मिलना चाहिए। अस्पताल मना करे, तो पहले घायल को बचाइए: 112 पर कॉल करके नज़दीकी नामित अस्पताल पहुँचिए, फिर लिखित शिकायत कीजिए।
घायल के अधिकार
सवालसड़क हादसे के घायल के इलाज से जुड़े अधिकार क्या हैं?
जवाब: इलाज की सीमा: प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक; समय सीमा: हादसे की तारीख़ से 7 दिन; कौन पात्र: किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन से हुए हादसे का हर पीड़ित; स्थिरीकरण इलाज: ग़ैर-जानलेवा में 24 घंटे, जानलेवा में 48 घंटे तक (पुलिस पुष्टि के अधीन); किसके तहत: मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162; S.O.
| अधिकार | जानकारी (PIB, 29 जनवरी 2026) |
|---|---|
| इलाज की सीमा | प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक |
| समय सीमा | हादसे की तारीख़ से 7 दिन |
| कौन पात्र | किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन से हुए हादसे का हर पीड़ित |
| स्थिरीकरण इलाज | ग़ैर-जानलेवा में 24 घंटे, जानलेवा में 48 घंटे तक (पुलिस पुष्टि के अधीन) |
| किसके तहत | मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162; S.O. 2015(E), 5 मई 2025 |
| प्राथमिकता | यह वैधानिक योजना दूसरी केंद्र/राज्य योजनाओं पर प्राथमिकता रखती है |
सुप्रीम कोर्ट ने 1989 के पं. परमानंद कटारा बनाम भारत संघ मामले में भी यह सिद्धांत रखा था कि जान बचाने के लिए तुरंत इलाज देना डॉक्टर का कर्तव्य है, और क़ानूनी औपचारिकताएँ इसमें बाधा नहीं बननी चाहिए। आसान शब्दों में: पहले इलाज, काग़ज़ बाद में।
कौन-से अस्पताल?
सवालकैशलेस इलाज किन अस्पतालों में मिलता है?
जवाब: PIB के अनुसार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) में सूचीबद्ध अस्पताल इस योजना के लिए अपने-आप "नामित अस्पताल" माने जाते हैं। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अतिरिक्त अस्पतालों को भी जोड़ सकते हैं। 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम (ERSS) को योजना से जोड़ा गया है, ताकि 112 ऑपरेटर घायल को नज़दीकी नामित अस्पताल का रास्ता बताए और ज़रूरत हो तो एंबुलेंस भेजे।

अस्पताल मना करे तो क्या करें?
सवालअस्पताल इलाज से मना करे तो तुरंत क्या करें?
जवाब: बहस में समय न गँवाएँ: घायल की हालत गंभीर हो तो 112 से तुरंत दूसरे नज़दीकी नामित अस्पताल की जानकारी लें।; शांति से योजना बताएँ: कहें कि यह सड़क हादसे का मामला है और कैशलेस इलाज योजना (PM-RAHAT) के तहत इलाज चाहिए।; पुलिस को सूचना: हादसे की जानकारी पुलिस तक पहुँचनी चाहिए; योजना में पुलिस की पुष्टि eDAR सिस्टम से जुड़ती है।
- बहस में समय न गँवाएँ: घायल की हालत गंभीर हो तो 112 से तुरंत दूसरे नज़दीकी नामित अस्पताल की जानकारी लें।
- शांति से योजना बताएँ: कहें कि यह सड़क हादसे का मामला है और कैशलेस इलाज योजना (PM-RAHAT) के तहत इलाज चाहिए।
- पुलिस को सूचना: हादसे की जानकारी पुलिस तक पहुँचनी चाहिए; योजना में पुलिस की पुष्टि eDAR सिस्टम से जुड़ती है।
- लिखित में कारण माँगें: अस्पताल मना करे या एडवांस माँगे, तो अस्पताल प्रबंधन से लिखित कारण माँगें। समय, नाम और बातचीत नोट करें।
- शिकायत करें: ज़िला प्रशासन या राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) से शिकायत करें।
आयुष्मान कार्ड ज़रूरी है?
सवालक्या कैशलेस इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड ज़रूरी है?
जवाब: नहीं। PIB के अनुसार आयुष्मान भारत PM-JAY एक लाभ-आधारित बीमा योजना है जिसमें लाभार्थी पहले से तय होते हैं, जबकि कैशलेस इलाज योजना वैधानिक है, जिसमें मोटर वाहन से हुए सड़क हादसे का कोई भी पीड़ित लाभार्थी हो सकता है, चाहे उसके पास कोई कार्ड हो या न हो।
अस्पताल को भुगतान कैसे होता है?
डिस्चार्ज के बाद अस्पताल ज़रूरी काग़ज़ों के साथ राज्य स्वास्थ्य एजेंसी को क्लेम भेजता है। SHA की मंज़ूरी के बाद 10 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है। भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) से होता है। यानी अस्पताल को घायल के परिवार से इस सीमा के भीतर के इलाज का पैसा माँगने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए।
| कौन | क्या करे |
|---|---|
| राहगीर/मददगार | 112 पर कॉल, घायल को अस्पताल पहुँचाना |
| परिवार | पहचान पत्र, हादसे की जानकारी, अस्पताल से संपर्क |
| अस्पताल | इलाज, फिर SHA को क्लेम |
| पुलिस | हादसे की पुष्टि (eDAR) |
हिट एंड रन में
अगर टक्कर मारने वाला वाहन भाग जाए, तब भी इलाज का हक़ बना रहता है। इसके अलावा PIB के अनुसार हिट एंड रन पीड़ितों के लिए अलग मुआवज़ा योजना (1 अप्रैल 2022 से) है: मृत्यु पर ₹2 लाख और गंभीर चोट पर ₹50,000।
हादसे की जगह पर पहले 10 मिनट: क्या करें
सवालहादसे की जगह पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
जवाब: चोट लगने के बाद का पहला घंटा सबसे क़ीमती माना जाता है, इसलिए हादसे की जगह पर मौजूद आम लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। ज़रूरी है कि मदद करते हुए आप ख़ुद सुरक्षित रहें। अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
- अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
- 112 पर कॉल करें: जगह का नाम, नज़दीकी पहचान (पुल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किलोमीटर पत्थर) और घायलों की संख्या बताएँ।
- इंजन बंद कराएँ: हादसे वाली गाड़ी का इंजन बंद करवाएँ। ईंधन या गैस की गंध आए तो बीड़ी-सिगरेट और चिंगारी से दूर रहें।
- बिना ज़रूरत न हिलाएँ: गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो तो घायल को तभी हटाएँ जब आग या दूसरी गाड़ी से तुरंत ख़तरा हो।
- ख़ून रोकें: बहते ख़ून पर साफ़ कपड़े से लगातार दबाव रखें।
- होश में रखें: घायल से बात करते रहें, भीड़ हटाएँ ताकि हवा मिले। बेहोश व्यक्ति के मुँह में पानी न डालें।
- अस्पताल पहुँचाएँ: एम्बुलेंस देर से आए और घायल को ले जाना सुरक्षित हो, तो नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।
वीडियो बनाने से ज़्यादा ज़रूरी है मदद करना। अगर आप ख़ुद कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम सही जगह और जानकारी के साथ 112 पर कॉल ज़रूर करें।
मुआवज़े और बीमा क्लेम के लिए ज़रूरी काग़ज़
हादसे के बाद परिवार सदमे में होता है और काग़ज़ों पर ध्यान नहीं जाता। लेकिन यही काग़ज़ आगे इलाज के ख़र्च, बीमा क्लेम या मुआवज़े में काम आते हैं। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत घायल व्यक्ति, गाड़ी/संपत्ति का मालिक या मृतक के क़ानूनी वारिस मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवज़े का आवेदन कर सकते हैं। क़ानून में आवेदन की समय-सीमा भी लिखी है, इसलिए देर न करें और ज़रूरत हो तो ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ़्त क़ानूनी सलाह लें।
| काग़ज़ | क्यों ज़रूरी |
|---|---|
| FIR / पुलिस रिपोर्ट की कॉपी | हादसे का आधिकारिक रिकॉर्ड |
| अस्पताल की पर्ची, मेडिकल रिपोर्ट, बिल | चोट और ख़र्च का सबूत |
| गाड़ी का नंबर, RC, बीमा पॉलिसी की जानकारी | किस बीमा कंपनी से दावा होगा |
| मौक़े की तस्वीरें, गवाहों के नंबर | हादसा कैसे हुआ, इसका सबूत |
| आय का सबूत (सैलरी स्लिप, ITR आदि) | मुआवज़े की गणना में काम आता है |
| मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र | वारिसों के दावे के लिए |
अपनी गाड़ी के नुकसान पर: बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें, सर्वे से पहले गाड़ी की मरम्मत न कराएँ, और क्लेम नंबर लिख लें। किसी बिचौलिए को काग़ज़ या पैसे देने से पहले सोचें; सीधे बीमा कंपनी या वकील से बात करना सुरक्षित है।

निष्कर्ष
हादसे के बाद के पहले घंटे सबसे क़ीमती होते हैं। अपने अधिकार जानिए, घबराइए मत, और इलाज रुकने मत दीजिए। यह जानकारी परिवार और ड्राइवरों से ज़रूर साझा कीजिए। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड Help in an Emergency Situations भी पढ़ सकते हैं।
हादसे के समय परिवार तक जल्दी ख़बर पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए: मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 1 अगस्त 2026
स्रोत (Sources)
- PIB, “Cashless Treatment to Road Accident Victims” (29 जनवरी 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2220125
- PIB, PM RAHAT (11 मार्च 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2238637
- Indian Kanoon, पं. परमानंद कटारा बनाम भारत संघ (28 अगस्त 1989): https://indiankanoon.org/doc/498126/
- MoRTH, Good Samaritan: https://morth.gov.in/en/good-samaritan
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988, धारा 166 (मुआवज़े के लिए आवेदन): https://indiacode.ecourtsindia.com/mv-act/section/166/
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. सड़क हादसे के घायल को कितने तक का मुफ़्त इलाज मिलता है?
PIB के अनुसार ₹1.5 लाख तक, हादसे की तारीख़ से 7 दिन तक।
2. क्या अस्पताल इलाज से पहले पैसे माँग सकता है?
योजना का उद्देश्य कैशलेस इलाज है; भुगतान SHA के ज़रिए अस्पताल को होता है। पैसे माँगे जाएँ तो लिखित कारण लें और शिकायत करें।
3. कौन-से अस्पताल नामित हैं?
आयुष्मान भारत PM-JAY में सूचीबद्ध अस्पताल अपने-आप नामित माने जाते हैं; 112 ऑपरेटर नज़दीकी अस्पताल बता सकता है।
4. घायल को अस्पताल ले जाने वाले से पूछताछ होगी?
गुड समैरिटन नियम मदद करने वालों को सुरक्षा देते हैं; उन्हें बेवजह रोका या परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
5. हादसे के बाद घायल को हिलाना चाहिए या नहीं?
अगर गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो और जगह पर आग या दूसरा तुरंत ख़तरा न हो, तो बिना ज़रूरत घायल को न हिलाएँ; 112 पर कॉल करके मदद का इंतज़ार करें और ख़ून बहने वाली जगह पर साफ़ कपड़े से दबाव रखें।



