PM-RAHAT: आठ महीनों में करीब 25,000 घायलों का कैशलेस इलाज, 13,000 मामलों में अस्पतालों को भुगतान; आप लाभ कैसे लें

सीधा जवाब: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को बताया कि पिछले आठ महीनों में सरकार की कैशलेस इलाज योजना PM-RAHAT के तहत लगभग 25,000 सड़क हादसा पीड़ितों का इलाज हुआ है, और लगभग 13,000 मामलों में अस्पतालों को इलाज के ख़र्च का भुगतान किया जा चुका है (Times of India)। योजना के तहत अस्पतालों के लिए सड़क हादसे के घायल का ₹1.5 लाख तक मुफ़्त इलाज करना ज़रूरी है, हादसे की तारीख़ से 7 दिन की सीमा के साथ। यानी हादसे के बाद पैसे की चिंता में इलाज मत रोकिए।

आंकड़े एक नज़र में

बात जानकारी (TOI, 29 सितंबर 2026)
योजना PM-RAHAT (सड़क हादसा पीड़ितों का कैशलेस इलाज)
अवधि पिछले आठ महीने
इलाज पाए पीड़ित लगभग 25,000
अस्पतालों को भुगतान लगभग 13,000 मामलों में
इलाज की सीमा प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक
समय सीमा हादसे की तारीख़ से 7 दिन
किसने बताया महमूद अहमद, अतिरिक्त सचिव, MoRTH

अधिकारी ने यह जानकारी रोड सेफ़्टी नेटवर्क की “शहरी रफ़्तार पर पुनर्विचार” विषय पर हुई गोलमेज़ बैठक में दी और कहा कि योजना से जानें बचाने में मदद मिली है।

योजना क्या देती है?

सवालPM-RAHAT योजना में घायल को क्या मिलता है?

जवाब: Times of India के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम के तहत यह योजना अस्पतालों के लिए सड़क हादसे के पीड़ित का प्रति व्यक्ति ₹1.5 लाख तक मुफ़्त इलाज अनिवार्य बनाती है, और यह हादसे की तारीख़ से सात दिन तक लागू है। अलग-अलग अध्ययनों के अनुसार हादसे के बाद जल्दी इलाज मिलने से लगभग 50% जानें बचाई जा सकती हैं।

अस्पताल का गलियारा (प्रतीकात्मक)
Photo: fradellafra via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

लाभ कैसे लें?

सवालहादसे के बाद PM-RAHAT का लाभ कैसे लें?

जवाब: हादसा होते ही 112 पर कॉल करें, या घायल को सीधे नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।; अस्पताल को बताएँ कि यह सड़क हादसे का मामला है और PM-RAHAT के तहत कैशलेस इलाज चाहिए।; पुलिस को सूचना दी जाती है; हादसे की जानकारी दर्ज होना ज़रूरी है।; परिवार घायल का पहचान पत्र और हादसे से जुड़ी जानकारी (समय, जगह, वाहन नंबर अगर पता हो) तैयार रखे।

  1. हादसा होते ही 112 पर कॉल करें, या घायल को सीधे नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।
  2. अस्पताल को बताएँ कि यह सड़क हादसे का मामला है और PM-RAHAT के तहत कैशलेस इलाज चाहिए।
  3. पुलिस को सूचना दी जाती है; हादसे की जानकारी दर्ज होना ज़रूरी है।
  4. परिवार घायल का पहचान पत्र और हादसे से जुड़ी जानकारी (समय, जगह, वाहन नंबर अगर पता हो) तैयार रखे।
  5. इलाज से मना किया जाए या पैसे माँगे जाएँ, तो अस्पताल प्रबंधन से लिखित में कारण पूछें और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी या ज़िला प्रशासन से शिकायत करें।

घायल की मदद करने वाले राहगीर से न पैसे माँगे जा सकते हैं, न उसे बेवजह रोका जा सकता है। गुड समैरिटन नियम मदद करने वालों को क़ानूनी सुरक्षा देते हैं।

शहरों में रफ़्तार पर क्या कहा गया?

सवालबैठक में शहरी सड़कों की रफ़्तार पर क्या कहा गया?

जवाब: बैठक में विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने कहा कि वाहनों में बढ़ती सुरक्षा सुविधाएँ शहरी सड़कों पर रफ़्तार नियंत्रण का विकल्प नहीं हैं। पैदल यात्री, दोपहिया सवार और साइकिल चालक सबसे ज़्यादा जोखिम में हैं, और हादसे की गंभीरता सीधे रफ़्तार से जुड़ी है।

कौन सबसे बड़ा जोखिम
पैदल यात्री फ़ुटपाथ न होना, तेज़ रफ़्तार वाहन
दोपहिया सवार रफ़्तार, बिना हेलमेट
साइकिल चालक अलग लेन की कमी

इलेक्ट्रॉनिक निगरानी पर ज़ोर क्यों?

सवालट्रैफिक नियमों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी पर क्यों ज़ोर है?

जवाब: अतिरिक्त सचिव ने ट्रैफिक नियमों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी मज़बूत करने की ज़रूरत बताई, क्योंकि नियम तोड़ने की प्रवृत्ति है और हर जगह पुलिसकर्मी तैनात करना संभव नहीं। उनके शब्दों में, "जब तक सज़ा की निश्चितता नहीं होगी, डर नहीं बनेगा।" उन्होंने कहा कि व्यवस्था तभी काम करेगी जब उल्लंघन पकड़े जाएँ और उन पर कार्रवाई पूरी हो।

मुआवज़े और बीमा क्लेम के लिए ज़रूरी काग़ज़

सवालहादसे के बाद मुआवज़े या बीमा क्लेम के लिए कौन-से काग़ज़ चाहिए?

जवाब: हादसे के बाद परिवार सदमे में होता है और काग़ज़ों पर ध्यान नहीं जाता। लेकिन यही काग़ज़ आगे इलाज के ख़र्च, बीमा क्लेम या मुआवज़े में काम आते हैं। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत घायल व्यक्ति, गाड़ी/संपत्ति का मालिक या मृतक के क़ानूनी वारिस मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवज़े का आवेदन कर सकते हैं।

काग़ज़ क्यों ज़रूरी
FIR / पुलिस रिपोर्ट की कॉपी हादसे का आधिकारिक रिकॉर्ड
अस्पताल की पर्ची, मेडिकल रिपोर्ट, बिल चोट और ख़र्च का सबूत
गाड़ी का नंबर, RC, बीमा पॉलिसी की जानकारी किस बीमा कंपनी से दावा होगा
मौक़े की तस्वीरें, गवाहों के नंबर हादसा कैसे हुआ, इसका सबूत
आय का सबूत (सैलरी स्लिप, ITR आदि) मुआवज़े की गणना में काम आता है
मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र वारिसों के दावे के लिए

अपनी गाड़ी के नुकसान पर: बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें, सर्वे से पहले गाड़ी की मरम्मत न कराएँ, और क्लेम नंबर लिख लें। किसी बिचौलिए को काग़ज़ या पैसे देने से पहले सोचें; सीधे बीमा कंपनी या वकील से बात करना सुरक्षित है।

हादसे की जगह पर पहले 10 मिनट: क्या करें

चोट लगने के बाद का पहला घंटा सबसे क़ीमती माना जाता है, इसलिए हादसे की जगह पर मौजूद आम लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। ज़रूरी है कि मदद करते हुए आप ख़ुद सुरक्षित रहें।

  1. अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
  2. 112 पर कॉल करें: जगह का नाम, नज़दीकी पहचान (पुल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किलोमीटर पत्थर) और घायलों की संख्या बताएँ।
  3. इंजन बंद कराएँ: हादसे वाली गाड़ी का इंजन बंद करवाएँ। ईंधन या गैस की गंध आए तो बीड़ी-सिगरेट और चिंगारी से दूर रहें।
  4. बिना ज़रूरत न हिलाएँ: गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो तो घायल को तभी हटाएँ जब आग या दूसरी गाड़ी से तुरंत ख़तरा हो।
  5. ख़ून रोकें: बहते ख़ून पर साफ़ कपड़े से लगातार दबाव रखें।
  6. होश में रखें: घायल से बात करते रहें, भीड़ हटाएँ ताकि हवा मिले। बेहोश व्यक्ति के मुँह में पानी न डालें।
  7. अस्पताल पहुँचाएँ: एम्बुलेंस देर से आए और घायल को ले जाना सुरक्षित हो, तो नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।

वीडियो बनाने से ज़्यादा ज़रूरी है मदद करना। अगर आप ख़ुद कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम सही जगह और जानकारी के साथ 112 पर कॉल ज़रूर करें।

जब टक्कर मारकर भाग जाए: हिट-एंड-रन मुआवज़ा

कई हादसों में टक्कर मारने वाला वाहन पकड़ा नहीं जाता। ऐसे पीड़ितों के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने 25 फ़रवरी 2022 को “Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022” अधिसूचित की, जो 1 अप्रैल 2022 से पुरानी सोलेशियम योजना, 1989 की जगह लागू है।

स्थिति पहले (सोलेशियम योजना) अब (2022 योजना)
मृत्यु ₹25,000 ₹2,00,000
गंभीर चोट ₹12,500 ₹50,000

कैसे आवेदन करें:

  1. हादसे की FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी लें, जिसमें लिखा हो कि वाहन का पता नहीं चला।
  2. इलाज के काग़ज़, मेडिकल रिपोर्ट और (मृत्यु के मामले में) पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र संभालकर रखें।
  3. योजना में दावा “Claims Enquiry Officer” के पास तय फ़ॉर्म में किया जाता है; मंज़ूरी “Claims Settlement Commissioner” देते हैं और राशि सीधे बैंक खाते में आती है। अपने इलाक़े के सही दफ़्तर की जानकारी पुलिस थाने या ज़िला प्रशासन से लें।
  4. बैंक खाते का विवरण और पहचान पत्र साथ रखें।

मंत्रालय के अनुसार आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है। अगर बाद में वाहन पकड़ा जाता है, तो मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में अलग से दावा भी किया जा सकता है।

शहर की सड़क पर पैदल यात्री (प्रतीकात्मक)
Photo: Tama66 via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

निष्कर्ष

PM-RAHAT का संदेश सीधा है: सड़क हादसे में पहले इलाज, पैसे की बात बाद में। इसे अपने परिवार और ड्राइवरों को ज़रूर बताइए, क्योंकि जानकारी ही सबसे पहली मदद है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड Help in an Emergency Situations भी पढ़ सकते हैं।

हादसे के समय परिवार तक जल्दी ख़बर पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए: मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।

सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।

आख़िरी अपडेट: 30 सितंबर 2026

स्रोत (Sources)

  1. Times of India, “25,000 crash victims treated under PM-RAHAT; hospitals reimbursed in 13,000 cases” (29 सितंबर 2026): https://timesofindia.indiatimes.com/india/25000-crash-victims-treated-under-pm-rahat-hospitals-reimbursed-in-13000-cases/articleshow/134571772.cms
  2. PIB, PM-RAHAT योजना (11 मार्च 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2238637
  3. MoRTH, Good Samaritan: https://morth.gov.in/en/good-samaritan
  4. मोटर वाहन अधिनियम, 1988, धारा 166 (मुआवज़े के लिए आवेदन): https://indiacode.ecourtsindia.com/mv-act/section/166/
  5. PIB, हिट-एंड-रन पीड़ितों के मुआवज़े की नई योजना (25 फ़रवरी 2022): https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1801698
  6. PIB, लोकसभा उत्तर: हिट-एंड-रन मुआवज़ा और Motor Vehicle Accident Fund: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1845885

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. PM-RAHAT के तहत अब तक कितने लोगों का इलाज हुआ?

मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार पिछले आठ महीनों में लगभग 25,000 पीड़ितों का।

2. योजना में कितने तक का इलाज मुफ़्त है?

प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक, हादसे की तारीख़ से 7 दिन तक।

3. अस्पतालों को भुगतान हो रहा है?

TOI के अनुसार लगभग 13,000 मामलों में अस्पतालों को इलाज का भुगतान किया जा चुका है।

4. अस्पताल इलाज से मना करे तो क्या करें?

लिखित में कारण पूछें और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी या ज़िला प्रशासन से शिकायत करें; घायल को देर किए बिना दूसरे अस्पताल ले जाएँ।

5. सड़क हादसे में मुआवज़े का दावा कहाँ होता है?

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में; दावा जितनी जल्दी हो सके करना बेहतर है और FIR, मेडिकल काग़ज़ व वाहन/बीमा की जानकारी संभालकर रखनी चाहिए।

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