सीधा जवाब: 18 जनवरी 2026 (रविवार) सुबह करीब 7:30 बजे हरियाणा के नूंह ज़िले में कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे के बीच कई वाहन आपस में टकरा गए। The Hindu (PTI) के अनुसार चश्मदीदों ने बताया कि क्रशर लदे एक ट्रक ने अचानक ब्रेक लगाए और पीछे से चार वाहन उससे टकरा गए। बीच के दो ट्रकों में आग लग गई, जिसमें एक ट्रक ड्राइवर और उसके सहायक की जलकर मौत हो गई।
क्या हुआ था?
सवालयह हादसा कैसे हुआ?
जवाब: The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार: हादसा सबरस और गुढ़ी गाँवों के बीच हुआ।; आग बुझाने के लिए तीन फायर ब्रिगेड गाड़ियाँ बुलाई गईं और करीब दो घंटे में आग पर काबू पाया गया।; एक्सप्रेसवे पर लंबा जाम लगा; पुलिस को रास्ता साफ़ करने और ट्रैफिक बहाल करने में कुल चार घंटे लगे।; बजरी से लदे दो वाहन भी आग से क्षतिग्रस्त हुए।
- हादसा सबरस और गुढ़ी गाँवों के बीच हुआ।
- आग बुझाने के लिए तीन फायर ब्रिगेड गाड़ियाँ बुलाई गईं और करीब दो घंटे में आग पर काबू पाया गया।
- एक्सप्रेसवे पर लंबा जाम लगा; पुलिस को रास्ता साफ़ करने और ट्रैफिक बहाल करने में कुल चार घंटे लगे।
- बजरी से लदे दो वाहन भी आग से क्षतिग्रस्त हुए।
- पुलिस ने FIR दर्ज कर जाँच शुरू की।
कोहरे में चेन-टक्कर कैसे होती है?
सवालकोहरे में चेन-टक्कर कैसे होती है?
जवाब: आगे की गाड़ी अचानक धीमी होती है या रुकती है। कोहरे में पीछे वाले ड्राइवर को ब्रेक लाइट देर से दिखती है। अगर दूरी कम है और रफ़्तार ज़्यादा, तो वह समय पर नहीं रुक पाता, और फिर उसके पीछे वाला भी। भारी वाहनों में रुकने की दूरी ज़्यादा होती है, इसलिए ख़तरा और बढ़ जाता है।

चेन-टक्कर रोकने के 6 उपाय
सवालचेन-टक्कर रोकने के उपाय क्या हैं?
जवाब: आगे की गाड़ी से सामान्य से दोगुनी या ज़्यादा दूरी: अचानक ब्रेक पर रुकने का समय मिलता है; दिखने की दूरी के हिसाब से रफ़्तार: जितना दिख रहा, उतनी दूरी में रुक सकें; अचानक ब्रेक न लगाएँ; पहले से धीरे-धीरे धीमे हों: पीछे वाले को संभलने का समय; लो बीम, फॉग लाइट और साफ़ टेल लाइट: आप दूसरों को दिखें; भारी वाहनों पर रिफ़्लेक्टिव टेप: पीछे से आने वालों को…
| उपाय | क्यों |
|---|---|
| आगे की गाड़ी से सामान्य से दोगुनी या ज़्यादा दूरी | अचानक ब्रेक पर रुकने का समय मिलता है |
| दिखने की दूरी के हिसाब से रफ़्तार | जितना दिख रहा, उतनी दूरी में रुक सकें |
| अचानक ब्रेक न लगाएँ; पहले से धीरे-धीरे धीमे हों | पीछे वाले को संभलने का समय |
| लो बीम, फॉग लाइट और साफ़ टेल लाइट | आप दूसरों को दिखें |
| भारी वाहनों पर रिफ़्लेक्टिव टेप | पीछे से आने वालों को दूर से दिखें |
| बहुत घने कोहरे में सफ़र रोकें | सुरक्षित जगह पर कोहरा छँटने का इंतज़ार |
अगर टक्कर हो जाए तो
सवालटक्कर हो जाए तो क्या करें?
जवाब: गाड़ी में न रुके रहें; सुरक्षित हो तो तुरंत बाहर निकलें।; एक्सप्रेसवे की रेलिंग के पार या सड़क से दूर खड़े हों; लेन में खड़े होना ख़तरनाक है, पीछे से और गाड़ियाँ टकरा सकती हैं।; 112 पर कॉल करें और जगह बताएँ।; आग दिखे तो वाहनों से दूर रहें।।
- गाड़ी में न रुके रहें; सुरक्षित हो तो तुरंत बाहर निकलें।
- एक्सप्रेसवे की रेलिंग के पार या सड़क से दूर खड़े हों; लेन में खड़े होना ख़तरनाक है, पीछे से और गाड़ियाँ टकरा सकती हैं।
- 112 पर कॉल करें और जगह बताएँ।
- आग दिखे तो वाहनों से दूर रहें।
भारी वाहनों के साथ सड़क साझा करते समय
सवालट्रक या डंपर के पास गाड़ी चलाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब: ट्रक, डंपर और ट्रेलर बड़े और भारी होते हैं, उन्हें रुकने में ज़्यादा दूरी लगती है और ड्राइवर को आसपास की कई जगहें दिखाई नहीं देतीं। छोटे वाहन, बाइक और पैदल चलने वाले इन्हीं "अंधे कोनों" (ब्लाइंड स्पॉट) में सबसे ज़्यादा ख़तरे में होते हैं।
| ख़तरे की जगह | क्या करें |
|---|---|
| ट्रक के ठीक पीछे | इतनी दूरी रखें कि साइड-मिरर में ट्रक ड्राइवर दिखे |
| ट्रक के बाएँ बगल में | ज़्यादा देर न रुकें; मुड़ते समय ट्रक बाईं ओर दबता है |
| ढलान और मोड़ | ओवरटेक न करें; भारी वाहन के ब्रेक पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है |
| सड़क किनारे खड़ा ट्रक | रात में दूर से रफ़्तार कम करें; कई ट्रकों पर रिफ़्लेक्टर या लाइट नहीं होती |
ओवरटेक करने के नियम सीधे हैं: सिर्फ़ दाईं ओर से, तभी जब आगे साफ़ दिखे; इंडिकेटर दें, और ट्रक से आगे निकलकर इतनी दूरी बनाकर ही वापस लेन में आएँ कि वह आपको पीछे से न छुए।
भारी वाहन चालकों के लिए: ओवरलोडिंग न करें, लंबे सफ़र में आराम लें, ख़राब होने पर गाड़ी सड़क से पूरी तरह हटाएँ और पीछे चेतावनी तिकोन, पार्किंग लाइट या रिफ़्लेक्टर लगाएँ। सड़क पर बिना रोशनी के खड़ा ट्रक रात में बहुत बड़ा ख़तरा है।
कैशलेस इलाज की योजना: घायल के परिवार को क्या पता होना चाहिए
हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता अक्सर अस्पताल का ख़र्च होती है। केंद्र सरकार ने 5 मई 2025 को “Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025” अधिसूचित की और 4 जून 2025 को इसके दिशानिर्देश जारी किए। संसद में दी गई जानकारी (7 अगस्त 2025) के अनुसार यह योजना पूरे देश में लागू है।
| बात | योजना में क्या है |
|---|---|
| कौन हक़दार | मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुए सड़क हादसे का कोई भी घायल |
| कितना | हर घायल के लिए ₹1.5 लाख तक का इलाज |
| कितने दिन | हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन |
| कहाँ | देशभर के नामित (designated) अस्पताल |
| तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म | राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) का IT सिस्टम |
यह योजना आयुष्मान भारत (PM-JAY) का हिस्सा नहीं है, बल्कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत बनी अलग वैधानिक योजना है। बीमित वाहन से हादसे में बीमा कंपनियाँ योगदान देती हैं और बिना बीमा वाले वाहनों के मामलों में केंद्र सरकार बजट से मदद देती है।
परिवार क्या करे: अस्पताल पहुँचते ही बताइए कि मरीज़ सड़क हादसे का घायल है और पूछिए कि अस्पताल इस योजना में नामित है या नहीं। पुलिस को हादसे की सूचना ज़रूर दिलवाइए, क्योंकि सत्यापन के लिए इसकी ज़रूरत पड़ती है। पहचान पत्र और मोबाइल नंबर तैयार रखिए।
मुआवज़े और बीमा क्लेम के लिए ज़रूरी काग़ज़
हादसे के बाद परिवार सदमे में होता है और काग़ज़ों पर ध्यान नहीं जाता। लेकिन यही काग़ज़ आगे इलाज के ख़र्च, बीमा क्लेम या मुआवज़े में काम आते हैं। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत घायल व्यक्ति, गाड़ी/संपत्ति का मालिक या मृतक के क़ानूनी वारिस मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवज़े का आवेदन कर सकते हैं। क़ानून में आवेदन की समय-सीमा भी लिखी है, इसलिए देर न करें और ज़रूरत हो तो ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ़्त क़ानूनी सलाह लें।
| काग़ज़ | क्यों ज़रूरी |
|---|---|
| FIR / पुलिस रिपोर्ट की कॉपी | हादसे का आधिकारिक रिकॉर्ड |
| अस्पताल की पर्ची, मेडिकल रिपोर्ट, बिल | चोट और ख़र्च का सबूत |
| गाड़ी का नंबर, RC, बीमा पॉलिसी की जानकारी | किस बीमा कंपनी से दावा होगा |
| मौक़े की तस्वीरें, गवाहों के नंबर | हादसा कैसे हुआ, इसका सबूत |
| आय का सबूत (सैलरी स्लिप, ITR आदि) | मुआवज़े की गणना में काम आता है |
| मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र | वारिसों के दावे के लिए |
अपनी गाड़ी के नुकसान पर: बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें, सर्वे से पहले गाड़ी की मरम्मत न कराएँ, और क्लेम नंबर लिख लें। किसी बिचौलिए को काग़ज़ या पैसे देने से पहले सोचें; सीधे बीमा कंपनी या वकील से बात करना सुरक्षित है।

निष्कर्ष
कोहरे में एक अचानक ब्रेक कई गाड़ियों की टक्कर का कारण बन सकता है। दूरी, धीमी रफ़्तार और दिखने लायक लाइटें ही असली बचाव हैं। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
हादसे के बाद परिवार तक संपर्क जल्दी हो, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए। मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 19 जनवरी 2026
स्रोत (Sources)
- The Hindu (PTI), “Two dead in multi-vehicle pileup amid dense fog in Nuh”, 18 जनवरी 2026: https://www.thehindu.com/news/national/haryana/two-dead-in-multi-vehicle-pileup-amid-dense-fog-in-nuh/article70521865.ece
- MoRTH, सड़क सुरक्षा: https://morth.gov.in/en/road-safety
- MoRTH, सड़क सुरक्षा: https://morth.gov.in/road-safety
- PIB, “Cashless treatment for Road accident victims” (7 अगस्त 2025): https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2153890
- भारत का राजपत्र, S.O. 2015(E), 5 मई 2025 (Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/262912.pdf
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988, धारा 166 (मुआवज़े के लिए आवेदन): https://indiacode.ecourtsindia.com/mv-act/section/166/
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. नूंह हादसा कब हुआ?
18 जनवरी 2026 की सुबह करीब 7:30 बजे, KMP एक्सप्रेसवे पर।
2. हादसे की शुरुआत कैसे हुई?
चश्मदीदों के अनुसार क्रशर लदे ट्रक ने अचानक ब्रेक लगाए और घने कोहरे में चार वाहन उससे टकरा गए।
3. कोहरे में सबसे ज़रूरी सावधानी क्या है?
आगे की गाड़ी से ज़्यादा दूरी और कम रफ़्तार।
4. सड़क हादसा होते देखें तो सबसे पहले क्या करें?
112 पर कॉल करें, अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए घायल को जल्दी अस्पताल पहुँचाने में मदद करें। गुड समैरिटन नियमों के तहत मदद करने वाले से पुलिस या अस्पताल ज़बरदस्ती पहचान या पैसे नहीं माँग सकते।
5. ट्रक के पीछे कितनी दूरी रखनी चाहिए?
इतनी दूरी रखें कि आप ट्रक के साइड-मिरर में ड्राइवर को देख सकें और अचानक ब्रेक लगने पर आपके पास रुकने की जगह हो; रात, बारिश या कोहरे में यह दूरी और बढ़ा दें।



