सीधा जवाब: अगर आपको लगता है कि आपकी गाड़ी पर ग़लत चालान कटा है, तो न घबराइए और न तुरंत भुगतान कीजिए। पहले echallan.parivahan.gov.in पर चालान का विवरण और फ़ोटो देखिए, फिर अपने पक्ष के सबूत (लोकेशन, रसीद, फ़ोटो, गाड़ी के काग़ज़) जुटाइए। चालान अभी ट्रैफिक पुलिस के पास है तो उनके आधिकारिक शिकायत माध्यम से शिकायत कीजिए। अगर चालान वर्चुअल कोर्ट पहुँच चुका है, तो vcourts.gov.in पर केस खोलकर “I wish to contest the case” चुनिए; OTP सत्यापन के बाद आपको कोर्ट और सुनवाई की तारीख़ मिल जाएगी। ध्यान रखें: चुनौती चुनने के बाद ऑनलाइन भुगतान का विकल्प बंद हो जाता है।
ग़लत चालान के आम कारण
सवालग़लत चालान आम तौर पर क्यों कटते हैं?
जवाब: ज़्यादातर चालान कैमरों और पुलिस की जाँच से सही ही कटते हैं, लेकिन कभी-कभी ग़लती हो सकती है: नंबर प्लेट पढ़ने में ग़लती: कैमरा या व्यक्ति ने कोई अंक ग़लत पढ़ लिया।; नकली/क्लोन नंबर प्लेट: किसी और गाड़ी पर आपका नंबर लगा हो।; गाड़ी बिक चुकी हो: बेचने के बाद नाम ट्रांसफ़र न हुआ हो, तो चालान पुराने मालिक के नाम आ सकता है।
- नंबर प्लेट पढ़ने में ग़लती: कैमरा या व्यक्ति ने कोई अंक ग़लत पढ़ लिया।
- नकली/क्लोन नंबर प्लेट: किसी और गाड़ी पर आपका नंबर लगा हो।
- गाड़ी बिक चुकी हो: बेचने के बाद नाम ट्रांसफ़र न हुआ हो, तो चालान पुराने मालिक के नाम आ सकता है।
- ग़लत धारा या ग़लत वाहन प्रकार: जैसे कार को किसी दूसरी श्रेणी में दर्ज कर देना।
- दोहराया गया चालान: एक ही उल्लंघन के लिए दो बार चालान।
पहले क्या जाँचें?
सवालग़लत चालान दिखे तो सबसे पहले क्या जाँचें?
जवाब: echallan.parivahan.gov.in पर वाहन नंबर या चालान नंबर डालें। चालान में तारीख़, समय, जगह, उल्लंघन की धारा और अगर हो तो कैमरे की फ़ोटो देखें। फ़ोटो में गाड़ी का रंग, मॉडल और नंबर ध्यान से मिलाएँ। अगर गाड़ी आपकी नहीं दिखती, या आप उस समय कहीं और थे, तो यही आपकी शिकायत का आधार है। स्क्रीनशॉट ज़रूर ले लें।
| स्थिति | कहाँ जाएँ |
|---|---|
| चालान अभी ट्रैफिक पुलिस/पोर्टल पर | राज्य ट्रैफिक पुलिस का आधिकारिक शिकायत माध्यम |
| चालान वर्चुअल कोर्ट पहुँच चुका | vcourts.gov.in पर “I wish to contest the case” |
| नकली/क्लोन नंबर प्लेट का शक | नज़दीकी थाने में शिकायत, साथ में सबूत |
| गाड़ी बिक चुकी | RC ट्रांसफ़र के काग़ज़ और बिक्री का सबूत |

सबूत क्या रखें?
सवालग़लत चालान को चुनौती देने के लिए कौन-से सबूत रखें?
जवाब: चालान का स्क्रीनशॉट और फ़ोटो; उस समय आपकी मौजूदगी का सबूत: फ़ोन की लोकेशन हिस्ट्री, टोल/पार्किंग/पेट्रोल पंप की रसीद, दफ़्तर की हाज़िरी; अपनी गाड़ी की साफ़ फ़ोटो (नंबर प्लेट, रंग, मॉडल), ताकि फ़र्क़ दिखे; RC, बीमा और अगर गाड़ी बेची है तो बिक्री/ट्रांसफ़र के काग़ज़; डैशकैम वीडियो, अगर हो।
- चालान का स्क्रीनशॉट और फ़ोटो
- उस समय आपकी मौजूदगी का सबूत: फ़ोन की लोकेशन हिस्ट्री, टोल/पार्किंग/पेट्रोल पंप की रसीद, दफ़्तर की हाज़िरी
- अपनी गाड़ी की साफ़ फ़ोटो (नंबर प्लेट, रंग, मॉडल), ताकि फ़र्क़ दिखे
- RC, बीमा और अगर गाड़ी बेची है तो बिक्री/ट्रांसफ़र के काग़ज़
- डैशकैम वीडियो, अगर हो
सबूत जितने साफ़ और समय से जुड़े होंगे, शिकायत उतनी मज़बूत होगी।
वर्चुअल कोर्ट में चुनौती कैसे दें?
सवालवर्चुअल कोर्ट में चालान को चुनौती कैसे दें?
जवाब: वर्चुअल कोर्ट के आधिकारिक FAQ के अनुसार प्रक्रिया यह है: vcourts.gov.in पर जाएँ और अपना राज्य/विभाग चुनें।; मोबाइल नंबर, CNR नंबर, पार्टी का नाम, या चालान/वाहन नंबर से केस खोजें।; केस के सामने "View" पर क्लिक करें; पूरा चालान दिखेगा।; "I wish to contest the case" चुनें। OTP से सत्यापन होगा; मोबाइल नंबर ग़लत हो तो चेसिस या इंजन नंबर के आख़िरी 4 अंक से सत्यापन का विकल्प है।
- vcourts.gov.in पर जाएँ और अपना राज्य/विभाग चुनें।
- मोबाइल नंबर, CNR नंबर, पार्टी का नाम, या चालान/वाहन नंबर से केस खोजें।
- केस के सामने “View” पर क्लिक करें; पूरा चालान दिखेगा।
- “I wish to contest the case” चुनें। OTP से सत्यापन होगा; मोबाइल नंबर ग़लत हो तो चेसिस या इंजन नंबर के आख़िरी 4 अंक से सत्यापन का विकल्प है।
- ज़रूरी जानकारी भरकर Submit करें। स्क्रीन पर कोर्ट का नाम और सुनवाई की तारीख़ दिखेगी; इसे सेव कर लें।
दिल्ली ज़िला अदालतों की वेबसाइट के अनुसार दिल्ली में ऐसा चालान डिजिटल ट्रैफिक कोर्ट में चला जाता है, जहाँ आप ख़ुद या वकील के ज़रिए वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से पेश हो सकते हैं। केस की स्थिति services.ecourts.gov.in पर देखी जा सकती है, और कोर्ट जुर्माना लगाए तो pay.ecourts.gov.in पर भरा जा सकता है।
क्या न करें
- किसी “एजेंट” या अनजान वेबसाइट को पैसे देकर चालान “हटवाने” का वादा न मानें।
- SMS/WhatsApp पर आए लिंक से भुगतान न करें; हमेशा आधिकारिक पोर्टल ख़ुद खोलें।
- सुनवाई की तारीख़ को नज़रअंदाज़ न करें।
लोक अदालत के फ़ैसले के बारे में ज़रूरी बातें
सवाललोक अदालत का फ़ैसला कितना पक्का होता है?
जवाब: लोक अदालत आपसी सहमति से मामले निपटाने का मंच है, जिसे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य/ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण आयोजित करते हैं। ट्रैफ़िक चालान के अलावा बैंक वसूली, बिजली-पानी के बिल और कई छोटे दीवानी मामले भी यहाँ आते हैं।
| बात | क्या जानना ज़रूरी |
|---|---|
| फ़ैसले की ताक़त | विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 21 के तहत अवॉर्ड दीवानी अदालत की डिक्री जैसा माना जाता है |
| अपील | अवॉर्ड अंतिम होता है, उसके ख़िलाफ़ अपील नहीं होती |
| सहमति | मामला दोनों पक्षों की सहमति से ही निपटता है; ज़बरदस्ती नहीं |
| कोर्ट फ़ीस | अदालत में लंबित मामला लोक अदालत में निपटे तो चुकाई गई कोर्ट फ़ीस लौटाने का प्रावधान है |
जाने से पहले तैयारी: चालान नंबर या टोकन/स्लिप, गाड़ी की RC, पहचान पत्र और भुगतान का साधन साथ रखें। जिस शहर में लोक अदालत है, वहाँ की ट्रैफ़िक पुलिस या विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट पर तय प्रक्रिया ज़रूर देखें, क्योंकि कई जगह पहले से ऑनलाइन टोकन या अपॉइंटमेंट लेना होता है।
ध्यान दें: हर चालान लोक अदालत में नहीं आता। गंभीर अपराधों से जुड़े या कोर्ट में अलग से चल रहे मामलों के लिए नियम अलग हो सकते हैं। किसी दलाल को पैसे देकर “चालान माफ़” करवाने के झाँसे में न आएँ।
चालान से बचने की 8 आसान आदतें
आजकल ज़्यादातर बड़े शहरों में कैमरों से अपने-आप चालान कटते हैं, और कई बार लोगों को हफ़्तों बाद पता चलता है। सबसे सस्ता तरीका है नियम मानना:
- स्टॉप लाइन से पहले रुकें: रेड लाइट पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन पार न करें।
- बोर्ड वाली रफ़्तार: शहर, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग सीमा होती है; स्पीड कैमरे वाले हिस्सों में बोर्ड देखें।
- हेलमेट और सीटबेल्ट: दोपहिया पर दोनों सवार हेलमेट पहनें, कार में आगे-पीछे सब सीटबेल्ट लगाएँ।
- फ़ोन हाथ में नहीं: गाड़ी चलाते हुए फ़ोन पर बात या मैसेज न करें।
- सही लेन और सही दिशा: ग़लत दिशा (रॉन्ग साइड) में चलना ख़तरनाक भी है और आम चालान भी।
- नंबर प्लेट साफ़ और मानक: टूटी, धुंधली या डिज़ाइनर नंबर प्लेट से दिक़्क़त हो सकती है।
- काग़ज़ अपडेट: बीमा, PUC और लाइसेंस की तारीख़ याद रखें; DigiLocker/mParivahan में रखे दस्तावेज़ मान्य हैं।
- पार्किंग सही जगह: नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ी चालान के साथ टो भी हो सकती है।
महीने में एक बार जाँच: echallan.parivahan.gov.in पर अपनी गाड़ी का नंबर डालकर देख लें कि कोई चालान लंबित तो नहीं। समय पर जानकारी होने से आप सही समय पर भुगतान कर सकते हैं, ग़लत चालान को चुनौती दे सकते हैं, या लोक अदालत जैसे विकल्प का इंतज़ार कर सकते हैं।

निष्कर्ष
ग़लत चालान से परेशानी होती है, लेकिन रास्ता साफ़ है: आधिकारिक पोर्टल पर जाँच, मज़बूत सबूत और सही जगह शिकायत या चुनौती। डरिए नहीं, बस काग़ज़ और समय-सीमा का ध्यान रखिए। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड E-CHALLAN भी पढ़ सकते हैं।
किसी मुसीबत में लोग आपसे सुरक्षित तरीके से संपर्क कर सकें, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए: कोई भी उसे स्कैन करके आपको सूचना दे सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 8 जुलाई 2026
स्रोत (Sources)
- Parivahan ई-चालान पोर्टल: https://echallan.parivahan.gov.in/
- Virtual Courts, FAQ: https://vcourts.gov.in/virtualcourt/faq.php
- Delhi District Courts, डिजिटल ट्रैफिक कोर्ट: https://delhidistrictcourts.nic.in/digitaltrafficcourt
- eCourts सेवाएँ (केस स्थिति): https://services.ecourts.gov.in/ecourtindia_v6/
- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987, धारा 21: https://indiacode.ecourtsindia.com/legal-services-authorities-act-1987/section/21/
- NALSA, नेशनल लोक अदालत: https://nalsa.gov.in/national-lok-adalat/
- PIB, DigiLocker/mParivahan पर दस्तावेज़ों की मान्यता (अगस्त 2018): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1542222
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. ग़लत चालान दिखे तो क्या तुरंत भुगतान कर दूँ?
नहीं। पहले पोर्टल पर विवरण और फ़ोटो देखें, सबूत जुटाएँ और फिर शिकायत या चुनौती का फ़ैसला करें।
2. वर्चुअल कोर्ट में चुनौती देने के बाद क्या ऑनलाइन भुगतान हो सकता है?
नहीं। चुनौती चुनने पर केस नियमित कोर्ट में चला जाता है और ऑनलाइन भुगतान का विकल्प बंद हो जाता है।
3. मोबाइल नंबर बदल गया है तो OTP कैसे मिलेगा?
वर्चुअल कोर्ट में चेसिस या इंजन नंबर के आख़िरी 4 अंक से सत्यापन का विकल्प है।
4. कोर्ट और तारीख़ कैसे पता चलेगी?
चुनौती सबमिट करते ही स्क्रीन पर कोर्ट का नाम और तारीख़ दिखती है; इसे सेव या प्रिंट कर लें।
5. क्या लोक अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील हो सकती है?
नहीं। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 21 के अनुसार लोक अदालत का अवॉर्ड अंतिम होता है और उसके ख़िलाफ़ किसी अदालत में अपील नहीं होती।


