सीधा जवाब: The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, होली (4 मार्च 2026, बुधवार) पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शहर भर में विशेष अभियान चलाकर 11,179 नोटिस जारी किए, जिनमें 1,204 चालान नशे में ड्राइविंग के थे। 4 मार्च को दिल्ली में 22 सड़क हादसे दर्ज हुए, जिनमें 4 लोगों की मौत हुई और 18 घायल हुए। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत नशे में ड्राइविंग पर पहली बार ₹10,000 तक जुर्माना और/या 6 महीने तक की जेल हो सकती है।
आंकड़े: पिछले सालों से तुलना
सवालहोली 2026 पर दिल्ली में कितने चालान हुए?
जवाब: 2026: 11,179 नोटिस (1,204 ड्रिंक-ड्राइव): 22: 4; 2025: 8,521: 13: 6; 2024: 7,717: 27: 14 (स्रोत: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आंकड़े, The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार) पुलिस अधिकारी के मुताबिक़, इस साल ज़्यादा चालान का कारण नशे में ड्राइविंग और ख़तरनाक राइडिंग के ख़िलाफ़ सख़्त अभियान था।
| वर्ष | ट्रैफिक उल्लंघन (होली) | होली के दिन हादसे | मौतें |
|---|---|---|---|
| 2026 | 11,179 नोटिस (1,204 ड्रिंक-ड्राइव) | 22 | 4 |
| 2025 | 8,521 | 13 | 6 |
| 2024 | 7,717 | 27 | 14 |
नशे में ड्राइविंग: क़ानून क्या कहता है
सवालनशे में ड्राइविंग पर क़ानून क्या सज़ा देता है?
जवाब: धारा 185 (MV Act): पहली बार ₹10,000 तक जुर्माना और/या 6 महीने तक जेल; तीन साल के भीतर दोबारा पकड़े जाने पर ₹15,000 तक और/या 2 साल तक जेल।; ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित भी हो सकता है।; 100 ml ख़ून में 30 mg से ज़्यादा अल्कोहल (ब्रेथ एनालाइज़र से) नियम का उल्लंघन है।।
- धारा 185 (MV Act): पहली बार ₹10,000 तक जुर्माना और/या 6 महीने तक जेल; तीन साल के भीतर दोबारा पकड़े जाने पर ₹15,000 तक और/या 2 साल तक जेल।
- ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित भी हो सकता है।
- 100 ml ख़ून में 30 mg से ज़्यादा अल्कोहल (ब्रेथ एनालाइज़र से) नियम का उल्लंघन है।

त्योहार पर सुरक्षित रहने के आसान तरीके
सवालहोली पर सुरक्षित कैसे रहें?
जवाब: पीने का प्लान हो, तो गाड़ी का प्लान न हो: कैब, ऑटो, मेट्रो या ऐसा दोस्त जो पी नहीं रहा।; दोपहिया पर तीन सवारी नहीं, बिना हेलमेट नहीं: होली पर दोपहिया हादसे आम होते हैं।; गीले रंग और आँखें: रंग आँख में गया हो तो गाड़ी न चलाएँ।; चलती गाड़ी पर गुब्बारे न फेंकें: इससे चालक का संतुलन बिगड़ सकता है।
- पीने का प्लान हो, तो गाड़ी का प्लान न हो: कैब, ऑटो, मेट्रो या ऐसा दोस्त जो पी नहीं रहा।
- दोपहिया पर तीन सवारी नहीं, बिना हेलमेट नहीं: होली पर दोपहिया हादसे आम होते हैं।
- गीले रंग और आँखें: रंग आँख में गया हो तो गाड़ी न चलाएँ।
- चलती गाड़ी पर गुब्बारे न फेंकें: इससे चालक का संतुलन बिगड़ सकता है।
- बच्चों पर नज़र: गलियों में खेल रहे बच्चों के पास बहुत धीमे चलें।
नशे में हादसा और बीमा: जेब पर दोहरी मार
सवालनशे में हादसा हुआ तो बीमा क्लेम पर क्या असर पड़ सकता है?
जवाब: नशे में गाड़ी चलाने की क़ीमत सिर्फ़ जुर्माना या जेल नहीं है; बीमा भी साथ छोड़ सकता है। ज़्यादातर मोटर बीमा पॉलिसियों में शर्त होती है कि चालक शराब या नशीले पदार्थ के असर में हो, तो कंपनी अपनी गाड़ी के नुक़सान (ओन डैमेज) का भुगतान नहीं करेगी।
| स्थिति | अदालतों का रुख़ |
|---|---|
| अपनी गाड़ी का नुक़सान | सुप्रीम कोर्ट (12 अप्रैल 2021, Iffco Tokio बनाम Pearl Beverages): कंपनी को दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था; इसके लिए ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं, FIR, मेडिकल रिपोर्ट और हादसे का तरीका भी सबूत बन सकते हैं |
| थर्ड-पार्टी पीड़ित | सुप्रीम कोर्ट (8 अगस्त 2018, Shamanna बनाम Oriental Insurance): पॉलिसी शर्त टूटने पर भी कंपनी पहले पीड़ित को भुगतान करे और फिर गाड़ी मालिक से वसूल सकती है (“पे एंड रिकवर”); यह मामला बिना वैध लाइसेंस का था |
2021 के फ़ैसले में अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ़ थोड़ी-सी शराब की मौजूदगी अपने आप में काफ़ी नहीं; यह दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था और इसने हादसे में योगदान दिया। हर मामले का फ़ैसला उसके तथ्यों और पॉलिसी की शर्तों पर होता है।
परिवार के लिए मतलब: गाड़ी की मरम्मत अपनी जेब से, थर्ड-पार्टी मुआवज़े की वसूली का ख़तरा, और ऊपर से धारा 185 की सज़ा। सबसे सस्ता बीमा यही है: पी है, तो गाड़ी नहीं।
आम ट्रैफ़िक नियम और जुर्माने: एक नज़र में
सवालआम ट्रैफ़िक नियम तोड़ने पर कितना जुर्माना लगता है?
जवाब: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के 63 प्रावधान 1 सितंबर 2019 से लागू हुए, जिनमें कई जुर्माने पहले से कई गुना बढ़ाए गए। नीचे केंद्रीय क़ानून में तय कुछ आम उल्लंघनों के जुर्माने हैं। ध्यान रहे, कई राज्य कुछ अपराधों में अपनी कंपाउंडिंग (मौक़े पर भुगतान) दरें तय करते हैं, इसलिए आपके राज्य में रक़म अलग हो सकती है।
| उल्लंघन (धारा) | 2019 संशोधन के बाद |
|---|---|
| सामान्य उल्लंघन (177) | ₹500 |
| ओवरस्पीडिंग, हल्का मोटर वाहन (183) | ₹1,000 |
| ख़तरनाक ड्राइविंग (184) | ₹5,000 तक |
| नशे में ड्राइविंग (185) | ₹10,000 तक (पहली बार) |
| बिना सीटबेल्ट (194B) | ₹1,000 |
| दोपहिया पर ओवरलोडिंग/तीन सवारी (194C) | ₹2,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| बिना हेलमेट (194D) | ₹1,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| एम्बुलेंस/आपात वाहन को रास्ता न देना (194E) | ₹10,000 |
| बिना बीमा (196) | ₹2,000 |
ध्यान रखें: जुर्माना सिर्फ़ सज़ा नहीं, चेतावनी है। हेलमेट, सीटबेल्ट और तय रफ़्तार, ये तीन आदतें ज़्यादातर चालानों और कई जानलेवा हादसों से बचा सकती हैं। चालान मिलने पर उसे आधिकारिक e-Challan पोर्टल पर ही जाँचें और भरें।
चालान से बचने की 8 आसान आदतें
आजकल ज़्यादातर बड़े शहरों में कैमरों से अपने-आप चालान कटते हैं, और कई बार लोगों को हफ़्तों बाद पता चलता है। सबसे सस्ता तरीका है नियम मानना:
- स्टॉप लाइन से पहले रुकें: रेड लाइट पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन पार न करें।
- बोर्ड वाली रफ़्तार: शहर, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग सीमा होती है; स्पीड कैमरे वाले हिस्सों में बोर्ड देखें।
- हेलमेट और सीटबेल्ट: दोपहिया पर दोनों सवार हेलमेट पहनें, कार में आगे-पीछे सब सीटबेल्ट लगाएँ।
- फ़ोन हाथ में नहीं: गाड़ी चलाते हुए फ़ोन पर बात या मैसेज न करें।
- सही लेन और सही दिशा: ग़लत दिशा (रॉन्ग साइड) में चलना ख़तरनाक भी है और आम चालान भी।
- नंबर प्लेट साफ़ और मानक: टूटी, धुंधली या डिज़ाइनर नंबर प्लेट से दिक़्क़त हो सकती है।
- काग़ज़ अपडेट: बीमा, PUC और लाइसेंस की तारीख़ याद रखें; DigiLocker/mParivahan में रखे दस्तावेज़ मान्य हैं।
- पार्किंग सही जगह: नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ी चालान के साथ टो भी हो सकती है।
महीने में एक बार जाँच: echallan.parivahan.gov.in पर अपनी गाड़ी का नंबर डालकर देख लें कि कोई चालान लंबित तो नहीं। समय पर जानकारी होने से आप सही समय पर भुगतान कर सकते हैं, ग़लत चालान को चुनौती दे सकते हैं, या लोक अदालत जैसे विकल्प का इंतज़ार कर सकते हैं।

निष्कर्ष
होली रंगों का त्योहार है, अस्पताल का नहीं। नशे में चाबी किसी और को दें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड NEW MOTOR VEHICLE ACT भी पढ़ सकते हैं।
किसी अनहोनी में परिवार तक जल्दी सूचना पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए। मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 6 मार्च 2026
स्रोत (Sources)
- The Indian Express, “1,200 challans issued for drunk driving on Holi; 11,179 traffic violation notices served” (5 मार्च 2026): https://indianexpress.com/article/cities/delhi/holi-drunk-driving-traffic-violations-10566716/
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 (गज़ट): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (India Code): https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
- सुप्रीम कोर्ट, Iffco Tokio General Insurance Co. Ltd. बनाम Pearl Beverages Ltd., 12 अप्रैल 2021 (Indian Kanoon): https://indiankanoon.org/doc/25720691/
- सुप्रीम कोर्ट, Shamanna बनाम Divisional Manager, Oriental Insurance Co. Ltd., 8 अगस्त 2018 (LawSathi): https://research.lawsathi.in/supreme-court/2018/shamanna-another-divisional-manager-oriental-insurance-co-ltd/
- The Indian Express, “New traffic fines take effect from today: Rs 1,000 for no helmet, Rs 10,000 for drunken driving” (1 सितंबर 2019): https://indianexpress.com/article/india/new-traffic-fines-list-motor-vehicles-act-2019-5955543/
- PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
- Parivahan ई-चालान पोर्टल: https://echallan.parivahan.gov.in/
- PIB, DigiLocker/mParivahan पर दस्तावेज़ों की मान्यता (अगस्त 2018): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1542222
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. होली पर कितने ड्रिंक-ड्राइव चालान हुए?
दिल्ली में 1,204 (कुल 11,179 नोटिस में से)।
2. भांग पीकर गाड़ी चलाना भी अपराध है?
हाँ, धारा 185 नशीले पदार्थ (drug) के प्रभाव में ड्राइविंग को भी कवर करती है।
3. नशे में ड्राइविंग का चालान लोक अदालत में माफ़ होता है?
आम तौर पर कोर्ट में जाने वाले गंभीर मामले, जैसे धारा 185, लोक अदालत के सामान्य निपटारे से बाहर रखे जाते हैं; अपने राज्य की सूची देखें।
4. होली के दिन दिल्ली में कितने हादसे दर्ज हुए?
The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार 4 मार्च 2026 को दिल्ली में 22 सड़क हादसे दर्ज हुए, जिनमें 4 लोगों की मौत हुई और 18 घायल हुए।
5. नशे में हादसा होने पर अपनी गाड़ी का क्लेम मिलेगा?
पॉलिसी की शर्त के आधार पर ओन डैमेज क्लेम ख़ारिज हो सकता है; सुप्रीम कोर्ट (2021) के अनुसार बीमा कंपनी FIR और मेडिकल रिपोर्ट जैसे सबूतों से भी नशा साबित कर सकती है, ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं।


