वारंगल/हनुमाकोंडा: नशे में स्कूल बस चला रहे ड्राइवर को 5 दिन की सज़ा; CP ने रोज़ ब्रेथ टेस्ट के आदेश दिए

सीधा जवाब: तेलंगाना के वारंगल/हनुमाकोंडा में काज़ीपेट ट्रैफ़िक पुलिस की ड्रंक-ड्राइव जाँच में 14 लोग पकड़े गए; इनमें एक प्राइवेट स्कूल बस का ड्राइवर नशे की हालत में बस चलाते पकड़ा गया। कोर्ट (द्वितीय श्रेणी जज राजशेखर रेड्डी) ने उसे पाँच दिन की सज़ा दी और परकला सब-जेल भेजा गया। पुलिस कमिश्नर एन. श्वेता/श्वेता ने स्कूल मैनेजमेंट को निर्देश दिए कि हर दिन ड्यूटी से पहले ड्राइवरों का ब्रेथ एनालाइज़र टेस्ट हो—बिना टेस्ट बस/वैन न चले।

क्या कार्रवाई हुई

सवालवारंगल में नशे में स्कूल बस ड्राइवर केस में क्या हुआ?

जवाब: हैंस इंडिया और हैदराबाद मेल के अनुसार जाँच अतिरिक्त DCP (ट्रैफ़िक) रायल प्रभु प्रभाकर राव और ACP टी. सत्यनारायण की निगरानी में हुई। 14 में से बाक़ी पर जुर्माना। साथ ही बिना लाइसेंस वाहन चलाते छह नाबालिग किशोर न्यायालय में पेश; जज एम.डी. फारिया ने एक को एक दिन किशोर गृह भेजने का आदेश दिया (रिपोर्टों में)।

CP ने चेतावनी दी कि नशे में स्कूल वाहन चलाना या लापरवाह ड्राइविंग बर्दाश्त नहीं; लाइसेंस रद्द करने की दिशा में भी क़दम उठाए जा सकते हैं। नाबालिगों को गाड़ी देने वाले अभिभावक/मालिकों पर भी कार्रवाई की बात कही गई।

बिंदु जानकारी
जगह वारंगल/हनुमाकोंडा, काज़ीपेट ट्रैफ़िक जाँच
पकड़े 14 ड्रंक ड्राइव; 1 स्कूल बस ड्राइवर
सज़ा 5 दिन जेल, परकला सब-जेल
CP निर्देश रोज़ ब्रेथ टेस्ट + लाइसेंस/फ़िटनेस मॉनिटरिंग
अन्य 6 नाबालिग बिना लाइसेंस—किशोर न्यायालय

रिपोर्टों में छोटा अंतर

सवालरिपोर्टों में क्या अंतर है?

जवाब: दिन: हैंस—“शुक्रवार”; हैदराबाद मेल—“गुरुवार” (दोनों रिपोर्ट 7 नवंबर 2026)।; नाम स्पेलिंग: Swetha / Sweta; Royal/Rayala Prabhu।; बाक़ी मुख्य तथ्य (14, 5 दिन जेल, रोज़ टेस्ट आदेश) दोनों में मेल खाते हैं।। नशे में ड्राइविंग क़ानून और हाल के अभियानों के लिए धारा 185 जुर्माना-जेल , बेंगलुरु 617 ड्रंक केस और अहमदाबाद निकोल Fortuner पढ़ें। स्कूल ट्रांसपोर्ट: स्कूल खुलने पर बच्चों की सुरक्षा ।

  • दिन: हैंस—“शुक्रवार”; हैदराबाद मेल—“गुरुवार” (दोनों रिपोर्ट 7 नवंबर 2026)।
  • नाम स्पेलिंग: Swetha / Sweta; Royal/Rayala Prabhu।
  • बाक़ी मुख्य तथ्य (14, 5 दिन जेल, रोज़ टेस्ट आदेश) दोनों में मेल खाते हैं।
ब्रेथ एनालाइज़र से जाँच (प्रतीकात्मक)
Photo: miguelrd68 via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

अभिभावक और स्कूल—व्यावहारिक चेकलिस्ट

सवालस्कूल ट्रांसपोर्ट की सुरक्षा के लिए अभिभावक क्या पूछें?

जवाब: पूछें: क्या स्कूल के पास ब्रेथ एनालाइज़र है और रोज़ लॉग रखा जाता है?; ड्राइवर का वैध लाइसेंस, बैज और वाहन फ़िटनेस सर्टिफ़िकेट देखें।; बच्चों को बताएँ—ड्राइवर की साँस/व्यवहार अजीब लगे तो तुरंत शिक्षक/अभिभावक को बताएँ।; ओवरलोडिंग और ओवरस्पीड की शिकायत लिखित में दर्ज कराएँ।; खुद नशे में पिकअप/ड्रॉप न करें—बच्चों के सामने उदाहरण बनें।।

  1. पूछें: क्या स्कूल के पास ब्रेथ एनालाइज़र है और रोज़ लॉग रखा जाता है?
  2. ड्राइवर का वैध लाइसेंस, बैज और वाहन फ़िटनेस सर्टिफ़िकेट देखें।
  3. बच्चों को बताएँ—ड्राइवर की साँस/व्यवहार अजीब लगे तो तुरंत शिक्षक/अभिभावक को बताएँ।
  4. ओवरलोडिंग और ओवरस्पीड की शिकायत लिखित में दर्ज कराएँ।
  5. खुद नशे में पिकअप/ड्रॉप न करें—बच्चों के सामने उदाहरण बनें।

शराब पीकर गाड़ी नहीं: घर पहुँचने के सुरक्षित विकल्प

सवालशराब पीने के बाद घर कैसे पहुँचें?

जवाब: धारा 185 के तहत ख़ून में 30 mg प्रति 100 ml से ज़्यादा अल्कोहल के साथ गाड़ी चलाना अपराध है। 2019 संशोधन के बाद पहली बार 6 महीने तक जेल या ₹10,000 तक जुर्माना या दोनों, और 3 साल के भीतर दोबारा पकड़े जाने पर 2 साल तक जेल या ₹15,000 तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। लेकिन असली ख़तरा जुर्माना नहीं, हादसा है।

विकल्प कब काम आता है
डेज़िग्नेटेड ड्राइवर ग्रुप में कोई एक व्यक्ति पूरी शाम शराब न पिए और सबको घर छोड़े
कैब/ऑटो शहर में, देर रात भी
मेट्रो/बस आख़िरी सेवा का समय पहले देख लें
वहीं रुक जाना शादी या दूर के समारोह में
परिवार को बुलाना पास में रहते हों

कुछ ग़लतफ़हमियाँ: कॉफ़ी, ठंडा पानी या खाना खाने से ख़ून में अल्कोहल जल्दी कम नहीं होता; शरीर को समय चाहिए। “बस एक पेग” भी शरीर, वज़न और खाली पेट के हिसाब से सीमा पार करा सकता है। देर रात तक पीने के बाद अगली सुबह भी शरीर में अल्कोहल रह सकता है।

दोस्त ज़िद करे तो: चाबी अपने पास ले लें, कैब बुक कर दें, और उसकी गाड़ी में न ख़ुद बैठें, न दूसरों को बैठने दें।

बस यात्री अपनी सुरक्षा के लिए क्या करें

सवालबस में सफ़र करते समय अपनी सुरक्षा के लिए क्या करें?

जवाब: लंबी दूरी की बसों, ख़ासकर रात की स्लीपर बसों में यात्री अक्सर सबसे ज़्यादा असहाय होते हैं। कुछ आदतें मुश्किल समय में फ़र्क़ ला सकती हैं: बैठते ही रास्ता पहचानें: मुख्य दरवाज़ा, आपातकालीन खिड़की/दरवाज़ा और शीशा तोड़ने वाला हथौड़ा कहाँ है, यह देख लें। स्लीपर बस में अपनी बर्थ से निकलने का रास्ता समझ लें।

  • बैठते ही रास्ता पहचानें: मुख्य दरवाज़ा, आपातकालीन खिड़की/दरवाज़ा और शीशा तोड़ने वाला हथौड़ा कहाँ है, यह देख लें। स्लीपर बस में अपनी बर्थ से निकलने का रास्ता समझ लें।
  • गलियारा ख़ाली रखें: बैग, बोरी या सामान रास्ते में न रखें; आग या पलटने की हालत में यही रास्ता जान बचाता है।
  • ज्वलनशील सामान नहीं: पेट्रोल, गैस सिलेंडर, पटाखे जैसी चीज़ें बस में न ले जाएँ, और कोई ले जा रहा हो तो कंडक्टर को बताएँ।
  • ड्राइवर को टोकें: तेज़ रफ़्तार, फ़ोन पर बात करते हुए गाड़ी चलाना या थका हुआ ड्राइवर दिखे तो विनम्रता से टोकें; ज़रूरत हो तो 112 पर सूचना दें।
  • सीटबेल्ट हो तो लगाएँ: जिन बसों में सीटबेल्ट है, उनका इस्तेमाल करें।
  • टिकट और बस नंबर संभालें: परिवार को बस का नंबर और यात्रा का समय भेज दें।
आपात स्थिति क्या करें
धुआँ या जलने की गंध ड्राइवर को तुरंत रुकने को कहें, सबको जगाएँ
आग सामान छोड़कर नज़दीकी रास्ते से निकलें, धुएँ में झुककर चलें
बस पलटी पहले बच्चों और बुज़ुर्गों को निकालने में मदद करें, फिर बस से दूर हटें

बाहर निकलकर 112 पर कॉल करें और जगह की सटीक पहचान बताएँ।

बच्चों को बाइक पर ले जाने के नियम

कई परिवारों के लिए बाइक ही रोज़ का साधन है, और स्कूल छोड़ने से लेकर बाज़ार तक बच्चे साथ होते हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय ने फ़रवरी 2022 में केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन करके छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए नियम बनाए (जो प्रकाशन के एक साल बाद से लागू होने थे)।

नियम (9 महीने से 4 साल के बच्चे) क्या करना है
सेफ़्टी हार्नेस बच्चे को हार्नेस से चालक के साथ बाँधें
हेलमेट बच्चे के सिर पर ठीक से फ़िट होने वाला क्रैश हेलमेट
रफ़्तार बच्चे को साथ ले जाते समय बाइक 40 किमी/घंटा से ज़्यादा नहीं

4 साल से बड़े बच्चों के लिए भी: पीछे बैठे हर व्यक्ति के लिए हेलमेट ज़रूरी है, इसलिए बच्चे के नाप का अच्छी क्वालिटी का हेलमेट लें। बच्चे को आगे टंकी पर न बिठाएँ, और दो से ज़्यादा लोग बाइक पर न बैठें।

स्कूल वैन/ऑटो चुनते समय: देखें कि गाड़ी में क्षमता से ज़्यादा बच्चे न हों, ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस हो और गाड़ी के काग़ज़ पूरे हों। बच्चों को सिखाएँ कि गाड़ी से उतरकर सड़क कैसे पार करें और गाड़ी के ठीक पीछे या आगे न खड़े हों, जहाँ ड्राइवर उन्हें देख न सके।

स्कूल बस में बच्चे (प्रतीकात्मक)
Photo: ernestoeslava via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

निष्कर्ष

स्कूल बस बच्चों का भरोसा है—नशे में उसे चलाना न सिर्फ़ जुर्म है, बल्कि पूरे समाज का भरोसा तोड़ना है। वारंगल की कार्रवाई और रोज़ टेस्ट का निर्देश अन्य शहरों के लिए भी मिसाल है। संदेह हो तो पुलिस/112 से संपर्क करें। परिवार की गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाएँ। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड NEW MOTOR VEHICLE ACT भी पढ़ सकते हैं।

आख़िरी अपडेट: 7 नवंबर 2026

यह भी पढ़ें: भागलपुर: नशे में PG डॉक्टर की कार ने MBBS छात्र की जान ली

स्रोत (Sources)

  1. The Hans India, Five-day jail for drunk school bus driver (7 Nov 2026): https://www.thehansindia.com/news/cities/warangal/five-day-jail-for-drunk-school-bus-driver-1139976
  2. Hyderabad Mail, Warangal police catch 14 drunk drivers… (7 Nov 2026): https://hyderabadmail.com/warangal-police-catch-14-drunk-drivers-school-bus-driver-jailed/
  3. The Indian Express, नए ट्रैफ़िक जुर्माने (1 सितंबर 2019): https://indianexpress.com/article/india/new-traffic-fines-list-motor-vehicles-act-2019-5955543/
  4. PIB, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 के प्रावधान (सारांश): https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/MVA.pdf
  5. MoRTH, सड़क सुरक्षा: https://morth.gov.in/road-safety
  6. PIB, 4 साल से कम उम्र के बच्चों की दोपहिया सुरक्षा के नियम (फ़रवरी 2022): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1798731

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. स्कूल बस ड्राइवर को कितनी सज़ा हुई?

रिपोर्टों में पाँच दिन की जेल; परकला सब-जेल भेजा गया।

2. CP ने स्कूलों से क्या कहा?

रोज़ ब्रेथ टेस्ट के बाद ही ड्यूटी; लाइसेंस-योग्यता-फ़िटनेस की लगातार निगरानी।

3. और कितने पकड़े गए?

कुल 14 ड्रंक-ड्राइव जाँच में; बाक़ी पर जुर्माना। छह नाबालिग अलग कार्रवाई में।

4. माता-पिता पर भी कार्रवाई हो सकती है?

CP ने कहा नाबालिगों को गाड़ी देने वाले अभिभावक/मालिकों पर क़ानूनी कार्रवाई हो सकती है।

5. जाँच गुरुवार थी या शुक्रवार?

द हैंस इंडिया में काज़ीपेट जाँच “शुक्रवार” लिखी है; हैदराबाद मेल में “गुरुवार”। दोनों 7 नवंबर 2026 की रिपोर्ट हैं—तारीख़ का अंतर स्रोत में नोट करें; सज़ा और 14 गिरफ़्तारी दोनों में समान हैं।

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