सीधा जवाब: नवभारत टाइम्स की 10 मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार, 9 मई 2026 को दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (DSLSA) की ओर से आयोजित साल की दूसरी नेशनल लोक अदालत में एक ही दिन में 1,59,370 मामलों का निपटारा हुआ और कुल ₹390.14 करोड़ के समझौते हुए। इनमें सबसे ज़्यादा संख्या ट्रैफिक चालानों की थी: लगभग 1.31 लाख चालान मौके पर निपटाए गए और ₹2.07 करोड़ जुर्माना वसूला गया।
आंकड़े एक नज़र में
| मद | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल मामले निपटे | 1,59,370 |
| कुल समझौता राशि | ₹390.14 करोड़ |
| ट्रैफिक चालान निपटे | लगभग 1.31 लाख |
| ट्रैफिक जुर्माना वसूला | ₹2.07 करोड़ |
| DRT (ऋण वसूली) | 45 मामलों में ₹212.33 करोड़ |
(स्रोत: नवभारत टाइम्स, 10 मई 2026)
एक मोटा हिसाब: ₹2.07 करोड़ ÷ 1.31 लाख चालान ≈ औसतन लगभग ₹158 प्रति चालान (यह हमारी गणना है; हर चालान की राशि अलग होती है)।
डिजिटल लोक अदालत कैसे काम करती है
सवालडिजिटल लोक अदालत कैसे काम करती है?
जवाब: रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली ट्रैफिक पुलिस पोर्टल पर रियल-टाइम अपडेट और SMS अलर्ट से प्रक्रिया तेज़ रही। आम तौर पर प्रक्रिया यह होती है: ट्रैफिक पुलिस अपनी वेबसाइट पर तय समय पर स्लिप/टोकन डाउनलोड की सुविधा खोलती है (रोज़ाना सीमा के साथ)।; आप वाहन/चालान नंबर डालकर पात्र चालान चुनते हैं और स्लिप डाउनलोड करते हैं।; स्लिप पर कोर्ट परिसर, बेंच और समय लिखा होता है।
- ट्रैफिक पुलिस अपनी वेबसाइट पर तय समय पर स्लिप/टोकन डाउनलोड की सुविधा खोलती है (रोज़ाना सीमा के साथ)।
- आप वाहन/चालान नंबर डालकर पात्र चालान चुनते हैं और स्लिप डाउनलोड करते हैं।
- स्लिप पर कोर्ट परिसर, बेंच और समय लिखा होता है।
- तय दिन वहाँ जाकर जज/अधिकारी के सामने राशि तय होती है, भुगतान होता है और चालान बंद होता है।

अगली बार के लिए तैयारी
सवालअगली लोक अदालत के लिए कैसे तैयारी करें?
जवाब: तारीख़ पर नज़र: NALSA के कैलेंडर में नेशनल लोक अदालत मार्च, मई, सितंबर और दिसंबर के दूसरे शनिवार को होती है; दिल्ली में तारीख़ अक्सर बदली गई है, इसलिए DSLSA/ट्रैफिक पुलिस की घोषणा देखें।; स्लिप जल्दी लें: रोज़ की सीमा भर जाती है।; दस्तावेज़: स्लिप, DL, RC, पहचान पत्र।; सिर्फ़ आधिकारिक साइट: फ़र्ज़ी "लोक अदालत लिंक" से सावधान।।
- तारीख़ पर नज़र: NALSA के कैलेंडर में नेशनल लोक अदालत मार्च, मई, सितंबर और दिसंबर के दूसरे शनिवार को होती है; दिल्ली में तारीख़ अक्सर बदली गई है, इसलिए DSLSA/ट्रैफिक पुलिस की घोषणा देखें।
- स्लिप जल्दी लें: रोज़ की सीमा भर जाती है।
- दस्तावेज़: स्लिप, DL, RC, पहचान पत्र।
- सिर्फ़ आधिकारिक साइट: फ़र्ज़ी “लोक अदालत लिंक” से सावधान।
कौन से चालान शामिल नहीं
सवालकौन से चालान लोक अदालत में शामिल नहीं होते?
जवाब: नशे में ड्राइविंग, गंभीर हादसे, नाबालिग ड्राइविंग जैसे मामले आम तौर पर सामान्य निपटारे से बाहर रहते हैं। अंतिम सूची ट्रैफिक पुलिस/DSLSA तय करती है।
चालान ऑनलाइन कैसे देखें और भरें
सवालअपना ट्रैफ़िक चालान ऑनलाइन कैसे देखें और भरें?
जवाब: आजकल ज़्यादातर चालान कैमरों या पुलिस के हैंडहेल्ड डिवाइस से इलेक्ट्रॉनिक रूप में कटते हैं। अपने चालान की सही स्थिति देखने का सबसे भरोसेमंद तरीका सरकारी e-Challan पोर्टल है। ब्राउज़र में ख़ुद echallan.parivahan.gov.in टाइप करें (किसी मैसेज के लिंक से नहीं)।; चालान की स्थिति देखने वाले विकल्प में गाड़ी नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालें।
- ब्राउज़र में ख़ुद echallan.parivahan.gov.in टाइप करें (किसी मैसेज के लिंक से नहीं)।
- चालान की स्थिति देखने वाले विकल्प में गाड़ी नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालें।
- चालान की तारीख़, जगह, उल्लंघन और रक़म जाँचें; जहाँ तस्वीर उपलब्ध हो, वह भी देखें।
- सही लगे तो पोर्टल पर ही ऑनलाइन भुगतान करें और रसीद डाउनलोड करके रखें।
- चालान ग़लत लगे या भुगतान का विकल्प न दिखे, तो वह कोर्ट/वर्चुअल कोर्ट में भेजा गया हो सकता है; इसके लिए अपने राज्य की ट्रैफ़िक पुलिस या वर्चुअल कोर्ट की जानकारी देखें।
| ठगी के संकेत | क्या करें |
|---|---|
| अनजान नंबर से लिंक वाला “चालान” मैसेज | लिंक न खोलें, पोर्टल पर ख़ुद जाँचें |
| APK फ़ाइल डाउनलोड करने को कहा जाए | बिल्कुल डाउनलोड न करें |
| “आज ही भरें वरना गिरफ़्तारी” जैसी धमकी | घबराएँ नहीं, यह दबाव की चाल है |
| पैसे कट गए | तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें |
लोक अदालत के फ़ैसले के बारे में ज़रूरी बातें
सवाललोक अदालत का फ़ैसला कितना पक्का होता है?
जवाब: लोक अदालत आपसी सहमति से मामले निपटाने का मंच है, जिसे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य/ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण आयोजित करते हैं। ट्रैफ़िक चालान के अलावा बैंक वसूली, बिजली-पानी के बिल और कई छोटे दीवानी मामले भी यहाँ आते हैं।
| बात | क्या जानना ज़रूरी |
|---|---|
| फ़ैसले की ताक़त | विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 21 के तहत अवॉर्ड दीवानी अदालत की डिक्री जैसा माना जाता है |
| अपील | अवॉर्ड अंतिम होता है, उसके ख़िलाफ़ अपील नहीं होती |
| सहमति | मामला दोनों पक्षों की सहमति से ही निपटता है; ज़बरदस्ती नहीं |
| कोर्ट फ़ीस | अदालत में लंबित मामला लोक अदालत में निपटे तो चुकाई गई कोर्ट फ़ीस लौटाने का प्रावधान है |
जाने से पहले तैयारी: चालान नंबर या टोकन/स्लिप, गाड़ी की RC, पहचान पत्र और भुगतान का साधन साथ रखें। जिस शहर में लोक अदालत है, वहाँ की ट्रैफ़िक पुलिस या विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट पर तय प्रक्रिया ज़रूर देखें, क्योंकि कई जगह पहले से ऑनलाइन टोकन या अपॉइंटमेंट लेना होता है।
ध्यान दें: हर चालान लोक अदालत में नहीं आता। गंभीर अपराधों से जुड़े या कोर्ट में अलग से चल रहे मामलों के लिए नियम अलग हो सकते हैं। किसी दलाल को पैसे देकर “चालान माफ़” करवाने के झाँसे में न आएँ।
वर्चुअल कोर्ट में चालान: भुगतान या चुनौती
जो ई-चालान तय समय में नहीं भरे जाते या जिन्हें विभाग कोर्ट भेज देता है, वे कई राज्यों में “वर्चुअल कोर्ट” पहुँच जाते हैं। यहाँ ऑनलाइन ही केस देखा जा सकता है, और आप तय कर सकते हैं कि जुर्माना भरना है या चालान को चुनौती देनी है।
वर्चुअल कोर्ट के आधिकारिक FAQ के अनुसार तरीका:
- vcourts.gov.in पर जाएँ और अपना राज्य/विभाग चुनें।
- मोबाइल नंबर, CNR नंबर, पार्टी का नाम या चालान/वाहन नंबर से केस खोजें।
- केस के सामने “View” पर क्लिक करके पूरा चालान देखें।
- भुगतान करना हो तो वहीं दिखाई गई राशि ऑनलाइन भरें और रसीद सेव करें।
- चुनौती देनी हो तो “I wish to contest the case” चुनें। OTP से सत्यापन होता है; मोबाइल नंबर ग़लत हो तो चेसिस या इंजन नंबर के आख़िरी 4 अंक से सत्यापन का विकल्प है।
| फ़ैसला | आगे क्या होगा |
|---|---|
| जुर्माना भरा | रसीद मिलेगी, केस निपट जाएगा |
| चुनौती चुनी | केस नियमित कोर्ट में जाएगा, ऑनलाइन भुगतान का विकल्प बंद हो जाएगा |
| कुछ नहीं किया | केस लंबित रहेगा; बाद में दिक़्क़त बढ़ सकती है |
सावधानी: चुनौती तभी चुनें जब आपके पास मज़बूत सबूत हों (जैसे उस समय कहीं और होने का सबूत, या गाड़ी पहले ही बिक चुकी हो)। सुनवाई की तारीख़ और कोर्ट का नाम स्क्रीन पर दिखता है; उसे सेव कर लें और तारीख़ पर ज़रूर पेश हों।
चालान से बचने की 8 आसान आदतें
आजकल ज़्यादातर बड़े शहरों में कैमरों से अपने-आप चालान कटते हैं, और कई बार लोगों को हफ़्तों बाद पता चलता है। सबसे सस्ता तरीका है नियम मानना:
- स्टॉप लाइन से पहले रुकें: रेड लाइट पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन पार न करें।
- बोर्ड वाली रफ़्तार: शहर, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग सीमा होती है; स्पीड कैमरे वाले हिस्सों में बोर्ड देखें।
- हेलमेट और सीटबेल्ट: दोपहिया पर दोनों सवार हेलमेट पहनें, कार में आगे-पीछे सब सीटबेल्ट लगाएँ।
- फ़ोन हाथ में नहीं: गाड़ी चलाते हुए फ़ोन पर बात या मैसेज न करें।
- सही लेन और सही दिशा: ग़लत दिशा (रॉन्ग साइड) में चलना ख़तरनाक भी है और आम चालान भी।
- नंबर प्लेट साफ़ और मानक: टूटी, धुंधली या डिज़ाइनर नंबर प्लेट से दिक़्क़त हो सकती है।
- काग़ज़ अपडेट: बीमा, PUC और लाइसेंस की तारीख़ याद रखें; DigiLocker/mParivahan में रखे दस्तावेज़ मान्य हैं।
- पार्किंग सही जगह: नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ी चालान के साथ टो भी हो सकती है।
महीने में एक बार जाँच: echallan.parivahan.gov.in पर अपनी गाड़ी का नंबर डालकर देख लें कि कोई चालान लंबित तो नहीं। समय पर जानकारी होने से आप सही समय पर भुगतान कर सकते हैं, ग़लत चालान को चुनौती दे सकते हैं, या लोक अदालत जैसे विकल्प का इंतज़ार कर सकते हैं।

निष्कर्ष
लोक अदालत पुराने चालानों का बोझ हल्का करने का अच्छा मौका है। लेकिन सबसे बड़ी बचत तब है जब चालान बने ही नहीं। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड Procedure of Lok Adalat भी पढ़ सकते हैं।
गाड़ी से जुड़ी ज़रूरी सूचना आप तक सुरक्षित पहुँचे, इसके लिए Rakshak Code QR लगाइए। कोई भी उसे स्कैन करके आपसे संपर्क कर सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 11 मई 2026
स्रोत (Sources)
- नवभारत टाइम्स, “दिल्ली की लोक अदालत में सुलझे वर्षों पुराने विवाद… एक ही दिन में निपटे 1.59 लाख मामले” (10 मई 2026): https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/delhi/other-news/delhis-second-national-lok-adalat-resolves-1-lakh-59-thousand-cases-including-1-lakh-31-thousand-traffic-challans/articleshow/130987450.cms
- NALSA, 2026 नेशनल लोक अदालत कैलेंडर: https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3ec054172f3101212a2009c74b547b6dd/uploads/2025/11/2026020289.pdf
- दिल्ली ट्रैफिक पुलिस: https://traffic.delhipolice.gov.in/
- Parivahan ई-चालान पोर्टल: https://echallan.parivahan.gov.in/
- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल: https://cybercrime.gov.in/
- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987, धारा 21: https://indiacode.ecourtsindia.com/legal-services-authorities-act-1987/section/21/
- NALSA, नेशनल लोक अदालत: https://nalsa.gov.in/national-lok-adalat/
- Virtual Courts, FAQ: https://vcourts.gov.in/virtualcourt/faq.php
- PIB, DigiLocker/mParivahan पर दस्तावेज़ों की मान्यता (अगस्त 2018): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1542222
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. 9 मई की लोक अदालत में कितने चालान निपटे?
लगभग 1.31 लाख (नवभारत टाइम्स)।
2. क्या हर बार इतनी ही छूट मिलती है?
नहीं, राशि अदालत तय करती है और मामले के अनुसार अलग होती है।
3. स्लिप कहाँ से लें?
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट से, घोषित समय पर।
4. 9 मई को दिल्ली में कुल कितने मामले निपटे?
नवभारत टाइम्स के अनुसार 1,59,370 मामले, ₹390.14 करोड़ के समझौतों के साथ।
5. चालान के नाम पर आया मैसेज असली है या नकली, कैसे पहचानें?
मैसेज के लिंक पर क्लिक न करें; ख़ुद echallan.parivahan.gov.in पर जाकर गाड़ी नंबर या चालान नंबर से जाँचें। ठगी हो जाए तो 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।


