सीधा जवाब: हैदराबाद ट्रैफ़िक पुलिस ने 26 अप्रैल से 31 अक्टूबर 2026 तक चले विशेष अभियान में गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वाले 3,619 लोगों पर केस दर्ज किए। इनमें 3,469 दोपहिया सवार, 46 तिपहिया और 104 चारपहिया चालक हैं। पुलिस के मुताबिक़ सभी उल्लंघनकर्ताओं को चार्जशीट के साथ कोर्ट में पेश किया जाएगा और क़ानून के तहत सज़ा होगी।
अभियान में क्या हुआ
सवालहैदराबाद पुलिस के अभियान में कितने लोगों पर केस हुआ?
जवाब: तेलंगाना टुडे की 1 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार यह अभियान क़रीब छह महीने चला। पुलिस ने कहा कि गाड़ी चलाते फ़ोन इस्तेमाल करने से ध्यान भटकता है, प्रतिक्रिया देने का समय धीमा हो जाता है और हादसे का ख़तरा बढ़ता है। जॉइंट पुलिस कमिश्नर (ट्रैफ़िक) डी.
किस गाड़ी वाले सबसे ज़्यादा
सवालफ़ोन इस्तेमाल करते सबसे ज़्यादा कौन पकड़े गए?
जवाब: दोपहिया (बाइक/स्कूटर): 3,469: 96%; चारपहिया (कार आदि): 104: 3%; तिपहिया (ऑटो): 46: 1%; कुल: 3,619: 100% प्रतिशत रिपोर्ट के आँकड़ों से हमने निकाले हैं। साफ़ है कि सबसे बड़ी समस्या हेलमेट के अंदर फ़ोन दबाकर या एक हाथ से फ़ोन पकड़कर बाइक चलाने की है। दोपहिया पर एक हाथ हैंडल से हटते ही संतुलन और ब्रेक दोनों पर पकड़ कमज़ोर हो जाती है।
| वाहन | केस | हिस्सा (लगभग) |
|---|---|---|
| दोपहिया (बाइक/स्कूटर) | 3,469 | 96% |
| चारपहिया (कार आदि) | 104 | 3% |
| तिपहिया (ऑटो) | 46 | 1% |
| कुल | 3,619 | 100% |

क़ानून क्या कहता है
सवालगाड़ी चलाते फ़ोन इस्तेमाल करने पर क़ानून क्या कहता है?
जवाब: मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 184 (ख़तरनाक ड्राइविंग) में गाड़ी चलाते समय हाथ में पकड़े संचार उपकरण (जैसे मोबाइल फ़ोन) के इस्तेमाल को भी शामिल किया गया है। 2019 के संशोधन के बाद पहली बार में 6 महीने से 1 साल तक की जेल या ₹1,000 से ₹5,000 तक जुर्माना हो सकता है, और तीन साल के भीतर दोबारा पकड़े जाने पर सज़ा और बढ़ सकती है।
हैदराबाद में केस कोर्ट जाएँगे, यानी यह सिर्फ़ मौक़े पर कटने वाला चालान नहीं है। अपना चालान कैसे देखें और भरें, इसके लिए पढ़ें: ई-चालान कैसे चेक और भुगतान करें। ग़लत चालान लगे तो: ग़लत ई-चालान की शिकायत कैसे करें।
फ़ोन से कैसे बचें
सवालड्राइविंग के दौरान फ़ोन की आदत से कैसे बचें?
जवाब: गाड़ी स्टार्ट करने से पहले फ़ोन "ड्राइविंग मोड" या "डू नॉट डिस्टर्ब" पर रखें।; नेविगेशन चाहिए तो फ़ोन होल्डर पर लगाएँ और रास्ता पहले से सेट करें; चलते-चलते टाइप न करें।; ज़रूरी कॉल आए तो सुरक्षित जगह पर रुककर बात करें।; बाइक पर फ़ोन हेलमेट में दबाकर बात न करें; इससे सुनने और देखने दोनों में दिक़्क़त होती है।
- गाड़ी स्टार्ट करने से पहले फ़ोन “ड्राइविंग मोड” या “डू नॉट डिस्टर्ब” पर रखें।
- नेविगेशन चाहिए तो फ़ोन होल्डर पर लगाएँ और रास्ता पहले से सेट करें; चलते-चलते टाइप न करें।
- ज़रूरी कॉल आए तो सुरक्षित जगह पर रुककर बात करें।
- बाइक पर फ़ोन हेलमेट में दबाकर बात न करें; इससे सुनने और देखने दोनों में दिक़्क़त होती है।
- परिवार और ऑफ़िस को बता दें कि आप गाड़ी चलाते समय कॉल नहीं उठाते।
चालान से बचने की 8 आसान आदतें
सवालचालान से बचने के लिए कौन-सी आदतें अपनाएँ?
जवाब: आजकल ज़्यादातर बड़े शहरों में कैमरों से अपने-आप चालान कटते हैं, और कई बार लोगों को हफ़्तों बाद पता चलता है। सबसे सस्ता तरीका है नियम मानना: स्टॉप लाइन से पहले रुकें: रेड लाइट पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन पार न करें।; बोर्ड वाली रफ़्तार: शहर, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग सीमा होती है; स्पीड कैमरे वाले हिस्सों में बोर्ड देखें।
- स्टॉप लाइन से पहले रुकें: रेड लाइट पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन पार न करें।
- बोर्ड वाली रफ़्तार: शहर, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग सीमा होती है; स्पीड कैमरे वाले हिस्सों में बोर्ड देखें।
- हेलमेट और सीटबेल्ट: दोपहिया पर दोनों सवार हेलमेट पहनें, कार में आगे-पीछे सब सीटबेल्ट लगाएँ।
- फ़ोन हाथ में नहीं: गाड़ी चलाते हुए फ़ोन पर बात या मैसेज न करें।
- सही लेन और सही दिशा: ग़लत दिशा (रॉन्ग साइड) में चलना ख़तरनाक भी है और आम चालान भी।
- नंबर प्लेट साफ़ और मानक: टूटी, धुंधली या डिज़ाइनर नंबर प्लेट से दिक़्क़त हो सकती है।
- काग़ज़ अपडेट: बीमा, PUC और लाइसेंस की तारीख़ याद रखें; DigiLocker/mParivahan में रखे दस्तावेज़ मान्य हैं।
- पार्किंग सही जगह: नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ी चालान के साथ टो भी हो सकती है।
महीने में एक बार जाँच: echallan.parivahan.gov.in पर अपनी गाड़ी का नंबर डालकर देख लें कि कोई चालान लंबित तो नहीं। समय पर जानकारी होने से आप सही समय पर भुगतान कर सकते हैं, ग़लत चालान को चुनौती दे सकते हैं, या लोक अदालत जैसे विकल्प का इंतज़ार कर सकते हैं।

निष्कर्ष
कुछ सेकंड की कॉल या मैसेज भी आँखें सड़क से हटा देता है। हैदराबाद के आँकड़े बताते हैं कि यह आदत सबसे ज़्यादा दोपहिया सवारों में है, जो हादसे में सबसे कम सुरक्षित भी होते हैं। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड E-CHALLAN भी पढ़ सकते हैं।
गाड़ी खड़ी हो और कोई आपसे संपर्क करना चाहे, तो उसे आपका नंबर माँगने की ज़रूरत न पड़े। Rakshak Code QR से लोग स्कैन करके आपसे बात कर सकते हैं, आपका नंबर देखे बिना, और आप सुरक्षित रुककर जवाब दे सकते हैं।
आख़िरी अपडेट: 1 नवंबर 2026
स्रोत (Sources)
- Telangana Today, Hyderabad traffic cops enforce zero-tolerance policy, book 3,619 motorists for phone use while driving (1 नवंबर 2026): https://telanganatoday.com/hyderabad-traffic-cops-enforce-zero-tolerance-policy-book-3619-motorists-for-phone-use-while-driving
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (India Code): https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/1798
- Parivahan ई-चालान पोर्टल: https://echallan.parivahan.gov.in/
- PIB, DigiLocker/mParivahan पर दस्तावेज़ों की मान्यता (अगस्त 2018): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1542222
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. अभियान कब से कब तक चला?
26 अप्रैल से 31 अक्टूबर 2026 तक।
2. कुल कितने केस दर्ज हुए?
3,619, जिनमें 3,469 दोपहिया, 104 चारपहिया और 46 तिपहिया चालक हैं।
3. क्या ब्लूटूथ या हैंड्स-फ़्री पर बात करना भी अपराध है?
धारा 184 हाथ में पकड़े उपकरण की बात करती है। हैंड्स-फ़्री पर भी ध्यान भटकता है, इसलिए ज़रूरी बात हो तो रुककर करें; स्थानीय पुलिस के नियम भी देखें।
4. पकड़े गए लोगों का क्या होगा?
पुलिस के अनुसार सभी को चार्जशीट के साथ कोर्ट में पेश किया जाएगा।
5. क्या ये अभियान आगे भी चलेगा?
तेलंगाना टुडे के अनुसार जॉइंट पुलिस कमिश्नर (ट्रैफ़िक) डी. जोएल डेविस ने कहा कि ऐसे विशेष अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे।


