सीधा जवाब: अपना ई-चालान देखने और भरने के लिए सिर्फ़ सरकारी पोर्टल echallan.parivahan.gov.in खोलें, “Pay Online” या चालान देखने का विकल्प चुनें, फिर चालान नंबर, गाड़ी नंबर या DL नंबर डालकर कैप्चा भरें। पेंडिंग चालान दिख जाएँगे; “Pay Now” दबाकर UPI, कार्ड या नेट बैंकिंग से भुगतान करें और रसीद डाउनलोड करके रखें। अगर चालान कोर्ट में भेजा जा चुका है, तो उसे वर्चुअल कोर्ट पोर्टल पर भरना होता है।
ई-चालान क्या है?
सवालई-चालान क्या है?
जवाब: ई-चालान ट्रैफिक नियम तोड़ने पर डिजिटल रूप से जारी होने वाला चालान है। यह मौके पर पुलिस के हैंडहेल्ड डिवाइस से, या सड़क पर लगे कैमरों (जैसे रेड लाइट या स्पीड कैमरा) से बन सकता है। इसकी जानकारी आम तौर पर गाड़ी के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS से आती है।
स्टेप-बाय-स्टेप: चालान कैसे देखें
सवालई-चालान कैसे चेक करें?
जवाब: ब्राउज़र में echallan.parivahan.gov.in खोलें। मिलती-जुलती नकली वेबसाइटों से सावधान रहें; पता ध्यान से पढ़ें।; चालान देखने/ऑनलाइन भुगतान का विकल्प चुनें।; तीन में से कोई एक चुनें: चालान नंबर , गाड़ी नंबर या DL नंबर ।; गाड़ी नंबर चुनने पर चेसिस या इंजन नंबर के आख़िरी अंक माँगे जा सकते हैं।; कैप्चा भरें और "Get Detail" दबाएँ।
- ब्राउज़र में echallan.parivahan.gov.in खोलें। मिलती-जुलती नकली वेबसाइटों से सावधान रहें; पता ध्यान से पढ़ें।
- चालान देखने/ऑनलाइन भुगतान का विकल्प चुनें।
- तीन में से कोई एक चुनें: चालान नंबर, गाड़ी नंबर या DL नंबर।
- गाड़ी नंबर चुनने पर चेसिस या इंजन नंबर के आख़िरी अंक माँगे जा सकते हैं।
- कैप्चा भरें और “Get Detail” दबाएँ।
- पेंडिंग और भरे हुए चालानों की सूची दिखेगी: तारीख़, जगह, उल्लंघन और राशि के साथ।

ऑनलाइन भुगतान कैसे करें
सवालई-चालान का ऑनलाइन भुगतान कैसे करें?
जवाब: जिस चालान को भरना है, उसके आगे "Pay Now" दबाएँ।; मोबाइल पर आए OTP से पुष्टि करें।; भुगतान का तरीका चुनें: UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग।; भुगतान पूरा होते ही रसीद (receipt) डाउनलोड करें और सँभालकर रखें।।
- जिस चालान को भरना है, उसके आगे “Pay Now” दबाएँ।
- मोबाइल पर आए OTP से पुष्टि करें।
- भुगतान का तरीका चुनें: UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग।
- भुगतान पूरा होते ही रसीद (receipt) डाउनलोड करें और सँभालकर रखें।
चालान की स्थिति और क्या करें
| स्थिति | मतलब | क्या करें |
|---|---|---|
| Pending (पुलिस के पास) | चालान अभी विभाग के पास है | पोर्टल पर सीधे ऑनलाइन भरें |
| Sent to Court / Virtual Court | चालान कोर्ट भेजा जा चुका है | वर्चुअल कोर्ट पोर्टल (vcourts.gov.in) पर देखें और भरें; समझौता-योग्य हो तो लोक अदालत भी विकल्प |
| Disposed / Paid | भुगतान हो चुका | रसीद सँभालकर रखें |
रसीद क्यों सँभालें?
कभी-कभी भुगतान के बाद भी पोर्टल पर स्थिति देर से अपडेट होती है। अगर बाद में वही चालान फिर से पेंडिंग दिखे, तो रसीद आपका सबूत है। गाड़ी बेचते समय या RTO के काम में भी साफ़ रिकॉर्ड काम आता है।
नकली चालान से सावधान
- सिर्फ़ आधिकारिक पोर्टल या अपने राज्य की ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट/ऐप पर भरें।
- SMS में आए अनजान लिंक या APK फ़ाइल न खोलें।
- कोई भी असली विभाग फ़ोन पर OTP या कार्ड का PIN नहीं माँगता।
- शक हो तो चालान नंबर को ख़ुद पोर्टल पर जाकर जाँचें।
अगर चालान ग़लत लगे
सवालचालान ग़लत लगे तो क्या करें?
जवाब: अगर आपको लगता है कि चालान ग़लत कटा है (जैसे गाड़ी उस जगह थी ही नहीं), तो अपने राज्य की ट्रैफिक पुलिस के शिकायत पोर्टल पर सबूत के साथ शिकायत करें, या कोर्ट में चुनौती दें।
लोक अदालत के फ़ैसले के बारे में ज़रूरी बातें
सवाललोक अदालत का फ़ैसला कितना पक्का होता है?
जवाब: लोक अदालत आपसी सहमति से मामले निपटाने का मंच है, जिसे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य/ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण आयोजित करते हैं। ट्रैफ़िक चालान के अलावा बैंक वसूली, बिजली-पानी के बिल और कई छोटे दीवानी मामले भी यहाँ आते हैं।
| बात | क्या जानना ज़रूरी |
|---|---|
| फ़ैसले की ताक़त | विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 21 के तहत अवॉर्ड दीवानी अदालत की डिक्री जैसा माना जाता है |
| अपील | अवॉर्ड अंतिम होता है, उसके ख़िलाफ़ अपील नहीं होती |
| सहमति | मामला दोनों पक्षों की सहमति से ही निपटता है; ज़बरदस्ती नहीं |
| कोर्ट फ़ीस | अदालत में लंबित मामला लोक अदालत में निपटे तो चुकाई गई कोर्ट फ़ीस लौटाने का प्रावधान है |
जाने से पहले तैयारी: चालान नंबर या टोकन/स्लिप, गाड़ी की RC, पहचान पत्र और भुगतान का साधन साथ रखें। जिस शहर में लोक अदालत है, वहाँ की ट्रैफ़िक पुलिस या विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट पर तय प्रक्रिया ज़रूर देखें, क्योंकि कई जगह पहले से ऑनलाइन टोकन या अपॉइंटमेंट लेना होता है।
ध्यान दें: हर चालान लोक अदालत में नहीं आता। गंभीर अपराधों से जुड़े या कोर्ट में अलग से चल रहे मामलों के लिए नियम अलग हो सकते हैं। किसी दलाल को पैसे देकर “चालान माफ़” करवाने के झाँसे में न आएँ।
चालान से बचने की 8 आसान आदतें
आजकल ज़्यादातर बड़े शहरों में कैमरों से अपने-आप चालान कटते हैं, और कई बार लोगों को हफ़्तों बाद पता चलता है। सबसे सस्ता तरीका है नियम मानना:
- स्टॉप लाइन से पहले रुकें: रेड लाइट पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन पार न करें।
- बोर्ड वाली रफ़्तार: शहर, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग सीमा होती है; स्पीड कैमरे वाले हिस्सों में बोर्ड देखें।
- हेलमेट और सीटबेल्ट: दोपहिया पर दोनों सवार हेलमेट पहनें, कार में आगे-पीछे सब सीटबेल्ट लगाएँ।
- फ़ोन हाथ में नहीं: गाड़ी चलाते हुए फ़ोन पर बात या मैसेज न करें।
- सही लेन और सही दिशा: ग़लत दिशा (रॉन्ग साइड) में चलना ख़तरनाक भी है और आम चालान भी।
- नंबर प्लेट साफ़ और मानक: टूटी, धुंधली या डिज़ाइनर नंबर प्लेट से दिक़्क़त हो सकती है।
- काग़ज़ अपडेट: बीमा, PUC और लाइसेंस की तारीख़ याद रखें; DigiLocker/mParivahan में रखे दस्तावेज़ मान्य हैं।
- पार्किंग सही जगह: नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ी चालान के साथ टो भी हो सकती है।
महीने में एक बार जाँच: echallan.parivahan.gov.in पर अपनी गाड़ी का नंबर डालकर देख लें कि कोई चालान लंबित तो नहीं। समय पर जानकारी होने से आप सही समय पर भुगतान कर सकते हैं, ग़लत चालान को चुनौती दे सकते हैं, या लोक अदालत जैसे विकल्प का इंतज़ार कर सकते हैं।
डिजिटल काग़ज़: मोबाइल में रखें, परेशानी से बचें
ड्राइविंग लाइसेंस या RC घर पर भूल जाना आम बात है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने अगस्त 2018 में राज्यों को एडवाइज़री भेजी कि DigiLocker या mParivahan ऐप में उपलब्ध ड्राइविंग लाइसेंस, RC और दूसरे परिवहन दस्तावेज़ मूल काग़ज़ों के बराबर क़ानूनी रूप से मान्य माने जाएँ।
| दस्तावेज़ | कहाँ रखें |
|---|---|
| ड्राइविंग लाइसेंस | DigiLocker / mParivahan |
| RC (रजिस्ट्रेशन) | DigiLocker / mParivahan |
| बीमा पॉलिसी | बीमा कंपनी की PDF/ऐप; कई पॉलिसियाँ DigiLocker में भी जुड़ती हैं |
| PUC | puc.parivahan.gov.in से डाउनलोड |
कैसे शुरू करें:
- आधिकारिक ऐप स्टोर से DigiLocker या mParivahan ऐप डाउनलोड करें।
- मोबाइल नंबर/आधार से लॉग-इन करें।
- “Issued Documents” में परिवहन विभाग से अपना लाइसेंस और RC जोड़ें।
ध्यान रखें: फ़ोन की गैलरी में रखी फ़ोटो या स्कैन कॉपी वही दर्जा नहीं रखती जो इन आधिकारिक ऐप में जारी दस्तावेज़ रखता है। फ़ोन की बैटरी चार्ज रखें, और लंबे सफ़र में एक फ़ोटोकॉपी भी साथ रखें। किसी अनजान “दस्तावेज़ अपडेट” लिंक पर अपनी जानकारी न डालें।

निष्कर्ष
ई-चालान चेक करना और भरना अब घर बैठे कुछ मिनटों का काम है। बस सही पोर्टल पर जाएँ, और रसीद सँभालकर रखें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड E-CHALLAN भी पढ़ सकते हैं।
कई चालान इसलिए कटते हैं क्योंकि गाड़ी ग़लत जगह खड़ी होती है और मालिक तक कोई पहुँच नहीं पाता। गाड़ी पर लगा Rakshak Code QR स्कैन करके कोई भी आपको समय पर गाड़ी हटाने की सूचना दे सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 14 जनवरी 2026
स्रोत (Sources)
- eChallan पोर्टल (MoRTH/Parivahan): https://echallan.parivahan.gov.in/
- Virtual Courts (कोर्ट भेजे गए चालान): https://vcourts.gov.in/virtualcourt/
- Parivahan Sewa: https://parivahan.gov.in/
- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987, धारा 21: https://indiacode.ecourtsindia.com/legal-services-authorities-act-1987/section/21/
- NALSA, नेशनल लोक अदालत: https://nalsa.gov.in/national-lok-adalat/
- PIB, DigiLocker/mParivahan पर दस्तावेज़ों की मान्यता (अगस्त 2018): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1542222
- MoRTH एडवाइज़री, 8 अगस्त 2018 (Parivahan): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/08-08-2018.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या बिना चालान नंबर के चालान देख सकते हैं?
हाँ, गाड़ी नंबर या DL नंबर से भी देख सकते हैं।
2. कोर्ट में गया चालान कैसे भरें?
वर्चुअल कोर्ट पोर्टल (vcourts.gov.in) पर, या अपने ज़िले की लोक अदालत में अगर चालान समझौता-योग्य है।
3. भुगतान हो गया पर पोर्टल पर पेंडिंग दिख रहा है?
कुछ समय इंतज़ार करें। फिर भी अपडेट न हो तो रसीद के साथ हेल्पडेस्क पर शिकायत करें।
4. अपना चालान कहाँ देखें?
परिवहन विभाग के e-Challan पोर्टल (echallan.parivahan.gov.in) पर गाड़ी नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर से।
5. क्या लोक अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील हो सकती है?
नहीं। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 21 के अनुसार लोक अदालत का अवॉर्ड अंतिम होता है और उसके ख़िलाफ़ किसी अदालत में अपील नहीं होती।


