सीधा जवाब: सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 164A के तहत Compensation to Victims (Interim Relief) Scheme, 2026 बनाई है, जिसमें हादसा पीड़ित या मृतक के वारिस MACT में दावा लंबित रहते हुए अंतरिम (अग्रिम) मुआवज़ा माँग सकेंगे। 16 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को इस योजना का व्यापक प्रचार करने, इसे जल्द से जल्द आधिकारिक गज़ट में प्रकाशित करने और यह बताने का निर्देश दिया कि क्या योजना बिना बीमा वाली गाड़ियों के हादसों पर भी लागू होगी। अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को है।
कोर्ट ने क्या कहा
सवालसुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम मुआवज़ा योजना पर क्या कहा?
जवाब: LiveLaw के अनुसार जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने यह निर्देश उन अवमानना याचिकाओं की सुनवाई में दिया, जिनमें पहले के आदेशों का पालन न होने का आरोप था। कोर्ट की मुख्य बातें: आम नागरिक को अंतरिम मुआवज़े के अधिकार का पता तभी चलेगा जब सरकार इसका प्रचार करे, इसलिए व्यापक प्रचार ज़रूरी है।
- आम नागरिक को अंतरिम मुआवज़े के अधिकार का पता तभी चलेगा जब सरकार इसका प्रचार करे, इसलिए व्यापक प्रचार ज़रूरी है।
- धारा 164A के तहत बनी योजना वैधानिक योजना है और धारा 212 के दायरे में आती है, इसलिए इसे गज़ट में प्रकाशित करना होगा।
- केंद्र अगली सुनवाई तक बताए कि योजना को चालू कैसे किया जाएगा।
धारा 164A क्या है
सवालमोटर वाहन अधिनियम की धारा 164A क्या है?
जवाब: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 से जोड़ी गई धारा 164A केंद्र सरकार को मुआवज़ा माँगने वाले दावेदारों के लिए अंतरिम राहत की योजना बनाने का अधिकार देती है। योजना में यह प्रक्रिया भी होनी चाहिए कि दी गई राशि बाद में गाड़ी मालिक या दूसरे स्रोतों से वसूली जा सके। LiveLaw के अनुसार यह प्रावधान 1 अप्रैल 2022 से लागू है, लेकिन तीन साल तक इसके तहत योजना नहीं बनी।

आवेदन की प्रक्रिया
सवालअंतरिम मुआवज़ा योजना में आवेदन की प्रक्रिया क्या है?
जवाब: कोर्ट ने योजना के क्लॉज़ 6 को देखा, जिसमें दावा करने का तरीक़ा है: 1: पीड़ित या मृतक के वारिस तय ई-पोर्टल पर आवेदन करें, MACT में दायर या लंबित दावे की जानकारी के साथ: —; 2: आवेदन वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) और संबंधित जाँच अधिकारी (IO) को जाएगा; DFS इसे गाड़ी की बीमा कंपनी को भेजेगा: —; 3: जाँच अधिकारी पोर्टल पर विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (DAR)…
| चरण | क्या होगा | समय-सीमा |
|---|---|---|
| 1 | पीड़ित या मृतक के वारिस तय ई-पोर्टल पर आवेदन करें, MACT में दायर या लंबित दावे की जानकारी के साथ | — |
| 2 | आवेदन वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) और संबंधित जाँच अधिकारी (IO) को जाएगा; DFS इसे गाड़ी की बीमा कंपनी को भेजेगा | — |
| 3 | जाँच अधिकारी पोर्टल पर विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (DAR) अपलोड करेगा | हादसे के 90 दिन के भीतर |
| 4 | बीमा कंपनी कारण सहित आवेदन मंज़ूर या नामंज़ूर करेगी | DAR अपलोड होने के 30 दिन में |
| 5 | मंज़ूरी पर भुगतान दावा न्यायाधिकरण (MACT) के सामने | मंज़ूरी के 30 दिन में |
DAR और eDAR पोर्टल कैसे काम करता है, इसके लिए पढ़ें: eDAR: सड़क हादसे का डेटा और क्लेम। ध्यान रहे, रिपोर्ट में अंतरिम राशि कितनी होगी, यह नहीं बताया गया है; योजना गज़ट में छपने के बाद ही पूरी शर्तें साफ़ होंगी।
बिना बीमा वाली गाड़ी
सवालक्या बिना बीमा वाली गाड़ी के हादसे में भी अंतरिम मुआवज़ा मिलेगा?
जवाब: एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल और एक आवेदक ने कोर्ट को बताया कि योजना सिर्फ़ बीमित गाड़ियों वाले मामलों तक सीमित लगती है, जबकि बिना बीमा वाली गाड़ी के हादसे में भी पीड़ित को मदद चाहिए। कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से इस पर निर्देश लेकर बताने को कहा।
इसी सुनवाई में कोर्ट ने 2023 की सड़क दुर्घटना वार्षिक रिपोर्ट समय पर न छापने को लेकर एक अलग अवमानना याचिका पर भी केंद्र को नोटिस दिया।
पीड़ित परिवार अभी क्या करें
- हादसे के बाद FIR ज़रूर दर्ज कराएँ और उसकी कॉपी रखें; DAR इसी जाँच से बनती है।
- MACT में दावा दायर करें; अंतरिम राहत का आवेदन MACT दावे की जानकारी के साथ ही होगा।
- इलाज के लिए कैशलेस योजना का लाभ लें: PM-RAHAT: पीड़ितों को कैशलेस इलाज।
- योजना के गज़ट में छपने और पोर्टल शुरू होने की आधिकारिक सूचना पर नज़र रखें।
मुआवज़े और बीमा क्लेम के लिए ज़रूरी काग़ज़
सवालहादसे के बाद मुआवज़े या बीमा क्लेम के लिए कौन-से काग़ज़ चाहिए?
जवाब: हादसे के बाद परिवार सदमे में होता है और काग़ज़ों पर ध्यान नहीं जाता। लेकिन यही काग़ज़ आगे इलाज के ख़र्च, बीमा क्लेम या मुआवज़े में काम आते हैं। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत घायल व्यक्ति, गाड़ी/संपत्ति का मालिक या मृतक के क़ानूनी वारिस मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवज़े का आवेदन कर सकते हैं।
| काग़ज़ | क्यों ज़रूरी |
|---|---|
| FIR / पुलिस रिपोर्ट की कॉपी | हादसे का आधिकारिक रिकॉर्ड |
| अस्पताल की पर्ची, मेडिकल रिपोर्ट, बिल | चोट और ख़र्च का सबूत |
| गाड़ी का नंबर, RC, बीमा पॉलिसी की जानकारी | किस बीमा कंपनी से दावा होगा |
| मौक़े की तस्वीरें, गवाहों के नंबर | हादसा कैसे हुआ, इसका सबूत |
| आय का सबूत (सैलरी स्लिप, ITR आदि) | मुआवज़े की गणना में काम आता है |
| मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र | वारिसों के दावे के लिए |
अपनी गाड़ी के नुकसान पर: बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें, सर्वे से पहले गाड़ी की मरम्मत न कराएँ, और क्लेम नंबर लिख लें। किसी बिचौलिए को काग़ज़ या पैसे देने से पहले सोचें; सीधे बीमा कंपनी या वकील से बात करना सुरक्षित है।

निष्कर्ष
MACT में सालों चलने वाले मुक़दमों के बीच अंतरिम मुआवज़ा पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकता है, बशर्ते योजना जल्दी अधिसूचित हो, लोगों तक पहुँचे और बिना बीमा वाली गाड़ियों के मामलों को भी शामिल करे। इससे जुड़ी जानकारी के लिए दिल्ली की नेशनल लोक अदालत अब 25 अक्टूबर को: 19 अक्टूबर से चालान स्लिप डाउनलोड, जानिए कौन-से चालान शामिल और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे: ट्रेलर से टकराई AC बस, 4 यात्रियों की मौत; ड्राइवर को झपकी की आशंका भी देखें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड TRAFFIC RULES EVERYONE MUST FOLLOW भी पढ़ सकते हैं।
गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए। हादसे की स्थिति में मदद करने वाला व्यक्ति QR स्कैन करके आपके परिवार या इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को तुरंत ख़बर दे सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
आख़िरी अपडेट: 31 अक्टूबर 2026
स्रोत (Sources)
- LiveLaw, Supreme Court Directs Centre To Publicise Scheme For Interim Compensation To Road Accident Victims (20 अक्टूबर 2026): https://www.livelaw.in/supreme-court/supreme-court-directs-centre-to-publicise-scheme-for-interim-compensation-to-road-accident-victims-555334
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019, भारत का राजपत्र (धारा 164A): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988, धारा 166 (मुआवज़े के लिए आवेदन): https://indiacode.ecourtsindia.com/mv-act/section/166/
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Interim Relief Scheme, 2026 क्या है?
धारा 164A के तहत सड़क परिवहन मंत्रालय की बनाई योजना, जिसमें MACT में दावा लंबित रहते हुए पीड़ित या वारिस अंतरिम मुआवज़ा माँग सकते हैं।
2. क्या योजना लागू हो गई है?
सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को इसे जल्द गज़ट में छापने और चालू करने की योजना बताने को कहा है; गज़ट अधिसूचना के बाद ही यह औपचारिक रूप से लागू मानी जाएगी।
3. बीमा कंपनी को कितने दिन में फ़ैसला करना होगा?
योजना के अनुसार DAR अपलोड होने के 30 दिन में मंज़ूर या नामंज़ूर करना होगा, और मंज़ूरी के 30 दिन में भुगतान MACT के सामने करना होगा।
4. जाँच अधिकारी DAR कितने दिन में अपलोड करेगा?
हादसे के 90 दिन के भीतर।
5. इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
LiveLaw के अनुसार अवमानना याचिकाएँ और जुड़े आवेदन 25 नवंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।


