eDAR क्या है: सड़क हादसे का डेटा कैसे दर्ज होता है और इलाज व क्लेम में यह कैसे मदद करता है

सीधा जवाब: eDAR का पूरा नाम है electronic Detailed Accident Report। यह पुलिस अधिकारियों द्वारा सड़क हादसों की रिपोर्टिंग का डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। PIB (29 जनवरी 2026) के अनुसार सरकार की कैशलेस इलाज योजना eDAR और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के TMS 2.0 (अस्पतालों का क्लेम सिस्टम) को जोड़कर चलाई जा रही है। eDAR, VAHAN पोर्टल से जुड़ा है, इसलिए टक्कर मारने वाले वाहन के थर्ड-पार्टी बीमे की स्थिति भी इसमें दर्ज होती है। आम आदमी के लिए मतलब सीधा है: हादसे की जानकारी पुलिस तक पहुँचे, तो इलाज, भुगतान और आगे के क्लेम का डिजिटल रिकॉर्ड बनता है।

eDAR क्या है?

सवालeDAR क्या है?

जवाब: सड़क हादसा होने पर पुलिस उसकी जानकारी दर्ज करती है: कब, कहाँ, कौन-से वाहन, कितने घायल, और हादसे की परिस्थितियाँ। पहले यह सब ज़्यादातर काग़ज़ पर होता था। eDAR इसे डिजिटल बनाता है, ताकि जानकारी एक जगह सुरक्षित रहे और ज़रूरत पड़ने पर संबंधित विभागों तक पहुँच सके। यह सिस्टम सड़क परिवहन मंत्रालय के iRAD (Integrated Road Accident Database) प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ा है, जिसका पता irad.parivahan.gov.in है।

बात जानकारी
पूरा नाम electronic Detailed Accident Report
कौन इस्तेमाल करता है पुलिस अधिकारी, हादसों की रिपोर्टिंग के लिए
किससे जुड़ा VAHAN पोर्टल (वाहन व बीमा जानकारी)
कैशलेस इलाज में NHA के TMS 2.0 के साथ (PIB, जनवरी 2026)
फ़ायदा हादसे से इलाज और भुगतान तक पूरा डिजिटल रिकॉर्ड

कैशलेस इलाज में भूमिका

सवालकैशलेस इलाज योजना में eDAR की क्या भूमिका है?

जवाब: PIB के अनुसार कैशलेस इलाज योजना में हर सड़क हादसा पीड़ित को ₹1.5 लाख तक, 7 दिन तक इलाज मिलता है। नामित अस्पताल में स्थिरीकरण इलाज 24 से 48 घंटे तक पुलिस पुष्टि के अधीन होता है। यही "पुलिस पुष्टि" eDAR से होती है। अस्पताल TMS 2.0 पर इलाज और क्लेम दर्ज करता है, और पुलिस eDAR पर हादसे की पुष्टि करती है।

कंप्यूटर पर डेटा (प्रतीकात्मक)
Photo: Lalmch via Pixabay · Pixabay

बीमा और क्लेम में मदद

सवालबीमा और क्लेम में eDAR कैसे मदद करता है?

जवाब: eDAR VAHAN से जुड़ा है, इसलिए टक्कर मारने वाले वाहन का थर्ड-पार्टी बीमा है या नहीं, यह जानकारी रिपोर्ट में आ जाती है। PIB के अनुसार अस्पतालों का भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) से होता है, जिसमें बीमित वाहन के मामलों में जनरल इंश्योरेंस कंपनियों का योगदान और बाक़ी मामलों में बजट सहायता होती है। मुआवज़े के दावे में भी पुलिस का दर्ज रिकॉर्ड अहम सबूत होता है।

आपको क्या करना चाहिए?

सवालहादसे के बाद आम आदमी को क्या करना चाहिए?

जवाब: 112 पर कॉल करें: इससे हादसे की सूचना आधिकारिक रूप से दर्ज होती है और एंबुलेंस/अस्पताल की मदद मिलती है।; पुलिस को सही जानकारी दें: समय, जगह, वाहन नंबर, गवाहों के नाम।; सबूत संभालें: फ़ोटो, वीडियो, आसपास के CCTV की जानकारी।; काग़ज़ों की कॉपी रखें: FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी, अस्पताल के काग़ज़ और बिल।

  • 112 पर कॉल करें: इससे हादसे की सूचना आधिकारिक रूप से दर्ज होती है और एंबुलेंस/अस्पताल की मदद मिलती है।
  • पुलिस को सही जानकारी दें: समय, जगह, वाहन नंबर, गवाहों के नाम।
  • सबूत संभालें: फ़ोटो, वीडियो, आसपास के CCTV की जानकारी।
  • काग़ज़ों की कॉपी रखें: FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी, अस्पताल के काग़ज़ और बिल।
  • अपनी गाड़ी का बीमा वैध रखें: VAHAN पर सही जानकारी होने से आगे परेशानी कम होती है।
हादसे के बाद क्यों
112 पर सूचना आधिकारिक रिकॉर्ड और तुरंत मदद
पुलिस रिपोर्ट eDAR में दर्ज, इलाज की पुष्टि
काग़ज़ों की कॉपी बीमा/मुआवज़ा दावा

आंकड़ों को कैसे पढ़ें और कहाँ देखें

सवालसड़क हादसों के सरकारी आंकड़े कहाँ मिलते हैं और उन्हें कैसे समझें?

जवाब: सड़क हादसों से जुड़ी ख़बरों में बड़े-बड़े आंकड़े आते हैं, लेकिन उन्हें सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है। MoRTH की वार्षिक रिपोर्ट "Road Accidents in India": देश और राज्यवार हादसे, मौतें, घायल, कारण और सड़क के प्रकार; संसद के प्रश्न-उत्तर (sansad.in): किसी ख़ास विषय या राज्य पर मंत्रालय का लिखित जवाब; राज्य पुलिस / परिवहन विभाग: राज्य या शहर स्तर के आंकड़े

स्रोत इसमें क्या मिलता है
MoRTH की वार्षिक रिपोर्ट “Road Accidents in India” देश और राज्यवार हादसे, मौतें, घायल, कारण और सड़क के प्रकार
संसद के प्रश्न-उत्तर (sansad.in) किसी ख़ास विषय या राज्य पर मंत्रालय का लिखित जवाब
राज्य पुलिस / परिवहन विभाग राज्य या शहर स्तर के आंकड़े

पढ़ते समय ये बातें ध्यान रखें:

  1. साल देखें: वार्षिक रिपोर्ट अक्सर एक-दो साल पुराने आंकड़ों पर होती है। ख़बर में “इस साल” लिखा हो तो जाँचें कि आंकड़ा किस साल का है।
  2. हादसे बनाम मौतें: हादसों की संख्या और मौतों की संख्या अलग चीज़ें हैं; एक हादसे में कई लोगों की जान जा सकती है।
  3. प्रतिशत बदलाव: “इतने प्रतिशत बढ़े” सुनकर यह भी देखें कि आधार संख्या कितनी थी।
  4. रिपोर्टिंग का आधार: MoRTH की रिपोर्ट राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस से मिली जानकारी पर बनती है; कई छोटे हादसे दर्ज ही नहीं होते।

आंकड़े हमें बताते हैं कि ख़तरा कहाँ है। ओवरस्पीडिंग, हेलमेट/सीटबेल्ट न लगाना और ग़लत दिशा में चलना जैसे कारण बार-बार सामने आते हैं, और इन्हें बदलना हमारे अपने हाथ में है।

जब टक्कर मारकर भाग जाए: हिट-एंड-रन मुआवज़ा

कई हादसों में टक्कर मारने वाला वाहन पकड़ा नहीं जाता। ऐसे पीड़ितों के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने 25 फ़रवरी 2022 को “Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022” अधिसूचित की, जो 1 अप्रैल 2022 से पुरानी सोलेशियम योजना, 1989 की जगह लागू है।

स्थिति पहले (सोलेशियम योजना) अब (2022 योजना)
मृत्यु ₹25,000 ₹2,00,000
गंभीर चोट ₹12,500 ₹50,000

कैसे आवेदन करें:

  1. हादसे की FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी लें, जिसमें लिखा हो कि वाहन का पता नहीं चला।
  2. इलाज के काग़ज़, मेडिकल रिपोर्ट और (मृत्यु के मामले में) पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र संभालकर रखें।
  3. योजना में दावा “Claims Enquiry Officer” के पास तय फ़ॉर्म में किया जाता है; मंज़ूरी “Claims Settlement Commissioner” देते हैं और राशि सीधे बैंक खाते में आती है। अपने इलाक़े के सही दफ़्तर की जानकारी पुलिस थाने या ज़िला प्रशासन से लें।
  4. बैंक खाते का विवरण और पहचान पत्र साथ रखें।

मंत्रालय के अनुसार आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है। अगर बाद में वाहन पकड़ा जाता है, तो मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में अलग से दावा भी किया जा सकता है।

मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं

हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि “पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे”। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए। इनके अनुसार नेकनीयती से आपात मदद करने वाले व्यक्ति पर घायल की चोट या मौत के लिए दीवानी या आपराधिक कार्रवाई नहीं होती।

मदद करने वाले का अधिकार इसका मतलब
तुरंत जाने की छूट पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं
पहचान बताना ज़रूरी नहीं पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता
अस्पताल का ख़र्च नहीं अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता
पावती (रसीद) नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है
गवाह बनना मर्ज़ी से गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है

नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।

बीमा के काग़ज़ (प्रतीकात्मक)
Photo: OleksandrPidvalnyi via Pixabay · Pixabay

निष्कर्ष

eDAR परदे के पीछे का सिस्टम है, लेकिन इसका असर सीधे घायल और उसके परिवार पर पड़ता है: तेज़ इलाज, अस्पताल को भुगतान और आगे के दावे। आपकी ज़िम्मेदारी बस इतनी है कि हादसे की सूचना सही समय पर सही जगह पहुँचे। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड TRAFFIC RULES EVERYONE MUST FOLLOW भी पढ़ सकते हैं।

हादसे के समय परिवार तक जल्दी ख़बर पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए: मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।

सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।

आख़िरी अपडेट: 5 अगस्त 2026

स्रोत (Sources)

  1. PIB, “Cashless Treatment to Road Accident Victims” (29 जनवरी 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2220125
  2. MoRTH iRAD/eDAR पोर्टल: https://irad.parivahan.gov.in/
  3. PIB, PM RAHAT (11 मार्च 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2238637
  4. MoRTH, Road Accidents in India 2022: https://morth.gov.in/backend/documents/uploaded/1755600426_RA_2022_30_Oct.pdf
  5. संसद (लोकसभा) प्रश्न और उत्तर: https://sansad.in/ls/questions/questions-and-answers
  6. PIB, हिट-एंड-रन पीड़ितों के मुआवज़े की नई योजना (25 फ़रवरी 2022): https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1801698
  7. PIB, लोकसभा उत्तर: हिट-एंड-रन मुआवज़ा और Motor Vehicle Accident Fund: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1845885
  8. PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
  9. MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. eDAR का पूरा नाम क्या है?

electronic Detailed Accident Report, जिसे पुलिस हादसों की रिपोर्टिंग के लिए इस्तेमाल करती है।

2. क्या आम आदमी eDAR पर ख़ुद रिपोर्ट दर्ज कर सकता है?

eDAR पुलिस अधिकारियों का प्लेटफ़ॉर्म है। आम आदमी 112 पर कॉल या नज़दीकी थाने में सूचना देकर रिपोर्ट दर्ज कराता है।

3. कैशलेस इलाज में eDAR क्यों ज़रूरी है?

PIB के अनुसार योजना eDAR और अस्पतालों के TMS 2.0 को जोड़कर चलती है; हादसे की पुलिस पुष्टि eDAR से होती है।

4. eDAR में बीमे की जानकारी कैसे आती है?

eDAR VAHAN पोर्टल से जुड़ा है, इसलिए वाहन का थर्ड-पार्टी बीमा स्टेटस इसमें दर्ज होता है।

5. सड़क हादसों के आधिकारिक आंकड़े कहाँ मिलते हैं?

सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) की वार्षिक रिपोर्ट “Road Accidents in India” में, जो राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस से मिले आंकड़ों पर आधारित होती है; संसद में दिए गए जवाबों में भी ताज़ा आंकड़े आते हैं।

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