सीधा जवाब: टाइम्स ऑफ़ इंडिया (16 अक्टूबर 2026) के अनुसार गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) ज़िला प्रशासन ने 43 ऐसे अस्पताल चिह्नित किए हैं, जो PM-JAY वाले अस्पतालों के अलावा PM-RAHAT नेटवर्क में जोड़े जाएँगे। यानी अब हादसे के घायल इन अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज चुन सकेंगे। योजना के तहत हर घायल को हादसे की तारीख़ से 7 दिन तक, ₹1.5 लाख तक का इलाज कैशलेस मिलता है, चाहे उसके पास कोई कार्ड हो या न हो।
43 अस्पताल: क्या फ़ैसला हुआ?
सवालनोएडा में कितने नए अस्पताल जुड़े हैं?
जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक़ ज़िला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में अपर ज़िलाधिकारी (प्रशासन) ने ये निर्देश दिए: 43 अस्पताल, जो PM-JAY योजना से अलग हैं, PM-RAHAT नेटवर्क में जोड़े जाएँगे।; मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सभी 43 अस्पतालों को सूचित करें।; योजना की जानकारी पुलिस थानों में लगाई जाए , क्योंकि हादसे की जगह पर अक्सर पुलिस ही सबसे पहले पहुँचती है।
- 43 अस्पताल, जो PM-JAY योजना से अलग हैं, PM-RAHAT नेटवर्क में जोड़े जाएँगे।
- मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सभी 43 अस्पतालों को सूचित करें।
- योजना की जानकारी पुलिस थानों में लगाई जाए, क्योंकि हादसे की जगह पर अक्सर पुलिस ही सबसे पहले पहुँचती है।
- अगली बैठक में अस्पतालों के प्रबंधन को भी बुलाया जाएगा, ताकि कमियाँ दूर हों।
बैठक में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) ने प्रक्रिया भी समझाई: अस्पताल में इलाज का ब्योरा दर्ज होना, e-DAR पोर्टल पर हादसे का केस भेजना और पुलिस सत्यापन।
नोएडा में क्यों ज़रूरी है?
उसी रिपोर्ट में ट्रैफ़िक पुलिस के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि जनवरी से जुलाई 2026 के बीच शहर में 577 सड़क हादसे हुए और 450 लोगों की जान गई। TOI ने यह भी बताया था कि साल के पहले चार महीनों में कैशलेस इलाज के दावे औसतन क़रीब 30 प्रति माह ही रहे, यानी बहुत से लोगों को योजना की जानकारी ही नहीं है।

PM-RAHAT में कितना इलाज मिलता है?
सवालPM-RAHAT में कितना इलाज मुफ़्त मिलता है?
जवाब: इलाज की सीमा: प्रति घायल ₹1.5 लाख तक; समय: हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन; कौन पात्र: किसी भी सड़क पर मोटर वाहन से हुए हादसे का कोई भी घायल; अस्पताल: नामित अस्पताल; PM-JAY में सूचीबद्ध अस्पताल अपने आप नामित माने जाते हैं यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री के लोकसभा में लिखित जवाब (PIB, 29 जनवरी 2026) और PMO की घोषणा (PIB, 13 फ़रवरी 2026) पर आधारित है।
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| इलाज की सीमा | प्रति घायल ₹1.5 लाख तक |
| समय | हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन |
| कौन पात्र | किसी भी सड़क पर मोटर वाहन से हुए हादसे का कोई भी घायल |
| अस्पताल | नामित अस्पताल; PM-JAY में सूचीबद्ध अस्पताल अपने आप नामित माने जाते हैं |
हादसा हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?
सवालहादसा हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?
जवाब: 112 पर कॉल करें। सरकार के अनुसार योजना 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से जुड़ी है; ऑपरेटर नज़दीकी नामित अस्पताल बताता है और ज़रूरत हो तो एम्बुलेंस भी भेजता है।; घायल को नज़दीकी नामित अस्पताल ले जाएँ। पहला घंटा ("गोल्डन ऑवर") सबसे क़ीमती होता है।; अस्पताल को बताएँ कि यह सड़क हादसे का मामला है और PM-RAHAT के तहत कैशलेस इलाज चाहिए।
- 112 पर कॉल करें। सरकार के अनुसार योजना 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से जुड़ी है; ऑपरेटर नज़दीकी नामित अस्पताल बताता है और ज़रूरत हो तो एम्बुलेंस भी भेजता है।
- घायल को नज़दीकी नामित अस्पताल ले जाएँ। पहला घंटा (“गोल्डन ऑवर”) सबसे क़ीमती होता है।
- अस्पताल को बताएँ कि यह सड़क हादसे का मामला है और PM-RAHAT के तहत कैशलेस इलाज चाहिए।
- पुलिस हादसा e-DAR पर दर्ज करती है; अस्पताल इलाज का ब्योरा दर्ज करता है। परिवार अपना नंबर और घायल की जानकारी साफ़ दें।
- अस्पताल पैसे माँगे तो योजना का हवाला दें। बात न बने तो ज़िला प्रशासन या CMO कार्यालय से संपर्क करें।
पूरी प्रक्रिया विस्तार से यहाँ पढ़ें: PM-RAHAT कैशलेस इलाज: स्टेप-बाय-स्टेप। अगर अस्पताल इलाज से मना करे तो आपके अधिकार यहाँ देखें: अस्पताल हादसे के घायल का इलाज करने से मना करे तो क्या करें।
मदद करने वाले डरें नहीं
घायल को अस्पताल पहुँचाने वाले व्यक्ति को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134A के तहत “गुड समैरिटन” का संरक्षण है। नेक नीयत से मदद करने वाले पर इस मदद के लिए कोई दीवानी या आपराधिक ज़िम्मेदारी नहीं बनती।
हादसे की जगह पर पहले 10 मिनट: क्या करें
सवालहादसे की जगह पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
जवाब: चोट लगने के बाद का पहला घंटा सबसे क़ीमती माना जाता है, इसलिए हादसे की जगह पर मौजूद आम लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। ज़रूरी है कि मदद करते हुए आप ख़ुद सुरक्षित रहें। अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
- अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
- 112 पर कॉल करें: जगह का नाम, नज़दीकी पहचान (पुल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किलोमीटर पत्थर) और घायलों की संख्या बताएँ।
- इंजन बंद कराएँ: हादसे वाली गाड़ी का इंजन बंद करवाएँ। ईंधन या गैस की गंध आए तो बीड़ी-सिगरेट और चिंगारी से दूर रहें।
- बिना ज़रूरत न हिलाएँ: गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो तो घायल को तभी हटाएँ जब आग या दूसरी गाड़ी से तुरंत ख़तरा हो।
- ख़ून रोकें: बहते ख़ून पर साफ़ कपड़े से लगातार दबाव रखें।
- होश में रखें: घायल से बात करते रहें, भीड़ हटाएँ ताकि हवा मिले। बेहोश व्यक्ति के मुँह में पानी न डालें।
- अस्पताल पहुँचाएँ: एम्बुलेंस देर से आए और घायल को ले जाना सुरक्षित हो, तो नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।
वीडियो बनाने से ज़्यादा ज़रूरी है मदद करना। अगर आप ख़ुद कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम सही जगह और जानकारी के साथ 112 पर कॉल ज़रूर करें।
मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं
सवालघायल की मदद करने पर क्या पुलिस परेशान कर सकती है?
जवाब: हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि "पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे"। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए।
| मदद करने वाले का अधिकार | इसका मतलब |
|---|---|
| तुरंत जाने की छूट | पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं |
| पहचान बताना ज़रूरी नहीं | पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता |
| अस्पताल का ख़र्च नहीं | अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता |
| पावती (रसीद) | नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है |
| गवाह बनना मर्ज़ी से | गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है |
नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।
हाईवे पर मदद और शिकायत के आधिकारिक रास्ते
नेशनल हाईवे पर सफ़र करते समय मुसीबत आए या सड़क में कोई ख़राबी दिखे, तो इन आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें:
| ज़रूरत | कहाँ संपर्क करें |
|---|---|
| हाईवे पर गाड़ी ख़राब, हादसा, सड़क पर रुकावट | NHAI हेल्पलाइन 1033 |
| किसी भी आपात स्थिति (पुलिस, एम्बुलेंस, आग) | 112 |
| गड्ढे, टूटी सड़क, टोल या सुविधा से जुड़ी शिकायत | NHAI का राजमार्गयात्रा ऐप |
| FASTag से ग़लत कटौती | FASTag जारी करने वाला बैंक, और 1033 |
राजमार्गयात्रा NHAI का नागरिक-केंद्रित ऐप है, जिसमें हाईवे से जुड़ी जानकारी, आसपास की सुविधाएँ और शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी गई है।
कॉल करते समय क्या बताएँ: हाईवे का नंबर (जैसे NH-48), किस शहर से किस शहर की ओर जा रहे हैं, नज़दीकी किलोमीटर पत्थर, टोल प्लाज़ा, ढाबा या पुल, और क्या मदद चाहिए। जितनी सटीक जानकारी, उतनी जल्दी मदद।
शिकायत करते समय: तस्वीर लें (सुरक्षित जगह से), जगह का नाम लिखें और शिकायत नंबर संभालकर रखें, ताकि बाद में उसकी स्थिति देख सकें।

निष्कर्ष
43 नए अस्पताल जुड़ने से नोएडा में घायलों को जल्दी और बिना पैसे की चिंता के इलाज मिलने की उम्मीद है। यह जानकारी अपने परिवार, ड्राइवर और सोसाइटी के गार्ड तक ज़रूर पहुँचाएँ। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
हादसे के बाद सबसे बड़ी दिक़्क़त होती है परिवार तक ख़बर पहुँचाना। गाड़ी पर Rakshak Code QR हो, तो मदद करने वाला स्कैन करके तुरंत इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, वह भी बिना आपका नंबर देखे।
आख़िरी अपडेट: 26 अक्टूबर 2026
स्रोत (Sources)
- The Times of India, “Dividers to signage, Noida plans to make roads safer, curb accident deaths” (16 अक्टूबर 2026): https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/dividers-to-signage-noida-plans-to-make-roads-safer-curb-accident-deaths/articleshow/134975785.cms
- PIB (PMO), PM RAHAT योजना की मंज़ूरी (13 फ़रवरी 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2227542
- PIB (MoRTH), “Cashless Treatment to Road Accident Victims” (29 जनवरी 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2220125
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 (धारा 134A), भारत का राजपत्र: https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
- PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
- MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf
- NHAI राजमार्गयात्रा: https://rajmargyatra.nhai.gov.in/
- राजमार्गयात्रा, About Us: https://rajmargyatra.nhai.gov.in/aboutus
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या आयुष्मान कार्ड ज़रूरी है?
नहीं। PM-RAHAT में कोई भी सड़क हादसा पीड़ित पात्र है।
2. 43 अस्पतालों की सूची कहाँ मिलेगी?
TOI की रिपोर्ट में अस्पतालों के नाम नहीं दिए गए। ज़िला प्रशासन के निर्देश के अनुसार जानकारी पुलिस थानों में लगाई जानी है; 112 पर कॉल करके भी नज़दीकी नामित अस्पताल पूछ सकते हैं।
3. ₹1.5 लाख से ज़्यादा ख़र्च हो तो?
योजना की सीमा ₹1.5 लाख और 7 दिन है। उससे आगे का ख़र्च बीमा या दूसरी योजनाओं से देखना पड़ सकता है।
4. अगर टक्कर मारने वाली गाड़ी का बीमा न हो तो?
सरकार के अनुसार अस्पतालों को भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष से होता है; बीमा न होने वाले मामलों में इसके लिए सरकारी बजट से सहायता दी जाती है। हिट-एंड-रन में मौत पर ₹2 लाख और गंभीर चोट पर ₹50,000 की अलग मुआवज़ा योजना भी है।
5. यह फ़ैसला किस बैठक में हुआ?
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार गौतम बुद्ध नगर की ज़िला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में, जिसमें अपर ज़िलाधिकारी (प्रशासन) ने सड़क सुरक्षा उपायों की समीक्षा की।


