सीधा जवाब: 13 फ़रवरी 2026 को प्रधानमंत्री ने PM RAHAT योजना शुरू करने को मंज़ूरी दी, जिसके तहत सड़क हादसे के घायलों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज मिलेगा। यह मोटर वाहन अधिनियम की धारा 162 के तहत 5 मई 2025 को अधिसूचित कैशलेस इलाज योजना पर आधारित है: किसी भी सड़क पर मोटर वाहन से हुए हादसे का हर घायल, नामित अस्पताल में, हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन तक, प्रति व्यक्ति ₹1.5 लाख तक इलाज पा सकता है।
योजना की मुख्य बातें
सवालकैशलेस इलाज योजना की मुख्य बातें क्या हैं?
जवाब: सरकार द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी (PIB, 29 जनवरी 2026) और PMO की घोषणा (PIB, 13 फ़रवरी 2026) के आधार पर: इलाज की सीमा: प्रति घायल ₹1.5 लाख तक; समय: हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन; कौन पात्र: किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन से हुए हादसे का कोई भी घायल; स्थिरीकरण (stabilisation): गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे, जानलेवा मामलों में 48 घंटे तक (पुलिस प्रतिक्रिया…
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| इलाज की सीमा | प्रति घायल ₹1.5 लाख तक |
| समय | हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन |
| कौन पात्र | किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन से हुए हादसे का कोई भी घायल |
| स्थिरीकरण (stabilisation) | गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे, जानलेवा मामलों में 48 घंटे तक (पुलिस प्रतिक्रिया के अधीन) |
| अस्पताल | नामित अस्पताल; आयुष्मान भारत PM-JAY में सूचीबद्ध अस्पताल अपने आप नामित माने जाते हैं |
| भुगतान | मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) से, अस्पतालों को |
यह आयुष्मान कार्ड से कैसे अलग है?
सवालयह योजना आयुष्मान कार्ड से कैसे अलग है?
जवाब: PM-JAY में लाभार्थी पहले से तय होते हैं। जबकि यह योजना क़ानूनी रूप से अनिवार्य है और इसमें कोई भी सड़क हादसा पीड़ित लाभ ले सकता है, चाहे उसके पास कोई कार्ड हो या न हो।

हादसा हो जाए तो क्या करें?
सवालहादसा हो जाए तो क्या करें?
जवाब: 112 पर कॉल करें। सरकार के अनुसार योजना को 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से जोड़ा गया है; ऑपरेटर नज़दीकी नामित अस्पताल बताता है और ज़रूरत हो तो एम्बुलेंस भेजता है।; घायल को नामित अस्पताल ले जाएँ। "गोल्डन ऑवर" (पहला घंटा) सबसे क़ीमती होता है।; पुलिस रिपोर्टिंग: पुलिस eDAR प्लेटफ़ॉर्म पर हादसा दर्ज करती है; अस्पताल NHA के TMS 2.0 पर इलाज और क्लेम दर्ज करता है।
- 112 पर कॉल करें। सरकार के अनुसार योजना को 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से जोड़ा गया है; ऑपरेटर नज़दीकी नामित अस्पताल बताता है और ज़रूरत हो तो एम्बुलेंस भेजता है।
- घायल को नामित अस्पताल ले जाएँ। “गोल्डन ऑवर” (पहला घंटा) सबसे क़ीमती होता है।
- पुलिस रिपोर्टिंग: पुलिस eDAR प्लेटफ़ॉर्म पर हादसा दर्ज करती है; अस्पताल NHA के TMS 2.0 पर इलाज और क्लेम दर्ज करता है।
- अस्पताल से पैसे न देने की बात करें: योजना की सीमा तक इलाज कैशलेस होना चाहिए।
मदद करने वाले को डर नहीं
सवालमदद करने वाले को डर क्यों नहीं होना चाहिए?
जवाब: घायल को अस्पताल पहुँचाने वाले "नेक मददगार" (Good Samaritan) को क़ानूनी सुरक्षा है: उनसे ज़बरदस्ती पहचान या पैसे नहीं माँगे जा सकते। सरकार की राह-वीर योजना में ऐसे मददगार को ₹25,000 का इनाम भी है।
हिट एंड रन पीड़ितों के लिए अलग योजना
हिट एंड रन मामलों में अलग मुआवज़ा योजना (1 अप्रैल 2022 से) लागू है: मौत पर ₹2 लाख और गंभीर चोट पर ₹50,000।
मुआवज़े और बीमा क्लेम के लिए ज़रूरी काग़ज़
सवालहादसे के बाद मुआवज़े या बीमा क्लेम के लिए कौन-से काग़ज़ चाहिए?
जवाब: हादसे के बाद परिवार सदमे में होता है और काग़ज़ों पर ध्यान नहीं जाता। लेकिन यही काग़ज़ आगे इलाज के ख़र्च, बीमा क्लेम या मुआवज़े में काम आते हैं। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत घायल व्यक्ति, गाड़ी/संपत्ति का मालिक या मृतक के क़ानूनी वारिस मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवज़े का आवेदन कर सकते हैं।
| काग़ज़ | क्यों ज़रूरी |
|---|---|
| FIR / पुलिस रिपोर्ट की कॉपी | हादसे का आधिकारिक रिकॉर्ड |
| अस्पताल की पर्ची, मेडिकल रिपोर्ट, बिल | चोट और ख़र्च का सबूत |
| गाड़ी का नंबर, RC, बीमा पॉलिसी की जानकारी | किस बीमा कंपनी से दावा होगा |
| मौक़े की तस्वीरें, गवाहों के नंबर | हादसा कैसे हुआ, इसका सबूत |
| आय का सबूत (सैलरी स्लिप, ITR आदि) | मुआवज़े की गणना में काम आता है |
| मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र | वारिसों के दावे के लिए |
अपनी गाड़ी के नुकसान पर: बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें, सर्वे से पहले गाड़ी की मरम्मत न कराएँ, और क्लेम नंबर लिख लें। किसी बिचौलिए को काग़ज़ या पैसे देने से पहले सोचें; सीधे बीमा कंपनी या वकील से बात करना सुरक्षित है।
निकलने से पहले गाड़ी की 5 मिनट की जाँच
कई हादसे गाड़ी की छोटी-सी ख़राबी से शुरू होते हैं, जिसे निकलने से पहले पकड़ा जा सकता था। यह जाँच सूची किसी भी कार, बाइक या छोटे व्यावसायिक वाहन के लिए काम की है:
| क्या देखें | कैसे |
|---|---|
| टायर | हवा का दबाव कंपनी की बताई मात्रा के अनुसार; घिसाव, कट या उभार तो नहीं |
| ब्रेक | पैडल ढीला या आवाज़ तो नहीं; बाइक में आगे-पीछे दोनों ब्रेक |
| लाइट और इंडिकेटर | हेडलाइट (लो/हाई), ब्रेक लाइट, इंडिकेटर, पीछे के रिफ़्लेक्टर |
| वाइपर और शीशे | वाइपर ठीक चले, शीशे और मिरर साफ़ हों |
| तरल पदार्थ | इंजन ऑयल, कूलेंट, ब्रेक ऑयल का स्तर |
| काग़ज़ | ड्राइविंग लाइसेंस, RC, बीमा और PUC |
गाड़ी में ये चीज़ें रखें: फ़र्स्ट-एड किट, टॉर्च, चेतावनी तिकोन, पानी, चार्ज किया फ़ोन और परिवार/इमरजेंसी के नंबर।
ख़ुद की जाँच भी: नींद पूरी हो, शराब या नींद लाने वाली दवा न ली हो, और रास्ता पहले से देख लिया हो। परिवार को बता दें कि आप कब निकले और कब तक पहुँचने का अंदाज़ा है।
गाड़ी का बीमा: कौन-सा ज़रूरी, कौन-सा समझदारी
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत सार्वजनिक जगह पर कोई भी गाड़ी चलाने के लिए कम से कम थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है। यह बीमा उन लोगों के नुक़सान के लिए है जिन्हें आपकी गाड़ी से चोट या नुक़सान पहुँचे। 2019 संशोधन के बाद बिना बीमा गाड़ी चलाने पर पहली बार ₹2,000 जुर्माने का प्रावधान किया गया (राज्यों में कंपाउंडिंग की रक़म अलग हो सकती है)।
| बीमा का प्रकार | किसका नुक़सान कवर | ज़रूरी? |
|---|---|---|
| थर्ड-पार्टी | दूसरों को चोट, मौत या संपत्ति का नुक़सान | हाँ, क़ानूनन |
| ओन डैमेज / कॉम्प्रिहेंसिव | आपकी अपनी गाड़ी का नुक़सान (हादसा, आग, चोरी आदि, पॉलिसी के अनुसार) | नहीं, लेकिन समझदारी |
| पर्सनल एक्सीडेंट कवर | चालक/मालिक को चोट या मृत्यु | पॉलिसी के अनुसार |
ध्यान रखने की बातें:
- पॉलिसी की तारीख़ याद रखें; एक दिन की देरी में हुआ हादसा भारी पड़ सकता है।
- CNG किट या कोई बड़ा बदलाव हो, तो बीमा कंपनी को बताएँ।
- पॉलिसी में “Exclusions” (किन हालात में क्लेम नहीं मिलेगा) एक बार ज़रूर पढ़ें।
- हादसे या खड़ी गाड़ी को नुक़सान होने पर तुरंत बीमा कंपनी को सूचना दें और तस्वीरें लें।

निष्कर्ष
PM-RAHAT का संदेश साफ़ है: पैसे की कमी से किसी घायल की जान नहीं जानी चाहिए। हादसा दिखे तो 112 पर कॉल करें और घायल को अस्पताल पहुँचाएँ। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड Help in an Emergency Situations भी पढ़ सकते हैं।
घायल के परिवार तक जल्दी ख़बर पहुँचना भी उतना ही ज़रूरी है। गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए: मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 14 फ़रवरी 2026
स्रोत (Sources)
- PIB (PMO), PM RAHAT योजना की मंज़ूरी (13 फ़रवरी 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2227542
- PIB (MoRTH), “Cashless Treatment to Road Accident Victims” (29 जनवरी 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2220125
- MoRTH, कैशलेस इलाज योजना अधिसूचना S.O. 2015(E): https://morth.nic.in/hi/node/23038
- National Health Authority: https://nha.gov.in/
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988, धारा 166 (मुआवज़े के लिए आवेदन): https://indiacode.ecourtsindia.com/mv-act/section/166/
- MoRTH, सड़क सुरक्षा: https://morth.gov.in/road-safety
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (धारा 146) (India Code): https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
- PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या इलाज के लिए बीमा या आयुष्मान कार्ड ज़रूरी है?
नहीं, यह किसी भी सड़क हादसा पीड़ित के लिए है।
2. ₹1.5 लाख से ज़्यादा ख़र्च हो तो?
योजना की सीमा ₹1.5 लाख और 7 दिन है; उससे आगे का ख़र्च दूसरी योजनाओं/बीमा से देखना पड़ सकता है।
3. नामित अस्पताल कैसे पता करें?
112 पर कॉल करें; PM-JAY सूचीबद्ध अस्पताल भी नामित माने जाते हैं।
4. हाईवे पर मुसीबत में किस नंबर पर कॉल करें?
NHAI की हेल्पलाइन 1033 पर, और किसी भी आपात स्थिति में 112 पर।
5. सड़क हादसे में मुआवज़े का दावा कहाँ होता है?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में; दावा जितनी जल्दी हो सके करना बेहतर है और FIR, मेडिकल काग़ज़ व वाहन/बीमा की जानकारी संभालकर रखनी चाहिए।



