सीधा जवाब: मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 185 के अनुसार, अगर ब्रेथ एनालाइज़र (या दूसरी जाँच) में आपके ख़ून में 30 mg प्रति 100 ml से ज़्यादा अल्कोहल पाया जाता है, तो गाड़ी चलाना अपराध है। 2019 के संशोधन के बाद पहली बार में 6 महीने तक जेल और/या ₹10,000 तक जुर्माना, और तीन साल के भीतर दोबारा पकड़े जाने पर 2 साल तक जेल और/या ₹15,000 तक जुर्माना हो सकता है। शरीर, वज़न, खाना और समय के हिसाब से “बस एक-दो पेग” भी इस सीमा को पार करा सकते हैं, इसलिए सबसे सुरक्षित नियम है: पी है तो गाड़ी नहीं।
30mg/100ml का मतलब क्या है?
सवाल30mg/100ml सीमा का क्या मतलब है?
जवाब: यह ब्लड अल्कोहल कंसंट्रेशन (BAC) है: 100 मिलीलीटर ख़ून में 30 मिलीग्राम अल्कोहल, यानी 0.03%।; ब्रेथ एनालाइज़र साँस में अल्कोहल नापकर ख़ून में उसकी मात्रा का अंदाज़ा देता है।; धारा 185 नशीले पदार्थों (drugs) के प्रभाव में ड्राइविंग को भी अपराध मानती है।।
- यह ब्लड अल्कोहल कंसंट्रेशन (BAC) है: 100 मिलीलीटर ख़ून में 30 मिलीग्राम अल्कोहल, यानी 0.03%।
- ब्रेथ एनालाइज़र साँस में अल्कोहल नापकर ख़ून में उसकी मात्रा का अंदाज़ा देता है।
- धारा 185 नशीले पदार्थों (drugs) के प्रभाव में ड्राइविंग को भी अपराध मानती है।
“मैंने तो बस थोड़ी-सी पी थी” क्यों काम नहीं करता
सवालक्या एक-दो पेग के बाद गाड़ी चलाना सुरक्षित है?
जवाब: एक ही मात्रा का असर अलग-अलग लोगों पर अलग होता है: शरीर का वज़न: कम वज़न में BAC ज़्यादा बढ़ता है; ख़ाली पेट: अल्कोहल जल्दी ख़ून में पहुँचता है; ड्रिंक की ताक़त: बीयर, वाइन, स्पिरिट में अल्कोहल अलग-अलग; समय: शरीर धीरे-धीरे अल्कोहल घटाता है; "एक घंटे बाद ठीक" ज़रूरी नहीं; दवाएँ, थकान: असर बढ़ा सकती हैं
| असर डालने वाली चीज़ | कैसे |
|---|---|
| शरीर का वज़न | कम वज़न में BAC ज़्यादा बढ़ता है |
| ख़ाली पेट | अल्कोहल जल्दी ख़ून में पहुँचता है |
| ड्रिंक की ताक़त | बीयर, वाइन, स्पिरिट में अल्कोहल अलग-अलग |
| समय | शरीर धीरे-धीरे अल्कोहल घटाता है; “एक घंटे बाद ठीक” ज़रूरी नहीं |
| दवाएँ, थकान | असर बढ़ा सकती हैं |
इसलिए कोई “सुरक्षित पेग गिनती” नहीं है जिसकी गारंटी दी जा सके।

सज़ा एक नज़र में (धारा 185)
| स्थिति | सज़ा |
|---|---|
| पहली बार | 6 महीने तक जेल और/या ₹10,000 तक जुर्माना |
| 3 साल के भीतर दोबारा | 2 साल तक जेल और/या ₹15,000 तक जुर्माना |
इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित हो सकता है। गंभीर मामले आम तौर पर अदालत में जाते हैं और लोक अदालत के सामान्य निपटारे से बाहर रखे जाते हैं।
टेस्ट के दौरान क्या ध्यान रखें
सवालब्रेथ एनालाइज़र टेस्ट के दौरान क्या ध्यान रखें?
जवाब: पुलिस से विनम्रता से पेश आएँ और प्रक्रिया में सहयोग करें।; मोटर वाहन अधिनियम में पुलिस को साँस की जाँच और ज़रूरत पड़ने पर मेडिकल/लैब जाँच करवाने के अधिकार दिए गए हैं; जाँच से बचने की कोशिश आपके पक्ष में नहीं जाती।; चालान/रिपोर्ट की कॉपी लें और उसमें लिखी बातें पढ़ें।।
- पुलिस से विनम्रता से पेश आएँ और प्रक्रिया में सहयोग करें।
- मोटर वाहन अधिनियम में पुलिस को साँस की जाँच और ज़रूरत पड़ने पर मेडिकल/लैब जाँच करवाने के अधिकार दिए गए हैं; जाँच से बचने की कोशिश आपके पक्ष में नहीं जाती।
- चालान/रिपोर्ट की कॉपी लें और उसमें लिखी बातें पढ़ें।
नशे में गाड़ी न चलाने के आसान विकल्प
- कैब, ऑटो, मेट्रो।
- “डेज़िग्नेटेड ड्राइवर”: समूह में एक व्यक्ति जो बिल्कुल नहीं पिएगा।
- रात वहीं रुक जाना।
- किसी परिचित को बुलाना।
नशे में हादसा और बीमा: जेब पर दोहरी मार
सवालनशे में हादसा हुआ तो बीमा क्लेम पर क्या असर पड़ सकता है?
जवाब: नशे में गाड़ी चलाने की क़ीमत सिर्फ़ जुर्माना या जेल नहीं है; बीमा भी साथ छोड़ सकता है। ज़्यादातर मोटर बीमा पॉलिसियों में शर्त होती है कि चालक शराब या नशीले पदार्थ के असर में हो, तो कंपनी अपनी गाड़ी के नुक़सान (ओन डैमेज) का भुगतान नहीं करेगी।
| स्थिति | अदालतों का रुख़ |
|---|---|
| अपनी गाड़ी का नुक़सान | सुप्रीम कोर्ट (12 अप्रैल 2021, Iffco Tokio बनाम Pearl Beverages): कंपनी को दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था; इसके लिए ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं, FIR, मेडिकल रिपोर्ट और हादसे का तरीका भी सबूत बन सकते हैं |
| थर्ड-पार्टी पीड़ित | सुप्रीम कोर्ट (8 अगस्त 2018, Shamanna बनाम Oriental Insurance): पॉलिसी शर्त टूटने पर भी कंपनी पहले पीड़ित को भुगतान करे और फिर गाड़ी मालिक से वसूल सकती है (“पे एंड रिकवर”); यह मामला बिना वैध लाइसेंस का था |
2021 के फ़ैसले में अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ़ थोड़ी-सी शराब की मौजूदगी अपने आप में काफ़ी नहीं; यह दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था और इसने हादसे में योगदान दिया। हर मामले का फ़ैसला उसके तथ्यों और पॉलिसी की शर्तों पर होता है।
परिवार के लिए मतलब: गाड़ी की मरम्मत अपनी जेब से, थर्ड-पार्टी मुआवज़े की वसूली का ख़तरा, और ऊपर से धारा 185 की सज़ा। सबसे सस्ता बीमा यही है: पी है, तो गाड़ी नहीं।
आम ट्रैफ़िक नियम और जुर्माने: एक नज़र में
सवालआम ट्रैफ़िक नियम तोड़ने पर कितना जुर्माना लगता है?
जवाब: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के 63 प्रावधान 1 सितंबर 2019 से लागू हुए, जिनमें कई जुर्माने पहले से कई गुना बढ़ाए गए। नीचे केंद्रीय क़ानून में तय कुछ आम उल्लंघनों के जुर्माने हैं। ध्यान रहे, कई राज्य कुछ अपराधों में अपनी कंपाउंडिंग (मौक़े पर भुगतान) दरें तय करते हैं, इसलिए आपके राज्य में रक़म अलग हो सकती है।
| उल्लंघन (धारा) | 2019 संशोधन के बाद |
|---|---|
| सामान्य उल्लंघन (177) | ₹500 |
| ओवरस्पीडिंग, हल्का मोटर वाहन (183) | ₹1,000 |
| ख़तरनाक ड्राइविंग (184) | ₹5,000 तक |
| नशे में ड्राइविंग (185) | ₹10,000 तक (पहली बार) |
| बिना सीटबेल्ट (194B) | ₹1,000 |
| दोपहिया पर ओवरलोडिंग/तीन सवारी (194C) | ₹2,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| बिना हेलमेट (194D) | ₹1,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| एम्बुलेंस/आपात वाहन को रास्ता न देना (194E) | ₹10,000 |
| बिना बीमा (196) | ₹2,000 |
ध्यान रखें: जुर्माना सिर्फ़ सज़ा नहीं, चेतावनी है। हेलमेट, सीटबेल्ट और तय रफ़्तार, ये तीन आदतें ज़्यादातर चालानों और कई जानलेवा हादसों से बचा सकती हैं। चालान मिलने पर उसे आधिकारिक e-Challan पोर्टल पर ही जाँचें और भरें।

निष्कर्ष
30mg/100ml कोई “लक्ष्य” नहीं, एक क़ानूनी सीमा है। सबसे आसान नियम: पी है तो चाबी किसी और को दें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड NEW MOTOR VEHICLE ACT भी पढ़ सकते हैं।
किसी अनहोनी में परिवार तक जल्दी सूचना पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए। मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 8 मई 2026
स्रोत (Sources)
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (धारा 185) (India Code): https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 (गज़ट): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
- सड़क दुर्घटना रिपोर्ट 2022 (MoRTH): https://morth.gov.in/backend/documents/uploaded/1755600426_RA_2022_30_Oct.pdf
- सुप्रीम कोर्ट, Iffco Tokio General Insurance Co. Ltd. बनाम Pearl Beverages Ltd., 12 अप्रैल 2021 (Indian Kanoon): https://indiankanoon.org/doc/25720691/
- सुप्रीम कोर्ट, Shamanna बनाम Divisional Manager, Oriental Insurance Co. Ltd., 8 अगस्त 2018 (LawSathi): https://research.lawsathi.in/supreme-court/2018/shamanna-another-divisional-manager-oriental-insurance-co-ltd/
- The Indian Express, “New traffic fines take effect from today: Rs 1,000 for no helmet, Rs 10,000 for drunken driving” (1 सितंबर 2019): https://indianexpress.com/article/india/new-traffic-fines-list-motor-vehicles-act-2019-5955543/
- PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या एक बीयर के बाद गाड़ी चला सकते हैं?
कोई गारंटी नहीं कि आप सीमा के भीतर होंगे। सबसे सुरक्षित है: पीने के बाद गाड़ी नहीं।
2. दोपहिया पर भी यही नियम है?
हाँ, सभी मोटर वाहनों पर।
3. नशे में ड्राइविंग का चालान ऑनलाइन भर सकते हैं?
धारा 185 के मामले आम तौर पर अदालत जाते हैं; अपने राज्य की प्रक्रिया देखें।
4. नशे में हादसा होने पर अपनी गाड़ी का क्लेम मिलेगा?
पॉलिसी की शर्त के आधार पर ओन डैमेज क्लेम ख़ारिज हो सकता है; सुप्रीम कोर्ट (2021) के अनुसार बीमा कंपनी FIR और मेडिकल रिपोर्ट जैसे सबूतों से भी नशा साबित कर सकती है, ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं।
5. बिना हेलमेट बाइक चलाने पर क्या जुर्माना है?
मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के बाद धारा 194D के तहत ₹1,000 जुर्माना और 3 महीने के लिए लाइसेंस अयोग्यता का प्रावधान है (राज्यों की कंपाउंडिंग दरें अलग हो सकती हैं)।


