सीधा जवाब: 31 दिसंबर 2025 की रात दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शराब पीकर गाड़ी चलाने के 868 चालान काटे। हैदराबाद और उसके उपनगरों (हैदराबाद, साइबराबाद और राचकोंडा कमिश्नरेट) में कुल 2,731 मोटर चालक नशे में ड्राइविंग करते पकड़े गए, जो पिछले साल के 2,873 से करीब 5% कम है। हैदराबाद के आंकड़ों में सबसे ज़्यादा मामले दोपहिया चालकों के थे।
दिल्ली: 868 चालान
सवालनए साल पर दिल्ली में कितने चालान हुए?
जवाब: The Hindu (PTI) के अनुसार: विशेष टीमें मुख्य सड़कों, नाइटलाइफ़ वाले इलाकों और रिहायशी क्षेत्रों में तैनात रहीं।; पूरी रात कई चेकपॉइंट पर ब्रेथ एनालाइज़र से जाँच हुई, और टीमें जगह बदलती रहीं ताकि लोग जाँच से बच न सकें।; कानून-व्यवस्था के लिए दिल्ली पुलिस ने 20,000 कर्मियों को लगाया; कनॉट प्लेस, हौज़ ख़ास और एयरोसिटी पर ख़ास ध्यान रहा।।
- विशेष टीमें मुख्य सड़कों, नाइटलाइफ़ वाले इलाकों और रिहायशी क्षेत्रों में तैनात रहीं।
- पूरी रात कई चेकपॉइंट पर ब्रेथ एनालाइज़र से जाँच हुई, और टीमें जगह बदलती रहीं ताकि लोग जाँच से बच न सकें।
- कानून-व्यवस्था के लिए दिल्ली पुलिस ने 20,000 कर्मियों को लगाया; कनॉट प्लेस, हौज़ ख़ास और एयरोसिटी पर ख़ास ध्यान रहा।
हैदराबाद: 2,731 केस, कहाँ कितने?
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार:
| कमिश्नरेट | ड्रिंक-ड्राइव केस |
|---|---|
| हैदराबाद | 1,198 (2024 में 1,415) |
| साइबराबाद | 928 |
| राचकोंडा (पूर्व) | 605 |
| कुल | 2,731 (पिछले साल 2,873) |

आंकड़े क्या बताते हैं?
सवालये आंकड़े क्या बताते हैं?
जवाब: दोपहिया सबसे आगे: साइबराबाद में 928 में से 695 मामले दोपहिया के थे, 199 चार पहिया, 31 तिपहिया और 3 भारी वाहन। राचकोंडा में 605 में से 511 दोपहिया चालक थे।; युवा उम्र: राचकोंडा में सबसे ज़्यादा पकड़े गए लोग 21–30 (255) और 31–40 (181) आयु वर्ग के थे।
- दोपहिया सबसे आगे: साइबराबाद में 928 में से 695 मामले दोपहिया के थे, 199 चार पहिया, 31 तिपहिया और 3 भारी वाहन। राचकोंडा में 605 में से 511 दोपहिया चालक थे।
- युवा उम्र: राचकोंडा में सबसे ज़्यादा पकड़े गए लोग 21–30 (255) और 31–40 (181) आयु वर्ग के थे।
- सीमा से कई गुना: क़ानूनी सीमा 30 mg/100 ml है, जबकि राचकोंडा में ज़्यादातर मामले 51–100 mg (262) और 101–150 mg (141) की रेंज में थे। साइबराबाद में 419 लोगों का स्तर 100 mg से ऊपर था।
- लाइसेंस पर असर: साइबराबाद पुलिस के अनुसार सभी आरोपियों के ड्राइविंग लाइसेंस ज़ब्त करके निलंबन के लिए RTA को भेजे जाएँगे।
दोपहिया चालकों का सबसे ज़्यादा पकड़ा जाना चिंता की बात है, क्योंकि नशे में संतुलन बिगड़ने पर दोपहिया पर चोट सबसे गंभीर होती है।
क़ानून क्या कहता है?
सवालनशे में ड्राइविंग पर क़ानून क्या कहता है?
जवाब: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत पहली बार ₹10,000 तक जुर्माना और/या 6 महीने तक जेल, और 3 साल के अंदर दोबारा पकड़े जाने पर ₹15,000 तक जुर्माना और/या 2 साल तक जेल का प्रावधान है।
जश्न के बाद सुरक्षित घर कैसे पहुँचें?
सवालजश्न के बाद सुरक्षित घर कैसे पहुँचें?
जवाब: पहले से योजना: पार्टी में जाने से पहले तय करें कि घर कैसे लौटेंगे।; डेज़िग्नेटेड ड्राइवर: समूह में एक व्यक्ति न पिए।; कैब/ऑटो: ऐप वाली कैब या भरोसेमंद ऑटो लें।; रुक जाएँ: ज़रूरत हो तो दोस्त के घर रुकें।; दोस्त को रोकें: कोई नशे में बाइक या कार चलाने की ज़िद करे, तो चाबी ले लें।।
- पहले से योजना: पार्टी में जाने से पहले तय करें कि घर कैसे लौटेंगे।
- डेज़िग्नेटेड ड्राइवर: समूह में एक व्यक्ति न पिए।
- कैब/ऑटो: ऐप वाली कैब या भरोसेमंद ऑटो लें।
- रुक जाएँ: ज़रूरत हो तो दोस्त के घर रुकें।
- दोस्त को रोकें: कोई नशे में बाइक या कार चलाने की ज़िद करे, तो चाबी ले लें।
नशे में हादसा और बीमा: जेब पर दोहरी मार
सवालनशे में हादसा हुआ तो बीमा क्लेम पर क्या असर पड़ सकता है?
जवाब: नशे में गाड़ी चलाने की क़ीमत सिर्फ़ जुर्माना या जेल नहीं है; बीमा भी साथ छोड़ सकता है। ज़्यादातर मोटर बीमा पॉलिसियों में शर्त होती है कि चालक शराब या नशीले पदार्थ के असर में हो, तो कंपनी अपनी गाड़ी के नुक़सान (ओन डैमेज) का भुगतान नहीं करेगी।
| स्थिति | अदालतों का रुख़ |
|---|---|
| अपनी गाड़ी का नुक़सान | सुप्रीम कोर्ट (12 अप्रैल 2021, Iffco Tokio बनाम Pearl Beverages): कंपनी को दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था; इसके लिए ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं, FIR, मेडिकल रिपोर्ट और हादसे का तरीका भी सबूत बन सकते हैं |
| थर्ड-पार्टी पीड़ित | सुप्रीम कोर्ट (8 अगस्त 2018, Shamanna बनाम Oriental Insurance): पॉलिसी शर्त टूटने पर भी कंपनी पहले पीड़ित को भुगतान करे और फिर गाड़ी मालिक से वसूल सकती है (“पे एंड रिकवर”); यह मामला बिना वैध लाइसेंस का था |
2021 के फ़ैसले में अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ़ थोड़ी-सी शराब की मौजूदगी अपने आप में काफ़ी नहीं; यह दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था और इसने हादसे में योगदान दिया। हर मामले का फ़ैसला उसके तथ्यों और पॉलिसी की शर्तों पर होता है।
परिवार के लिए मतलब: गाड़ी की मरम्मत अपनी जेब से, थर्ड-पार्टी मुआवज़े की वसूली का ख़तरा, और ऊपर से धारा 185 की सज़ा। सबसे सस्ता बीमा यही है: पी है, तो गाड़ी नहीं।
आम ट्रैफ़िक नियम और जुर्माने: एक नज़र में
मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के 63 प्रावधान 1 सितंबर 2019 से लागू हुए, जिनमें कई जुर्माने पहले से कई गुना बढ़ाए गए। नीचे केंद्रीय क़ानून में तय कुछ आम उल्लंघनों के जुर्माने हैं। ध्यान रहे, कई राज्य कुछ अपराधों में अपनी कंपाउंडिंग (मौक़े पर भुगतान) दरें तय करते हैं, इसलिए आपके राज्य में रक़म अलग हो सकती है।
| उल्लंघन (धारा) | 2019 संशोधन के बाद |
|---|---|
| सामान्य उल्लंघन (177) | ₹500 |
| ओवरस्पीडिंग, हल्का मोटर वाहन (183) | ₹1,000 |
| ख़तरनाक ड्राइविंग (184) | ₹5,000 तक |
| नशे में ड्राइविंग (185) | ₹10,000 तक (पहली बार) |
| बिना सीटबेल्ट (194B) | ₹1,000 |
| दोपहिया पर ओवरलोडिंग/तीन सवारी (194C) | ₹2,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| बिना हेलमेट (194D) | ₹1,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| एम्बुलेंस/आपात वाहन को रास्ता न देना (194E) | ₹10,000 |
| बिना बीमा (196) | ₹2,000 |
ध्यान रखें: जुर्माना सिर्फ़ सज़ा नहीं, चेतावनी है। हेलमेट, सीटबेल्ट और तय रफ़्तार, ये तीन आदतें ज़्यादातर चालानों और कई जानलेवा हादसों से बचा सकती हैं। चालान मिलने पर उसे आधिकारिक e-Challan पोर्टल पर ही जाँचें और भरें।
वर्चुअल कोर्ट में चालान: भुगतान या चुनौती
जो ई-चालान तय समय में नहीं भरे जाते या जिन्हें विभाग कोर्ट भेज देता है, वे कई राज्यों में “वर्चुअल कोर्ट” पहुँच जाते हैं। यहाँ ऑनलाइन ही केस देखा जा सकता है, और आप तय कर सकते हैं कि जुर्माना भरना है या चालान को चुनौती देनी है।
वर्चुअल कोर्ट के आधिकारिक FAQ के अनुसार तरीका:
- vcourts.gov.in पर जाएँ और अपना राज्य/विभाग चुनें।
- मोबाइल नंबर, CNR नंबर, पार्टी का नाम या चालान/वाहन नंबर से केस खोजें।
- केस के सामने “View” पर क्लिक करके पूरा चालान देखें।
- भुगतान करना हो तो वहीं दिखाई गई राशि ऑनलाइन भरें और रसीद सेव करें।
- चुनौती देनी हो तो “I wish to contest the case” चुनें। OTP से सत्यापन होता है; मोबाइल नंबर ग़लत हो तो चेसिस या इंजन नंबर के आख़िरी 4 अंक से सत्यापन का विकल्प है।
| फ़ैसला | आगे क्या होगा |
|---|---|
| जुर्माना भरा | रसीद मिलेगी, केस निपट जाएगा |
| चुनौती चुनी | केस नियमित कोर्ट में जाएगा, ऑनलाइन भुगतान का विकल्प बंद हो जाएगा |
| कुछ नहीं किया | केस लंबित रहेगा; बाद में दिक़्क़त बढ़ सकती है |
सावधानी: चुनौती तभी चुनें जब आपके पास मज़बूत सबूत हों (जैसे उस समय कहीं और होने का सबूत, या गाड़ी पहले ही बिक चुकी हो)। सुनवाई की तारीख़ और कोर्ट का नाम स्क्रीन पर दिखता है; उसे सेव कर लें और तारीख़ पर ज़रूर पेश हों।

निष्कर्ष
आंकड़ों में थोड़ी कमी अच्छा संकेत है, लेकिन एक रात में हज़ारों लोगों का नशे में गाड़ी चलाना बताता है कि जागरूकता अभी भी ज़रूरी है। नए साल का सबसे अच्छा संकल्प: पी है तो गाड़ी नहीं। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड NEW MOTOR VEHICLE ACT भी पढ़ सकते हैं।
मुश्किल घड़ी में परिवार तक जल्दी पहुँचना ज़रूरी होता है। गाड़ी पर लगा Rakshak Code QR मदद करने वाले को आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँचने देता है, आपका नंबर दिखाए बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 2 जनवरी 2026
स्रोत (Sources)
- The Hindu (PTI), “868 drunken driving challans issued on New Year’s Eve in Delhi”, 1 जनवरी 2026: https://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/868-drunken-driving-challans-issued-on-new-years-eve-in-delhi/article70459413.ece
- The Hindu, “Over 2,730 motorists booked for drunk driving across Hyderabad on New Year’s Eve”, 1 जनवरी 2026: https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/over-2730-motorists-booked-for-drunk-driving-across-hyderabad-on-new-years-eve/article70459410.ece
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019, भारत का राजपत्र: https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
- सुप्रीम कोर्ट, Iffco Tokio General Insurance Co. Ltd. बनाम Pearl Beverages Ltd., 12 अप्रैल 2021 (Indian Kanoon): https://indiankanoon.org/doc/25720691/
- सुप्रीम कोर्ट, Shamanna बनाम Divisional Manager, Oriental Insurance Co. Ltd., 8 अगस्त 2018 (LawSathi): https://research.lawsathi.in/supreme-court/2018/shamanna-another-divisional-manager-oriental-insurance-co-ltd/
- The Indian Express, “New traffic fines take effect from today: Rs 1,000 for no helmet, Rs 10,000 for drunken driving” (1 सितंबर 2019): https://indianexpress.com/article/india/new-traffic-fines-list-motor-vehicles-act-2019-5955543/
- PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
- Virtual Courts, FAQ: https://vcourts.gov.in/virtualcourt/faq.php
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. दिल्ली में न्यू ईयर ईव पर कितने ड्रिंक-ड्राइव चालान कटे?
868, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार।
2. हैदराबाद में मामले बढ़े या घटे?
कुल मामले 2,873 से घटकर 2,731 हुए, यानी करीब 5% कमी।
3. सबसे ज़्यादा कौन पकड़े गए?
हैदराबाद क्षेत्र के आंकड़ों में दोपहिया चालक, और 21–40 साल के लोग।
4. सफ़र से पहले गाड़ी में क्या-क्या जाँचें?
टायर (हवा और घिसाव), ब्रेक, लाइट, इंडिकेटर, वाइपर और हॉर्न जाँचें, और ड्राइविंग लाइसेंस, RC, बीमा और PUC साथ रखें।
5. नशे में हादसा होने पर अपनी गाड़ी का क्लेम मिलेगा?
पॉलिसी की शर्त के आधार पर ओन डैमेज क्लेम ख़ारिज हो सकता है; सुप्रीम कोर्ट (2021) के अनुसार बीमा कंपनी FIR और मेडिकल रिपोर्ट जैसे सबूतों से भी नशा साबित कर सकती है, ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं।



