सीधा जवाब: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 127 के तहत सार्वजनिक जगह पर बेवजह या रास्ता रोकती खड़ी गाड़ी को अधिकृत अधिकारी टो करवा सकते हैं, और मालिक को टोइंग का ख़र्च देना होता है। ग़लत पार्किंग पर अलग से चालान भी कटता है (जैसे धारा 122/177A के उल्लंघन पर)। गाड़ी टो हो जाए तो घबराएँ नहीं: नज़दीकी ट्रैफिक सर्कल/पिट की जानकारी 112 या ट्रैफिक हेल्पलाइन से लें, DL, RC और पहचान पत्र लेकर जाएँ, चालान और टोइंग चार्ज भरें और रसीद लें। टोइंग में नुकसान हो तो फ़ोटो लें और लिखित शिकायत करें।
टोइंग कब हो सकती है?
सवालगाड़ी कब टो की जा सकती है?
जवाब: नो-पार्किंग बोर्ड वाली जगह पर।; चौराहे, बस स्टॉप, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, फ़ुटपाथ या फायर हाइड्रेंट के पास।; किसी के गेट/ड्राइववे के सामने या सड़क पर रास्ता रोकते हुए।; लंबे समय से लावारिस खड़ी गाड़ी (धारा 127 में अलग-अलग स्थितियाँ दी गई हैं)।।
- नो-पार्किंग बोर्ड वाली जगह पर।
- चौराहे, बस स्टॉप, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, फ़ुटपाथ या फायर हाइड्रेंट के पास।
- किसी के गेट/ड्राइववे के सामने या सड़क पर रास्ता रोकते हुए।
- लंबे समय से लावारिस खड़ी गाड़ी (धारा 127 में अलग-अलग स्थितियाँ दी गई हैं)।
जुर्माना और ख़र्च
सवालटोइंग पर कितना जुर्माना और ख़र्च लगता है?
जवाब: ग़लत पार्किंग का चालान: MV Act और राज्य की अधिसूचित दर के अनुसार; टोइंग चार्ज: धारा 127 के तहत मालिक से वसूली; राशि राज्य/शहर तय करते हैं; देर से छुड़ाने पर: कई शहरों में स्टोरेज/पार्किंग शुल्क चूँकि दरें राज्य और शहर के अनुसार अलग-अलग हैं, अपने शहर की ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट पर ताज़ा दर देखें।
| मद | क्या लगता है |
|---|---|
| ग़लत पार्किंग का चालान | MV Act और राज्य की अधिसूचित दर के अनुसार |
| टोइंग चार्ज | धारा 127 के तहत मालिक से वसूली; राशि राज्य/शहर तय करते हैं |
| देर से छुड़ाने पर | कई शहरों में स्टोरेज/पार्किंग शुल्क |

गाड़ी वापस कैसे लें: क़दम-दर-क़दम
सवालटो हुई गाड़ी वापस कैसे लें?
जवाब: पता करें गाड़ी कहाँ गई: मौके पर लिखा/चॉक का निशान, पास के ट्रैफिक पुलिस बूथ, 112 या शहर की ट्रैफिक हेल्पलाइन से।; दस्तावेज़ साथ लें: DL, RC (या उसकी डिजिटल कॉपी DigiLocker/mParivahan में), पहचान पत्र।; चालान और टोइंग चार्ज भरें: ऑनलाइन या मौके पर; हमेशा रसीद लें।; गाड़ी की जाँच करें: छोड़ने से पहले चारों तरफ़ देख लें, नुकसान हो तो वहीं दर्ज कराएँ।।
- पता करें गाड़ी कहाँ गई: मौके पर लिखा/चॉक का निशान, पास के ट्रैफिक पुलिस बूथ, 112 या शहर की ट्रैफिक हेल्पलाइन से।
- दस्तावेज़ साथ लें: DL, RC (या उसकी डिजिटल कॉपी DigiLocker/mParivahan में), पहचान पत्र।
- चालान और टोइंग चार्ज भरें: ऑनलाइन या मौके पर; हमेशा रसीद लें।
- गाड़ी की जाँच करें: छोड़ने से पहले चारों तरफ़ देख लें, नुकसान हो तो वहीं दर्ज कराएँ।
टोइंग में नुकसान हो तो
सवालटोइंग में गाड़ी को नुकसान हो तो क्या करें?
जवाब: मौके पर ही फ़ोटो/वीडियो लें।; टोइंग यार्ड/ट्रैफिक अधिकारी को लिखित शिकायत दें और रिसीविंग लें।; बात न बने तो ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी या शिकायत पोर्टल पर जाएँ।।
- मौके पर ही फ़ोटो/वीडियो लें।
- टोइंग यार्ड/ट्रैफिक अधिकारी को लिखित शिकायत दें और रिसीविंग लें।
- बात न बने तो ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी या शिकायत पोर्टल पर जाएँ।
टोइंग से बचें: आसान आदतें
- बोर्ड पढ़ें: “No Parking”, “Tow Away Zone”।
- पेड पार्किंग में खड़ी करें, भले थोड़ा पैदल चलना पड़े।
- गेट, फ़ुटपाथ और मोड़ पर कभी नहीं।
- थोड़ी देर के लिए भी हो, गाड़ी में संपर्क का साधन छोड़ें ताकि हटाने की ज़रूरत हो तो आपको बुलाया जा सके।
गाड़ी का बीमा: कौन-सा ज़रूरी, कौन-सा समझदारी
सवालगाड़ी का कौन-सा बीमा ज़रूरी है?
जवाब: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत सार्वजनिक जगह पर कोई भी गाड़ी चलाने के लिए कम से कम थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है। यह बीमा उन लोगों के नुक़सान के लिए है जिन्हें आपकी गाड़ी से चोट या नुक़सान पहुँचे। 2019 संशोधन के बाद बिना बीमा गाड़ी चलाने पर पहली बार ₹2,000 जुर्माने का प्रावधान किया गया (राज्यों में कंपाउंडिंग की रक़म अलग हो सकती है)।
| बीमा का प्रकार | किसका नुक़सान कवर | ज़रूरी? |
|---|---|---|
| थर्ड-पार्टी | दूसरों को चोट, मौत या संपत्ति का नुक़सान | हाँ, क़ानूनन |
| ओन डैमेज / कॉम्प्रिहेंसिव | आपकी अपनी गाड़ी का नुक़सान (हादसा, आग, चोरी आदि, पॉलिसी के अनुसार) | नहीं, लेकिन समझदारी |
| पर्सनल एक्सीडेंट कवर | चालक/मालिक को चोट या मृत्यु | पॉलिसी के अनुसार |
ध्यान रखने की बातें:
- पॉलिसी की तारीख़ याद रखें; एक दिन की देरी में हुआ हादसा भारी पड़ सकता है।
- CNG किट या कोई बड़ा बदलाव हो, तो बीमा कंपनी को बताएँ।
- पॉलिसी में “Exclusions” (किन हालात में क्लेम नहीं मिलेगा) एक बार ज़रूर पढ़ें।
- हादसे या खड़ी गाड़ी को नुक़सान होने पर तुरंत बीमा कंपनी को सूचना दें और तस्वीरें लें।
आम ट्रैफ़िक नियम और जुर्माने: एक नज़र में
मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के 63 प्रावधान 1 सितंबर 2019 से लागू हुए, जिनमें कई जुर्माने पहले से कई गुना बढ़ाए गए। नीचे केंद्रीय क़ानून में तय कुछ आम उल्लंघनों के जुर्माने हैं। ध्यान रहे, कई राज्य कुछ अपराधों में अपनी कंपाउंडिंग (मौक़े पर भुगतान) दरें तय करते हैं, इसलिए आपके राज्य में रक़म अलग हो सकती है।
| उल्लंघन (धारा) | 2019 संशोधन के बाद |
|---|---|
| सामान्य उल्लंघन (177) | ₹500 |
| ओवरस्पीडिंग, हल्का मोटर वाहन (183) | ₹1,000 |
| ख़तरनाक ड्राइविंग (184) | ₹5,000 तक |
| नशे में ड्राइविंग (185) | ₹10,000 तक (पहली बार) |
| बिना सीटबेल्ट (194B) | ₹1,000 |
| दोपहिया पर ओवरलोडिंग/तीन सवारी (194C) | ₹2,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| बिना हेलमेट (194D) | ₹1,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| एम्बुलेंस/आपात वाहन को रास्ता न देना (194E) | ₹10,000 |
| बिना बीमा (196) | ₹2,000 |
ध्यान रखें: जुर्माना सिर्फ़ सज़ा नहीं, चेतावनी है। हेलमेट, सीटबेल्ट और तय रफ़्तार, ये तीन आदतें ज़्यादातर चालानों और कई जानलेवा हादसों से बचा सकती हैं। चालान मिलने पर उसे आधिकारिक e-Challan पोर्टल पर ही जाँचें और भरें।
चालान ऑनलाइन कैसे देखें और भरें
आजकल ज़्यादातर चालान कैमरों या पुलिस के हैंडहेल्ड डिवाइस से इलेक्ट्रॉनिक रूप में कटते हैं। अपने चालान की सही स्थिति देखने का सबसे भरोसेमंद तरीका सरकारी e-Challan पोर्टल है।
- ब्राउज़र में ख़ुद echallan.parivahan.gov.in टाइप करें (किसी मैसेज के लिंक से नहीं)।
- चालान की स्थिति देखने वाले विकल्प में गाड़ी नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालें।
- चालान की तारीख़, जगह, उल्लंघन और रक़म जाँचें; जहाँ तस्वीर उपलब्ध हो, वह भी देखें।
- सही लगे तो पोर्टल पर ही ऑनलाइन भुगतान करें और रसीद डाउनलोड करके रखें।
- चालान ग़लत लगे या भुगतान का विकल्प न दिखे, तो वह कोर्ट/वर्चुअल कोर्ट में भेजा गया हो सकता है; इसके लिए अपने राज्य की ट्रैफ़िक पुलिस या वर्चुअल कोर्ट की जानकारी देखें।
| ठगी के संकेत | क्या करें |
|---|---|
| अनजान नंबर से लिंक वाला “चालान” मैसेज | लिंक न खोलें, पोर्टल पर ख़ुद जाँचें |
| APK फ़ाइल डाउनलोड करने को कहा जाए | बिल्कुल डाउनलोड न करें |
| “आज ही भरें वरना गिरफ़्तारी” जैसी धमकी | घबराएँ नहीं, यह दबाव की चाल है |
| पैसे कट गए | तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें |

निष्कर्ष
टोइंग से बचने का सबसे आसान तरीका सही जगह पार्किंग है। और अगर कभी कुछ मिनट रुकना पड़े, तो ऐसा रास्ता रखें जिससे लोग आपको बुला सकें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड PARKING PROBLEM IN INDIA AND THEIR SOLUTION भी पढ़ सकते हैं।
गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए: कोई भी उसे स्कैन करके आपको गाड़ी हटाने की सूचना दे सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 20 मार्च 2026
स्रोत (Sources)
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (धारा 122, 127) (India Code): https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 (गज़ट): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
- दिल्ली ट्रैफिक पुलिस: https://traffic.delhipolice.gov.in/
- Parivahan ई-चालान: https://echallan.parivahan.gov.in/
- PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
- The Indian Express, “New traffic fines take effect from today: Rs 1,000 for no helmet, Rs 10,000 for drunken driving” (1 सितंबर 2019): https://indianexpress.com/article/india/new-traffic-fines-list-motor-vehicles-act-2019-5955543/
- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल: https://cybercrime.gov.in/
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. मैं गाड़ी के पास पहुँच गया और टोइंग चल रही है, तो?
कई शहरों में मौके पर चालान भरकर गाड़ी छुड़ाई जा सकती है; अधिकारी से विनम्रता से बात करें।
2. क्या दोपहिया भी टो हो सकते हैं?
हाँ, नियम सभी मोटर वाहनों पर लागू हैं।
3. टोइंग चार्ज कितना है?
यह राज्य/शहर तय करते हैं; ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट देखें।
4. टोइंग से बचने का सबसे आसान तरीका क्या है?
बोर्ड पढ़कर सही जगह, बेहतर हो तो पेड पार्किंग में गाड़ी खड़ी करें, और गेट, फ़ुटपाथ व मोड़ पर कभी पार्क न करें।
5. क्या थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है?
हाँ। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत सार्वजनिक जगह पर गाड़ी चलाने के लिए कम से कम थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है; बिना बीमा गाड़ी चलाने पर 2019 संशोधन के बाद पहली बार ₹2,000 जुर्माने का प्रावधान है।


