सीधा जवाब: केरल पुलिस ने नशे में गाड़ी चलाने वालों के ख़िलाफ़ राज्यव्यापी स्पेशल ड्राइव में 13 अक्टूबर 2026 से 7 नवंबर 2026 सुबह 7 बजे तक, यानी 26 दिनों में 23,040 लोगों पर केस दर्ज किए। यह अभियान क़ानून-व्यवस्था के ADGP पी. विजयन के निर्देश पर ज़ोन IG, रेंज DIG और ज़िला पुलिस प्रमुखों की निगरानी में चला। सबसे ज़्यादा केस एर्नाकुलम रूरल (2,762) में, फिर कोट्टायम (2,022) और तिरुवनंतपुरम रूरल (1,661) में दर्ज हुए; सबसे कम कासरगोड (304) में। पुलिस ने कहा है कि वाहन जाँच आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी (एशियानेट न्यूज़, केरल कौमुदी)।
स्पेशल ड्राइव में क्या मिला
सवालकेरल पुलिस की नशे में ड्राइविंग स्पेशल ड्राइव में क्या मिला?
जवाब: एशियानेट न्यूज़ के अनुसार पुलिस ने 13 अक्टूबर से 7 नवंबर सुबह 7 बजे तक के आँकड़े जारी किए। केरल पुलिस का कहना है कि नशे में गाड़ी चलाना सड़क हादसों और मौतों का बड़ा कारण है, इसलिए वाहन जाँच सख़्ती से जारी रहेगी। केरल कौमुदी के अनुसार अलग-अलग यूनिटों की यह स्पेशल ड्राइव ADGP पी.
औसतन देखें तो 26 दिनों में 23,040 केस का मतलब है रोज़ क़रीब 886 केस (यह हमारा सीधा हिसाब है)। यानी हर दिन सैकड़ों लोग शराब पीकर गाड़ी चलाते पकड़े गए—और ये सिर्फ़ वही हैं जो जाँच में आए।
ज़िलेवार आंकड़े और पहले चरण से तुलना
सवालकेरल में ज़िलेवार सबसे ज़्यादा और सबसे कम केस कहाँ दर्ज हुए?
जवाब: एर्नाकुलम रूरल: 1,639: 2,762; कोट्टायम: 1,253: 2,022; तिरुवनंतपुरम रूरल: 1,121: 1,661; कासरगोड (सबसे कम): 212: 304; पूरा राज्य: 15,782: 23,040 * साउथ इंडिया पल्स (28 अक्टूबर 2026) — 13 अक्टूबर सुबह 7 बजे से 28 अक्टूबर सुबह 7 बजे तक। ** एशियानेट न्यूज़ और केरल कौमुदी (7–8 नवंबर 2026)।
| पुलिस ज़िला | 13–28 अक्टूबर (15 दिन)* | 13 अक्टूबर–7 नवंबर (26 दिन)** |
|---|---|---|
| एर्नाकुलम रूरल | 1,639 | 2,762 |
| कोट्टायम | 1,253 | 2,022 |
| तिरुवनंतपुरम रूरल | 1,121 | 1,661 |
| कासरगोड (सबसे कम) | 212 | 304 |
| पूरा राज्य | 15,782 | 23,040 |
दोनों आँकड़ों का अंतर देखें तो 28 अक्टूबर से 7 नवंबर के बीच क़रीब 7,258 और केस जुड़े (हमारा हिसाब)। दोनों चरणों में ज़िलों का क्रम एक जैसा रहा—एर्नाकुलम रूरल सबसे ऊपर और कासरगोड सबसे नीचे।
दक्षिण भारत में ऐसी ही सख़्ती का एक और उदाहरण: बेंगलुरु में एक हफ़्ते की स्पेशल ड्राइव में नशे में ड्राइविंग के 617 केस।

नशे में ड्राइविंग से कैसे बचें
सवालपार्टी या समारोह के बाद नशे में ड्राइविंग से कैसे बचें?
जवाब: पहले से तय करें: समारोह या पार्टी में जाने से पहले तय कर लें कि गाड़ी कौन चलाएगा—वह व्यक्ति शराब नहीं पिएगा।; कैब, ऑटो या बस लें: थोड़ा पैसा ख़र्च होगा, पर चालान, जेल और हादसे के जोखिम से बहुत सस्ता है।; "थोड़ी-सी" भी नहीं: ब्रेथ टेस्ट में तय सीमा से ऊपर आते ही केस बनता है; अंदाज़े पर भरोसा न करें।
- पहले से तय करें: समारोह या पार्टी में जाने से पहले तय कर लें कि गाड़ी कौन चलाएगा—वह व्यक्ति शराब नहीं पिएगा।
- कैब, ऑटो या बस लें: थोड़ा पैसा ख़र्च होगा, पर चालान, जेल और हादसे के जोखिम से बहुत सस्ता है।
- “थोड़ी-सी” भी नहीं: ब्रेथ टेस्ट में तय सीमा से ऊपर आते ही केस बनता है; अंदाज़े पर भरोसा न करें।
- दोपहिया पर भी उतना ही ख़तरा: नशे में बाइक/स्कूटी चलाना अपनी और पीछे बैठे की जान जोखिम में डालना है।
- दोस्त को रोकें: किसी ने पी रखी है तो उसकी चाबी लेकर उसे घर छोड़ दें।
शराब पीकर गाड़ी नहीं: घर पहुँचने के सुरक्षित विकल्प
सवालशराब पीने के बाद घर कैसे पहुँचें?
जवाब: धारा 185 के तहत ख़ून में 30 mg प्रति 100 ml से ज़्यादा अल्कोहल के साथ गाड़ी चलाना अपराध है। 2019 संशोधन के बाद पहली बार 6 महीने तक जेल या ₹10,000 तक जुर्माना या दोनों, और 3 साल के भीतर दोबारा पकड़े जाने पर 2 साल तक जेल या ₹15,000 तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। लेकिन असली ख़तरा जुर्माना नहीं, हादसा है।
| विकल्प | कब काम आता है |
|---|---|
| डेज़िग्नेटेड ड्राइवर | ग्रुप में कोई एक व्यक्ति पूरी शाम शराब न पिए और सबको घर छोड़े |
| कैब/ऑटो | शहर में, देर रात भी |
| मेट्रो/बस | आख़िरी सेवा का समय पहले देख लें |
| वहीं रुक जाना | शादी या दूर के समारोह में |
| परिवार को बुलाना | पास में रहते हों |
कुछ ग़लतफ़हमियाँ: कॉफ़ी, ठंडा पानी या खाना खाने से ख़ून में अल्कोहल जल्दी कम नहीं होता; शरीर को समय चाहिए। “बस एक पेग” भी शरीर, वज़न और खाली पेट के हिसाब से सीमा पार करा सकता है। देर रात तक पीने के बाद अगली सुबह भी शरीर में अल्कोहल रह सकता है।
दोस्त ज़िद करे तो: चाबी अपने पास ले लें, कैब बुक कर दें, और उसकी गाड़ी में न ख़ुद बैठें, न दूसरों को बैठने दें।
आम ट्रैफ़िक नियम और जुर्माने: एक नज़र में
सवालआम ट्रैफ़िक नियम तोड़ने पर कितना जुर्माना लगता है?
जवाब: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के 63 प्रावधान 1 सितंबर 2019 से लागू हुए, जिनमें कई जुर्माने पहले से कई गुना बढ़ाए गए। नीचे केंद्रीय क़ानून में तय कुछ आम उल्लंघनों के जुर्माने हैं। ध्यान रहे, कई राज्य कुछ अपराधों में अपनी कंपाउंडिंग (मौक़े पर भुगतान) दरें तय करते हैं, इसलिए आपके राज्य में रक़म अलग हो सकती है।
| उल्लंघन (धारा) | 2019 संशोधन के बाद |
|---|---|
| सामान्य उल्लंघन (177) | ₹500 |
| ओवरस्पीडिंग, हल्का मोटर वाहन (183) | ₹1,000 से ₹2,000 |
| ख़तरनाक ड्राइविंग (184) | ₹5,000 तक |
| नशे में ड्राइविंग (185) | ₹10,000 तक (पहली बार) |
| बिना सीटबेल्ट (194B) | ₹1,000 |
| दोपहिया पर ओवरलोडिंग/तीन सवारी (194C) | ₹1,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| बिना हेलमेट (194D) | ₹1,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| एम्बुलेंस/आपात वाहन को रास्ता न देना (194E) | ₹10,000 |
| बिना बीमा (196) | ₹2,000 |
ध्यान रखें: जुर्माना सिर्फ़ सज़ा नहीं, चेतावनी है। हेलमेट, सीटबेल्ट और तय रफ़्तार, ये तीन आदतें ज़्यादातर चालानों और कई जानलेवा हादसों से बचा सकती हैं। चालान मिलने पर उसे आधिकारिक e-Challan पोर्टल पर ही जाँचें और भरें।
नशे में हादसा और बीमा: जेब पर दोहरी मार
नशे में गाड़ी चलाने की क़ीमत सिर्फ़ जुर्माना या जेल नहीं है; बीमा भी साथ छोड़ सकता है। ज़्यादातर मोटर बीमा पॉलिसियों में शर्त होती है कि चालक शराब या नशीले पदार्थ के असर में हो, तो कंपनी अपनी गाड़ी के नुक़सान (ओन डैमेज) का भुगतान नहीं करेगी।
| स्थिति | अदालतों का रुख़ |
|---|---|
| अपनी गाड़ी का नुक़सान | सुप्रीम कोर्ट (12 अप्रैल 2021, Iffco Tokio बनाम Pearl Beverages): कंपनी को दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था; इसके लिए ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं, FIR, मेडिकल रिपोर्ट और हादसे का तरीका भी सबूत बन सकते हैं |
| थर्ड-पार्टी पीड़ित | सुप्रीम कोर्ट (8 अगस्त 2018, Shamanna बनाम Oriental Insurance): पॉलिसी शर्त टूटने पर भी कंपनी पहले पीड़ित को भुगतान करे और फिर गाड़ी मालिक से वसूल सकती है (“पे एंड रिकवर”); यह मामला बिना वैध लाइसेंस का था |
2021 के फ़ैसले में अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ़ थोड़ी-सी शराब की मौजूदगी अपने आप में काफ़ी नहीं; यह दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था और इसने हादसे में योगदान दिया। हर मामले का फ़ैसला उसके तथ्यों और पॉलिसी की शर्तों पर होता है।
परिवार के लिए मतलब: गाड़ी की मरम्मत अपनी जेब से, थर्ड-पार्टी मुआवज़े की वसूली का ख़तरा, और ऊपर से धारा 185 की सज़ा। सबसे सस्ता बीमा यही है: पी है, तो गाड़ी नहीं।

निष्कर्ष
23,040 केस यह दिखाते हैं कि नशे में गाड़ी चलाना अब भी आम आदत है—और पुलिस इसे गंभीरता से पकड़ रही है। चालान से ज़्यादा ज़रूरी है जान बचाना, इसलिए पीकर गाड़ी बिल्कुल न चलाएँ। हादसा दिखे तो 112 पर कॉल करें और खुद तेज़ ट्रैफ़िक वाली सड़क (कैरिजवे) पर खड़े न हों। अपनी गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाएँ, ताकि स्कैन करने वाला बिना नंबर देखे परिवार से संपर्क कर सके। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड NEW MOTOR VEHICLE ACT भी पढ़ सकते हैं।
आख़िरी अपडेट: 8 नवंबर 2026
स्रोत (Sources)
- Asianet News Malayalam, മദ്യപിച്ച് വാഹനമോടിക്കൽ: ഒക്ടോബർ 13 മുതൽ നവംബർ 7 വരെ 23040 പേർക്കെതിരെ കേസ് (7 Nov 2026): https://www.asianetnews.com/kerala-news/cases-registered-against-23040-individuals-for-driving-under-the-influence-of-alcohol-within-26-days-articleshow-vx24poy
- Kerala Kaumudi, മദ്യപിച്ച് വാഹനമോടിച്ച 23040 പേര്ക്കെതിരെ കേസ് (8 Nov 2026): https://keralakaumudi.com/kerala/general/kerala-1823891
- South India Pulse, Mass Crackdown in Kerala: 15,782 Drunk Drivers Nabbed in 15 Days; Ernakulam Rural Tops List! (28 Oct 2026): https://southindiapulse.com/news/28/10/2026/kerala-police-drunk-driving-special-drive-cases-registered/
- The Indian Express, नए ट्रैफ़िक जुर्माने (1 सितंबर 2019): https://indianexpress.com/article/india/new-traffic-fines-list-motor-vehicles-act-2019-5955543/
- PIB, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 के प्रावधान (सारांश): https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/MVA.pdf
- PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
- सुप्रीम कोर्ट, Iffco Tokio General Insurance Co. Ltd. बनाम Pearl Beverages Ltd., 12 अप्रैल 2021 (Indian Kanoon): https://indiankanoon.org/doc/25720691/
- सुप्रीम कोर्ट, Shamanna बनाम Divisional Manager, Oriental Insurance Co. Ltd., 8 अगस्त 2018 (LawSathi): https://research.lawsathi.in/supreme-court/2018/shamanna-another-divisional-manager-oriental-insurance-co-ltd/
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. केरल में कितने केस दर्ज हुए?
13 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 सुबह 7 बजे तक (26 दिन) कुल 23,040 लोगों पर नशे में ड्राइविंग के केस।
2. सबसे ज़्यादा केस कहाँ दर्ज हुए?
एर्नाकुलम रूरल में 2,762; इसके बाद कोट्टायम (2,022) और तिरुवनंतपुरम रूरल (1,661)।
3. सबसे कम केस कहाँ दर्ज हुए?
कासरगोड ज़िले में—304 केस।
4. क्या जाँच आगे भी चलेगी?
हाँ, केरल कौमुदी के अनुसार ADGP पी. विजयन ने कहा है कि वाहन जाँच आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी।
5. क्या 23,040 का आँकड़ा और 15,782 का आँकड़ा अलग-अलग ड्राइव के हैं?
नहीं, दोनों एक ही अभियान के हैं। साउथ इंडिया पल्स के अनुसार 13 से 28 अक्टूबर (15 दिन) तक 15,782 केस दर्ज हुए थे; एशियानेट और केरल कौमुदी के अनुसार 13 अक्टूबर से 7 नवंबर सुबह 7 बजे (26 दिन) तक कुल 23,040 केस हुए। दोनों का अंतर (7,258) हमारा हिसाब है, पुलिस का अलग से जारी आँकड़ा नहीं।
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