सीधा जवाब: मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने CBSE से कहा कि वह लखनऊ में अपने संबद्ध स्कूलों के आसपास ट्रैफिक प्रबंधन सुधारने के प्रभावी उपाय सुझाए। कोर्ट ने CBSE के एक ज़िम्मेदार अधिकारी को तलब किया, निर्देश न मानने वाले स्कूलों पर उचित कार्रवाई को कहा और साफ़ किया कि स्कूल वाहनों की जाँच नियमित होनी चाहिए, एक बार की मुहिम नहीं। अगली सुनवाई 4 नवंबर को है।
कोर्ट ने क्या कहा: मुख्य निर्देश
सवालइलाहाबाद हाई कोर्ट ने लखनऊ के स्कूलों के ट्रैफिक पर क्या निर्देश दिए?
जवाब: India Today (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच ने गोमती रिवर बैंक रेज़िडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर ये निर्देश दिए: CBSE से उपाय: संबद्ध स्कूलों के आसपास ट्रैफिक सुधार के प्रभावी उपाय सुझाए; ज़िम्मेदार अधिकारी कोर्ट को बताए कि पहले के निर्देश कैसे लागू होंगे; CBSE पक्षकार: CBSE को केस में पक्षकार बनाया गया ताकि संबद्ध स्कूल निर्देश मानें और…
| निर्देश | ब्योरा |
|---|---|
| CBSE से उपाय | संबद्ध स्कूलों के आसपास ट्रैफिक सुधार के प्रभावी उपाय सुझाए; ज़िम्मेदार अधिकारी कोर्ट को बताए कि पहले के निर्देश कैसे लागू होंगे |
| CBSE पक्षकार | CBSE को केस में पक्षकार बनाया गया ताकि संबद्ध स्कूल निर्देश मानें और उल्लंघन पर कार्रवाई हो सके |
| ट्रैफिक कमेटी | ट्रैफिक मुद्दों पर बनी कमेटी के अध्यक्ष DCP (ट्रैफिक) का तबादला हो गया था; DGP अपर महाधिवक्ता से सलाह कर नया अध्यक्ष नामित करें, जो DCP रैंक से नीचे न हो, आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 10 दिन के भीतर |
| स्कूलों के भवन नक्शे | पड़ोसी ज़िलों के स्कूलों के बिल्डिंग प्लान की जानकारी के लिए राज्य सरकार को 10 दिन और |
स्कूल वाहनों की जाँच
सवालस्कूल वाहनों की जाँच पर कोर्ट ने क्या कहा?
जवाब: रिपोर्ट के अनुसार उप परिवहन आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि स्कूल वाहनों की जाँच जारी रहेगी और मोटर वाहन अधिनियम व संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जाँच नियमित होनी चाहिए। स्कूल बस और वैन के नियमों पर हमारी विस्तृत गाइड: स्कूल वैन और बस के नियम ।

स्कूलों के बाहर जाम क्यों ख़तरनाक है
छुट्टी के समय स्कूल गेट पर निजी कारें, वैन, ई-रिक्शा और बाइक एक साथ रुकते हैं। इससे बच्चे खड़ी गाड़ियों के बीच से सड़क पार करते हैं, जहाँ ड्राइवर उन्हें देख नहीं पाते। ग़लत पार्किंग पर नियम और टोइंग: टोइंग और ग़लत पार्किंग के नियम।
अभिभावक क्या देखें
सवालबच्चों की स्कूल बस या वैन में अभिभावक क्या जाँचें?
जवाब: बस/वैन का परमिट, फ़िटनेस और बीमा वैध है या नहीं, स्कूल से पूछें; वाहन नंबर से mParivahan पर भी कुछ ब्योरा देखा जा सकता है।; वाहन में क्षमता से ज़्यादा बच्चे न हों; ओवरलोडिंग दिखे तो स्कूल को लिखित बताएँ।; ड्राइवर का अनुभव और व्यवहार, साथ में अटेंडेंट है या नहीं, यह जानें।
- बस/वैन का परमिट, फ़िटनेस और बीमा वैध है या नहीं, स्कूल से पूछें; वाहन नंबर से mParivahan पर भी कुछ ब्योरा देखा जा सकता है।
- वाहन में क्षमता से ज़्यादा बच्चे न हों; ओवरलोडिंग दिखे तो स्कूल को लिखित बताएँ।
- ड्राइवर का अनुभव और व्यवहार, साथ में अटेंडेंट है या नहीं, यह जानें।
- ख़ुद बच्चे को छोड़ने जाएँ तो गेट के ठीक सामने गाड़ी न रोकें; थोड़ी दूर पार्क करें और बच्चे का हाथ पकड़कर फ़ुटपाथ से ले जाएँ।
- दोपहिया पर बच्चे को बैठाएँ तो उसे भी हेलमेट पहनाएँ: पीछे बैठने वालों के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट नियम।
- नाबालिग बच्चे को गाड़ी न दें: धारा 199A में अभिभावक/मालिक को दोषी माना जाता है, ₹25,000 जुर्माना और 3 साल तक जेल का प्रावधान है।
बच्चों को बाइक पर ले जाने के नियम
सवालबच्चे को बाइक पर बिठाने के नियम क्या हैं?
जवाब: कई परिवारों के लिए बाइक ही रोज़ का साधन है, और स्कूल छोड़ने से लेकर बाज़ार तक बच्चे साथ होते हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय ने फ़रवरी 2022 में केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन करके छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए नियम बनाए (जो प्रकाशन के एक साल बाद से लागू होने थे)।
| नियम (9 महीने से 4 साल के बच्चे) | क्या करना है |
|---|---|
| सेफ़्टी हार्नेस | बच्चे को हार्नेस से चालक के साथ बाँधें |
| हेलमेट | बच्चे के सिर पर ठीक से फ़िट होने वाला क्रैश हेलमेट |
| रफ़्तार | बच्चे को साथ ले जाते समय बाइक 40 किमी/घंटा से ज़्यादा नहीं |
4 साल से बड़े बच्चों के लिए भी: पीछे बैठे हर व्यक्ति के लिए हेलमेट ज़रूरी है, इसलिए बच्चे के नाप का अच्छी क्वालिटी का हेलमेट लें। बच्चे को आगे टंकी पर न बिठाएँ, और दो से ज़्यादा लोग बाइक पर न बैठें।
स्कूल वैन/ऑटो चुनते समय: देखें कि गाड़ी में क्षमता से ज़्यादा बच्चे न हों, ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस हो और गाड़ी के काग़ज़ पूरे हों। बच्चों को सिखाएँ कि गाड़ी से उतरकर सड़क कैसे पार करें और गाड़ी के ठीक पीछे या आगे न खड़े हों, जहाँ ड्राइवर उन्हें देख न सके।

निष्कर्ष
स्कूलों के बाहर की सड़क बच्चों के लिए रोज़ का सबसे जोखिम भरा हिस्सा है। हाई कोर्ट ने स्कूल, CBSE, पुलिस और परिवहन विभाग सबकी भूमिका तय करने की दिशा में क़दम उठाया है। अभिभावक भी नियमित रूप से बस-वैन की जाँच और गेट पर अनुशासन में हिस्सा लें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड TRAFFIC RULES EVERYONE MUST FOLLOW भी पढ़ सकते हैं।
स्कूल वैन या अपनी गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए ताकि ज़रूरत पड़ने पर कोई भी आपसे तुरंत संपर्क कर सके। स्कैन करने पर कॉल, WhatsApp और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट के बटन मिलते हैं, और आपका नंबर किसी को दिखता नहीं।
आख़िरी अपडेट: 29 अक्टूबर 2026
स्रोत (Sources)
- India Today (PTI), “Allahabad High Court seeks CBSE plan for traffic near Lucknow schools” (27 अक्टूबर 2026): https://www.indiatoday.in/india/law-news/story/lucknow-school-traffic-allahabad-high-court-seeks-cbse-measures-ptag-3026404-2026-10-27
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019, भारत का राजपत्र (धारा 199A): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
- PIB, 4 साल से कम उम्र के बच्चों की दोपहिया सुरक्षा के नियम (फ़रवरी 2022): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1798731
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. यह मामला किसने दायर किया?
गोमती रिवर बैंक रेज़िडेंट्स एसोसिएशन ने जनहित याचिका दायर की है।
2. अगली सुनवाई कब है?
India Today (PTI) के अनुसार 4 नवंबर 2026 को।
3. ट्रैफिक कमेटी के अध्यक्ष पर क्या निर्देश है?
DGP अपर महाधिवक्ता से सलाह कर नया अध्यक्ष नामित करें, जो DCP रैंक से नीचे न हो; नियुक्ति आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 10 दिन के भीतर हो।
4. क्या यह आदेश सभी स्कूलों पर लागू है?
रिपोर्ट के अनुसार निर्देश लखनऊ के CBSE से संबद्ध स्कूलों के आसपास ट्रैफिक प्रबंधन पर केंद्रित हैं। अंतिम आदेश की प्रति आने पर दायरा और साफ़ होगा।
5. स्कूल वैन ओवरलोड या तेज़ चलती दिखे तो शिकायत कहाँ करें?
पहले स्कूल प्रबंधन को लिखित शिकायत दें। ख़तरा तुरंत हो तो 112 पर फ़ोन करें। वाहन की फ़िटनेस और परमिट के मामले में नज़दीकी RTO/ARTO में शिकायत दी जा सकती है; वाहन नंबर और समय नोट करें।


