सीधा जवाब: टाइम्स ऑफ़ इंडिया (21 अक्टूबर 2026) के अनुसार ग़ाज़ियाबाद के वैशाली, वसुंधरा और शालीमार गार्डन में गहरे गड्ढे, ऊबड़-खाबड़ सड़कें और खुदी छोड़ी गई पट्टियाँ त्योहारों से पहले बड़ी परेशानी बनी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़ नगर निगम ने क़रीब ₹8 करोड़ की मरम्मत योजना बनाई है, पर लोगों का कहना है कि ज़मीन पर ज़्यादा बदलाव नहीं दिखा। सबसे ज़्यादा ख़तरा साइकिल, दोपहिया चलाने वालों, पैदल चलने वालों और बुज़ुर्गों को है। बचाव के लिए धीमी रफ़्तार, सही हेलमेट और दूरी रखें, और शिकायत UP जनसुनवाई पोर्टल या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर करें।
कहाँ है समस्या?
सवालग़ाज़ियाबाद में किन इलाक़ों में गड्ढों की शिकायत है?
जवाब: रिपोर्ट में स्थानीय लोगों ने बताया: वसुंधरा: बुद्ध चौक से सेक्टर तक का रास्ता गड्ढों से भरा; कुछ जगह सड़क खोदकर वैसे ही छोड़ दी गई।; वैशाली: सेक्टर 1 से 4 की अंदरूनी सड़कें ख़राब; बार-बार शिकायत के बाद भी कई जगह काम शुरू नहीं हुआ।; शालीमार गार्डन: मरम्मत की माँग लंबे समय से लंबित।।
- वसुंधरा: बुद्ध चौक से सेक्टर तक का रास्ता गड्ढों से भरा; कुछ जगह सड़क खोदकर वैसे ही छोड़ दी गई।
- वैशाली: सेक्टर 1 से 4 की अंदरूनी सड़कें ख़राब; बार-बार शिकायत के बाद भी कई जगह काम शुरू नहीं हुआ।
- शालीमार गार्डन: मरम्मत की माँग लंबे समय से लंबित।
लोगों का कहना है कि गहरे गड्ढों में बाइक-स्कूटर वाले अक्सर संतुलन खोकर गिरते हैं और चोटिल होते हैं। त्योहारों पर बाज़ारों में भीड़ बढ़ने से जाम और हादसे का ख़तरा और बढ़ जाता है।
गड्ढों वाली सड़क पर दोपहिया कैसे चलाएँ?
सवालगड्ढों वाली सड़क पर दोपहिया कैसे चलाएँ?
जवाब: रफ़्तार कम रखें। गड्ढा दिखे तो पहले ही धीमे हो जाएँ; गड्ढे के ऊपर अचानक ब्रेक न लगाएँ।; अचानक मोड़ न काटें। गड्ढे से बचने के लिए एकदम दाएँ-बाएँ मुड़ना पीछे की गाड़ी से टक्कर करा सकता है। पहले शीशे में देखें, इशारा दें।; आगे वाली गाड़ी से दूरी रखें, ताकि गड्ढा समय रहते दिख जाए।; पानी भरे गड्ढे से बचें, उसकी गहराई का अंदाज़ा नहीं लगता।
- रफ़्तार कम रखें। गड्ढा दिखे तो पहले ही धीमे हो जाएँ; गड्ढे के ऊपर अचानक ब्रेक न लगाएँ।
- अचानक मोड़ न काटें। गड्ढे से बचने के लिए एकदम दाएँ-बाएँ मुड़ना पीछे की गाड़ी से टक्कर करा सकता है। पहले शीशे में देखें, इशारा दें।
- आगे वाली गाड़ी से दूरी रखें, ताकि गड्ढा समय रहते दिख जाए।
- पानी भरे गड्ढे से बचें, उसकी गहराई का अंदाज़ा नहीं लगता।
- हेलमेट ठीक से बाँधें। मोटर वाहन अधिनियम (2019 संशोधन) के अनुसार बिना हेलमेट (धारा 194D) पर ₹1,000 जुर्माना और 3 महीने के लिए लाइसेंस अयोग्यता का प्रावधान है। पीछे बैठने वाले के लिए भी हेलमेट ज़रूरी है।
- रात में और सावधानी, क्योंकि अंधेरे में गड्ढे और खुदी सड़क कम दिखती है। हेडलाइट और टायर की हवा ठीक रखें।
- साइकिल चलाने वाले हल्के रंग के कपड़े या रिफ़्लेक्टर लगाएँ और सड़क के किनारे पर चलें।

पैदल चलने वाले और बुज़ुर्ग
- खुदी हुई जगह के पास से न निकलें, थोड़ा घूमकर ही सही पर सुरक्षित रास्ता लें।
- बच्चों और बुज़ुर्गों का हाथ पकड़कर चलें, ख़ासकर बाज़ार की भीड़ में।
टूटी सड़क की शिकायत कहाँ करें?
सवालटूटी सड़क की शिकायत कहाँ करें?
जवाब: UP जनसुनवाई (IGRS): jansunwai.up.nic.in पर मोबाइल OTP से पंजीकरण करें, शिकायत दर्ज करें, फ़ोटो लगाएँ और स्थिति ट्रैक करें; रिमाइंडर और फ़ीडबैक की सुविधा भी है। Android ऐप भी उपलब्ध है।; मुख्यमंत्री हेल्पलाइन: 1076 पर कॉल करें।; राष्ट्रीय राजमार्ग: NHAI हेल्पलाइन 1033।; हादसा या इमरजेंसी: पुलिस 112, एम्बुलेंस 108।
| माध्यम | कैसे |
|---|---|
| UP जनसुनवाई (IGRS) | jansunwai.up.nic.in पर मोबाइल OTP से पंजीकरण करें, शिकायत दर्ज करें, फ़ोटो लगाएँ और स्थिति ट्रैक करें; रिमाइंडर और फ़ीडबैक की सुविधा भी है। Android ऐप भी उपलब्ध है। |
| मुख्यमंत्री हेल्पलाइन | 1076 पर कॉल करें। |
| राष्ट्रीय राजमार्ग | NHAI हेल्पलाइन 1033। |
| हादसा या इमरजेंसी | पुलिस 112, एम्बुलेंस 108। |
शिकायत में जगह का सही पता (सेक्टर, नज़दीकी चौराहा या लैंडमार्क), फ़ोटो और तारीख़ लिखें। शिकायत संख्या संभाल कर रखें।
गड्ढों का ख़तरा कितना बड़ा?
देश भर में गड्ढों से होने वाली मौतों पर हमने पहले विस्तार से लिखा है: गड्ढों से होने वाली मौतें।
सही हेलमेट कैसे चुनें
सवालसही हेलमेट कैसे चुनें?
जवाब: हेलमेट तभी जान बचाता है जब वह अच्छी क्वालिटी का हो और ठीक से पहना गया हो। सड़क किनारे बिकने वाले सस्ते, पतले हेलमेट सिर्फ़ चालान से बचाते हैं, चोट से नहीं। क़ानूनी बात: सड़क परिवहन मंत्रालय के "Helmet for Riders of Two-Wheeler Motor Vehicles (Quality Control) Order, 2020" के तहत 1 जून 2021 से दोपहिया चालकों के हेलमेट का BIS प्रमाणित होना ज़रूरी है।
| क्या देखें | क्यों |
|---|---|
| ISI मार्क और IS 4151 | मानक के अनुसार बना और जाँचा गया हेलमेट |
| सही नाप | ढीला हेलमेट टक्कर में सिर से निकल सकता है |
| चिन-स्ट्रैप | हर बार बाँधें; बिना स्ट्रैप हेलमेट बेकार है |
| साफ़ वाइज़र | खरोंच वाला वाइज़र रात में रोशनी बिखेरता है |
| पुराना या गिरा हुआ हेलमेट | ज़ोर से गिरा या टक्कर खाया हेलमेट अंदर से कमज़ोर हो सकता है, बदल दें |
पीछे बैठने वाले भी: हेलमेट सिर्फ़ चालक के लिए नहीं, पीछे बैठने वाले के लिए भी उतना ही ज़रूरी है। बच्चों के लिए उनके नाप का हेलमेट लें।
पहनने का सही तरीका: हेलमेट माथे के ऊपर तक आए, दोनों तरफ़ से कसा हुआ लगे, और स्ट्रैप इतना कसा हो कि ठुड्डी और स्ट्रैप के बीच एक-दो उंगली ही जाए।
रात में सफ़र: ज़्यादा सावधानी क्यों ज़रूरी
सवालरात में गाड़ी चलाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब: रात में दिखाई कम देता है, थकान और नींद का असर बढ़ जाता है, और सड़क किनारे बिना रोशनी के खड़े वाहन अचानक सामने आ जाते हैं। रात के सफ़र में ये आदतें मदद करती हैं: डिपर का सही इस्तेमाल: सामने से गाड़ी आए या आगे किसी गाड़ी के पीछे चल रहे हों, तो हाई-बीम से लो-बीम पर आएँ।
- डिपर का सही इस्तेमाल: सामने से गाड़ी आए या आगे किसी गाड़ी के पीछे चल रहे हों, तो हाई-बीम से लो-बीम पर आएँ। सामने की तेज़ रोशनी से बचने के लिए नज़र सड़क के बाएँ किनारे पर रखें।
- रफ़्तार हेडलाइट की पहुँच के भीतर: जितनी दूर रोशनी में दिख रहा है, उतनी दूरी में रुक पाने वाली रफ़्तार रखें।
- नींद से लड़ें नहीं, रुकें: जम्हाई, आँखें भारी होना या लेन से भटकना नींद के संकेत हैं। सुरक्षित जगह रुककर आराम करें।
- खड़े वाहनों से सावधान: हाईवे पर बिना लाइट खड़े ट्रक या ट्रैक्टर-ट्रॉली बड़ा ख़तरा हैं; दूर से रफ़्तार कम करें।
- अपनी गाड़ी को दिखने लायक रखें: हेडलाइट, टेल-लाइट, ब्रेक लाइट और रिफ़्लेक्टर साफ़ और चालू हों।
- शीशे साफ़: गंदा विंडस्क्रीन रात में रोशनी बिखेरता है।
| जोखिम | बचाव |
|---|---|
| सामने से चकाचौंध | नज़र बाएँ किनारे पर, रफ़्तार कम |
| नींद | रुककर आराम, संभव हो तो ड्राइवर बदलें |
| सड़क किनारे खड़ा वाहन | दूर से धीमे, ओवरटेक सोच-समझकर |
हाईवे पर मदद और शिकायत के आधिकारिक रास्ते
नेशनल हाईवे पर सफ़र करते समय मुसीबत आए या सड़क में कोई ख़राबी दिखे, तो इन आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें:
| ज़रूरत | कहाँ संपर्क करें |
|---|---|
| हाईवे पर गाड़ी ख़राब, हादसा, सड़क पर रुकावट | NHAI हेल्पलाइन 1033 |
| किसी भी आपात स्थिति (पुलिस, एम्बुलेंस, आग) | 112 |
| गड्ढे, टूटी सड़क, टोल या सुविधा से जुड़ी शिकायत | NHAI का राजमार्गयात्रा ऐप |
| FASTag से ग़लत कटौती | FASTag जारी करने वाला बैंक, और 1033 |
राजमार्गयात्रा NHAI का नागरिक-केंद्रित ऐप है, जिसमें हाईवे से जुड़ी जानकारी, आसपास की सुविधाएँ और शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी गई है।
कॉल करते समय क्या बताएँ: हाईवे का नंबर (जैसे NH-48), किस शहर से किस शहर की ओर जा रहे हैं, नज़दीकी किलोमीटर पत्थर, टोल प्लाज़ा, ढाबा या पुल, और क्या मदद चाहिए। जितनी सटीक जानकारी, उतनी जल्दी मदद।
शिकायत करते समय: तस्वीर लें (सुरक्षित जगह से), जगह का नाम लिखें और शिकायत नंबर संभालकर रखें, ताकि बाद में उसकी स्थिति देख सकें।

निष्कर्ष
सड़कें ठीक होने में समय लग सकता है, पर अपनी सुरक्षा आज से शुरू होती है: धीमी रफ़्तार, अच्छा हेलमेट और सावधानी। टूटी सड़क दिखे तो शिकायत ज़रूर करें, इससे दूसरों की भी जान बचती है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
अगर कभी आपकी गाड़ी के साथ कुछ हो जाए, तो Rakshak Code QR स्कैन करके कोई भी आपको या आपके परिवार को कॉल, WhatsApp या इमरजेंसी कॉन्टैक्ट बटन से तुरंत बता सकता है, आपका नंबर दिखाए बिना।
आख़िरी अपडेट: 26 अक्टूबर 2026
स्रोत (Sources)
- The Times of India, “Despite Rs 8 crore plan, potholes persist across Ghaziabad” (21 अक्टूबर 2026): https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/despite-rs-8-crore-plan-potholes-persist-across-ghaziabad/articleshow/135076372.cms
- UP जनसुनवाई – समाधान (IGRS) पोर्टल: https://jansunwai.up.nic.in/
- UP 112, संपर्क और हेल्पलाइन नंबर: https://112.up.gov.in/
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019, भारत का राजपत्र: https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
- BIS, Helmet for Riders of Two-Wheeler Motor Vehicles (Quality Control) Order, 2020 (26 नवंबर 2020): https://www.bis.gov.in/wp-content/uploads/2020/12/Helmet-for-riders-of-Two-Wheeler-Motor-Vehicles-Quality-Control-Order-2020.pdf
- PIB, केवल BIS प्रमाणित दोपहिया हेलमेट: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1676466
- MoRTH, सड़क सुरक्षा: https://morth.gov.in/road-safety
- NHAI राजमार्गयात्रा: https://rajmargyatra.nhai.gov.in/
- राजमार्गयात्रा, About Us: https://rajmargyatra.nhai.gov.in/aboutus
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या ग़ाज़ियाबाद में सड़कें ठीक करने की योजना है?
TOI के अनुसार नगर निगम ने त्योहारों से पहले गड्ढे भरने और सड़कें ठीक करने के लिए क़रीब ₹8 करोड़ की योजना बनाई है। अधिकारियों से अख़बार का संपर्क नहीं हो पाया।
2. शिकायत की स्थिति कैसे देखें?
जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत संख्या से स्थिति ट्रैक कर सकते हैं और समाधान से संतुष्ट न हों तो फ़ीडबैक दे सकते हैं।
3. गड्ढे के कारण गिर जाएँ तो क्या करें?
चोट हो तो 112 या 108 पर कॉल करें। हादसे की जगह और गड्ढे की फ़ोटो रखें, यह शिकायत और बीमा दावे में काम आ सकती है।
4. क्या हाईवे के गड्ढों की शिकायत अलग जगह होती है?
हाँ। राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी शिकायत के लिए NHAI की हेल्पलाइन 1033 है।
5. क्या बिना ISI मार्क वाला हेलमेट बेचना मना है?
हाँ। Helmet for Riders of Two-Wheeler Motor Vehicles (Quality Control) Order, 2020 के तहत 1 जून 2021 से दोपहिया हेलमेट का BIS प्रमाणित (IS 4151:2015, ISI मार्क) होना ज़रूरी है।


