सीधा जवाब: सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) द्वारा फ़रवरी 2026 में लोकसभा में रखे गए आंकड़ों (The Indian Express की रिपोर्ट) के अनुसार, गड्ढों से जुड़े सड़क हादसों में मौतें 2020 में 1,555 से बढ़कर 2024 में 2,385 हो गईं, यानी 53% से ज़्यादा बढ़ोतरी। 2020-2024 के पाँच सालों में ऐसे हादसों में कुल 9,438 लोगों की जान गई, यानी 2024 में औसतन रोज़ 6 से ज़्यादा मौतें।
आंकड़े एक नज़र में
सवालगड्ढों से हादसों के आंकड़े क्या कहते हैं?
जवाब: 2020: 3,713: 1,555; 2024: 5,432: 2,385; 2020-2024 कुल: 23,056: 9,438 रिपोर्ट के मुताबिक: – 2021 में (कोविड काल) मौतों में लगभग 4.7% की मामूली कमी आई थी, उसके बाद लगातार बढ़ोतरी हुई। – घायलों की संख्या 2020 में 3,167 से बढ़कर 2024 में 4,643 हुई; 2023 में यह 5,309 के शिखर पर थी। – आंकड़ों में नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और शहरी सड़कें, सभी शामिल हैं।
| वर्ष/अवधि | हादसे | मौतें |
|---|---|---|
| 2020 | 3,713 | 1,555 |
| 2024 | 5,432 | 2,385 |
| 2020-2024 कुल | 23,056 | 9,438 |
किन राज्यों में सबसे ज़्यादा?
सवालकिन राज्यों में सबसे ज़्यादा हादसे हुए?
जवाब: उत्तर प्रदेश अकेले देश की कुल गड्ढा-मौतों के आधे से ज़्यादा के लिए ज़िम्मेदार: 2020 में 759 से 2024 में 1,369।; मध्य प्रदेश में 96 (2020) से 277 (2024)।; इसके बाद पंजाब, तमिलनाडु और असम। शीर्ष पाँच राज्य मिलकर 80% से ज़्यादा हिस्सा रखते हैं।।
- उत्तर प्रदेश अकेले देश की कुल गड्ढा-मौतों के आधे से ज़्यादा के लिए ज़िम्मेदार: 2020 में 759 से 2024 में 1,369।
- मध्य प्रदेश में 96 (2020) से 277 (2024)।
- इसके बाद पंजाब, तमिलनाडु और असम। शीर्ष पाँच राज्य मिलकर 80% से ज़्यादा हिस्सा रखते हैं।
बड़ी तस्वीर देखें तो रिपोर्ट के अनुसार 2024 में देश में सड़क हादसों में कुल 1.77 लाख लोगों की मौत हुई।

गड्ढों की शिकायत कहाँ करें?
सवालगड्ढों की शिकायत कहाँ करें?
जवाब: नेशनल हाईवे: NHAI हेल्पलाइन 1033 या राजमार्गयात्रा ऐप।; शहर की सड़कें: नगर निगम/नगर पालिका की हेल्पलाइन, ऐप या वेबसाइट।; राज्य की सड़कें: राज्य PWD की शिकायत व्यवस्था।; शिकायत में जगह (लैंडमार्क), फ़ोटो और तारीख़ ज़रूर दें, और शिकायत नंबर सँभालकर रखें।।
- नेशनल हाईवे: NHAI हेल्पलाइन 1033 या राजमार्गयात्रा ऐप।
- शहर की सड़कें: नगर निगम/नगर पालिका की हेल्पलाइन, ऐप या वेबसाइट।
- राज्य की सड़कें: राज्य PWD की शिकायत व्यवस्था।
- शिकायत में जगह (लैंडमार्क), फ़ोटो और तारीख़ ज़रूर दें, और शिकायत नंबर सँभालकर रखें।
बारिश और रात में गड्ढों वाली सड़क पर कैसे चलें
सवालबारिश और रात में गड्ढों वाली सड़क पर कैसे चलाएँ?
जवाब: पानी भरे हिस्से में गड्ढे की गहराई का अंदाज़ा नहीं होता: स्पीड कम करें।; दोपहिया पर अचानक ब्रेक या झटके से मोड़ने से बचें; दोनों हाथ हैंडल पर।; हेडलाइट सही ऊँचाई पर रखें और आगे की गाड़ी से दूरी बढ़ाएँ।; हेलमेट का स्ट्रैप बंद रखें: गिरने पर सिर की चोट सबसे बड़ा ख़तरा है।; परिचित सड़क पर भी नए खोदे गए गड्ढों/खुदाई से सावधान रहें।।
- पानी भरे हिस्से में गड्ढे की गहराई का अंदाज़ा नहीं होता: स्पीड कम करें।
- दोपहिया पर अचानक ब्रेक या झटके से मोड़ने से बचें; दोनों हाथ हैंडल पर।
- हेडलाइट सही ऊँचाई पर रखें और आगे की गाड़ी से दूरी बढ़ाएँ।
- हेलमेट का स्ट्रैप बंद रखें: गिरने पर सिर की चोट सबसे बड़ा ख़तरा है।
- परिचित सड़क पर भी नए खोदे गए गड्ढों/खुदाई से सावधान रहें।
कैशलेस इलाज की योजना: घायल के परिवार को क्या पता होना चाहिए
सवालसड़क हादसे में घायल को मुफ़्त इलाज कैसे मिल सकता है?
जवाब: हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता अक्सर अस्पताल का ख़र्च होती है। केंद्र सरकार ने 5 मई 2025 को "Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025" अधिसूचित की और 4 जून 2025 को इसके दिशानिर्देश जारी किए। संसद में दी गई जानकारी (7 अगस्त 2025) के अनुसार यह योजना पूरे देश में लागू है।
| बात | योजना में क्या है |
|---|---|
| कौन हक़दार | मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुए सड़क हादसे का कोई भी घायल |
| कितना | हर घायल के लिए ₹1.5 लाख तक का इलाज |
| कितने दिन | हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन |
| कहाँ | देशभर के नामित (designated) अस्पताल |
| तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म | राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) का IT सिस्टम |
यह योजना आयुष्मान भारत (PM-JAY) का हिस्सा नहीं है, बल्कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत बनी अलग वैधानिक योजना है। बीमित वाहन से हादसे में बीमा कंपनियाँ योगदान देती हैं और बिना बीमा वाले वाहनों के मामलों में केंद्र सरकार बजट से मदद देती है।
परिवार क्या करे: अस्पताल पहुँचते ही बताइए कि मरीज़ सड़क हादसे का घायल है और पूछिए कि अस्पताल इस योजना में नामित है या नहीं। पुलिस को हादसे की सूचना ज़रूर दिलवाइए, क्योंकि सत्यापन के लिए इसकी ज़रूरत पड़ती है। पहचान पत्र और मोबाइल नंबर तैयार रखिए।
आंकड़ों को कैसे पढ़ें और कहाँ देखें
सड़क हादसों से जुड़ी ख़बरों में बड़े-बड़े आंकड़े आते हैं, लेकिन उन्हें सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है।
| स्रोत | इसमें क्या मिलता है |
|---|---|
| MoRTH की वार्षिक रिपोर्ट “Road Accidents in India” | देश और राज्यवार हादसे, मौतें, घायल, कारण और सड़क के प्रकार |
| संसद के प्रश्न-उत्तर (sansad.in) | किसी ख़ास विषय या राज्य पर मंत्रालय का लिखित जवाब |
| राज्य पुलिस / परिवहन विभाग | राज्य या शहर स्तर के आंकड़े |
पढ़ते समय ये बातें ध्यान रखें:
- साल देखें: वार्षिक रिपोर्ट अक्सर एक-दो साल पुराने आंकड़ों पर होती है। ख़बर में “इस साल” लिखा हो तो जाँचें कि आंकड़ा किस साल का है।
- हादसे बनाम मौतें: हादसों की संख्या और मौतों की संख्या अलग चीज़ें हैं; एक हादसे में कई लोगों की जान जा सकती है।
- प्रतिशत बदलाव: “इतने प्रतिशत बढ़े” सुनकर यह भी देखें कि आधार संख्या कितनी थी।
- रिपोर्टिंग का आधार: MoRTH की रिपोर्ट राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस से मिली जानकारी पर बनती है; कई छोटे हादसे दर्ज ही नहीं होते।
आंकड़े हमें बताते हैं कि ख़तरा कहाँ है। ओवरस्पीडिंग, हेलमेट/सीटबेल्ट न लगाना और ग़लत दिशा में चलना जैसे कारण बार-बार सामने आते हैं, और इन्हें बदलना हमारे अपने हाथ में है।
मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं
हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि “पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे”। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए। इनके अनुसार नेकनीयती से आपात मदद करने वाले व्यक्ति पर घायल की चोट या मौत के लिए दीवानी या आपराधिक कार्रवाई नहीं होती।
| मदद करने वाले का अधिकार | इसका मतलब |
|---|---|
| तुरंत जाने की छूट | पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं |
| पहचान बताना ज़रूरी नहीं | पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता |
| अस्पताल का ख़र्च नहीं | अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता |
| पावती (रसीद) | नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है |
| गवाह बनना मर्ज़ी से | गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है |
नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।

निष्कर्ष
गड्ढे सिर्फ़ असुविधा नहीं, जानलेवा ख़तरा हैं। शिकायत करें, धीमे चलें और हेलमेट-सीटबेल्ट कभी न छोड़ें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
हादसे के बाद परिवार तक जल्दी सूचना पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए। मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 17 फ़रवरी 2026
स्रोत (Sources)
- The Indian Express, “Pothole-related road fatalities increase by 53% in 5 years” (13 फ़रवरी 2026): https://indianexpress.com/article/business/pothole-related-road-fatalities-increase-by-53-per-cent-in-5-years-10529465/
- NHAI: https://nhai.gov.in/
- राजमार्गयात्रा (NHAI): https://rajmargyatra.nhai.gov.in/
- PIB, “Cashless treatment for Road accident victims” (7 अगस्त 2025): https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2153890
- भारत का राजपत्र, S.O. 2015(E), 5 मई 2025 (Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/262912.pdf
- MoRTH, Road Accidents in India 2022: https://morth.gov.in/backend/documents/uploaded/1755600426_RA_2022_30_Oct.pdf
- संसद (लोकसभा) प्रश्न और उत्तर: https://sansad.in/ls/questions/questions-and-answers
- PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
- MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. गड्ढे से हादसा हो जाए तो क्या मुआवज़ा मिल सकता है?
कई मामलों में अदालतों ने संबंधित विभाग की ज़िम्मेदारी पर विचार किया है; इसके लिए पुलिस रिपोर्ट, फ़ोटो और मेडिकल दस्तावेज़ रखें और वकील की सलाह लें।
2. NHAI की हेल्पलाइन क्या है?
1033।
3. ये आंकड़े किस अवधि के हैं?
2020 से 2024 तक।
4. सफ़र से पहले गाड़ी में क्या-क्या जाँचें?
टायर (हवा और घिसाव), ब्रेक, लाइट, इंडिकेटर, वाइपर और हॉर्न जाँचें, और ड्राइविंग लाइसेंस, RC, बीमा और PUC साथ रखें।
5. सड़क हादसे के घायल को कितने तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है?
Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025 के तहत मोटर वाहन से हुए हादसे के हर घायल को नामित अस्पताल में हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिनों तक ₹1.5 लाख तक का इलाज कवर मिलता है।


