सीधा जवाब: पार्टी, शादी या जश्न पर जाने से पहले तय कर लीजिए कि लौटते समय गाड़ी कौन चलाएगा, और वह व्यक्ति पूरी शाम शराब नहीं पिएगा। इसे “डेज़िग्नेटेड ड्राइवर” कहते हैं। अगर कोई ऐसा न हो, तो कैब, ऑटो, सार्वजनिक परिवहन या रात वहीं रुकने का विकल्प चुनिए। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत ख़ून में 30 mg/100 ml से ज़्यादा अल्कोहल के साथ गाड़ी चलाने पर पहली बार 6 महीने तक जेल और/या ₹10,000 तक जुर्माना, और तीन साल में दोबारा पकड़े जाने पर 2 साल तक जेल और/या ₹15,000 तक जुर्माना हो सकता है। लेकिन असली क़ीमत जुर्माना नहीं, किसी की जान है।
डेज़िग्नेटेड ड्राइवर क्या है?
सवालडेज़िग्नेटेड ड्राइवर क्या होता है?
जवाब: डेज़िग्नेटेड ड्राइवर वह साथी है जो पहले से तय करता है कि वह पूरी शाम शराब या कोई नशा नहीं करेगा और सबको सुरक्षित घर पहुँचाएगा। यह ज़िम्मेदारी बारी-बारी से बाँटी जा सकती है: इस बार एक दोस्त, अगली बार दूसरा। ज़रूरी है कि यह फ़ैसला पार्टी शुरू होने से पहले हो, क्योंकि पीने के बाद लोग अक्सर अपनी हालत को कम आँकते हैं।
| तरीका | कब सही |
|---|---|
| डेज़िग्नेटेड ड्राइवर | ग्रुप में जा रहे हों, कोई न पीने को तैयार हो |
| कैब/ऑटो | शहर में, देर रात भी उपलब्ध हो |
| सार्वजनिक परिवहन | मेट्रो/बस चल रही हो |
| वहीं रुक जाना | दूर का सफ़र, देर रात, सुरक्षित जगह |
| किसी परिवारवाले को बुलाना | पास में रहते हों |
क़ानून क्या कहता है?
सवालनशे में गाड़ी चलाने पर क़ानून क्या कहता है?
जवाब: धारा 185 के तहत ब्रेथ एनालाइज़र या दूसरी जाँच में ख़ून में 30 mg प्रति 100 ml से ज़्यादा अल्कोहल मिलना, या नशीले पदार्थ के असर में गाड़ी चलाना अपराध है। पहली बार: 6 महीने तक जेल, या ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों; 3 साल के भीतर दोबारा: 2 साल तक जेल, या ₹15,000 तक जुर्माना, या दोनों
| स्थिति | सज़ा (धारा 185, 2019 संशोधन के बाद) |
|---|---|
| पहली बार | 6 महीने तक जेल, या ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों |
| 3 साल के भीतर दोबारा | 2 साल तक जेल, या ₹15,000 तक जुर्माना, या दोनों |
इसके साथ ड्राइविंग लाइसेंस पर निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है। शरीर, वज़न, खाना और समय के हिसाब से “बस एक-दो पेग” भी सीमा पार करा सकते हैं। इसलिए सबसे सुरक्षित नियम है: पी है, तो गाड़ी नहीं।

दोस्त नशे में गाड़ी चलाने की ज़िद करे तो?
सवालदोस्त नशे में गाड़ी चलाने की ज़िद करे तो क्या करें?
जवाब: यह सबसे मुश्किल पल होता है, लेकिन यहीं आपकी दोस्ती काम आती है: शांति से बात करें: "आज मैं चला लेता हूँ" या "कैब बुक कर देता हूँ" जैसी सीधी पेशकश करें। ताने या बहस से ज़िद बढ़ती है।; चाबी लें: हो सके तो चाबी अपने पास रख लें और अगले दिन लौटा दें।
- शांति से बात करें: “आज मैं चला लेता हूँ” या “कैब बुक कर देता हूँ” जैसी सीधी पेशकश करें। ताने या बहस से ज़िद बढ़ती है।
- चाबी लें: हो सके तो चाबी अपने पास रख लें और अगले दिन लौटा दें।
- विकल्प तैयार रखें: कैब ऐप फ़ोन में हो, आसपास के ऑटो स्टैंड या रात में चलने वाली बस की जानकारी हो।
- मेज़बान की भूमिका: पार्टी के मेज़बान मेहमानों के लौटने का इंतज़ाम पहले से सोचें, और ज़रूरत हो तो रुकने की जगह दें।
- बिल्कुल न मानें तो: उसकी गाड़ी में बैठें नहीं, और दूसरों को भी न बैठने दें।
दूसरे विकल्प
सवालडेज़िग्नेटेड ड्राइवर न हो तो घर कैसे पहुँचें?
जवाब: अगर कोई डेज़िग्नेटेड ड्राइवर नहीं है: पहले से कैब/ऑटो का ख़र्च बजट में रखें; यह किसी भी जुर्माने या अस्पताल के बिल से बहुत कम है।; मेट्रो या बस की आख़िरी सेवा का समय देख लें।; शादी या दूर के समारोह में रात रुकने की व्यवस्था करें।; परिवार में किसी को पहले से बता दें कि ज़रूरत पड़ने पर लेने आ सकें।
- पहले से कैब/ऑटो का ख़र्च बजट में रखें; यह किसी भी जुर्माने या अस्पताल के बिल से बहुत कम है।
- मेट्रो या बस की आख़िरी सेवा का समय देख लें।
- शादी या दूर के समारोह में रात रुकने की व्यवस्था करें।
- परिवार में किसी को पहले से बता दें कि ज़रूरत पड़ने पर लेने आ सकें।
- अगली सुबह भी सावधानी रखें; देर रात तक पीने के बाद सुबह तक शरीर में अल्कोहल रह सकता है।
नशे में हादसा और बीमा: जेब पर दोहरी मार
सवालनशे में हादसा हुआ तो बीमा क्लेम पर क्या असर पड़ सकता है?
जवाब: नशे में गाड़ी चलाने की क़ीमत सिर्फ़ जुर्माना या जेल नहीं है; बीमा भी साथ छोड़ सकता है। ज़्यादातर मोटर बीमा पॉलिसियों में शर्त होती है कि चालक शराब या नशीले पदार्थ के असर में हो, तो कंपनी अपनी गाड़ी के नुक़सान (ओन डैमेज) का भुगतान नहीं करेगी।
| स्थिति | अदालतों का रुख़ |
|---|---|
| अपनी गाड़ी का नुक़सान | सुप्रीम कोर्ट (12 अप्रैल 2021, Iffco Tokio बनाम Pearl Beverages): कंपनी को दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था; इसके लिए ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं, FIR, मेडिकल रिपोर्ट और हादसे का तरीका भी सबूत बन सकते हैं |
| थर्ड-पार्टी पीड़ित | सुप्रीम कोर्ट (8 अगस्त 2018, Shamanna बनाम Oriental Insurance): पॉलिसी शर्त टूटने पर भी कंपनी पहले पीड़ित को भुगतान करे और फिर गाड़ी मालिक से वसूल सकती है (“पे एंड रिकवर”); यह मामला बिना वैध लाइसेंस का था |
2021 के फ़ैसले में अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ़ थोड़ी-सी शराब की मौजूदगी अपने आप में काफ़ी नहीं; यह दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था और इसने हादसे में योगदान दिया। हर मामले का फ़ैसला उसके तथ्यों और पॉलिसी की शर्तों पर होता है।
परिवार के लिए मतलब: गाड़ी की मरम्मत अपनी जेब से, थर्ड-पार्टी मुआवज़े की वसूली का ख़तरा, और ऊपर से धारा 185 की सज़ा। सबसे सस्ता बीमा यही है: पी है, तो गाड़ी नहीं।
आम ट्रैफ़िक नियम और जुर्माने: एक नज़र में
मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के 63 प्रावधान 1 सितंबर 2019 से लागू हुए, जिनमें कई जुर्माने पहले से कई गुना बढ़ाए गए। नीचे केंद्रीय क़ानून में तय कुछ आम उल्लंघनों के जुर्माने हैं। ध्यान रहे, कई राज्य कुछ अपराधों में अपनी कंपाउंडिंग (मौक़े पर भुगतान) दरें तय करते हैं, इसलिए आपके राज्य में रक़म अलग हो सकती है।
| उल्लंघन (धारा) | 2019 संशोधन के बाद |
|---|---|
| सामान्य उल्लंघन (177) | ₹500 |
| ओवरस्पीडिंग, हल्का मोटर वाहन (183) | ₹1,000 |
| ख़तरनाक ड्राइविंग (184) | ₹5,000 तक |
| नशे में ड्राइविंग (185) | ₹10,000 तक (पहली बार) |
| बिना सीटबेल्ट (194B) | ₹1,000 |
| दोपहिया पर ओवरलोडिंग/तीन सवारी (194C) | ₹2,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| बिना हेलमेट (194D) | ₹1,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता |
| एम्बुलेंस/आपात वाहन को रास्ता न देना (194E) | ₹10,000 |
| बिना बीमा (196) | ₹2,000 |
ध्यान रखें: जुर्माना सिर्फ़ सज़ा नहीं, चेतावनी है। हेलमेट, सीटबेल्ट और तय रफ़्तार, ये तीन आदतें ज़्यादातर चालानों और कई जानलेवा हादसों से बचा सकती हैं। चालान मिलने पर उसे आधिकारिक e-Challan पोर्टल पर ही जाँचें और भरें।

निष्कर्ष
अच्छी पार्टी वही है जिसके बाद सब सुरक्षित घर पहुँचें। जाने से पहले बस एक सवाल पूछिए: “आज गाड़ी कौन चलाएगा?” इतना-सा फ़ैसला किसी परिवार की ख़ुशी बचा सकता है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड NEW MOTOR VEHICLE ACT भी पढ़ सकते हैं।
रास्ते में किसी मुसीबत में परिवार तक जल्दी ख़बर पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए: मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 29 जुलाई 2026
स्रोत (Sources)
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 (धारा 185), भारत का राजपत्र: https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (India Code): https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
- MoRTH, Road Safety: https://morth.gov.in/en/road-safety
- सुप्रीम कोर्ट, Iffco Tokio General Insurance Co. Ltd. बनाम Pearl Beverages Ltd., 12 अप्रैल 2021 (Indian Kanoon): https://indiankanoon.org/doc/25720691/
- सुप्रीम कोर्ट, Shamanna बनाम Divisional Manager, Oriental Insurance Co. Ltd., 8 अगस्त 2018 (LawSathi): https://research.lawsathi.in/supreme-court/2018/shamanna-another-divisional-manager-oriental-insurance-co-ltd/
- The Indian Express, “New traffic fines take effect from today: Rs 1,000 for no helmet, Rs 10,000 for drunken driving” (1 सितंबर 2019): https://indianexpress.com/article/india/new-traffic-fines-list-motor-vehicles-act-2019-5955543/
- PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. डेज़िग्नेटेड ड्राइवर कौन होता है?
वह साथी जो पहले से तय करता है कि पूरी शाम नशा नहीं करेगा और सबको सुरक्षित घर पहुँचाएगा।
2. नशे में गाड़ी चलाने पर पहली बार क्या सज़ा है?
धारा 185 के तहत 6 महीने तक जेल, या ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों।
3. क्या एक पेग के बाद गाड़ी चलाना ठीक है?
सुरक्षित नहीं। शरीर, वज़न और खाने के हिसाब से थोड़ी शराब भी सीमा पार करा सकती है और ध्यान व प्रतिक्रिया धीमी करती है।
4. दोस्त नहीं माने तो क्या करें?
उसकी गाड़ी में न बैठें, चाबी लेने या कैब बुक करने की कोशिश करें, और दूसरों को भी साथ न जाने दें।
5. नशे में हादसा होने पर अपनी गाड़ी का क्लेम मिलेगा?
पॉलिसी की शर्त के आधार पर ओन डैमेज क्लेम ख़ारिज हो सकता है; सुप्रीम कोर्ट (2021) के अनुसार बीमा कंपनी FIR और मेडिकल रिपोर्ट जैसे सबूतों से भी नशा साबित कर सकती है, ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं।


