लोक अदालत में चालान: कम बजट में पुराने चालान निपटाने की पूरी गाइड, पात्रता, काग़ज़ और सही उम्मीद

सीधा जवाब: अगर आपके कई पुराने ट्रैफिक चालान हैं और एक साथ पूरा जुर्माना भरना मुश्किल है, तो पहले echallan.parivahan.gov.in पर देखिए कि कौन-से चालान अभी ऑनलाइन भरने लायक़ हैं और कौन-से कोर्ट (वर्चुअल कोर्ट) पहुँच चुके हैं। कोर्ट पहुँचे समझौते लायक़ चालान नेशनल लोक अदालत में निपट सकते हैं, जहाँ राशि बेंच आपसी सहमति से तय करती है। लोक अदालत में किसी तय “माफ़ी” का वादा नहीं होता, लेकिन अक्सर यह पूरा जुर्माना भरने से आसान रास्ता बनता है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 21 के अनुसार लोक अदालत का फ़ैसला अंतिम होता है और उसके ख़िलाफ़ अपील नहीं होती।

पहला क़दम: चालान की स्थिति देखें

सवालपुराने चालान निपटाने का पहला क़दम क्या है?

जवाब: चालान पोर्टल पर, ऑनलाइन भरने लायक़: UPI/कार्ड से तुरंत भरें; लोक अदालत का इंतज़ार ज़रूरी नहीं; चालान वर्चुअल कोर्ट पहुँच चुका, समझौते लायक़: लोक अदालत (टोकन/स्लिप) या वर्चुअल कोर्ट पर भुगतान/चुनौती; गंभीर मामला (FIR, हादसा, नशा): लोक अदालत में आम तौर पर नहीं; कोर्ट की प्रक्रिया; दूसरे राज्य का चालान: उसी राज्य की व्यवस्था देखें

स्थिति क्या करें
चालान पोर्टल पर, ऑनलाइन भरने लायक़ UPI/कार्ड से तुरंत भरें; लोक अदालत का इंतज़ार ज़रूरी नहीं
चालान वर्चुअल कोर्ट पहुँच चुका, समझौते लायक़ लोक अदालत (टोकन/स्लिप) या वर्चुअल कोर्ट पर भुगतान/चुनौती
गंभीर मामला (FIR, हादसा, नशा) लोक अदालत में आम तौर पर नहीं; कोर्ट की प्रक्रिया
दूसरे राज्य का चालान उसी राज्य की व्यवस्था देखें

अपने सभी चालानों की सूची बना लें: तारीख़, राशि, स्थिति। इससे पता चलेगा कि बजट कहाँ लगाना है।

कौन-से चालान नहीं निपटते?

सवालकौन-से चालान लोक अदालत में नहीं निपटते?

जवाब: लोक अदालत सिर्फ़ समझौते लायक़ (compoundable) मामले निपटा सकती है। The Economic Times की गाइड और राज्यों की सूचनाओं के अनुसार आम तौर पर ये चालान शामिल नहीं होते: नशे में ड्राइविंग; गंभीर चोट या मौत वाले हादसे; नाबालिगों से जुड़े अपराध; रेसिंग या स्पीड ट्रायल; ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल वाहन; जिन मामलों में पूरा मुक़दमा चल रहा है।

  • नशे में ड्राइविंग
  • गंभीर चोट या मौत वाले हादसे
  • नाबालिगों से जुड़े अपराध
  • रेसिंग या स्पीड ट्रायल
  • ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल वाहन
  • जिन मामलों में पूरा मुक़दमा चल रहा है

हर राज्य की सूची थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए अपने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण या ट्रैफिक पुलिस की सूचना ज़रूर देखें।

कोर्ट भवन (प्रतीकात्मक)
Photo: Bru-nO via Pixabay · Pixabay

कितनी राशि देनी पड़ती है?

सवाललोक अदालत में कितनी राशि देनी पड़ती है?

जवाब: कोई तय सरकारी दर प्रकाशित नहीं होती; बेंच हर मामले में आपसी सहमति से राशि तय करती है। उदाहरण के लिए, नवभारत टाइम्स (10 मई 2026) के अनुसार 9 मई 2026 की नेशनल लोक अदालत में दिल्ली में लगभग 1.31 लाख ट्रैफिक चालान निपटे और लगभग ₹2.07 करोड़ जुर्माना जमा हुआ।

बजट के हिसाब से योजना

  1. सबसे पुराने और सबसे बड़े चालान पहले देखें: कोर्ट पहुँचे चालान लोक अदालत के लिए रखें, ऑनलाइन वाले थोड़ा-थोड़ा करके भरें।
  2. तारीख़ पहले से जानें: नेशनल लोक अदालत साल में कई बार लगती है। तारीख़ NALSA और अपने राज्य प्राधिकरण की वेबसाइट पर देखें।
  3. टोकन/स्लिप समय पर लें: दिल्ली जैसे शहरों में स्लिप सीमित होती हैं और जल्दी ख़त्म हो जाती हैं।
  4. काग़ज़ तैयार रखें: स्लिप/टोकन, DL, RC, चालान की कॉपी या SMS, पहचान पत्र, पहले के भुगतान की रसीद।
  5. एजेंट से बचें: कोई “पक्की माफ़ी” के नाम पर पैसे माँगे, तो यह धोखा हो सकता है।

फ़ैसले का असर

सवाललोक अदालत के फ़ैसले का क्या असर होता है?

जवाब: धारा 21 के अनुसार लोक अदालत का अवॉर्ड सिविल कोर्ट की डिक्री माना जाता है और अंतिम व बाध्यकारी होता है; इसके ख़िलाफ़ अपील नहीं होती। NALSA के अनुसार लोक अदालत में मामला ले जाने पर कोर्ट फ़ीस नहीं लगती, और लंबित केस का समझौता हो जाए तो पहले चुकाई गई कोर्ट फ़ीस वापस मिल सकती है। समझौता न हो, तो मामला सामान्य कोर्ट में वापस चला जाता है।

चालान ऑनलाइन कैसे देखें और भरें

सवालअपना ट्रैफ़िक चालान ऑनलाइन कैसे देखें और भरें?

जवाब: आजकल ज़्यादातर चालान कैमरों या पुलिस के हैंडहेल्ड डिवाइस से इलेक्ट्रॉनिक रूप में कटते हैं। अपने चालान की सही स्थिति देखने का सबसे भरोसेमंद तरीका सरकारी e-Challan पोर्टल है। ब्राउज़र में ख़ुद echallan.parivahan.gov.in टाइप करें (किसी मैसेज के लिंक से नहीं)।; चालान की स्थिति देखने वाले विकल्प में गाड़ी नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालें।

  1. ब्राउज़र में ख़ुद echallan.parivahan.gov.in टाइप करें (किसी मैसेज के लिंक से नहीं)।
  2. चालान की स्थिति देखने वाले विकल्प में गाड़ी नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालें।
  3. चालान की तारीख़, जगह, उल्लंघन और रक़म जाँचें; जहाँ तस्वीर उपलब्ध हो, वह भी देखें।
  4. सही लगे तो पोर्टल पर ही ऑनलाइन भुगतान करें और रसीद डाउनलोड करके रखें।
  5. चालान ग़लत लगे या भुगतान का विकल्प न दिखे, तो वह कोर्ट/वर्चुअल कोर्ट में भेजा गया हो सकता है; इसके लिए अपने राज्य की ट्रैफ़िक पुलिस या वर्चुअल कोर्ट की जानकारी देखें।
ठगी के संकेत क्या करें
अनजान नंबर से लिंक वाला “चालान” मैसेज लिंक न खोलें, पोर्टल पर ख़ुद जाँचें
APK फ़ाइल डाउनलोड करने को कहा जाए बिल्कुल डाउनलोड न करें
“आज ही भरें वरना गिरफ़्तारी” जैसी धमकी घबराएँ नहीं, यह दबाव की चाल है
पैसे कट गए तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें

चालान से बचने की 8 आसान आदतें

आजकल ज़्यादातर बड़े शहरों में कैमरों से अपने-आप चालान कटते हैं, और कई बार लोगों को हफ़्तों बाद पता चलता है। सबसे सस्ता तरीका है नियम मानना:

  1. स्टॉप लाइन से पहले रुकें: रेड लाइट पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन पार न करें।
  2. बोर्ड वाली रफ़्तार: शहर, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग सीमा होती है; स्पीड कैमरे वाले हिस्सों में बोर्ड देखें।
  3. हेलमेट और सीटबेल्ट: दोपहिया पर दोनों सवार हेलमेट पहनें, कार में आगे-पीछे सब सीटबेल्ट लगाएँ।
  4. फ़ोन हाथ में नहीं: गाड़ी चलाते हुए फ़ोन पर बात या मैसेज न करें।
  5. सही लेन और सही दिशा: ग़लत दिशा (रॉन्ग साइड) में चलना ख़तरनाक भी है और आम चालान भी।
  6. नंबर प्लेट साफ़ और मानक: टूटी, धुंधली या डिज़ाइनर नंबर प्लेट से दिक़्क़त हो सकती है।
  7. काग़ज़ अपडेट: बीमा, PUC और लाइसेंस की तारीख़ याद रखें; DigiLocker/mParivahan में रखे दस्तावेज़ मान्य हैं।
  8. पार्किंग सही जगह: नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ी चालान के साथ टो भी हो सकती है।

महीने में एक बार जाँच: echallan.parivahan.gov.in पर अपनी गाड़ी का नंबर डालकर देख लें कि कोई चालान लंबित तो नहीं। समय पर जानकारी होने से आप सही समय पर भुगतान कर सकते हैं, ग़लत चालान को चुनौती दे सकते हैं, या लोक अदालत जैसे विकल्प का इंतज़ार कर सकते हैं।

डिजिटल काग़ज़: मोबाइल में रखें, परेशानी से बचें

ड्राइविंग लाइसेंस या RC घर पर भूल जाना आम बात है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने अगस्त 2018 में राज्यों को एडवाइज़री भेजी कि DigiLocker या mParivahan ऐप में उपलब्ध ड्राइविंग लाइसेंस, RC और दूसरे परिवहन दस्तावेज़ मूल काग़ज़ों के बराबर क़ानूनी रूप से मान्य माने जाएँ।

दस्तावेज़ कहाँ रखें
ड्राइविंग लाइसेंस DigiLocker / mParivahan
RC (रजिस्ट्रेशन) DigiLocker / mParivahan
बीमा पॉलिसी बीमा कंपनी की PDF/ऐप; कई पॉलिसियाँ DigiLocker में भी जुड़ती हैं
PUC puc.parivahan.gov.in से डाउनलोड

कैसे शुरू करें:

  1. आधिकारिक ऐप स्टोर से DigiLocker या mParivahan ऐप डाउनलोड करें।
  2. मोबाइल नंबर/आधार से लॉग-इन करें।
  3. “Issued Documents” में परिवहन विभाग से अपना लाइसेंस और RC जोड़ें।

ध्यान रखें: फ़ोन की गैलरी में रखी फ़ोटो या स्कैन कॉपी वही दर्जा नहीं रखती जो इन आधिकारिक ऐप में जारी दस्तावेज़ रखता है। फ़ोन की बैटरी चार्ज रखें, और लंबे सफ़र में एक फ़ोटोकॉपी भी साथ रखें। किसी अनजान “दस्तावेज़ अपडेट” लिंक पर अपनी जानकारी न डालें।

काग़ज़ों की फ़ाइल (प्रतीकात्मक)
Photo: myrfa via Pixabay · Pixabay

निष्कर्ष

पुराने चालान बोझ बन जाते हैं, लेकिन सही जानकारी से इन्हें कम ख़र्च में निपटाया जा सकता है। पहले स्थिति देखिए, फिर सही रास्ता चुनिए, और आगे से चालान समय पर भरने की आदत डालिए। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड Procedure of Lok Adalat भी पढ़ सकते हैं।

किसी मुसीबत में लोग आप तक पहुँच सकें, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए: कोई भी उसे स्कैन करके आपको सूचना दे सकता है, आपका नंबर देखे बिना।

सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।

आख़िरी अपडेट: 17 जुलाई 2026

स्रोत (Sources)

  1. NALSA, लोक अदालत: https://nalsa.gov.in/lok-adalats/
  2. NALSA, नेशनल लोक अदालत: https://nalsa.gov.in/national-lok-adalat/
  3. The Economic Times, “Lok Adalat 2026 Date: How to settle traffic challans, eligibility, and online & offline process”: https://economictimes.indiatimes.com/news/new-updates/lok-adalat-2026-date-how-to-settle-traffic-challans-eligibility-and-online-offline-process/articleshow/129540588.cms
  4. नवभारत टाइम्स, दिल्ली की दूसरी नेशनल लोक अदालत (10 मई 2026): https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/delhi/other-news/delhis-second-national-lok-adalat-resolves-1-lakh-59-thousand-cases-including-1-lakh-31-thousand-traffic-challans/articleshow/130987450.cms
  5. Parivahan ई-चालान पोर्टल: https://echallan.parivahan.gov.in/
  6. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल: https://cybercrime.gov.in/
  7. PIB, DigiLocker/mParivahan पर दस्तावेज़ों की मान्यता (अगस्त 2018): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1542222
  8. MoRTH एडवाइज़री, 8 अगस्त 2018 (Parivahan): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/08-08-2018.pdf

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या लोक अदालत में चालान माफ़ हो जाता है?

पूरी माफ़ी का कोई तय नियम नहीं है। बेंच आपसी सहमति से राशि तय करती है, जो अक्सर पूरे जुर्माने से कम होती है।

2. क्या ऑनलाइन भरने लायक़ चालान के लिए भी लोक अदालत जाना चाहिए?

ज़रूरी नहीं। ऐसा चालान सीधे पोर्टल पर भर देना अक्सर आसान होता है।

3. नशे में ड्राइविंग का चालान लोक अदालत में निपटेगा?

आम तौर पर नहीं। ऐसे मामले कोर्ट की सामान्य प्रक्रिया से चलते हैं।

4. लोक अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील हो सकती है?

नहीं। धारा 21 के अनुसार फ़ैसला अंतिम और बाध्यकारी है।

5. चालान के नाम पर आया मैसेज असली है या नकली, कैसे पहचानें?

मैसेज के लिंक पर क्लिक न करें; ख़ुद echallan.parivahan.gov.in पर जाकर गाड़ी नंबर या चालान नंबर से जाँचें। ठगी हो जाए तो 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।

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