कर्नाटक में पेंडिंग ट्रैफिक चालान पर 50% छूट की नई विंडो

सीधा जवाब: The Hindu की 5 जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक सरकार ने गुरुवार (4 जून 2026) को पेंडिंग ट्रैफिक ई-चालान और कुछ परिवहन विभाग के जुर्माना मामलों पर 50% छूट की घोषणा की। यह छूट 21 जून से 10 जुलाई 2026 तक मिलेगी: इस दौरान वाहन मालिक बकाया जुर्माने की आधी राशि भरकर मामला बंद करा सकते हैं। छूट मई 2026 तक पुलिस द्वारा दर्ज सभी पेंडिंग ई-चालान पर, और परिवहन विभाग के 1991 से 2022 के बीच के बकाया मामलों पर लागू है। यह फ़ैसला 11 जुलाई को होने वाली नेशनल लोक अदालत से पहले कर्नाटक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रस्ताव पर लिया गया।

योजना एक नज़र में

बिंदु जानकारी (The Hindu के अनुसार)
छूट बकाया जुर्माने पर 50%
अवधि 21 जून से 10 जुलाई 2026 (20 दिन)
पुलिस ई-चालान मई 2026 तक दर्ज सभी पेंडिंग मामले
परिवहन विभाग 1991-2022 के बकाया मामले
आधार परिवहन विभाग का सरकारी आदेश, वित्त विभाग की सहमति से
संदर्भ 11 जुलाई की नेशनल लोक अदालत से पहले

पिछली विंडो में क्या हुआ था

सवालकर्नाटक की पिछली चालान छूट विंडो में क्या हुआ था?

जवाब: रिपोर्ट के अनुसार नवंबर-दिसंबर 2025 की पिछली छूट अवधि में 77.4 लाख से ज़्यादा ट्रैफिक मामले निपटे और लगभग ₹201 करोड़ जुर्माना वसूला गया; परिवहन विभाग के 902 मामलों से लगभग ₹29.66 लाख मिले। फिर भी विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुमान के अनुसार लगभग ₹2,827 करोड़ की वसूली बाक़ी है।

शहर का ट्रैफिक सिग्नल (प्रतीकात्मक)
Photo: Javaistan via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

कैसे भरें (सामान्य तरीका)

सवालकर्नाटक में 50% छूट के साथ चालान कैसे भरें?

जवाब: अपने वाहन नंबर से पेंडिंग चालान देखें: कर्नाटक राज्य पुलिस/बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक पोर्टल या ऐप, या Parivahan ई-चालान पोर्टल।; छूट अवधि (21 जून-10 जुलाई) में भुगतान करें; सिस्टम में 50% राशि दिखनी चाहिए।; भुगतान की रसीद सँभालकर रखें।; शक हो तो नज़दीकी ट्रैफिक पुलिस स्टेशन से पुष्टि करें।।

  1. अपने वाहन नंबर से पेंडिंग चालान देखें: कर्नाटक राज्य पुलिस/बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक पोर्टल या ऐप, या Parivahan ई-चालान पोर्टल।
  2. छूट अवधि (21 जून-10 जुलाई) में भुगतान करें; सिस्टम में 50% राशि दिखनी चाहिए।
  3. भुगतान की रसीद सँभालकर रखें।
  4. शक हो तो नज़दीकी ट्रैफिक पुलिस स्टेशन से पुष्टि करें।

सावधानी: छूट के नाम पर आने वाले SMS/WhatsApp लिंक पर क्लिक न करें; सिर्फ़ आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें।

बजट के हिसाब से पुराने चालान निपटाने के विकल्प

सवालबजट कम हो तो पुराने चालान कैसे निपटाएँ?

जवाब: राज्य की छूट योजना (जैसे यह) का इंतज़ार और समय पर भुगतान।; नेशनल लोक अदालत , जहाँ अदालत के फ़ैसले से राशि तय होती है।; एक-एक करके भुगतान: सबसे पुराने/बड़े चालान पहले।; आगे से नियम मानें: हेलमेट, सीटबेल्ट, स्पीड लिमिट।।

  • राज्य की छूट योजना (जैसे यह) का इंतज़ार और समय पर भुगतान।
  • नेशनल लोक अदालत, जहाँ अदालत के फ़ैसले से राशि तय होती है।
  • एक-एक करके भुगतान: सबसे पुराने/बड़े चालान पहले।
  • आगे से नियम मानें: हेलमेट, सीटबेल्ट, स्पीड लिमिट।

चालान ऑनलाइन कैसे देखें और भरें

सवालअपना ट्रैफ़िक चालान ऑनलाइन कैसे देखें और भरें?

जवाब: आजकल ज़्यादातर चालान कैमरों या पुलिस के हैंडहेल्ड डिवाइस से इलेक्ट्रॉनिक रूप में कटते हैं। अपने चालान की सही स्थिति देखने का सबसे भरोसेमंद तरीका सरकारी e-Challan पोर्टल है। ब्राउज़र में ख़ुद echallan.parivahan.gov.in टाइप करें (किसी मैसेज के लिंक से नहीं)।; चालान की स्थिति देखने वाले विकल्प में गाड़ी नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालें।

  1. ब्राउज़र में ख़ुद echallan.parivahan.gov.in टाइप करें (किसी मैसेज के लिंक से नहीं)।
  2. चालान की स्थिति देखने वाले विकल्प में गाड़ी नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालें।
  3. चालान की तारीख़, जगह, उल्लंघन और रक़म जाँचें; जहाँ तस्वीर उपलब्ध हो, वह भी देखें।
  4. सही लगे तो पोर्टल पर ही ऑनलाइन भुगतान करें और रसीद डाउनलोड करके रखें।
  5. चालान ग़लत लगे या भुगतान का विकल्प न दिखे, तो वह कोर्ट/वर्चुअल कोर्ट में भेजा गया हो सकता है; इसके लिए अपने राज्य की ट्रैफ़िक पुलिस या वर्चुअल कोर्ट की जानकारी देखें।
ठगी के संकेत क्या करें
अनजान नंबर से लिंक वाला “चालान” मैसेज लिंक न खोलें, पोर्टल पर ख़ुद जाँचें
APK फ़ाइल डाउनलोड करने को कहा जाए बिल्कुल डाउनलोड न करें
“आज ही भरें वरना गिरफ़्तारी” जैसी धमकी घबराएँ नहीं, यह दबाव की चाल है
पैसे कट गए तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें

लोक अदालत के फ़ैसले के बारे में ज़रूरी बातें

सवाललोक अदालत का फ़ैसला कितना पक्का होता है?

जवाब: लोक अदालत आपसी सहमति से मामले निपटाने का मंच है, जिसे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य/ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण आयोजित करते हैं। ट्रैफ़िक चालान के अलावा बैंक वसूली, बिजली-पानी के बिल और कई छोटे दीवानी मामले भी यहाँ आते हैं।

बात क्या जानना ज़रूरी
फ़ैसले की ताक़त विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 21 के तहत अवॉर्ड दीवानी अदालत की डिक्री जैसा माना जाता है
अपील अवॉर्ड अंतिम होता है, उसके ख़िलाफ़ अपील नहीं होती
सहमति मामला दोनों पक्षों की सहमति से ही निपटता है; ज़बरदस्ती नहीं
कोर्ट फ़ीस अदालत में लंबित मामला लोक अदालत में निपटे तो चुकाई गई कोर्ट फ़ीस लौटाने का प्रावधान है

जाने से पहले तैयारी: चालान नंबर या टोकन/स्लिप, गाड़ी की RC, पहचान पत्र और भुगतान का साधन साथ रखें। जिस शहर में लोक अदालत है, वहाँ की ट्रैफ़िक पुलिस या विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट पर तय प्रक्रिया ज़रूर देखें, क्योंकि कई जगह पहले से ऑनलाइन टोकन या अपॉइंटमेंट लेना होता है।

ध्यान दें: हर चालान लोक अदालत में नहीं आता। गंभीर अपराधों से जुड़े या कोर्ट में अलग से चल रहे मामलों के लिए नियम अलग हो सकते हैं। किसी दलाल को पैसे देकर “चालान माफ़” करवाने के झाँसे में न आएँ।

वर्चुअल कोर्ट में चालान: भुगतान या चुनौती

जो ई-चालान तय समय में नहीं भरे जाते या जिन्हें विभाग कोर्ट भेज देता है, वे कई राज्यों में “वर्चुअल कोर्ट” पहुँच जाते हैं। यहाँ ऑनलाइन ही केस देखा जा सकता है, और आप तय कर सकते हैं कि जुर्माना भरना है या चालान को चुनौती देनी है।

वर्चुअल कोर्ट के आधिकारिक FAQ के अनुसार तरीका:

  1. vcourts.gov.in पर जाएँ और अपना राज्य/विभाग चुनें।
  2. मोबाइल नंबर, CNR नंबर, पार्टी का नाम या चालान/वाहन नंबर से केस खोजें।
  3. केस के सामने “View” पर क्लिक करके पूरा चालान देखें।
  4. भुगतान करना हो तो वहीं दिखाई गई राशि ऑनलाइन भरें और रसीद सेव करें।
  5. चुनौती देनी हो तो “I wish to contest the case” चुनें। OTP से सत्यापन होता है; मोबाइल नंबर ग़लत हो तो चेसिस या इंजन नंबर के आख़िरी 4 अंक से सत्यापन का विकल्प है।
फ़ैसला आगे क्या होगा
जुर्माना भरा रसीद मिलेगी, केस निपट जाएगा
चुनौती चुनी केस नियमित कोर्ट में जाएगा, ऑनलाइन भुगतान का विकल्प बंद हो जाएगा
कुछ नहीं किया केस लंबित रहेगा; बाद में दिक़्क़त बढ़ सकती है

सावधानी: चुनौती तभी चुनें जब आपके पास मज़बूत सबूत हों (जैसे उस समय कहीं और होने का सबूत, या गाड़ी पहले ही बिक चुकी हो)। सुनवाई की तारीख़ और कोर्ट का नाम स्क्रीन पर दिखता है; उसे सेव कर लें और तारीख़ पर ज़रूर पेश हों।

मोबाइल से भुगतान (प्रतीकात्मक)
Photo: AS_Photography via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

निष्कर्ष

कर्नाटक के वाहन मालिकों के लिए पुराने चालान आधी रक़म में निपटाने का अच्छा मौका है, बस समय-सीमा और आधिकारिक पोर्टल का ध्यान रखें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड E-CHALLAN भी पढ़ सकते हैं।

गाड़ी से जुड़ी ज़रूरी सूचना आप तक सुरक्षित पहुँचे, इसके लिए Rakshak Code QR लगाइए। कोई भी उसे स्कैन करके आपसे संपर्क कर सकता है, आपका नंबर देखे बिना।

सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।

आख़िरी अपडेट: 6 जून 2026

स्रोत (Sources)

  1. The Hindu, “Karnataka govt. announces 50% waiver on pending traffic fines” (5 जून 2026): https://www.thehindu.com/news/national/karnataka/karnataka-govt-announces-50-fine-waiver-on-pending-traffic-fines/article71062545.ece
  2. Parivahan ई-चालान: https://echallan.parivahan.gov.in/
  3. कर्नाटक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण: https://karnataka.nalsa.gov.in/
  4. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल: https://cybercrime.gov.in/
  5. विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987, धारा 21: https://indiacode.ecourtsindia.com/legal-services-authorities-act-1987/section/21/
  6. NALSA, नेशनल लोक अदालत: https://nalsa.gov.in/national-lok-adalat/
  7. Virtual Courts, FAQ: https://vcourts.gov.in/virtualcourt/faq.php

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. छूट कब तक है?

21 जून से 10 जुलाई 2026 तक।

2. क्या जून 2026 के चालान पर भी छूट है?

रिपोर्ट के अनुसार छूट मई 2026 तक दर्ज पुलिस ई-चालान पर है।

3. क्या हर तरह का चालान शामिल है?

सरकारी आदेश में शामिल श्रेणियाँ ही; गंभीर अपराध आम तौर पर बाहर रहते हैं। आधिकारिक पोर्टल पर जाँचें।

4. कितनी राशि अभी भी बकाया है?

The Hindu के अनुसार विधिक सेवा प्राधिकरण का अनुमान है कि लगभग ₹2,827 करोड़ की वसूली बाक़ी है।

5. चालान के नाम पर आया मैसेज असली है या नकली, कैसे पहचानें?

मैसेज के लिंक पर क्लिक न करें; ख़ुद echallan.parivahan.gov.in पर जाकर गाड़ी नंबर या चालान नंबर से जाँचें। ठगी हो जाए तो 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।

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