सीधा जवाब: PM-RAHAT (Prime Minister – Road Accident Victims’ Hospitalisation and Assured Treatment) योजना में किसी भी सड़क पर मोटर वाहन से हुए हादसे के हर घायल को नामित अस्पताल में ₹1.5 लाख तक, हादसे से 7 दिन तक कैशलेस इलाज मिलता है। प्रक्रिया: 112 पर कॉल करें → घायल को नामित अस्पताल पहुँचाएँ → अस्पताल इलाज शुरू करता है और TMS 2.0 पर ट्रीटमेंट ID बनाकर eDAR के ज़रिए पुलिस को भेजता है → पुलिस को सत्यापन के लिए 24 घंटे (जानलेवा मामलों में 48 घंटे) तक का समय मिलता है → भुगतान अस्पताल को सीधे मोटर वाहन दुर्घटना कोष से होता है।
योजना की बुनियादी बातें
सरकार द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी (PIB, 11 मार्च 2026) के अनुसार:
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| क़ानूनी आधार | मोटर वाहन अधिनियम की धारा 162; S.O. 2015(E), 5 मई 2025 |
| नाम | PM-RAHAT, S.O. 952(E), 19 फ़रवरी 2026; शुरुआत 13 फ़रवरी 2026 |
| इलाज की सीमा | प्रति घायल ₹1.5 लाख, हादसे से अधिकतम 7 दिन |
| स्थिरीकरण | गैर-जानलेवा 24 घंटे, जानलेवा 48 घंटे तक (पुलिस प्रतिक्रिया के अधीन) |
| अस्पताल | नामित अस्पताल; दिशानिर्देशों का पालन करने वाले PM-JAY अस्पताल भी नामित माने जाते हैं |
| भुगतान | मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) से अस्पताल को |
स्टेप-बाय-स्टेप: हादसे से डिस्चार्ज तक
सवालPM-RAHAT में हादसे से डिस्चार्ज तक प्रक्रिया क्या है?
जवाब: 1. मौके पर (मददगार/परिवार): – 112 पर कॉल करें। ऑपरेटर नज़दीकी नामित अस्पताल बताता है और ज़रूरत हो तो एम्बुलेंस भेजता है। – घायल को "गोल्डन ऑवर" में अस्पताल पहुँचाना सबसे ज़रूरी है। 2. अस्पताल में: – अस्पताल को बताएँ कि यह सड़क हादसा है और PM-RAHAT के तहत इलाज चाहिए। – अस्पताल NHA के हेल्थ बेनिफ़िट पैकेज के अनुसार इलाज शुरू करता है।
3. पुलिस सत्यापन (eDAR): – अस्पताल TMS पर ट्रीटमेंट ID बनाकर eDAR से ज़िला पुलिस को भेजता है। – पुलिस को 24 घंटे (जानलेवा मामलों में 48 घंटे) तक में जवाब देना होता है।
4. डिस्चार्ज और क्लेम: – अस्पताल ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) को क्लेम भेजता है। – SHA की मंज़ूरी के बाद 10 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है।

परिवार क्या करे
सवालहादसे के बाद घायल का परिवार क्या करे?
जवाब: घायल का पहचान पत्र (आधार आदि) उपलब्ध हो तो अस्पताल को दें।; हादसे की जगह, समय और वाहन की जानकारी पुलिस को दें।; बिल या "एडवांस" माँगा जाए तो योजना का हवाला दें और शिकायत करें।; ₹1.5 लाख/7 दिन से ज़्यादा का ख़र्च हो सकता है: इसके लिए बीमा/दूसरी योजनाएँ देखें।।
- घायल का पहचान पत्र (आधार आदि) उपलब्ध हो तो अस्पताल को दें।
- हादसे की जगह, समय और वाहन की जानकारी पुलिस को दें।
- बिल या “एडवांस” माँगा जाए तो योजना का हवाला दें और शिकायत करें।
- ₹1.5 लाख/7 दिन से ज़्यादा का ख़र्च हो सकता है: इसके लिए बीमा/दूसरी योजनाएँ देखें।
शिकायत कहाँ करें
सवालPM-RAHAT में शिकायत कहाँ करें?
जवाब: योजना में ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था है: 1. ज़िला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नियुक्त शिकायत निवारण अधिकारी (GRO)। 2. फिर ज़िलाधिकारी । 3. फिर राज्य सड़क सुरक्षा परिषद ।
मददगार को डर नहीं
घायल को अस्पताल पहुँचाने वाले “राह-वीर” (नेक मददगार) को क़ानूनी सुरक्षा है और राह-वीर योजना में ₹25,000 का इनाम भी है।
मुआवज़े और बीमा क्लेम के लिए ज़रूरी काग़ज़
सवालहादसे के बाद मुआवज़े या बीमा क्लेम के लिए कौन-से काग़ज़ चाहिए?
जवाब: हादसे के बाद परिवार सदमे में होता है और काग़ज़ों पर ध्यान नहीं जाता। लेकिन यही काग़ज़ आगे इलाज के ख़र्च, बीमा क्लेम या मुआवज़े में काम आते हैं। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत घायल व्यक्ति, गाड़ी/संपत्ति का मालिक या मृतक के क़ानूनी वारिस मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवज़े का आवेदन कर सकते हैं।
| काग़ज़ | क्यों ज़रूरी |
|---|---|
| FIR / पुलिस रिपोर्ट की कॉपी | हादसे का आधिकारिक रिकॉर्ड |
| अस्पताल की पर्ची, मेडिकल रिपोर्ट, बिल | चोट और ख़र्च का सबूत |
| गाड़ी का नंबर, RC, बीमा पॉलिसी की जानकारी | किस बीमा कंपनी से दावा होगा |
| मौक़े की तस्वीरें, गवाहों के नंबर | हादसा कैसे हुआ, इसका सबूत |
| आय का सबूत (सैलरी स्लिप, ITR आदि) | मुआवज़े की गणना में काम आता है |
| मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र | वारिसों के दावे के लिए |
अपनी गाड़ी के नुकसान पर: बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें, सर्वे से पहले गाड़ी की मरम्मत न कराएँ, और क्लेम नंबर लिख लें। किसी बिचौलिए को काग़ज़ या पैसे देने से पहले सोचें; सीधे बीमा कंपनी या वकील से बात करना सुरक्षित है।
गाड़ी का बीमा: कौन-सा ज़रूरी, कौन-सा समझदारी
सवालगाड़ी का कौन-सा बीमा ज़रूरी है?
जवाब: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत सार्वजनिक जगह पर कोई भी गाड़ी चलाने के लिए कम से कम थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है। यह बीमा उन लोगों के नुक़सान के लिए है जिन्हें आपकी गाड़ी से चोट या नुक़सान पहुँचे। 2019 संशोधन के बाद बिना बीमा गाड़ी चलाने पर पहली बार ₹2,000 जुर्माने का प्रावधान किया गया (राज्यों में कंपाउंडिंग की रक़म अलग हो सकती है)।
| बीमा का प्रकार | किसका नुक़सान कवर | ज़रूरी? |
|---|---|---|
| थर्ड-पार्टी | दूसरों को चोट, मौत या संपत्ति का नुक़सान | हाँ, क़ानूनन |
| ओन डैमेज / कॉम्प्रिहेंसिव | आपकी अपनी गाड़ी का नुक़सान (हादसा, आग, चोरी आदि, पॉलिसी के अनुसार) | नहीं, लेकिन समझदारी |
| पर्सनल एक्सीडेंट कवर | चालक/मालिक को चोट या मृत्यु | पॉलिसी के अनुसार |
ध्यान रखने की बातें:
- पॉलिसी की तारीख़ याद रखें; एक दिन की देरी में हुआ हादसा भारी पड़ सकता है।
- CNG किट या कोई बड़ा बदलाव हो, तो बीमा कंपनी को बताएँ।
- पॉलिसी में “Exclusions” (किन हालात में क्लेम नहीं मिलेगा) एक बार ज़रूर पढ़ें।
- हादसे या खड़ी गाड़ी को नुक़सान होने पर तुरंत बीमा कंपनी को सूचना दें और तस्वीरें लें।
रात में सफ़र: ज़्यादा सावधानी क्यों ज़रूरी
रात में दिखाई कम देता है, थकान और नींद का असर बढ़ जाता है, और सड़क किनारे बिना रोशनी के खड़े वाहन अचानक सामने आ जाते हैं। रात के सफ़र में ये आदतें मदद करती हैं:
- डिपर का सही इस्तेमाल: सामने से गाड़ी आए या आगे किसी गाड़ी के पीछे चल रहे हों, तो हाई-बीम से लो-बीम पर आएँ। सामने की तेज़ रोशनी से बचने के लिए नज़र सड़क के बाएँ किनारे पर रखें।
- रफ़्तार हेडलाइट की पहुँच के भीतर: जितनी दूर रोशनी में दिख रहा है, उतनी दूरी में रुक पाने वाली रफ़्तार रखें।
- नींद से लड़ें नहीं, रुकें: जम्हाई, आँखें भारी होना या लेन से भटकना नींद के संकेत हैं। सुरक्षित जगह रुककर आराम करें।
- खड़े वाहनों से सावधान: हाईवे पर बिना लाइट खड़े ट्रक या ट्रैक्टर-ट्रॉली बड़ा ख़तरा हैं; दूर से रफ़्तार कम करें।
- अपनी गाड़ी को दिखने लायक रखें: हेडलाइट, टेल-लाइट, ब्रेक लाइट और रिफ़्लेक्टर साफ़ और चालू हों।
- शीशे साफ़: गंदा विंडस्क्रीन रात में रोशनी बिखेरता है।
| जोखिम | बचाव |
|---|---|
| सामने से चकाचौंध | नज़र बाएँ किनारे पर, रफ़्तार कम |
| नींद | रुककर आराम, संभव हो तो ड्राइवर बदलें |
| सड़क किनारे खड़ा वाहन | दूर से धीमे, ओवरटेक सोच-समझकर |

निष्कर्ष
प्रक्रिया डिजिटल है, लेकिन शुरुआत एक कॉल से होती है: 112। घायल को समय पर अस्पताल पहुँचाइए, बाक़ी काम योजना करती है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड Help in an Emergency Situations भी पढ़ सकते हैं।
परिवार तक जल्दी सूचना पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए। मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 14 मई 2026
स्रोत (Sources)
- PIB, “PM RAHAT – Cashless Treatment of Road Accident Victims” (11 मार्च 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2238637
- PIB, “Cashless Treatment to Road Accident Victims” (29 जनवरी 2026): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2220125
- MoRTH, अधिसूचना S.O. 2015(E): https://morth.nic.in/hi/node/23038
- National Health Authority: https://nha.gov.in/
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988, धारा 166 (मुआवज़े के लिए आवेदन): https://indiacode.ecourtsindia.com/mv-act/section/166/
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (धारा 146) (India Code): https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
- PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
- MoRTH, सड़क सुरक्षा: https://morth.gov.in/road-safety
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या आयुष्मान कार्ड ज़रूरी है?
नहीं, कोई भी सड़क हादसा पीड़ित पात्र है।
2. अस्पताल पैसे माँगे तो?
योजना का हवाला दें; न मानें तो ज़िले के GRO/ज़िलाधिकारी से शिकायत करें।
3. हिट एंड रन में भी इलाज मिलेगा?
हाँ, PIB के अनुसार बिना बीमा और हिट एंड रन मामलों का भुगतान बजटीय सहायता से होता है।
8. अस्पताल को भुगतान कितने दिन में होता है?
PIB के अनुसार स्टेट हेल्थ एजेंसी की मंज़ूरी के बाद 10 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है।
9. सड़क हादसे में मुआवज़े का दावा कहाँ होता है?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में; दावा जितनी जल्दी हो सके करना बेहतर है और FIR, मेडिकल काग़ज़ व वाहन/बीमा की जानकारी संभालकर रखनी चाहिए।


