सीधा जवाब: 26 मार्च 2026 (गुरुवार) को दो बड़े बस हादसे हुए। आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम ज़िले में रायावरम के पास तड़के एक निजी बस और टिपर लॉरी की टक्कर के बाद आग लगने से 14 लोगों की मौत हुई और 28 घायल हुए। उसी शाम मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा ज़िले में नागपुर हाईवे पर एक बस और मिनी ट्रक की आमने-सामने टक्कर में 10 लोगों की मौत हुई और लगभग 35 घायल हुए। दोनों मामलों में शुरुआती आधिकारिक बयानों में ग़लत लेन/तेज़ रफ़्तार और ओवरटेक का ज़िक्र आया; जाँच जारी थी।
दोनों हादसे एक नज़र में
| बिंदु | मार्कापुरम (आंध्र प्रदेश) | छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) |
|---|---|---|
| समय | सुबह लगभग 5:30-6:00 बजे | शाम लगभग 7:15 बजे |
| जगह | रायावरम के पास, मार्कापुरम ज़िला | उमरानाला गाँव के पास, नागपुर हाईवे, मोहखेड़ थाना क्षेत्र |
| वाहन | निजी बस (42 यात्री) और गिट्टी से भरी टिपर लॉरी | निजी बस (45+ यात्री) और मिनी ट्रक |
| नुकसान | 14 मौतें, 28 घायल | 10 मौतें, लगभग 35 घायल |
| शुरुआती बयान | अधिकारियों के अनुसार बस विपरीत लेन में गई; चालक ने स्टीयरिंग जाम होने की बात कही | कलेक्टर के अनुसार दोनों वाहन तेज़ थे और बस ओवरटेक कर रही थी |
(स्रोत: The Hindu की 26 मार्च 2026 की रिपोर्टें)
मार्कापुरम: टक्कर के बाद आग क्यों फैली
सवालमार्कापुरम बस हादसे में आग इतनी तेज़ी से क्यों फैली?
जवाब: The Hindu के अनुसार बस लॉरी के डीज़ल टैंक से टकराई, जिससे धमाका हुआ। फायर विभाग के अधिकारियों ने कहा कि लॉरी के ईंधन और बस के AC बैटरी सिस्टम में संदिग्ध शॉर्ट सर्किट से आग और भड़की; बस में कुछ ज्वलनशील सामान भी था। गृह मंत्री ने बताया कि जाँच में चालक नशे में नहीं पाया गया और प्रथम दृष्टया चालक की लापरवाही लगती है, पूरी जाँच जारी है।

छिंदवाड़ा: ओवरटेक का जोखिम
सवालछिंदवाड़ा बस हादसा कैसे हुआ?
जवाब: कलेक्टर के अनुसार बस एक सरकारी कार्यक्रम से लौट रहे लोगों को ले जा रही थी। दोनों वाहन तेज़ थे और बस के ओवरटेक करते समय आमने-सामने टक्कर हुई; दोनों वाहनों के चालकों की भी मौत हुई।
जाँच में उठने वाले सवाल
सवालदोनों बस हादसों की जाँच में कौन से सवाल अहम हैं?
जवाब: ग़लत लेन और ओवरटेक: दो लेन की सड़क पर सामने से आते वाहन के सामने ओवरटेक सबसे घातक ग़लतियों में है।; वाहन की फ़िटनेस: स्टीयरिंग, ब्रेक और बिजली की वायरिंग की नियमित जाँच।; ज्वलनशील सामान: यात्री बसों में ऐसा सामान ले जाना आग का जोखिम बढ़ाता है।; चालक की थकान और योग्यता: रात/तड़के के सफ़र में।।
- ग़लत लेन और ओवरटेक: दो लेन की सड़क पर सामने से आते वाहन के सामने ओवरटेक सबसे घातक ग़लतियों में है।
- वाहन की फ़िटनेस: स्टीयरिंग, ब्रेक और बिजली की वायरिंग की नियमित जाँच।
- ज्वलनशील सामान: यात्री बसों में ऐसा सामान ले जाना आग का जोखिम बढ़ाता है।
- चालक की थकान और योग्यता: रात/तड़के के सफ़र में।
बस यात्रियों के लिए सुरक्षा सुझाव
सवालबस यात्री अपनी सुरक्षा के लिए क्या करें?
जवाब: बैठते ही इमरजेंसी गेट और खिड़की तोड़ने का हथौड़ा कहाँ है, देख लें।; बस बहुत तेज़ या ख़तरनाक ओवरटेक करे तो चालक/कंडक्टर से शांति से कहें; ज़रूरत हो तो 112 पर सूचना दें।; गैलरी में सामान न रखें, जिससे निकलने का रास्ता बंद हो।; धुआँ या जलने की गंध आए तो तुरंत चालक को बताएँ।।
- बैठते ही इमरजेंसी गेट और खिड़की तोड़ने का हथौड़ा कहाँ है, देख लें।
- बस बहुत तेज़ या ख़तरनाक ओवरटेक करे तो चालक/कंडक्टर से शांति से कहें; ज़रूरत हो तो 112 पर सूचना दें।
- गैलरी में सामान न रखें, जिससे निकलने का रास्ता बंद हो।
- धुआँ या जलने की गंध आए तो तुरंत चालक को बताएँ।
जब टक्कर मारकर भाग जाए: हिट-एंड-रन मुआवज़ा
सवालअगर टक्कर मारने वाली गाड़ी का पता न चले तो मुआवज़ा मिलता है?
जवाब: कई हादसों में टक्कर मारने वाला वाहन पकड़ा नहीं जाता। ऐसे पीड़ितों के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने 25 फ़रवरी 2022 को "Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022" अधिसूचित की, जो 1 अप्रैल 2022 से पुरानी सोलेशियम योजना, 1989 की जगह लागू है।
| स्थिति | पहले (सोलेशियम योजना) | अब (2022 योजना) |
|---|---|---|
| मृत्यु | ₹25,000 | ₹2,00,000 |
| गंभीर चोट | ₹12,500 | ₹50,000 |
कैसे आवेदन करें:
- हादसे की FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी लें, जिसमें लिखा हो कि वाहन का पता नहीं चला।
- इलाज के काग़ज़, मेडिकल रिपोर्ट और (मृत्यु के मामले में) पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र संभालकर रखें।
- योजना में दावा “Claims Enquiry Officer” के पास तय फ़ॉर्म में किया जाता है; मंज़ूरी “Claims Settlement Commissioner” देते हैं और राशि सीधे बैंक खाते में आती है। अपने इलाक़े के सही दफ़्तर की जानकारी पुलिस थाने या ज़िला प्रशासन से लें।
- बैंक खाते का विवरण और पहचान पत्र साथ रखें।
मंत्रालय के अनुसार आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है। अगर बाद में वाहन पकड़ा जाता है, तो मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में अलग से दावा भी किया जा सकता है।
मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं
हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि “पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे”। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए। इनके अनुसार नेकनीयती से आपात मदद करने वाले व्यक्ति पर घायल की चोट या मौत के लिए दीवानी या आपराधिक कार्रवाई नहीं होती।
| मदद करने वाले का अधिकार | इसका मतलब |
|---|---|
| तुरंत जाने की छूट | पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं |
| पहचान बताना ज़रूरी नहीं | पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता |
| अस्पताल का ख़र्च नहीं | अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता |
| पावती (रसीद) | नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है |
| गवाह बनना मर्ज़ी से | गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है |
नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।
हादसे की जगह पर पहले 10 मिनट: क्या करें
चोट लगने के बाद का पहला घंटा सबसे क़ीमती माना जाता है, इसलिए हादसे की जगह पर मौजूद आम लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। ज़रूरी है कि मदद करते हुए आप ख़ुद सुरक्षित रहें।
- अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
- 112 पर कॉल करें: जगह का नाम, नज़दीकी पहचान (पुल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किलोमीटर पत्थर) और घायलों की संख्या बताएँ।
- इंजन बंद कराएँ: हादसे वाली गाड़ी का इंजन बंद करवाएँ। ईंधन या गैस की गंध आए तो बीड़ी-सिगरेट और चिंगारी से दूर रहें।
- बिना ज़रूरत न हिलाएँ: गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो तो घायल को तभी हटाएँ जब आग या दूसरी गाड़ी से तुरंत ख़तरा हो।
- ख़ून रोकें: बहते ख़ून पर साफ़ कपड़े से लगातार दबाव रखें।
- होश में रखें: घायल से बात करते रहें, भीड़ हटाएँ ताकि हवा मिले। बेहोश व्यक्ति के मुँह में पानी न डालें।
- अस्पताल पहुँचाएँ: एम्बुलेंस देर से आए और घायल को ले जाना सुरक्षित हो, तो नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।
वीडियो बनाने से ज़्यादा ज़रूरी है मदद करना। अगर आप ख़ुद कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम सही जगह और जानकारी के साथ 112 पर कॉल ज़रूर करें।

निष्कर्ष
एक दिन, दो हादसे, 24 जानें। ग़लत लेन और जल्दबाज़ी वाला ओवरटेक कभी “थोड़ा सा जोखिम” नहीं होता। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
हादसे में घायल यात्रियों के परिवार तक जल्दी सूचना पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए। मदद करने वाला उसे स्कैन करके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 27 मार्च 2026
स्रोत (Sources)
- The Hindu, “At least 14 killed, 28 injured as bus collides with lorry, triggers blaze near A.P.’s Markapuram” (26 मार्च 2026): https://www.thehindu.com/news/national/andhra-pradesh/markapuram-road-accident-several-killed-many-injured/article70786585.ece
- The Hindu, “10 killed, 35 injured as bus collides with mini-truck in M.P.’s Chhindwara” (26 मार्च 2026): https://www.thehindu.com/news/national/madhya-pradesh/bus-accident-madhya-pradesh-chhindwara-several-killed-injured-updates/article70789466.ece
- PIB, हिट-एंड-रन पीड़ितों के मुआवज़े की नई योजना (25 फ़रवरी 2022): https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1801698
- PIB, लोकसभा उत्तर: हिट-एंड-रन मुआवज़ा और Motor Vehicle Accident Fund: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1845885
- PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
- MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. दोनों हादसों में कितनी मौतें हुईं?
मार्कापुरम में 14 और छिंदवाड़ा में 10 (The Hindu के अनुसार)।
2. क्या हादसों के कारण तय हो गए?
नहीं, ये शुरुआती आधिकारिक बयान हैं; विस्तृत जाँच जारी थी।
3. पीड़ितों के लिए कौन-सी सहायता घोषित हुई?
आंध्र सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹2 लाख; प्रधानमंत्री ने ₹2 लाख और ₹50,000 की अनुग्रह राशि; मध्य प्रदेश सरकार ने ₹4 लाख और गंभीर घायलों को ₹1 लाख की घोषणा की।
4. हिट-एंड-रन हादसे में कितना मुआवज़ा मिलता है?
Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022 के तहत मृत्यु पर ₹2 लाख और गंभीर चोट पर ₹50,000 का मुआवज़ा तय है; यह योजना 1 अप्रैल 2022 से लागू है।
5. क्या घायल को अस्पताल पहुँचाने वाले को अपना नाम बताना ज़रूरी है?
नहीं। गुड समैरिटन नियमों (2020) के अनुसार पुलिस या कोई और व्यक्ति मदद करने वाले को नाम, पता या दूसरी निजी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता; बताना या गवाह बनना उसकी अपनी मर्ज़ी है।


