सीधा जवाब: अगर कोई अज्ञात गाड़ी टक्कर मारकर भाग जाए और पुलिस कोशिश के बाद भी गाड़ी या उसके मालिक/चालक का पता न लगा पाए, तो Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022 के तहत मौत पर ₹2,00,000 और गंभीर चोट पर ₹50,000 का तय मुआवज़ा मिलता है। यह 1 अप्रैल 2022 या उसके बाद हुए हादसों पर लागू है। दावा फ़ॉर्म I में, फ़ॉर्म IV (रिफ़ंड का वचन-पत्र) और काग़ज़ों के साथ, हादसे वाली जगह के उप-मंडल अधिकारी (SDM)/तहसीलदार के पास जमा होता है। इसमें अदालत या वकील की ज़रूरत नहीं है।
यह योजना क्यों ज़रूरी है?
सामान्य हादसे में पीड़ित परिवार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में गाड़ी के मालिक और बीमा कंपनी के ख़िलाफ़ दावा करता है। लेकिन हिट-एंड-रन में न गाड़ी का नंबर पता होता है, न मालिक, न बीमा कंपनी, इसलिए MACT का रास्ता बंद हो जाता है। ऐसे परिवारों के लिए सरकार ने तय मुआवज़े की योजना बनाई है।
जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के दस्तावेज़ के अनुसार हिट-एंड-रन मुआवज़ा पहली बार 1982 में शुरू हुआ था और इसकी राशि आख़िरी बार 1994 में बदली गई थी। मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 के बाद नई योजना में राशि बढ़ाकर मौत पर ₹2 लाख (पहले ₹25,000) और गंभीर चोट पर ₹50,000 (पहले ₹12,500) की गई।
कितना मुआवज़ा मिलता है?
सवालहिट-एंड-रन में कितना मुआवज़ा मिलता है?
जवाब: मृत्यु: ₹2,00,000; गंभीर चोट (grievous hurt): ₹50,000 गंभीर चोट के मामले में पैसा ख़ुद घायल व्यक्ति को मिलता है; मौत के मामले में कानूनी वारिस/आश्रित को।
| स्थिति | मुआवज़ा (1 अप्रैल 2022 से) |
|---|---|
| मृत्यु | ₹2,00,000 |
| गंभीर चोट (grievous hurt) | ₹50,000 |

कौन दावा कर सकता है?
सवालहिट-एंड-रन का दावा कौन कर सकता है?
जवाब: गंभीर रूप से घायल व्यक्ति ख़ुद।; मौत होने पर मृतक के कानूनी प्रतिनिधि/आश्रित।। ध्यान दें: यह योजना सिर्फ़ उन मामलों के लिए है जहाँ टक्कर मारने वाली गाड़ी की पहचान नहीं हो सकी। अगर गाड़ी पहचान ली गई है, तो दावा MACT में करना होगा, इस योजना में नहीं।
- गंभीर रूप से घायल व्यक्ति ख़ुद।
- मौत होने पर मृतक के कानूनी प्रतिनिधि/आश्रित।
ज़रूरी काग़ज़
सवालदावे के साथ कौन-से काग़ज़ लगते हैं?
जवाब: फ़ॉर्म I (आवेदन) और फ़ॉर्म IV (वचन-पत्र) के साथ ये काग़ज़ लगाएँ: दावेदार के बैंक खाते की पासबुक की कॉपी (खाताधारक का नाम, खाता नंबर, शाखा, IFSC)।; अस्पताल का कैशलेस इलाज बिल, अगर कोई हो।; पीड़ित का पहचान और पते का प्रमाण।; दावेदार का पहचान और पते का प्रमाण।; पुलिस FIR की कॉपी।; मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट।; मृत्यु प्रमाण पत्र या चोट की रिपोर्ट, जो लागू हो।।
- दावेदार के बैंक खाते की पासबुक की कॉपी (खाताधारक का नाम, खाता नंबर, शाखा, IFSC)।
- अस्पताल का कैशलेस इलाज बिल, अगर कोई हो।
- पीड़ित का पहचान और पते का प्रमाण।
- दावेदार का पहचान और पते का प्रमाण।
- पुलिस FIR की कॉपी।
- मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट।
- मृत्यु प्रमाण पत्र या चोट की रिपोर्ट, जो लागू हो।
फ़ॉर्म I में बैंक खाते की जानकारी (बिंदु 6) ज़रूर भरें, क्योंकि पैसा सीधे खाते में आता है।
दावा किसके पास और कैसे?
सवालदावा किसके पास और कैसे जमा होता है?
जवाब: चरण 1: दावा जाँच अधिकारी (Claims Enquiry Officer)। यह हादसे वाली जगह के राजस्व उप-मंडल का अधिकारी होता है, जैसे SDM या तहसीलदार। फ़ॉर्म I और काग़ज़ यहीं जमा होते हैं। चरण 2: जाँच रिपोर्ट। अधिकारी FIR की सच्चाई जाँचकर और सही दावेदार तय करके एक महीने के अंदर फ़ॉर्म II में रिपोर्ट दावा निपटान आयुक्त को भेजता है।
चरण 3: दावा निपटान आयुक्त (Claims Settlement Commissioner)। यह ज़िलाधिकारी/उपायुक्त/कलेक्टर होता है, जो रिपोर्ट मिलने के 15 दिन के अंदर फ़ॉर्म III में आदेश देता है। ज़रूरत लगे तो 15 दिन में दोबारा जाँच करवा सकता है।
चरण 4: भुगतान। मंज़ूरी के बाद राशि दावेदार के बैंक खाते में भेजी जाती है।
फ़ॉर्म IV (रिफ़ंड का वचन-पत्र) क्यों?
फ़ॉर्म IV में दावेदार लिखकर देता है कि अगर बाद में गाड़ी की पहचान हो जाए और उसी हादसे के लिए दूसरी जगह से मुआवज़ा मिले, तो योजना से मिली राशि लौटाई जाएगी। इसलिए जो भी मुआवज़ा मिले, उसकी जानकारी सच्ची और पूरी दें।
परिवार के लिए व्यावहारिक सुझाव
- हादसे के बाद जितनी जल्दी हो सके FIR दर्ज कराएँ और उसकी कॉपी लें।
- अस्पताल के सभी काग़ज़, बिल और रिपोर्ट एक फ़ाइल में संभालें।
- आस-पास के CCTV या किसी चश्मदीद की जानकारी पुलिस को दें; गाड़ी मिल गई तो MACT का बड़ा दावा भी संभव है।
- दावा जमा करने की रसीद लें और तहसील कार्यालय से आवेदन की स्थिति पूछते रहें।
हादसे की जगह पर पहले 10 मिनट: क्या करें
सवालहादसे की जगह पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
जवाब: चोट लगने के बाद का पहला घंटा सबसे क़ीमती माना जाता है, इसलिए हादसे की जगह पर मौजूद आम लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। ज़रूरी है कि मदद करते हुए आप ख़ुद सुरक्षित रहें। अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
- अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
- 112 पर कॉल करें: जगह का नाम, नज़दीकी पहचान (पुल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किलोमीटर पत्थर) और घायलों की संख्या बताएँ।
- इंजन बंद कराएँ: हादसे वाली गाड़ी का इंजन बंद करवाएँ। ईंधन या गैस की गंध आए तो बीड़ी-सिगरेट और चिंगारी से दूर रहें।
- बिना ज़रूरत न हिलाएँ: गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो तो घायल को तभी हटाएँ जब आग या दूसरी गाड़ी से तुरंत ख़तरा हो।
- ख़ून रोकें: बहते ख़ून पर साफ़ कपड़े से लगातार दबाव रखें।
- होश में रखें: घायल से बात करते रहें, भीड़ हटाएँ ताकि हवा मिले। बेहोश व्यक्ति के मुँह में पानी न डालें।
- अस्पताल पहुँचाएँ: एम्बुलेंस देर से आए और घायल को ले जाना सुरक्षित हो, तो नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।
वीडियो बनाने से ज़्यादा ज़रूरी है मदद करना। अगर आप ख़ुद कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम सही जगह और जानकारी के साथ 112 पर कॉल ज़रूर करें।
मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं
हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि “पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे”। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए। इनके अनुसार नेकनीयती से आपात मदद करने वाले व्यक्ति पर घायल की चोट या मौत के लिए दीवानी या आपराधिक कार्रवाई नहीं होती।
| मदद करने वाले का अधिकार | इसका मतलब |
|---|---|
| तुरंत जाने की छूट | पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं |
| पहचान बताना ज़रूरी नहीं | पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता |
| अस्पताल का ख़र्च नहीं | अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता |
| पावती (रसीद) | नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है |
| गवाह बनना मर्ज़ी से | गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है |
नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।

निष्कर्ष
हिट-एंड-रन में परिवार अक्सर यह मान लेता है कि अब कोई सहारा नहीं। ऐसा नहीं है: तय मुआवज़ा कानूनी हक़ है, और प्रक्रिया ज़िला प्रशासन के ज़रिए होती है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
हादसे के समय सबसे बड़ी दिक़्क़त अक्सर यह होती है कि घायल के परिवार को ख़बर कैसे पहुँचे। गाड़ी पर Rakshak Code QR लगा हो तो मदद करने वाला उसे स्कैन करके सीधे आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 25 अक्टूबर 2026
स्रोत (Sources)
- General Insurance Council, Hit and Run Motor Accident Compensation Claims (15 अगस्त 2023): https://www.gicouncil.in/media/4262/hit-and-run-motor-accident-compensation-claims.pdf
- हिमाचल प्रदेश सड़क सुरक्षा, Hit and Run Scheme 2022 की अधिसूचना: https://roadsafety.hp.gov.in/storage/files/notofication/hit%20and%20run%20scheme%202022.pdf
- LiveLaw, New Motor Vehicles Act Provisions Effective From April 1 (31 मार्च 2022): https://www.livelaw.in/know-the-law/new-motor-vehicles-act-provisions-effective-from-april-1-limitation-for-mact-claims-removal-of-2nd-schedule-more-195450
- ज़िला प्रशासन पथनमथिट्टा, Hit and Run योजना: https://pathanamthitta.nic.in/en/hitandrun/
- PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
- MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. हिट-एंड-रन में कितना मुआवज़ा मिलता है?
मौत पर ₹2 लाख और गंभीर चोट पर ₹50,000 (1 अप्रैल 2022 या उसके बाद के हादसों के लिए)।
2. दावा कहाँ जमा होता है?
हादसे वाली जगह के दावा जाँच अधिकारी (SDM/तहसीलदार या राजस्व उप-मंडल के प्रभारी अधिकारी) के पास।
3. कितने दिन लगते हैं?
योजना के अनुसार जाँच रिपोर्ट एक महीने में और आयुक्त का आदेश रिपोर्ट मिलने के 15 दिन में होना चाहिए।
4. गाड़ी पहचान ली गई हो तो?
तब यह योजना लागू नहीं होती; दावा MACT में किया जाता है।
5. क्या हिट-एंड-रन योजना में अदालत जाना पड़ता है?
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