अमरोहा: नौगावां सादात रोड पर बेकाबू काली थार ने एक के बाद एक 3 बाइकों को रौंदा, चचेरे भाई राजीव और प्रशांत की मौत; चालक फ़रार

सीधा जवाब: मंगलवार, 3 नवंबर 2026 की रात उत्तर प्रदेश के अमरोहा में नौगावां सादात-अमरोहा रोड पर संभल नंबर की एक तेज़ रफ़्तार काली महिंद्रा थार ने एक के बाद एक तीन मोटरसाइकिलों को टक्कर मार दी। चचेरे भाई राजीव कुमार (23) और प्रशांत (21) की मौके पर ही मौत हो गई और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए। थार पुलिस के कब्ज़े में है, पर चालक भीड़ का फ़ायदा उठाकर फ़रार हो गया।

हादसा कैसे हुआ

सवालअमरोहा में थार हादसा कैसे हुआ?

जवाब: दैनिक जागरण के अनुसार हादसा रीगल होटल से आगे अमरोहा नगर की सीमा पर हुआ। अमरोहा की तरफ़ से आ रही थार ने तीन बाइकों को एक के बाद एक टक्कर मारी। (बाइकें किस दिशा में जा रही थीं, इस पर जागरण और TOI की रिपोर्ट में फ़र्क है।) टक्कर इतनी तेज़ थी कि बाइक सवार उछलकर दूर जा गिरे और थार का अगला हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया।

दोनों मृतक अमरोहा नगर के रहने वाले थे (राजीव जयओम नगर के; प्रशांत का पता जागरण ने जयओम नगर और TOI ने डाक बंगला बताया है)। जागरण के मुताबिक़ राजीव पिता के साथ रेलवे स्टेशन रोड पर टायर पंचर की दुकान पर बैठते थे, जबकि प्रशांत परिवार के इकलौते बेटे थे और इसी साल 12वीं पास की थी।

बिंदु जानकारी
तारीख़ 3 नवंबर 2026 (मंगलवार) की रात
जगह नौगावां सादात-अमरोहा रोड, अमरोहा नगर सीमा (UP)
वाहन संभल नंबर की काली महिंद्रा थार, 3 मोटरसाइकिलें
मौतें 2 (राजीव कुमार 23, प्रशांत 21)
घायल 3 (गंभीर)
चालक फ़रार; थार ज़ब्त

हादसे के बाद क्या हुआ

सवालहादसे के बाद पुलिस और परिवार ने क्या कहा?

जवाब: पुलिस दोनों शवों को नगर CHC ले गई। जागरण के अनुसार दो घायलों को राहगीर निजी अस्पताल ले गए और एक घायल को CHC से ज़िला अस्पताल रेफ़र किया गया। परिजनों ने चालक की गिरफ़्तारी की माँग को लेकर क़रीब दो घंटे तक शव नहीं उठने दिए। CO डॉ.

The Times of India की रिपोर्ट में परिजनों का यह आरोप भी है कि हादसे के बाद कॉल करने पर पुलिस समय पर नहीं पहुँची। हादसे के बाद का पहला घंटा (गोल्डन ऑवर) घायलों के लिए सबसे अहम होता है, इसलिए राहगीरों की तुरंत मदद कई बार जान बचा देती है।

सड़क पर मोटरसाइकिल (प्रतीकात्मक)
Photo: vivekdchugh via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

हिट-एंड-रन में क्या करें

सवालहिट-एंड-रन हादसा दिखे तो क्या करना चाहिए?

जवाब: सबसे पहले 112 पर कॉल करें; एम्बुलेंस के लिए 108 भी मिला सकते हैं। जगह का साफ़ पता या लैंडमार्क बताएँ।; भागने वाली गाड़ी का नंबर, रंग और मॉडल नोट करें या फ़ोटो लें; यह FIR और मुआवज़े दोनों में काम आता है।; घायल को सुरक्षित तरीके से नज़दीकी अस्पताल पहुँचाने में मदद करें।

  1. सबसे पहले 112 पर कॉल करें; एम्बुलेंस के लिए 108 भी मिला सकते हैं। जगह का साफ़ पता या लैंडमार्क बताएँ।
  2. भागने वाली गाड़ी का नंबर, रंग और मॉडल नोट करें या फ़ोटो लें; यह FIR और मुआवज़े दोनों में काम आता है।
  3. घायल को सुरक्षित तरीके से नज़दीकी अस्पताल पहुँचाने में मदद करें। गुड समैरिटन यानी मदद करने वाले को क़ानूनी सुरक्षा है; पुलिस या अस्पताल उन्हें अपना नाम-पता देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।
  4. मदद करने वाले को राह-वीर योजना में ₹25,000 का इनाम भी मिल सकता है; विवरण हमारी पोस्ट राह-वीर योजना में है।
  5. पीड़ित परिवार FIR, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अस्पताल के काग़ज़ संभालकर रखे; दावे की पूरी प्रक्रिया हिट-एंड-रन मुआवज़ा दावा में देखें।

हाल के दूसरे हिट-एंड-रन मामलों पर हमारी पोस्ट रोहतक हिट-एंड-रन भी पढ़ें।

जब टक्कर मारकर भाग जाए: हिट-एंड-रन मुआवज़ा

सवालअगर टक्कर मारने वाली गाड़ी का पता न चले तो मुआवज़ा मिलता है?

जवाब: कई हादसों में टक्कर मारने वाला वाहन पकड़ा नहीं जाता। ऐसे पीड़ितों के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने 25 फ़रवरी 2022 को "Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022" अधिसूचित की, जो 1 अप्रैल 2022 से पुरानी सोलेशियम योजना, 1989 की जगह लागू है।

स्थिति पहले (सोलेशियम योजना) अब (2022 योजना)
मृत्यु ₹25,000 ₹2,00,000
गंभीर चोट ₹12,500 ₹50,000

कैसे आवेदन करें:

  1. हादसे की FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी लें, जिसमें लिखा हो कि वाहन का पता नहीं चला।
  2. इलाज के काग़ज़, मेडिकल रिपोर्ट और (मृत्यु के मामले में) पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र संभालकर रखें।
  3. योजना में दावा “Claims Enquiry Officer” के पास तय फ़ॉर्म में किया जाता है; मंज़ूरी “Claims Settlement Commissioner” देते हैं और राशि सीधे बैंक खाते में आती है। अपने इलाक़े के सही दफ़्तर की जानकारी पुलिस थाने या ज़िला प्रशासन से लें।
  4. बैंक खाते का विवरण और पहचान पत्र साथ रखें।

मंत्रालय के अनुसार आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है। अगर बाद में वाहन पकड़ा जाता है, तो मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में अलग से दावा भी किया जा सकता है।

मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं

सवालघायल की मदद करने पर क्या पुलिस परेशान कर सकती है?

जवाब: हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि "पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे"। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए।

मदद करने वाले का अधिकार इसका मतलब
तुरंत जाने की छूट पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं
पहचान बताना ज़रूरी नहीं पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता
अस्पताल का ख़र्च नहीं अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता
पावती (रसीद) नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है
गवाह बनना मर्ज़ी से गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है

नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।

हादसे की जगह पर पहले 10 मिनट: क्या करें

चोट लगने के बाद का पहला घंटा सबसे क़ीमती माना जाता है, इसलिए हादसे की जगह पर मौजूद आम लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। ज़रूरी है कि मदद करते हुए आप ख़ुद सुरक्षित रहें।

  1. अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
  2. 112 पर कॉल करें: जगह का नाम, नज़दीकी पहचान (पुल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किलोमीटर पत्थर) और घायलों की संख्या बताएँ।
  3. इंजन बंद कराएँ: हादसे वाली गाड़ी का इंजन बंद करवाएँ। ईंधन या गैस की गंध आए तो बीड़ी-सिगरेट और चिंगारी से दूर रहें।
  4. बिना ज़रूरत न हिलाएँ: गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो तो घायल को तभी हटाएँ जब आग या दूसरी गाड़ी से तुरंत ख़तरा हो।
  5. ख़ून रोकें: बहते ख़ून पर साफ़ कपड़े से लगातार दबाव रखें।
  6. होश में रखें: घायल से बात करते रहें, भीड़ हटाएँ ताकि हवा मिले। बेहोश व्यक्ति के मुँह में पानी न डालें।
  7. अस्पताल पहुँचाएँ: एम्बुलेंस देर से आए और घायल को ले जाना सुरक्षित हो, तो नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।

वीडियो बनाने से ज़्यादा ज़रूरी है मदद करना। अगर आप ख़ुद कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम सही जगह और जानकारी के साथ 112 पर कॉल ज़रूर करें।

इमरजेंसी में एम्बुलेंस (प्रतीकात्मक)
Photo: wal_172619 via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

निष्कर्ष

अमरोहा हादसे ने एक ही रात में दो परिवारों के बेटे छीन लिए। तेज़ रफ़्तार SUV, रात का समय और हादसे के बाद भाग जाना, यह पैटर्न बार-बार दिख रहा है। राहगीर के तौर पर तुरंत 112 पर कॉल करना और घायल की मदद करना सबसे बड़ा योगदान है। हादसे की हालत में आपके परिवार तक तुरंत ख़बर पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाएँ; स्कैन करने वाला आपका नंबर देखे बिना इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को कॉल कर सकता है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।

आख़िरी अपडेट: 5 नवंबर 2026

स्रोत (Sources)

  1. दैनिक जागरण, अमरोहा में बेकाबू काली थार का कहर: बाइकों को मारी टक्कर, दो भाइयों की मौत (4 नवंबर 2026): https://www.jagran.com/uttar-pradesh/amroha-city-high-speed-thar-killed-two-cousins-three-others-injured-amroha-accident-40426809.html
  2. The Times of India, SUV runs amok, rams 3 bikes; 2 cousins dead (4 नवंबर 2026): https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/suv-runs-amok-rams-3-bikes-2-cousins-dead/articleshow/135547446.cms
  3. मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (धारा 134A, गुड समैरिटन), India Code: https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
  4. PIB, हिट-एंड-रन पीड़ितों के मुआवज़े की नई योजना (25 फ़रवरी 2022): https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1801698
  5. PIB, लोकसभा उत्तर: हिट-एंड-रन मुआवज़ा और Motor Vehicle Accident Fund: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1845885
  6. PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
  7. MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. अमरोहा हादसा कहाँ हुआ?

3 नवंबर 2026 की रात नौगावां सादात-अमरोहा रोड पर रीगल होटल से आगे, अमरोहा नगर की सीमा पर।

2. हादसे में किनकी मौत हुई?

अमरोहा नगर के चचेरे भाई राजीव कुमार (23) और प्रशांत (21) की।

3. क्या थार चालक पकड़ा गया?

4 नवंबर की रिपोर्टों तक चालक फ़रार था; थार पुलिस के कब्ज़े में है और उसकी तलाश की जा रही थी।

4. घायल की मदद करने पर क्या पुलिस परेशान करेगी?

नहीं। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134A के तहत गुड समैरिटन को सिविल या आपराधिक ज़िम्मेदारी से सुरक्षा है, और उन्हें गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

5. हिट-एंड-रन में मुआवज़ा कितना मिलता है?

अगर टक्कर मारने वाली गाड़ी की पहचान न हो सके, तो केंद्र की हिट-एंड-रन मुआवज़ा योजना में मौत पर ₹2 लाख और गंभीर चोट पर ₹50,000 मिलते हैं। इस मामले में थार पुलिस के कब्ज़े में है, इसलिए परिवार वाहन के बीमा के आधार पर MACT में पूरा मुआवज़ा माँग सकता है।

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