सीधा जवाब: ETV भारत की रिपोर्ट के अनुसार 29 अक्टूबर 2026 को आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र में अरतौनी के पास आगरा-दिल्ली हाईवे की रेलिंग पार कर रहीं अंजू और उनके बच्चों को मथुरा की ओर से आ रही तेज़ रफ़्तार कार ने टक्कर मार दी। अंजू और उनके दो साल के बेटे अंश की मौत हो गई, और पांच साल की बेटी आकांक्षा गंभीर है। चालक कार लेकर फ़रार हो गया। ऐसे हिट-एंड-रन मामलों में सरकार की योजना के तहत मौत पर ₹2 लाख और गंभीर चोट पर ₹50,000 मुआवज़ा मिलता है।
हादसा कैसे हुआ
सवालआगरा-दिल्ली हाईवे पर यह हादसा कैसे हुआ?
जवाब: रिपोर्ट के अनुसार परिवार हाईवे के बीच लगी रेलिंग पार कर रहा था, तभी तेज़ रफ़्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी। थाना प्रभारी राजीव त्यागी के अनुसार मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और फ़रार चालक की तलाश की जा रही है।
हाईवे की रेलिंग पार करना क्यों जानलेवा है
हाईवे पर वाहन तेज़ चलते हैं, और ड्राइवर को सड़क पर अचानक आए पैदल यात्री को देखकर रुकने का समय नहीं मिलता। रेलिंग पार करते समय, ख़ासकर बच्चों के साथ, सड़क पर ज़्यादा देर रुकना पड़ता है।
- जहाँ भी हो, फ़ुट ओवरब्रिज, अंडरपास या ज़ेब्रा क्रॉसिंग से ही सड़क पार करें, भले थोड़ा पैदल चलना पड़े।
- रेलिंग या डिवाइडर पर बच्चों को लेकर न चढ़ें।
- शाम और रात में हल्के या चमकीले कपड़े पहनें, ताकि ड्राइवर दूर से देख सकें।
- जिस जगह लोग रोज़ रेलिंग पार करते हैं, वहाँ ग्राम प्रधान या स्थानीय प्रशासन के ज़रिए NHAI से अंडरपास या फ़ुट ओवरब्रिज की माँग करें। ऐसी जगहें अक्सर ब्लैक स्पॉट बन जाती हैं: ब्लैक स्पॉट क्या हैं।

हिट-एंड-रन मुआवज़ा योजना, 2022
सवालहिट-एंड-रन हादसे में कितना मुआवज़ा मिलता है?
जवाब: जब टक्कर मारने वाली गाड़ी का पता न चले, तब पीड़ित परिवार हिट-एंड-रन मोटर दुर्घटना पीड़ित मुआवज़ा योजना, 2022 के तहत मुआवज़ा माँग सकता है। यह योजना 1 अप्रैल 2022 से लागू है और इसने 1989 की सोलेशियम योजना की जगह ली। मौत: ₹2,00,000; गंभीर चोट: ₹50,000
| स्थिति | मुआवज़ा |
|---|---|
| मौत | ₹2,00,000 |
| गंभीर चोट | ₹50,000 |
दावा कैसे करें
सवालहिट-एंड-रन मुआवज़े का दावा कैसे करें?
जवाब: फ़ॉर्म-I भरकर उस सब-डिविज़न या तहसील के दावा जाँच अधिकारी (Claims Enquiry Officer) के पास जमा करें जहाँ हादसा हुआ।; साथ में FIR, पोस्टमार्टम या मेडिकल रिपोर्ट और पहचान पत्र लगाएँ।; योजना के अनुसार जाँच अधिकारी को एक महीने में रिपोर्ट देनी होती है, उसके बाद 15 दिन में मंज़ूरी और मंज़ूरी के 15 दिन में भुगतान होना है।
- फ़ॉर्म-I भरकर उस सब-डिविज़न या तहसील के दावा जाँच अधिकारी (Claims Enquiry Officer) के पास जमा करें जहाँ हादसा हुआ।
- साथ में FIR, पोस्टमार्टम या मेडिकल रिपोर्ट और पहचान पत्र लगाएँ।
- योजना के अनुसार जाँच अधिकारी को एक महीने में रिपोर्ट देनी होती है, उसके बाद 15 दिन में मंज़ूरी और मंज़ूरी के 15 दिन में भुगतान होना है।
- घायल के इलाज के लिए कैशलेस योजना भी है: पीएम राहत: ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज।
- बाद में गाड़ी पकड़ी जाए तो मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में भी दावा किया जा सकता है।
मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं
सवालघायल की मदद करने पर क्या पुलिस परेशान कर सकती है?
जवाब: हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि "पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे"। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए।
| मदद करने वाले का अधिकार | इसका मतलब |
|---|---|
| तुरंत जाने की छूट | पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं |
| पहचान बताना ज़रूरी नहीं | पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता |
| अस्पताल का ख़र्च नहीं | अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता |
| पावती (रसीद) | नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है |
| गवाह बनना मर्ज़ी से | गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है |
नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।
कैशलेस इलाज की योजना: घायल के परिवार को क्या पता होना चाहिए
सवालसड़क हादसे में घायल को मुफ़्त इलाज कैसे मिल सकता है?
जवाब: हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता अक्सर अस्पताल का ख़र्च होती है। केंद्र सरकार ने 5 मई 2025 को "Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025" अधिसूचित की और 4 जून 2025 को इसके दिशानिर्देश जारी किए। संसद में दी गई जानकारी (7 अगस्त 2025) के अनुसार यह योजना पूरे देश में लागू है।
| बात | योजना में क्या है |
|---|---|
| कौन हक़दार | मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुए सड़क हादसे का कोई भी घायल |
| कितना | हर घायल के लिए ₹1.5 लाख तक का इलाज |
| कितने दिन | हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन |
| कहाँ | देशभर के नामित (designated) अस्पताल |
| तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म | राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) का IT सिस्टम |
यह योजना आयुष्मान भारत (PM-JAY) का हिस्सा नहीं है, बल्कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत बनी अलग वैधानिक योजना है। बीमित वाहन से हादसे में बीमा कंपनियाँ योगदान देती हैं और बिना बीमा वाले वाहनों के मामलों में केंद्र सरकार बजट से मदद देती है।
परिवार क्या करे: अस्पताल पहुँचते ही बताइए कि मरीज़ सड़क हादसे का घायल है और पूछिए कि अस्पताल इस योजना में नामित है या नहीं। पुलिस को हादसे की सूचना ज़रूर दिलवाइए, क्योंकि सत्यापन के लिए इसकी ज़रूरत पड़ती है। पहचान पत्र और मोबाइल नंबर तैयार रखिए।

निष्कर्ष
एक परिवार ने कुछ सेकंड की जल्दबाज़ी में दो ज़िंदगियाँ खो दीं। हाईवे को सिर्फ़ तय जगह से पार करें, और हिट-एंड-रन में पीड़ित परिवार को मुआवज़ा योजना की जानकारी ज़रूर दें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए। हादसे की स्थिति में मदद करने वाला व्यक्ति QR स्कैन करके आपके परिवार या इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को तुरंत ख़बर दे सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
आख़िरी अपडेट: 30 अक्टूबर 2026
यह भी पढ़ें: रोहतक शिमली हिट-एंड-रन: टायर बदल रहे 3 मज़दूरों की मौत
स्रोत (Sources)
- ETV भारत, आगरा में सड़क हादसे में मां-बेटे की मौत (29 अक्टूबर 2026): https://www.etvbharat.com/hi/state/mother-and-son-die-road-accident-daughter-undergoing-treatment-in-agra-ups26102907406
- PIB, हिट-एंड-रन मुआवज़ा योजना, 2022: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1801656
- अधिसूचना GSR 163(E), 25 फ़रवरी 2022 (Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022): https://indiacode.ecourtsindia.com/rules/gsr-163-e-25-feb-2022-compensation-to-victims-of-hit-and-run-motor-504efe4c/
- PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
- MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf
- PIB, “Cashless treatment for Road accident victims” (7 अगस्त 2025): https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2153890
- भारत का राजपत्र, S.O. 2015(E), 5 मई 2025 (Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/262912.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. आगरा हादसा कहाँ और कब हुआ?
29 अक्टूबर 2026 को सिकंदरा थाना क्षेत्र में अरतौनी के पास आगरा-दिल्ली हाईवे पर।
2. हिट-एंड-रन में मौत पर कितना मुआवज़ा मिलता है?
योजना 2022 के तहत ₹2 लाख; गंभीर चोट पर ₹50,000।
3. दावा किसके पास करना होता है?
फ़ॉर्म-I में, हादसे वाले सब-डिविज़न या तहसील के दावा जाँच अधिकारी के पास।
4. भुगतान में कितना समय लगता है?
योजना के अनुसार जाँच रिपोर्ट एक महीने में, मंज़ूरी 15 दिन में और भुगतान मंज़ूरी के 15 दिन में होना है।
5. हिट-एंड-रन मुआवज़े के लिए किसके पास आवेदन करना होता है?
योजना के अनुसार फ़ॉर्म-I में आवेदन उस सब-डिविज़न या तहसील के दावा जाँच अधिकारी (Claims Enquiry Officer) के पास करना होता है जहाँ हादसा हुआ।


