राह-वीर योजना: घायल को समय पर अस्पताल पहुँचाने वाले को ₹25,000 का इनाम

सीधा जवाब: सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) की “राह-वीर” (गुड समैरिटन) योजना के तहत जो व्यक्ति मोटर वाहन से जुड़े गंभीर हादसे के घायल को तुरंत मदद देकर गोल्डन आवर (पहले एक घंटे) में अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुँचाता है, उसे ₹25,000 का इनाम और प्रशंसा पत्र मिलता है। एक व्यक्ति साल में अधिकतम 5 बार यह इनाम पा सकता है। साथ ही, मददगार को क़ानून की धारा 134A और 2020 के गुड समैरिटन नियमों से सुरक्षा मिलती है।

राह-वीर कौन है?

सवालराह-वीर कौन है?

जवाब: PIB के अनुसार जो लोग किसी अनजान घायल को उठाकर नज़दीकी अस्पताल पहुँचाते हैं, अक्सर उसका नाम जाने बिना, उन्हें "राह-वीर" कहा जाता है। योजना का मकसद ऐसे लोगों का सम्मान करना और दूसरों को भी बिना डर मदद के लिए प्रेरित करना है।

इनाम कितना और कैसे?

सवालराह-वीर को इनाम कितना और कैसे मिलता है?

जवाब: MoRTH की योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार: इनाम की राशि: ₹25,000 प्रति घटना, साथ में प्रशंसा पत्र; एक घटना, कई घायल, एक मददगार: ₹25,000 ही; एक घटना, कई मददगार: ₹25,000 सबमें बराबर बँटेगा (दिशानिर्देशों के अनुसार); साल में अधिकतम: 5 बार; राष्ट्रीय सम्मान: साल के 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों को ₹1 लाख, प्रमाणपत्र और ट्रॉफ़ी

प्रावधान विवरण
इनाम की राशि ₹25,000 प्रति घटना, साथ में प्रशंसा पत्र
एक घटना, कई घायल, एक मददगार ₹25,000 ही
एक घटना, कई मददगार ₹25,000 सबमें बराबर बँटेगा (दिशानिर्देशों के अनुसार)
साल में अधिकतम 5 बार
राष्ट्रीय सम्मान साल के 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों को ₹1 लाख, प्रमाणपत्र और ट्रॉफ़ी
मदद के लिए बढ़ा हाथ (प्रतीकात्मक)
Photo: sasint via Pixabay · Pixabay

प्रक्रिया: इनाम तक कैसे पहुँचते हैं?

सवालराह-वीर इनाम की प्रक्रिया क्या है?

जवाब: पुलिस/अस्पताल की सूचना: जब कोई मददगार घायल को अस्पताल पहुँचाता है, तो पुलिस या अस्पताल इसकी जानकारी दर्ज करते हैं।; ज़िला मूल्यांकन समिति: ज़िलाधिकारी, SSP, CMOH और RTO की समिति प्रस्ताव की जाँच और मंज़ूरी देती है।; भुगतान: मंज़ूरी के बाद राशि मददगार को दी जाती है।; राष्ट्रीय स्तर: MoRTH की समिति राज्यों से आए प्रस्तावों में से 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीर चुनती है।।

  1. पुलिस/अस्पताल की सूचना: जब कोई मददगार घायल को अस्पताल पहुँचाता है, तो पुलिस या अस्पताल इसकी जानकारी दर्ज करते हैं।
  2. ज़िला मूल्यांकन समिति: ज़िलाधिकारी, SSP, CMOH और RTO की समिति प्रस्ताव की जाँच और मंज़ूरी देती है।
  3. भुगतान: मंज़ूरी के बाद राशि मददगार को दी जाती है।
  4. राष्ट्रीय स्तर: MoRTH की समिति राज्यों से आए प्रस्तावों में से 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीर चुनती है।

ध्यान दें: दिशानिर्देशों के अनुसार जो मददगार अपनी जानकारी नहीं देना चाहते, उन्हें इनाम नहीं दिया जा सकता। यानी पहचान बताना आपकी मर्ज़ी है, पर इनाम के लिए ज़रूरी है।

मददगार की क़ानूनी सुरक्षा

सवालमददगार को क्या क़ानूनी सुरक्षा है?

जवाब: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134A और गुड समैरिटन नियम (G.S.R. 594(E), 29 सितंबर 2020) के अनुसार: नेक नीयत से मदद करने वाले पर कोई सिविल या आपराधिक ज़िम्मेदारी नहीं।; नाम-पता बताना ज़रूरी नहीं (पर राह-वीर इनाम के लिए जानकारी देनी होगी)।; अस्पताल मददगार से इलाज के पैसे नहीं माँग सकता।।

  • नेक नीयत से मदद करने वाले पर कोई सिविल या आपराधिक ज़िम्मेदारी नहीं।
  • नाम-पता बताना ज़रूरी नहीं (पर राह-वीर इनाम के लिए जानकारी देनी होगी)।
  • अस्पताल मददगार से इलाज के पैसे नहीं माँग सकता।

घायल की मदद कैसे करें: 5 आसान कदम

  1. अपनी सुरक्षा देखें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ।
  2. 112 या 108 पर कॉल करें।
  3. घायल को बेवजह न हिलाएँ; ख़तरा हो तभी हटाएँ।
  4. खून बह रहा हो तो साफ़ कपड़े से दबाएँ।
  5. नज़दीकी अस्पताल पहुँचाएँ और परिवार को सूचना दें।

कैशलेस इलाज की योजना: घायल के परिवार को क्या पता होना चाहिए

सवालसड़क हादसे में घायल को मुफ़्त इलाज कैसे मिल सकता है?

जवाब: हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता अक्सर अस्पताल का ख़र्च होती है। केंद्र सरकार ने 5 मई 2025 को "Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025" अधिसूचित की और 4 जून 2025 को इसके दिशानिर्देश जारी किए। संसद में दी गई जानकारी (7 अगस्त 2025) के अनुसार यह योजना पूरे देश में लागू है।

बात योजना में क्या है
कौन हक़दार मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुए सड़क हादसे का कोई भी घायल
कितना हर घायल के लिए ₹1.5 लाख तक का इलाज
कितने दिन हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन
कहाँ देशभर के नामित (designated) अस्पताल
तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) का IT सिस्टम

यह योजना आयुष्मान भारत (PM-JAY) का हिस्सा नहीं है, बल्कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत बनी अलग वैधानिक योजना है। बीमित वाहन से हादसे में बीमा कंपनियाँ योगदान देती हैं और बिना बीमा वाले वाहनों के मामलों में केंद्र सरकार बजट से मदद देती है।

परिवार क्या करे: अस्पताल पहुँचते ही बताइए कि मरीज़ सड़क हादसे का घायल है और पूछिए कि अस्पताल इस योजना में नामित है या नहीं। पुलिस को हादसे की सूचना ज़रूर दिलवाइए, क्योंकि सत्यापन के लिए इसकी ज़रूरत पड़ती है। पहचान पत्र और मोबाइल नंबर तैयार रखिए।

हादसे की जगह पर पहले 10 मिनट: क्या करें

चोट लगने के बाद का पहला घंटा सबसे क़ीमती माना जाता है, इसलिए हादसे की जगह पर मौजूद आम लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। ज़रूरी है कि मदद करते हुए आप ख़ुद सुरक्षित रहें।

  1. अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
  2. 112 पर कॉल करें: जगह का नाम, नज़दीकी पहचान (पुल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किलोमीटर पत्थर) और घायलों की संख्या बताएँ।
  3. इंजन बंद कराएँ: हादसे वाली गाड़ी का इंजन बंद करवाएँ। ईंधन या गैस की गंध आए तो बीड़ी-सिगरेट और चिंगारी से दूर रहें।
  4. बिना ज़रूरत न हिलाएँ: गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो तो घायल को तभी हटाएँ जब आग या दूसरी गाड़ी से तुरंत ख़तरा हो।
  5. ख़ून रोकें: बहते ख़ून पर साफ़ कपड़े से लगातार दबाव रखें।
  6. होश में रखें: घायल से बात करते रहें, भीड़ हटाएँ ताकि हवा मिले। बेहोश व्यक्ति के मुँह में पानी न डालें।
  7. अस्पताल पहुँचाएँ: एम्बुलेंस देर से आए और घायल को ले जाना सुरक्षित हो, तो नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।

वीडियो बनाने से ज़्यादा ज़रूरी है मदद करना। अगर आप ख़ुद कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम सही जगह और जानकारी के साथ 112 पर कॉल ज़रूर करें।

जब टक्कर मारकर भाग जाए: हिट-एंड-रन मुआवज़ा

कई हादसों में टक्कर मारने वाला वाहन पकड़ा नहीं जाता। ऐसे पीड़ितों के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने 25 फ़रवरी 2022 को “Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022” अधिसूचित की, जो 1 अप्रैल 2022 से पुरानी सोलेशियम योजना, 1989 की जगह लागू है।

स्थिति पहले (सोलेशियम योजना) अब (2022 योजना)
मृत्यु ₹25,000 ₹2,00,000
गंभीर चोट ₹12,500 ₹50,000

कैसे आवेदन करें:

  1. हादसे की FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी लें, जिसमें लिखा हो कि वाहन का पता नहीं चला।
  2. इलाज के काग़ज़, मेडिकल रिपोर्ट और (मृत्यु के मामले में) पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र संभालकर रखें।
  3. योजना में दावा “Claims Enquiry Officer” के पास तय फ़ॉर्म में किया जाता है; मंज़ूरी “Claims Settlement Commissioner” देते हैं और राशि सीधे बैंक खाते में आती है। अपने इलाक़े के सही दफ़्तर की जानकारी पुलिस थाने या ज़िला प्रशासन से लें।
  4. बैंक खाते का विवरण और पहचान पत्र साथ रखें।

मंत्रालय के अनुसार आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है। अगर बाद में वाहन पकड़ा जाता है, तो मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में अलग से दावा भी किया जा सकता है।

प्रशंसा पत्र (प्रतीकात्मक), राह-वीर को मिलता है सम्मान
Photo: DKrue via Pixabay · Pixabay

निष्कर्ष

राह-वीर योजना बताती है कि सरकार मदद करने वालों के साथ खड़ी है। इनाम से बड़ा सम्मान किसी की जान बचाना है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड Help in an Emergency Situations भी पढ़ सकते हैं।

मदद करने वाले के लिए घायल के परिवार तक पहुँचना भी ज़रूरी होता है। गाड़ी पर लगा Rakshak Code QR स्कैन करके मददगार आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।

सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।

आख़िरी अपडेट: 23 जनवरी 2026

स्रोत (Sources)

  1. MoRTH, Scheme Guidelines on Rah-Veer (हिमाचल प्रदेश सड़क सुरक्षा पोर्टल पर प्रति): https://roadsafety.hp.gov.in/storage/files/new-notifications/Scheme%20Guidelines%20on%20Rah%20Veer.pdf
  2. PIB, राह-वीर और गुड समैरिटन नियमों पर लेख: https://www.pib.gov.in/newsite/erelcontent.aspx?relid=281833
  3. MoRTH, गुड समैरिटन: https://morth.gov.in/en/good-samaritan
  4. मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019, भारत का राजपत्र: https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
  5. PIB, “Cashless treatment for Road accident victims” (7 अगस्त 2025): https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2153890
  6. भारत का राजपत्र, S.O. 2015(E), 5 मई 2025 (Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/262912.pdf
  7. PIB, हिट-एंड-रन पीड़ितों के मुआवज़े की नई योजना (25 फ़रवरी 2022): https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1801698
  8. PIB, लोकसभा उत्तर: हिट-एंड-रन मुआवज़ा और Motor Vehicle Accident Fund: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1845885

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. राह-वीर इनाम कितना है?

₹25,000 प्रति घटना और प्रशंसा पत्र।

2. क्या एक व्यक्ति कई बार इनाम पा सकता है?

हाँ, साल में अधिकतम 5 बार।

3. इनाम के लिए आवेदन कहाँ करें?

आम तौर पर पुलिस/अस्पताल की सूचना के आधार पर ज़िला समिति प्रस्ताव देखती है। अपने ज़िले के RTO या पुलिस से जानकारी ले सकते हैं।

4. सड़क हादसा होते देखें तो सबसे पहले क्या करें?

112 पर कॉल करें, अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए घायल को जल्दी अस्पताल पहुँचाने में मदद करें। गुड समैरिटन नियमों के तहत मदद करने वाले से पुलिस या अस्पताल ज़बरदस्ती पहचान या पैसे नहीं माँग सकते।

5. सड़क हादसे के घायल को कितने तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है?

Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025 के तहत मोटर वाहन से हुए हादसे के हर घायल को नामित अस्पताल में हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिनों तक ₹1.5 लाख तक का इलाज कवर मिलता है।

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