MoRTH रिपोर्ट 2024: सड़क हादसों में मौतें 2.5% बढ़ीं — राज्यवार तस्वीर

सीधा जवाब: सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) की “Road Accidents in India 2024” रिपोर्ट (Hindustan Times, 12 जून 2026) के अनुसार 2024 में देश में 4,87,707 सड़क हादसे हुए और 1,77,175 लोगों की मौत हुई, जो 2023 की 1,72,890 मौतों से 2.5% ज़्यादा है। यानी रोज़ लगभग 485 और हर घंटे लगभग 20 मौतें। ओवरस्पीडिंग 70.3% मौतों का कारण रही, मरने वालों में 46.2% दोपहिया सवार और 20.6% पैदल यात्री थे, और नेशनल हाईवे (सड़क नेटवर्क का सिर्फ़ 2.1%) पर 36.6% मौतें हुईं।

मुख्य आंकड़े

मद 2024
कुल हादसे 4,87,707 (+1.5%)
कुल मौतें 1,77,175 (+2.5%)
ओवरस्पीडिंग का हिस्सा 70.3% मौतें
दोपहिया सवार 46.2% मौतें
पैदल यात्री 20.6% मौतें
नेशनल हाईवे 36.6% मौतें
ग्रामीण इलाक़े 70.8% मौतें
18-45 आयु वर्ग 66.1% मौतें
हादसों की गंभीरता प्रति 100 हादसे 36.3 मौतें (2023 में 36)

हादसों के प्रकार

सवाल2024 में किस तरह के हादसों में सबसे ज़्यादा मौतें हुईं?

जवाब: पीछे से टक्कर (rear-end): 37,404 मौतें (21.1%), सबसे बड़ा हिस्सा।; हिट एंड रन: 34,030 मौतें (19.2%), 9% की सबसे तेज़ बढ़ोतरी।; आमने-सामने टक्कर: 28,400 मौतें (16%), 1.7% की कमी।; खड़े वाहनों से टक्कर: मौतों में 20.4% की कमी।; सीधी सड़कें: 1,18,817 मौतें (67.1%), सबसे घातक; विशेषज्ञों ने इसका बड़ा कारण तेज़ रफ़्तार बताया।; गड्ढे: 2,385 मौतें।।

  • पीछे से टक्कर (rear-end): 37,404 मौतें (21.1%), सबसे बड़ा हिस्सा।
  • हिट एंड रन: 34,030 मौतें (19.2%), 9% की सबसे तेज़ बढ़ोतरी।
  • आमने-सामने टक्कर: 28,400 मौतें (16%), 1.7% की कमी।
  • खड़े वाहनों से टक्कर: मौतों में 20.4% की कमी।
  • सीधी सड़कें: 1,18,817 मौतें (67.1%), सबसे घातक; विशेषज्ञों ने इसका बड़ा कारण तेज़ रफ़्तार बताया।
  • गड्ढे: 2,385 मौतें।
हेलमेट पहने बाइक सवार (प्रतीकात्मक)
Photo: terbe_rezso via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

हेलमेट और सीटबेल्ट

  • बिना हेलमेट मौतें: 54,568 (2023) से थोड़ी घटकर 54,122 (2024)।
  • बिना सीटबेल्ट मौतें: लगभग 9.7% घटकर 16,025 से 14,466।

राज्य और शहर

सवालकिन राज्यों और शहरों में सबसे ज़्यादा हादसे हुए?

जवाब: सबसे ज़्यादा हादसे: तमिलनाडु, 67,526 (13.8%)।; सबसे ज़्यादा मौतें: उत्तर प्रदेश, 24,118 (13.6%)।; सबसे ज़्यादा गंभीरता: मिज़ोरम (प्रति 100 हादसे 93.2 मौतें), बिहार (80.5), झारखंड (79.2)।; हादसों में कमी: हरियाणा (-6.3%), गुजरात (-4.7%), आंध्र प्रदेश (-2.0%)।; शहर: दिल्ली में सबसे ज़्यादा हादसे (5,657) और मौतें (1,551); बेंगलुरु दूसरे स्थान पर (4,769 हादसे, 894 मौतें)।।

  • सबसे ज़्यादा हादसे: तमिलनाडु, 67,526 (13.8%)।
  • सबसे ज़्यादा मौतें: उत्तर प्रदेश, 24,118 (13.6%)।
  • सबसे ज़्यादा गंभीरता: मिज़ोरम (प्रति 100 हादसे 93.2 मौतें), बिहार (80.5), झारखंड (79.2)।
  • हादसों में कमी: हरियाणा (-6.3%), गुजरात (-4.7%), आंध्र प्रदेश (-2.0%)।
  • शहर: दिल्ली में सबसे ज़्यादा हादसे (5,657) और मौतें (1,551); बेंगलुरु दूसरे स्थान पर (4,769 हादसे, 894 मौतें)।

रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों के आंकड़ों की सीमा का भी ज़िक्र है।

आम आदमी के लिए इसका मतलब

सवालइन आंकड़ों का आम आदमी के लिए क्या मतलब है?

जवाब: स्पीड सबसे बड़ा दुश्मन: सीधी, खुली सड़क पर भी स्पीड लिमिट मानें।; दोपहिया पर हेलमेट, सही तरह से: स्ट्रैप बंद, ISI मार्क वाला।; पीछे से टक्कर: आगे की गाड़ी से दूरी रखें; हाईवे पर अचानक ब्रेक से बचें।; पैदल यात्री: ज़ेब्रा क्रॉसिंग, फ़ुटओवर ब्रिज; रात में हल्के/रिफ़्लेक्टिव कपड़े।; हिट एंड रन पीड़ितों के लिए: मुआवज़ा योजना और PM-RAHAT कैशलेस इलाज उपलब्ध हैं।।

  1. स्पीड सबसे बड़ा दुश्मन: सीधी, खुली सड़क पर भी स्पीड लिमिट मानें।
  2. दोपहिया पर हेलमेट, सही तरह से: स्ट्रैप बंद, ISI मार्क वाला।
  3. पीछे से टक्कर: आगे की गाड़ी से दूरी रखें; हाईवे पर अचानक ब्रेक से बचें।
  4. पैदल यात्री: ज़ेब्रा क्रॉसिंग, फ़ुटओवर ब्रिज; रात में हल्के/रिफ़्लेक्टिव कपड़े।
  5. हिट एंड रन पीड़ितों के लिए: मुआवज़ा योजना और PM-RAHAT कैशलेस इलाज उपलब्ध हैं।

मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं

सवालघायल की मदद करने पर क्या पुलिस परेशान कर सकती है?

जवाब: हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि "पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे"। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए।

मदद करने वाले का अधिकार इसका मतलब
तुरंत जाने की छूट पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं
पहचान बताना ज़रूरी नहीं पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता
अस्पताल का ख़र्च नहीं अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता
पावती (रसीद) नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है
गवाह बनना मर्ज़ी से गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है

नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।

गाड़ी का बीमा: कौन-सा ज़रूरी, कौन-सा समझदारी

सवालगाड़ी का कौन-सा बीमा ज़रूरी है?

जवाब: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत सार्वजनिक जगह पर कोई भी गाड़ी चलाने के लिए कम से कम थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है। यह बीमा उन लोगों के नुक़सान के लिए है जिन्हें आपकी गाड़ी से चोट या नुक़सान पहुँचे। 2019 संशोधन के बाद बिना बीमा गाड़ी चलाने पर पहली बार ₹2,000 जुर्माने का प्रावधान किया गया (राज्यों में कंपाउंडिंग की रक़म अलग हो सकती है)।

बीमा का प्रकार किसका नुक़सान कवर ज़रूरी?
थर्ड-पार्टी दूसरों को चोट, मौत या संपत्ति का नुक़सान हाँ, क़ानूनन
ओन डैमेज / कॉम्प्रिहेंसिव आपकी अपनी गाड़ी का नुक़सान (हादसा, आग, चोरी आदि, पॉलिसी के अनुसार) नहीं, लेकिन समझदारी
पर्सनल एक्सीडेंट कवर चालक/मालिक को चोट या मृत्यु पॉलिसी के अनुसार

ध्यान रखने की बातें:

  • पॉलिसी की तारीख़ याद रखें; एक दिन की देरी में हुआ हादसा भारी पड़ सकता है।
  • CNG किट या कोई बड़ा बदलाव हो, तो बीमा कंपनी को बताएँ।
  • पॉलिसी में “Exclusions” (किन हालात में क्लेम नहीं मिलेगा) एक बार ज़रूर पढ़ें।
  • हादसे या खड़ी गाड़ी को नुक़सान होने पर तुरंत बीमा कंपनी को सूचना दें और तस्वीरें लें।

हादसे की जगह पर पहले 10 मिनट: क्या करें

चोट लगने के बाद का पहला घंटा सबसे क़ीमती माना जाता है, इसलिए हादसे की जगह पर मौजूद आम लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। ज़रूरी है कि मदद करते हुए आप ख़ुद सुरक्षित रहें।

  1. अपनी सुरक्षा पहले: अपनी गाड़ी सड़क से हटाकर रोकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ। रात या कोहरे में पीछे से आ रहे वाहनों को इशारा करने के लिए किसी को दूर खड़ा करें।
  2. 112 पर कॉल करें: जगह का नाम, नज़दीकी पहचान (पुल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किलोमीटर पत्थर) और घायलों की संख्या बताएँ।
  3. इंजन बंद कराएँ: हादसे वाली गाड़ी का इंजन बंद करवाएँ। ईंधन या गैस की गंध आए तो बीड़ी-सिगरेट और चिंगारी से दूर रहें।
  4. बिना ज़रूरत न हिलाएँ: गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो तो घायल को तभी हटाएँ जब आग या दूसरी गाड़ी से तुरंत ख़तरा हो।
  5. ख़ून रोकें: बहते ख़ून पर साफ़ कपड़े से लगातार दबाव रखें।
  6. होश में रखें: घायल से बात करते रहें, भीड़ हटाएँ ताकि हवा मिले। बेहोश व्यक्ति के मुँह में पानी न डालें।
  7. अस्पताल पहुँचाएँ: एम्बुलेंस देर से आए और घायल को ले जाना सुरक्षित हो, तो नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।

वीडियो बनाने से ज़्यादा ज़रूरी है मदद करना। अगर आप ख़ुद कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम सही जगह और जानकारी के साथ 112 पर कॉल ज़रूर करें।

पैदल यात्री क्रॉसिंग (प्रतीकात्मक)
Photo: B_Me via Pixabay (प्रतीकात्मक तस्वीर / Representative image) · Pixabay

निष्कर्ष

आंकड़े बताते हैं कि गाड़ियाँ बढ़ीं, पर सुरक्षा की आदतें उतनी नहीं। धीमे चलें, हेलमेट-सीटबेल्ट लगाएँ, और थकान में गाड़ी न चलाएँ। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।

हादसे के बाद परिवार तक जल्दी सूचना पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए। मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।

सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।

आख़िरी अपडेट: 13 जून 2026

स्रोत (Sources)

  1. Hindustan Times, “Road accident deaths increased 2.5% in 2024 from 2023: MoRTH report” (12 जून 2026): https://www.hindustantimes.com/india-news/road-accident-deaths-increased-2-5-in-2024-from-2023-morth-report-101781204793385.html
  2. MoRTH, सड़क सुरक्षा/प्रकाशन: https://morth.gov.in/
  3. PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
  4. MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf
  5. मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (धारा 146) (India Code): https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
  6. PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. 2024 में सड़क हादसों में कितनी मौतें हुईं?

1,77,175 (MoRTH रिपोर्ट, HT के अनुसार)।

2. सबसे बड़ा कारण क्या है?

ओवरस्पीडिंग, 70.3% मौतें।

3. NCRB के आंकड़े अलग क्यों हैं?

रिपोर्ट के अनुसार वर्गीकरण के तरीक़ों में अंतर के कारण।

4. क्या घायल को अस्पताल पहुँचाने वाले को अपना नाम बताना ज़रूरी है?

नहीं। गुड समैरिटन नियमों (2020) के अनुसार पुलिस या कोई और व्यक्ति मदद करने वाले को नाम, पता या दूसरी निजी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता; बताना या गवाह बनना उसकी अपनी मर्ज़ी है।

5. क्या थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है?

हाँ। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत सार्वजनिक जगह पर गाड़ी चलाने के लिए कम से कम थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है; बिना बीमा गाड़ी चलाने पर 2019 संशोधन के बाद पहली बार ₹2,000 जुर्माने का प्रावधान है।

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