सीधा जवाब: 16 दिसंबर 2025 (मंगलवार) की सुबह करीब 4 बजे मथुरा ज़िले में यमुना एक्सप्रेसवे पर आगरा-नोएडा लेन में घने कोहरे के बीच कम से कम 7 बसें और 3 कारें आपस में टकरा गईं, और टक्कर के बाद आग लग गई। The New Indian Express के अनुसार कम से कम 13 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। पुलिस के अनुसार सभी 13 मौतें जलने से हुईं।
क्या हुआ था?
सवालयह हादसा कैसे हुआ?
जवाब: The New Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार: हादसा बलदेव थाना क्षेत्र में माइलस्टोन 127 के पास हुआ, ज़िलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने यह जानकारी दी।; उस समय कोहरा इतना घना था कि दिखने की दूरी बेहद कम थी।; आग पर काबू पाने के लिए 11 फायर टेंडर लगाए गए। पुलिस, फायर सर्विस, NHAI और SDRF की टीमों ने बचाव कार्य किया।
- हादसा बलदेव थाना क्षेत्र में माइलस्टोन 127 के पास हुआ, ज़िलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने यह जानकारी दी।
- उस समय कोहरा इतना घना था कि दिखने की दूरी बेहद कम थी।
- आग पर काबू पाने के लिए 11 फायर टेंडर लगाए गए। पुलिस, फायर सर्विस, NHAI और SDRF की टीमों ने बचाव कार्य किया।
- चश्मदीदों के अनुसार टक्कर के बाद तेज़ धमाकों की आवाज़ें आईं, और आसपास के गाँवों के लोग मदद के लिए दौड़े।
- एक यात्री ने बताया कि बस अचानक रुकी, और यात्रियों ने जाम दरवाज़े खोलकर महिलाओं और बच्चों को बाहर निकाला।
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता की घोषणा की।
रिपोर्ट के अनुसार उन दिनों उत्तर प्रदेश में कोहरे से कई हादसे हुए थे: 15 दिसंबर को 6 हादसों में 31 वाहन, 14 दिसंबर को 6 हादसों में 29 वाहन (7 मौतें) और 13 दिसंबर को 8 हादसों में 40 वाहन (4 मौतें) शामिल थे।
उसी समय लागू थी घटी हुई स्पीड लिमिट
सवालउस समय कौन सी घटी हुई स्पीड लिमिट लागू थी?
जवाब: हर साल की तरह 15 दिसंबर 2025 से यमुना एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों की अधिकतम स्पीड 75 km/h और भारी वाहनों की 60 km/h कर दी गई थी (गौतम बुद्ध नगर प्रशासन/पुलिस की एडवाइज़री, जैसा मीडिया में रिपोर्ट हुआ)। हादसे में रफ़्तार की भूमिका क्या थी, यह जाँच के बाद ही साफ़ होगा।

कोहरे में चेन-टक्कर से बचने के सबक
सवालकोहरे में चेन-टक्कर से कैसे बचें?
जवाब: आगे की गाड़ी अचानक रुकना: सामान्य से दोगुनी या ज़्यादा दूरी; दिखने की दूरी से ज़्यादा रफ़्तार: उतनी ही रफ़्तार, जितनी दूरी में रुक सकें; लेन में खड़ी गाड़ी: रुकना हो तो सड़क से पूरी तरह हटें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ; हाई बीम: लो बीम और फॉग लाइट
| जोखिम | बचाव |
|---|---|
| आगे की गाड़ी अचानक रुकना | सामान्य से दोगुनी या ज़्यादा दूरी |
| दिखने की दूरी से ज़्यादा रफ़्तार | उतनी ही रफ़्तार, जितनी दूरी में रुक सकें |
| लेन में खड़ी गाड़ी | रुकना हो तो सड़क से पूरी तरह हटें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ |
| हाई बीम | लो बीम और फॉग लाइट |
बस यात्रियों के लिए: आग लगे तो
सवालबस में आग लगे तो यात्री क्या करें?
जवाब: बस में चढ़ते ही इमरजेंसी गेट और खिड़की तोड़ने वाला हथौड़ा देख लें।; धुआँ दिखे तो झुककर, नाक-मुँह ढककर नज़दीकी निकास की ओर जाएँ।; पहले बच्चों, बुज़ुर्गों और महिलाओं की मदद करें, फिर बस से दूर, एक्सप्रेसवे की रेलिंग के पार सुरक्षित जगह जाएँ।; सामान के लिए वापस न जाएँ।।
- बस में चढ़ते ही इमरजेंसी गेट और खिड़की तोड़ने वाला हथौड़ा देख लें।
- धुआँ दिखे तो झुककर, नाक-मुँह ढककर नज़दीकी निकास की ओर जाएँ।
- पहले बच्चों, बुज़ुर्गों और महिलाओं की मदद करें, फिर बस से दूर, एक्सप्रेसवे की रेलिंग के पार सुरक्षित जगह जाएँ।
- सामान के लिए वापस न जाएँ।
कैशलेस इलाज की योजना: घायल के परिवार को क्या पता होना चाहिए
सवालसड़क हादसे में घायल को मुफ़्त इलाज कैसे मिल सकता है?
जवाब: हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता अक्सर अस्पताल का ख़र्च होती है। केंद्र सरकार ने 5 मई 2025 को "Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025" अधिसूचित की और 4 जून 2025 को इसके दिशानिर्देश जारी किए। संसद में दी गई जानकारी (7 अगस्त 2025) के अनुसार यह योजना पूरे देश में लागू है।
| बात | योजना में क्या है |
|---|---|
| कौन हक़दार | मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुए सड़क हादसे का कोई भी घायल |
| कितना | हर घायल के लिए ₹1.5 लाख तक का इलाज |
| कितने दिन | हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिन |
| कहाँ | देशभर के नामित (designated) अस्पताल |
| तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म | राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) का IT सिस्टम |
यह योजना आयुष्मान भारत (PM-JAY) का हिस्सा नहीं है, बल्कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत बनी अलग वैधानिक योजना है। बीमित वाहन से हादसे में बीमा कंपनियाँ योगदान देती हैं और बिना बीमा वाले वाहनों के मामलों में केंद्र सरकार बजट से मदद देती है।
परिवार क्या करे: अस्पताल पहुँचते ही बताइए कि मरीज़ सड़क हादसे का घायल है और पूछिए कि अस्पताल इस योजना में नामित है या नहीं। पुलिस को हादसे की सूचना ज़रूर दिलवाइए, क्योंकि सत्यापन के लिए इसकी ज़रूरत पड़ती है। पहचान पत्र और मोबाइल नंबर तैयार रखिए।
रात में सफ़र: ज़्यादा सावधानी क्यों ज़रूरी
रात में दिखाई कम देता है, थकान और नींद का असर बढ़ जाता है, और सड़क किनारे बिना रोशनी के खड़े वाहन अचानक सामने आ जाते हैं। रात के सफ़र में ये आदतें मदद करती हैं:
- डिपर का सही इस्तेमाल: सामने से गाड़ी आए या आगे किसी गाड़ी के पीछे चल रहे हों, तो हाई-बीम से लो-बीम पर आएँ। सामने की तेज़ रोशनी से बचने के लिए नज़र सड़क के बाएँ किनारे पर रखें।
- रफ़्तार हेडलाइट की पहुँच के भीतर: जितनी दूर रोशनी में दिख रहा है, उतनी दूरी में रुक पाने वाली रफ़्तार रखें।
- नींद से लड़ें नहीं, रुकें: जम्हाई, आँखें भारी होना या लेन से भटकना नींद के संकेत हैं। सुरक्षित जगह रुककर आराम करें।
- खड़े वाहनों से सावधान: हाईवे पर बिना लाइट खड़े ट्रक या ट्रैक्टर-ट्रॉली बड़ा ख़तरा हैं; दूर से रफ़्तार कम करें।
- अपनी गाड़ी को दिखने लायक रखें: हेडलाइट, टेल-लाइट, ब्रेक लाइट और रिफ़्लेक्टर साफ़ और चालू हों।
- शीशे साफ़: गंदा विंडस्क्रीन रात में रोशनी बिखेरता है।
| जोखिम | बचाव |
|---|---|
| सामने से चकाचौंध | नज़र बाएँ किनारे पर, रफ़्तार कम |
| नींद | रुककर आराम, संभव हो तो ड्राइवर बदलें |
| सड़क किनारे खड़ा वाहन | दूर से धीमे, ओवरटेक सोच-समझकर |
निकलने से पहले गाड़ी की 5 मिनट की जाँच
कई हादसे गाड़ी की छोटी-सी ख़राबी से शुरू होते हैं, जिसे निकलने से पहले पकड़ा जा सकता था। यह जाँच सूची किसी भी कार, बाइक या छोटे व्यावसायिक वाहन के लिए काम की है:
| क्या देखें | कैसे |
|---|---|
| टायर | हवा का दबाव कंपनी की बताई मात्रा के अनुसार; घिसाव, कट या उभार तो नहीं |
| ब्रेक | पैडल ढीला या आवाज़ तो नहीं; बाइक में आगे-पीछे दोनों ब्रेक |
| लाइट और इंडिकेटर | हेडलाइट (लो/हाई), ब्रेक लाइट, इंडिकेटर, पीछे के रिफ़्लेक्टर |
| वाइपर और शीशे | वाइपर ठीक चले, शीशे और मिरर साफ़ हों |
| तरल पदार्थ | इंजन ऑयल, कूलेंट, ब्रेक ऑयल का स्तर |
| काग़ज़ | ड्राइविंग लाइसेंस, RC, बीमा और PUC |
गाड़ी में ये चीज़ें रखें: फ़र्स्ट-एड किट, टॉर्च, चेतावनी तिकोन, पानी, चार्ज किया फ़ोन और परिवार/इमरजेंसी के नंबर।
ख़ुद की जाँच भी: नींद पूरी हो, शराब या नींद लाने वाली दवा न ली हो, और रास्ता पहले से देख लिया हो। परिवार को बता दें कि आप कब निकले और कब तक पहुँचने का अंदाज़ा है।

निष्कर्ष
कोहरे के मौसम में एक्सप्रेसवे पर एक गलती दर्जनों ज़िंदगियों पर भारी पड़ सकती है। धीमी रफ़्तार, ज़्यादा दूरी और बसों में सुरक्षा उपकरणों की जाँच सबसे ज़रूरी है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
हादसे की घड़ी में घायलों के परिवार तक जल्दी ख़बर पहुँचाना बहुत मायने रखता है। गाड़ी पर लगा Rakshak Code QR मदद करने वाले को आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँचने देता है, आपका नंबर दिखाए बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 17 दिसंबर 2025
स्रोत (Sources)
- The New Indian Express, “13 dead, several injured as buses catch fire after fog-induced pile-up on Yamuna expressway in UP”, 16 दिसंबर 2025: https://www.newindianexpress.com/india/2025/Dec/16/13-dead-several-injured-as-buses-catch-fire-after-fog-induced-pile-up-on-yamuna-expressway-in-up
- ThePrint (PTI), “Max speed capped at 75 kmph on Noida-Greater Noida, Yamuna expressways in view of winter fog”, 13 दिसंबर 2025: https://theprint.in/india/max-speed-capped-at-75-kmph-on-noida-greater-noida-yamuna-expressways-in-view-of-winter-fog/2805140/
- PIB, “Cashless treatment for Road accident victims” (7 अगस्त 2025): https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2153890
- भारत का राजपत्र, S.O. 2015(E), 5 मई 2025 (Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025): https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/262912.pdf
- MoRTH, सड़क सुरक्षा: https://morth.gov.in/road-safety
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. मथुरा हादसा कब और कहाँ हुआ?
16 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 4 बजे, यमुना एक्सप्रेसवे पर माइलस्टोन 127 के पास (बलदेव थाना क्षेत्र)।
2. कितने वाहन शामिल थे?
कम से कम 7 बसें और 3 कारें।
3. कोहरे में एक्सप्रेसवे पर गाड़ी रोकनी पड़े तो?
लेन में न रुकें। किनारे सुरक्षित जगह, ढाबे या पेट्रोल पंप तक पहुँचकर रुकें, हैज़र्ड लाइट जलाएँ, और सवारियों को गाड़ी से बाहर रेलिंग के पार रखें।
4. सड़क हादसा होते देखें तो सबसे पहले क्या करें?
112 पर कॉल करें, अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए घायल को जल्दी अस्पताल पहुँचाने में मदद करें। गुड समैरिटन नियमों के तहत मदद करने वाले से पुलिस या अस्पताल ज़बरदस्ती पहचान या पैसे नहीं माँग सकते।
5. सड़क हादसे के घायल को कितने तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है?
Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025 के तहत मोटर वाहन से हुए हादसे के हर घायल को नामित अस्पताल में हादसे की तारीख़ से अधिकतम 7 दिनों तक ₹1.5 लाख तक का इलाज कवर मिलता है।


