सीधा जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सभी राज्यों के परिवहन व नगर निकायों को हाईवे से मवेशियों और दूसरे आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया। पशुओं को गौशालाओं या पशु शेल्टर में भेजा जाएगा, और हाईवे पर 24 घंटे पैट्रोल यूनिट व हेल्पलाइन नंबर लगाने होंगे। मुख्य सचिवों और NHAI चेयरपर्सन को इसका पालन सुनिश्चित करना है।
कोर्ट ने क्या कहा?
सवालकोर्ट ने क्या कहा?
जवाब: The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह आदेश आवारा कुत्तों के मामले में चल रही स्वतः संज्ञान (suo motu) सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने माना कि सड़कों और हाईवे पर मवेशियों व आवारा पशुओं से जुड़े हादसे "चिंताजनक रूप से आम" हो गए हैं।
हाईवे से जुड़े मुख्य निर्देश:
| निर्देश | किसकी ज़िम्मेदारी |
|---|---|
| हाईवे से मवेशी और आवारा पशु हटाना | NHAI, परिवहन और नगर निकाय |
| पशुओं को शेल्टर, गौशाला या कैटल पाउंड में भेजना, खाना-पानी और इलाज देना | संबंधित प्राधिकरण |
| 24 घंटे चलने वाली हाईवे पैट्रोल यूनिट | NHAI और राज्य |
| हाईवे पर हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से लगाना | NHAI और राज्य |
| पालन की निगरानी, लापरवाही पर अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही | राज्यों के मुख्य सचिव और NHAI चेयरपर्सन |
इसी आदेश में कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद शेल्टर में भेजने का निर्देश भी दिया। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को तय की गई।
हाईवे पर पशु इतना बड़ा ख़तरा क्यों हैं?
सवालहाईवे पर पशु इतना बड़ा ख़तरा क्यों हैं?
जवाब: रात में गहरे रंग के पशु हेडलाइट में देर से दिखते हैं।; पशु अचानक सड़क पर आ जाते हैं, जिससे ड्राइवर को अचानक ब्रेक या मोड़ना पड़ता है।; दोपहिया के लिए यह टक्कर अक्सर जानलेवा होती है।; अचानक ब्रेक से पीछे से आ रहे वाहन टकरा सकते हैं।।
- रात में गहरे रंग के पशु हेडलाइट में देर से दिखते हैं।
- पशु अचानक सड़क पर आ जाते हैं, जिससे ड्राइवर को अचानक ब्रेक या मोड़ना पड़ता है।
- दोपहिया के लिए यह टक्कर अक्सर जानलेवा होती है।
- अचानक ब्रेक से पीछे से आ रहे वाहन टकरा सकते हैं।

रात में हाईवे पर पशु दिखें तो क्या करें?
सवालरात में हाईवे पर पशु दिखें तो क्या करें?
जवाब: रफ़्तार पहले से कम रखें: गाँवों और कस्बों के पास ख़ासकर।; हाई बीम का सही इस्तेमाल: सामने से गाड़ी न हो तो हाई बीम से दूर तक देखें, लेकिन सामने वाहन आने पर डिपर करें।; हॉर्न हल्का दें: लगातार तेज़ हॉर्न से पशु घबराकर उल्टी दिशा में भाग सकते हैं।; झटके से न मोड़ें: तेज़ रफ़्तार में अचानक स्टीयरिंग घुमाना गाड़ी पलटने का कारण बन सकता है। संतुलित ब्रेक लगाएँ।
- रफ़्तार पहले से कम रखें: गाँवों और कस्बों के पास ख़ासकर।
- हाई बीम का सही इस्तेमाल: सामने से गाड़ी न हो तो हाई बीम से दूर तक देखें, लेकिन सामने वाहन आने पर डिपर करें।
- हॉर्न हल्का दें: लगातार तेज़ हॉर्न से पशु घबराकर उल्टी दिशा में भाग सकते हैं।
- झटके से न मोड़ें: तेज़ रफ़्तार में अचानक स्टीयरिंग घुमाना गाड़ी पलटने का कारण बन सकता है। संतुलित ब्रेक लगाएँ।
- झुंड दिखे तो रुकें: पूरा झुंड निकल जाने दें।
- सूचना दें: नेशनल हाईवे पर NHAI हेल्पलाइन 1033 या आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें।
पशु मालिकों और स्थानीय निकायों की भूमिका
सवालपशु मालिकों और स्थानीय निकायों की क्या ज़िम्मेदारी है?
जवाब: पशुओं को खुला छोड़ना न सिर्फ़ सड़क पर चलने वालों के लिए, बल्कि ख़ुद पशुओं के लिए भी ख़तरनाक है। कोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय निकायों से उम्मीद है कि वे गौशालाओं और कैटल पाउंड की व्यवस्था मज़बूत करें।
एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित सफ़र के नियम
सवालएक्सप्रेसवे पर गाड़ी चलाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब: एक्सप्रेसवे पर रफ़्तार ज़्यादा होती है, इसलिए छोटी-सी चूक भी बड़ा हादसा बन सकती है। इन बातों का ध्यान रखिए: बोर्ड पर लिखी रफ़्तार ही मानें: अलग-अलग वाहनों और हिस्सों के लिए गति सीमा अलग होती है, और मौसम (जैसे कोहरा) में अस्थायी रूप से घटाई भी जाती है।; लेन अनुशासन: धीमे वाहन बाईं लेन में रहें, दाईं लेन सिर्फ़ ओवरटेक के लिए है। बार-बार लेन बदलना ख़तरनाक है।
- बोर्ड पर लिखी रफ़्तार ही मानें: अलग-अलग वाहनों और हिस्सों के लिए गति सीमा अलग होती है, और मौसम (जैसे कोहरा) में अस्थायी रूप से घटाई भी जाती है।
- लेन अनुशासन: धीमे वाहन बाईं लेन में रहें, दाईं लेन सिर्फ़ ओवरटेक के लिए है। बार-बार लेन बदलना ख़तरनाक है।
- बीच सड़क कभी न रुकें: फ़ोन, रास्ता पूछने या सामान ठीक करने के लिए कैरिजवे पर रुकना जानलेवा हो सकता है। रुकना ही हो तो तय रेस्ट एरिया या शोल्डर पर।
- टायर और गाड़ी की जाँच: सफ़र से पहले टायर का दबाव, घिसाव, कूलेंट और ब्रेक देख लें। तेज़ रफ़्तार पर कमज़ोर टायर फटने का ख़तरा बढ़ता है।
- थकान को हल्के में न लें: नींद या आँखें भारी लगें तो रुककर आराम करें; लंबे सफ़र में बीच-बीच में ब्रेक लें।
- दूरी बनाए रखें: आगे वाली गाड़ी से इतनी दूरी रखें कि अचानक ब्रेक पर रुक सकें।
| मुसीबत | क्या करें |
|---|---|
| गाड़ी ख़राब | बाईं ओर शोल्डर पर, हैज़र्ड लाइट, पीछे चेतावनी तिकोन |
| सवारियाँ | बैरियर के पार सुरक्षित जगह खड़ी हों, गाड़ी में न बैठें |
| मदद | NHAI हेल्पलाइन 1033 या 112 पर कॉल करें |
आंकड़ों को कैसे पढ़ें और कहाँ देखें
सड़क हादसों से जुड़ी ख़बरों में बड़े-बड़े आंकड़े आते हैं, लेकिन उन्हें सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है।
| स्रोत | इसमें क्या मिलता है |
|---|---|
| MoRTH की वार्षिक रिपोर्ट “Road Accidents in India” | देश और राज्यवार हादसे, मौतें, घायल, कारण और सड़क के प्रकार |
| संसद के प्रश्न-उत्तर (sansad.in) | किसी ख़ास विषय या राज्य पर मंत्रालय का लिखित जवाब |
| राज्य पुलिस / परिवहन विभाग | राज्य या शहर स्तर के आंकड़े |
पढ़ते समय ये बातें ध्यान रखें:
- साल देखें: वार्षिक रिपोर्ट अक्सर एक-दो साल पुराने आंकड़ों पर होती है। ख़बर में “इस साल” लिखा हो तो जाँचें कि आंकड़ा किस साल का है।
- हादसे बनाम मौतें: हादसों की संख्या और मौतों की संख्या अलग चीज़ें हैं; एक हादसे में कई लोगों की जान जा सकती है।
- प्रतिशत बदलाव: “इतने प्रतिशत बढ़े” सुनकर यह भी देखें कि आधार संख्या कितनी थी।
- रिपोर्टिंग का आधार: MoRTH की रिपोर्ट राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस से मिली जानकारी पर बनती है; कई छोटे हादसे दर्ज ही नहीं होते।
आंकड़े हमें बताते हैं कि ख़तरा कहाँ है। ओवरस्पीडिंग, हेलमेट/सीटबेल्ट न लगाना और ग़लत दिशा में चलना जैसे कारण बार-बार सामने आते हैं, और इन्हें बदलना हमारे अपने हाथ में है।

निष्कर्ष
यह आदेश हाईवे को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसका असर ज़मीन पर पालन से ही दिखेगा। तब तक रात में धीमी रफ़्तार और सतर्कता ही सबसे भरोसेमंद बचाव है। इससे जुड़ी जानकारी के लिए जयपुर हरमाड़ा डंपर हादसा: बेकाबू डंपर ने कई वाहनों को टक्कर मारी, शहरों में भारी वाहनों की निगरानी पर बहस और 48 घंटे में दो बड़े हादसे: फलोदी (राजस्थान) और चेवेल्ला (तेलंगाना) से क्या सबक भी देखें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
हाईवे पर किसी मुश्किल में फँसें, तो परिवार तक जल्दी संपर्क ज़रूरी होता है। गाड़ी पर लगा Rakshak Code QR मदद करने वाले को आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँचने देता है, आपका नंबर दिखाए बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 8 नवंबर 2025
स्रोत (Sources)
- The Hindu, “Supreme Court orders removal of stray dogs from schools, hospitals, other public institutions”, 7 नवंबर 2025: https://www.thehindu.com/news/national/supreme-court-orders-removal-of-stray-dogs-from-schools-hospitals-other-public-institutions-directs-nhai-to-clear-cattle-from-highways/article70251263.ece
- NHAI (हेल्पलाइन 1033): https://nhai.gov.in/
- NHAI राजमार्गयात्रा (हेल्पलाइन 1033): https://rajmargyatra.nhai.gov.in/
- MoRTH, सड़क सुरक्षा: https://morth.gov.in/road-safety
- MoRTH, Road Accidents in India 2022: https://morth.gov.in/backend/documents/uploaded/1755600426_RA_2022_30_Oct.pdf
- संसद (लोकसभा) प्रश्न और उत्तर: https://sansad.in/ls/questions/questions-and-answers
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश कब आया?
7 नवंबर 2025 को।
2. हाईवे पर पशु दिखे तो किसे बताएँ?
नेशनल हाईवे पर NHAI हेल्पलाइन 1033 पर, और आपात स्थिति में 112 पर। कोर्ट ने हाईवे पर हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से लगाने को भी कहा है।
3. क्या यह आदेश सिर्फ़ नेशनल हाईवे के लिए है?
आदेश NHAI के साथ सभी परिवहन और नगर निकायों को हाईवे से पशु हटाने को कहता है। स्थानीय सड़कों पर लागू करने के तरीके राज्य तय करेंगे।
4. सफ़र से पहले गाड़ी में क्या-क्या जाँचें?
टायर (हवा और घिसाव), ब्रेक, लाइट, इंडिकेटर, वाइपर और हॉर्न जाँचें, और ड्राइविंग लाइसेंस, RC, बीमा और PUC साथ रखें।
5. एक्सप्रेसवे पर गाड़ी ख़राब हो जाए तो क्या करें?
गाड़ी को पूरी तरह बाईं ओर शोल्डर पर ले जाएँ, हैज़र्ड लाइट जलाएँ, पीछे चेतावनी तिकोन लगाएँ, सवारियों को बैरियर के पार सुरक्षित जगह खड़ा करें और NHAI हेल्पलाइन 1033 या 112 पर कॉल करें।



