शराब पीकर गाड़ी चलाना: धारा 185 के तहत जुर्माना, जेल और लाइसेंस निलंबन

सीधा जवाब: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत अगर ब्रेथ एनालाइज़र या दूसरी जाँच में ख़ून में अल्कोहल 30 mg प्रति 100 ml से ज़्यादा पाया जाए, या आप नशीले पदार्थ के असर में हों, तो पहली बार 6 महीने तक जेल या ₹10,000 तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। 3 साल के अंदर दोबारा पकड़े जाने पर 2 साल तक जेल या ₹15,000 तक जुर्माना या दोनों। साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस ज़ब्त होकर निलंबन की कार्रवाई हो सकती है।

धारा 185 क्या कहती है?

सवालधारा 185 क्या कहती है?

जवाब: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के बाद धारा 185 के मुख्य प्रावधान: पहली बार: 6 महीने तक जेल, या ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों; 3 साल के अंदर दोबारा: 2 साल तक जेल, या ₹15,000 तक जुर्माना, या दोनों; सीमा: ब्रेथ एनालाइज़र/जाँच में ख़ून में 30 mg प्रति 100 ml से ज़्यादा अल्कोहल, या ड्रग्स का असर

स्थिति सज़ा
पहली बार 6 महीने तक जेल, या ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों
3 साल के अंदर दोबारा 2 साल तक जेल, या ₹15,000 तक जुर्माना, या दोनों
सीमा ब्रेथ एनालाइज़र/जाँच में ख़ून में 30 mg प्रति 100 ml से ज़्यादा अल्कोहल, या ड्रग्स का असर

लाइसेंस पर क्या असर होता है?

सवालनशे में ड्राइविंग का लाइसेंस पर क्या असर होता है?

जवाब: 2019 के संशोधन के बाद धारा 206(4) के तहत पुलिस अधिकारी धारा 185 जैसे अपराधों में ड्राइविंग लाइसेंस ज़ब्त करके लाइसेंसिंग अथॉरिटी को भेज सकता है, ताकि धारा 19 के तहत लाइसेंस निलंबन या रद्द करने की कार्रवाई हो सके।

रात में शहर की टैक्सी, पार्टी के बाद सुरक्षित विकल्प
Photo: MasashiWakui via Pixabay · Pixabay

30 mg/100 ml का मतलब क्या है?

सवाल30 mg/100 ml का मतलब क्या है?

जवाब: यह सीमा काफ़ी कम है। शरीर का वज़न, खाना खाया या नहीं, शराब की मात्रा और समय, सब पर असर पड़ता है। "बस एक-दो पेग" भी कई लोगों को सीमा से ऊपर ले जा सकते हैं। सबसे सुरक्षित नियम एक ही है: अगर पी है, तो गाड़ी नहीं चलानी।

साल के आख़िर में जाँच क्यों बढ़ती है?

दिसंबर में शादियों, पार्टियों और न्यू ईयर ईव के कारण कई शहरों में ट्रैफिक पुलिस विशेष ड्रिंक-ड्राइव अभियान चलाती है। रात में नाकों पर ब्रेथ एनालाइज़र से जाँच आम होती है। ऐसे अभियानों में पकड़े जाने पर चालान के साथ गाड़ी भी रोकी जा सकती है।

हादसा हुआ तो मामला और गंभीर

अगर नशे में गाड़ी चलाते हुए किसी को चोट लगती है या किसी की जान जाती है, तो धारा 185 के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएँ भी लग सकती हैं। ऐसे मामले लोक अदालत में आम तौर पर समझौते से नहीं निपटते। बीमा क्लेम में भी गंभीर दिक्कत आ सकती है, क्योंकि ज़्यादातर पॉलिसियों में नशे में ड्राइविंग से जुड़े नुकसान पर शर्तें होती हैं।

पार्टी के बाद सुरक्षित घर कैसे पहुँचें?

सवालपार्टी के बाद सुरक्षित घर कैसे पहुँचें?

जवाब: डेज़िग्नेटेड ड्राइवर: समूह में एक व्यक्ति तय करें जो उस रात बिल्कुल नहीं पिएगा।; कैब या ऑटो: ऐप वाली कैब या भरोसेमंद ऑटो लें।; रुक जाएँ: दोस्त के घर या पास के होटल में रुकना बेहतर है।; दोस्त को रोकें: कोई नशे में गाड़ी चलाने की ज़िद करे, तो चाबी ले लें।।

  • डेज़िग्नेटेड ड्राइवर: समूह में एक व्यक्ति तय करें जो उस रात बिल्कुल नहीं पिएगा।
  • कैब या ऑटो: ऐप वाली कैब या भरोसेमंद ऑटो लें।
  • रुक जाएँ: दोस्त के घर या पास के होटल में रुकना बेहतर है।
  • दोस्त को रोकें: कोई नशे में गाड़ी चलाने की ज़िद करे, तो चाबी ले लें।

नशे में हादसा और बीमा: जेब पर दोहरी मार

सवालनशे में हादसा हुआ तो बीमा क्लेम पर क्या असर पड़ सकता है?

जवाब: नशे में गाड़ी चलाने की क़ीमत सिर्फ़ जुर्माना या जेल नहीं है; बीमा भी साथ छोड़ सकता है। ज़्यादातर मोटर बीमा पॉलिसियों में शर्त होती है कि चालक शराब या नशीले पदार्थ के असर में हो, तो कंपनी अपनी गाड़ी के नुक़सान (ओन डैमेज) का भुगतान नहीं करेगी।

स्थिति अदालतों का रुख़
अपनी गाड़ी का नुक़सान सुप्रीम कोर्ट (12 अप्रैल 2021, Iffco Tokio बनाम Pearl Beverages): कंपनी को दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था; इसके लिए ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं, FIR, मेडिकल रिपोर्ट और हादसे का तरीका भी सबूत बन सकते हैं
थर्ड-पार्टी पीड़ित सुप्रीम कोर्ट (8 अगस्त 2018, Shamanna बनाम Oriental Insurance): पॉलिसी शर्त टूटने पर भी कंपनी पहले पीड़ित को भुगतान करे और फिर गाड़ी मालिक से वसूल सकती है (“पे एंड रिकवर”); यह मामला बिना वैध लाइसेंस का था

2021 के फ़ैसले में अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ़ थोड़ी-सी शराब की मौजूदगी अपने आप में काफ़ी नहीं; यह दिखाना होता है कि चालक नशे के असर में था और इसने हादसे में योगदान दिया। हर मामले का फ़ैसला उसके तथ्यों और पॉलिसी की शर्तों पर होता है।

परिवार के लिए मतलब: गाड़ी की मरम्मत अपनी जेब से, थर्ड-पार्टी मुआवज़े की वसूली का ख़तरा, और ऊपर से धारा 185 की सज़ा। सबसे सस्ता बीमा यही है: पी है, तो गाड़ी नहीं।

आम ट्रैफ़िक नियम और जुर्माने: एक नज़र में

मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के 63 प्रावधान 1 सितंबर 2019 से लागू हुए, जिनमें कई जुर्माने पहले से कई गुना बढ़ाए गए। नीचे केंद्रीय क़ानून में तय कुछ आम उल्लंघनों के जुर्माने हैं। ध्यान रहे, कई राज्य कुछ अपराधों में अपनी कंपाउंडिंग (मौक़े पर भुगतान) दरें तय करते हैं, इसलिए आपके राज्य में रक़म अलग हो सकती है।

उल्लंघन (धारा) 2019 संशोधन के बाद
सामान्य उल्लंघन (177) ₹500
ओवरस्पीडिंग, हल्का मोटर वाहन (183) ₹1,000
ख़तरनाक ड्राइविंग (184) ₹5,000 तक
नशे में ड्राइविंग (185) ₹10,000 तक (पहली बार)
बिना सीटबेल्ट (194B) ₹1,000
दोपहिया पर ओवरलोडिंग/तीन सवारी (194C) ₹2,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता
बिना हेलमेट (194D) ₹1,000 और 3 महीने लाइसेंस अयोग्यता
एम्बुलेंस/आपात वाहन को रास्ता न देना (194E) ₹10,000
बिना बीमा (196) ₹2,000

ध्यान रखें: जुर्माना सिर्फ़ सज़ा नहीं, चेतावनी है। हेलमेट, सीटबेल्ट और तय रफ़्तार, ये तीन आदतें ज़्यादातर चालानों और कई जानलेवा हादसों से बचा सकती हैं। चालान मिलने पर उसे आधिकारिक e-Challan पोर्टल पर ही जाँचें और भरें।

वर्चुअल कोर्ट में चालान: भुगतान या चुनौती

जो ई-चालान तय समय में नहीं भरे जाते या जिन्हें विभाग कोर्ट भेज देता है, वे कई राज्यों में “वर्चुअल कोर्ट” पहुँच जाते हैं। यहाँ ऑनलाइन ही केस देखा जा सकता है, और आप तय कर सकते हैं कि जुर्माना भरना है या चालान को चुनौती देनी है।

वर्चुअल कोर्ट के आधिकारिक FAQ के अनुसार तरीका:

  1. vcourts.gov.in पर जाएँ और अपना राज्य/विभाग चुनें।
  2. मोबाइल नंबर, CNR नंबर, पार्टी का नाम या चालान/वाहन नंबर से केस खोजें।
  3. केस के सामने “View” पर क्लिक करके पूरा चालान देखें।
  4. भुगतान करना हो तो वहीं दिखाई गई राशि ऑनलाइन भरें और रसीद सेव करें।
  5. चुनौती देनी हो तो “I wish to contest the case” चुनें। OTP से सत्यापन होता है; मोबाइल नंबर ग़लत हो तो चेसिस या इंजन नंबर के आख़िरी 4 अंक से सत्यापन का विकल्प है।
फ़ैसला आगे क्या होगा
जुर्माना भरा रसीद मिलेगी, केस निपट जाएगा
चुनौती चुनी केस नियमित कोर्ट में जाएगा, ऑनलाइन भुगतान का विकल्प बंद हो जाएगा
कुछ नहीं किया केस लंबित रहेगा; बाद में दिक़्क़त बढ़ सकती है

सावधानी: चुनौती तभी चुनें जब आपके पास मज़बूत सबूत हों (जैसे उस समय कहीं और होने का सबूत, या गाड़ी पहले ही बिक चुकी हो)। सुनवाई की तारीख़ और कोर्ट का नाम स्क्रीन पर दिखता है; उसे सेव कर लें और तारीख़ पर ज़रूर पेश हों।

रात में पुलिस जाँच (प्रतीकात्मक)
Photo: _daskameraauge_ via Pixabay · Pixabay

निष्कर्ष

नशे में ड्राइविंग सिर्फ़ क़ानून तोड़ना नहीं, अपनी और दूसरों की जान से खेलना है। ₹10,000 का जुर्माना, जेल और लाइसेंस निलंबन की तुलना में एक कैब का किराया बहुत छोटा है। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड NEW MOTOR VEHICLE ACT भी पढ़ सकते हैं।

अगर कभी आपके किसी अपने को रात में मदद चाहिए, तो उन तक पहुँचना आसान होना चाहिए। गाड़ी पर लगा Rakshak Code QR मदद करने वाले को आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँचने देता है, आपका नंबर दिखाए बिना।

सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।

आख़िरी अपडेट: 6 दिसंबर 2025

स्रोत (Sources)

  1. मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 (धारा 185, 206), भारत का राजपत्र: https://egazette.gov.in/WriteReadData/2019/210413.pdf
  2. मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (India Code): https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
  3. MoRTH, Road Accidents in India (वार्षिक रिपोर्ट): https://morth.gov.in/en/road-accident-in-india
  4. सुप्रीम कोर्ट, Iffco Tokio General Insurance Co. Ltd. बनाम Pearl Beverages Ltd., 12 अप्रैल 2021 (Indian Kanoon): https://indiankanoon.org/doc/25720691/
  5. सुप्रीम कोर्ट, Shamanna बनाम Divisional Manager, Oriental Insurance Co. Ltd., 8 अगस्त 2018 (LawSathi): https://research.lawsathi.in/supreme-court/2018/shamanna-another-divisional-manager-oriental-insurance-co-ltd/
  6. The Indian Express, “New traffic fines take effect from today: Rs 1,000 for no helmet, Rs 10,000 for drunken driving” (1 सितंबर 2019): https://indianexpress.com/article/india/new-traffic-fines-list-motor-vehicles-act-2019-5955543/
  7. PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
  8. Virtual Courts, FAQ: https://vcourts.gov.in/virtualcourt/faq.php

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. नशे में पहली बार पकड़े जाने पर कितना जुर्माना है?

धारा 185 के तहत ₹10,000 तक जुर्माना, या 6 महीने तक जेल, या दोनों।

2. क्या दोपहिया पर भी यही नियम है?

हाँ, धारा 185 हर मोटर वाहन चलाने वाले पर लागू है।

3. क्या ड्रिंक-ड्राइव का चालान लोक अदालत में निपट सकता है?

आम तौर पर नहीं। ऐसे मामले कोर्ट में ही चलते हैं।

4. क्या लाइसेंस भी रद्द हो सकता है?

पुलिस लाइसेंस ज़ब्त करके लाइसेंसिंग अथॉरिटी को भेज सकती है, जो निलंबन या रद्द करने की कार्रवाई कर सकती है।

5. नशे में हादसा होने पर अपनी गाड़ी का क्लेम मिलेगा?

पॉलिसी की शर्त के आधार पर ओन डैमेज क्लेम ख़ारिज हो सकता है; सुप्रीम कोर्ट (2021) के अनुसार बीमा कंपनी FIR और मेडिकल रिपोर्ट जैसे सबूतों से भी नशा साबित कर सकती है, ब्रेथ टेस्ट हर बार ज़रूरी नहीं।

More like this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img

More like this

बिना हेलमेट ₹1,000, नशे में ड्राइविंग ₹10,000: जानें चालान रेट

ट्रैफिक चालान जुर्माना 2026: 15 अगस्त से क्या बदला?...

15 अगस्त 2026 से मोटर वाहन कानून में बदलाव: हेलमेट, PUC, ओवरस्पीडिंग, बीमा समेत चालान जुर्माने की...
कोर्ट भवन (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दिल्ली की नेशनल लोक अदालत अब 25 अक्टूबर को:...

DSLSA की 9 सितंबर 2026 की अधिसूचना के अनुसार दिल्ली की नेशनल लोक अदालत रविवार, 25 अक्टूबर...
सड़क पर ट्रैफिक (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चेन्नई में 15 हेल्प सेंटर: पेंडिंग ई-चालान भरने में...

ग्रेटर चेन्नई ट्रैफिक पुलिस 21 से 30 सितंबर 2026 तक 15 विशेष कॉल सेंटर चलाएगी, ताकि लोग...