सीधा जवाब: मोटर वाहन अधिनियम (2019 संशोधन, 1 अप्रैल 2022 से लागू) के तहत हादसे के पीड़ित के पास मुआवज़े के दो रास्ते हैं। धारा 164: ग़लती (negligence) साबित किए बिना तय मुआवज़ा, मौत पर ₹5 लाख और गंभीर चोट पर ₹2.5 लाख। धारा 166: मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में आमदनी, उम्र, इलाज के ख़र्च आदि के आधार पर पूरा मुआवज़ा। धारा 164 का पैसा स्वीकार करने पर धारा 166 का दावा ख़त्म हो जाता है। धारा 166(3) दावे के लिए हादसे से 6 महीने की समय-सीमा रखती है, लेकिन इसे चुनौती देने वाली याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में अंतरिम आदेश दिया कि सुनवाई पूरी होने तक MACT और हाई कोर्ट किसी दावे को समय-सीमा के आधार पर ख़ारिज न करें।
हादसे के बाद मुआवज़े के दो रास्ते
सवालहादसे के बाद मुआवज़े के कौन-से रास्ते हैं?
जवाब: ग़लती साबित करनी है?: नहीं: हाँ, सामान्य तौर पर चालक की लापरवाही; राशि: मौत: ₹5 लाख; गंभीर चोट: ₹2.5 लाख: असल नुकसान के हिसाब से, कोई तय सीमा नहीं; कब चुनें: जल्दी और निश्चित राशि चाहिए: नुकसान बड़ा है (कमाने वाले की मौत, स्थायी विकलांगता)
| धारा 164 (तय मुआवज़ा) | धारा 166 (MACT दावा) | |
|---|---|---|
| ग़लती साबित करनी है? | नहीं | हाँ, सामान्य तौर पर चालक की लापरवाही |
| राशि | मौत: ₹5 लाख; गंभीर चोट: ₹2.5 लाख | असल नुकसान के हिसाब से, कोई तय सीमा नहीं |
| कब चुनें | जल्दी और निश्चित राशि चाहिए | नुकसान बड़ा है (कमाने वाले की मौत, स्थायी विकलांगता) |
LiveLaw के विश्लेषण के अनुसार धारा 165(1) में जोड़ा गया नया प्रावधान कहता है कि धारा 164 के तहत भुगतान स्वीकार करने पर क्लेम पिटीशन ख़त्म (lapse) हो जाती है। यानी बिना ग़लती वाले रास्ते में अधिकतम राशि मौत पर ₹5 लाख और गंभीर चोट पर ₹2.5 लाख ही है।
धारा 164: बिना ग़लती साबित किए मुआवज़ा
सवालधारा 164 में कितना मुआवज़ा मिलता है?
जवाब: 2019 संशोधन से पुरानी धारा 163A (दूसरी अनुसूची वाला फ़ॉर्मूला) हटाई गई और उसकी जगह धारा 164 आई। इसमें दावेदार को यह साबित नहीं करना पड़ता कि हादसा किसकी ग़लती से हुआ। गाड़ी का मालिक/बीमा कंपनी तय राशि के लिए ज़िम्मेदार होती है। ध्यान रखें: अगर परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत हुई है, तो धारा 166 का पूरा दावा अक्सर ₹5 लाख से कहीं ज़्यादा बन सकता है।

धारा 166: MACT में पूरा दावा
यह दावा उस इलाक़े के MACT में किया जाता है जहाँ हादसा हुआ, या जहाँ दावेदार रहता है, या जहाँ प्रतिवादी (मालिक/बीमा कंपनी) का कार्यालय है। दावे में आम तौर पर ये चीज़ें गिनी जाती हैं:
- इलाज का ख़र्च और आगे का इलाज।
- कमाई का नुकसान (अस्थायी या स्थायी)।
- स्थायी विकलांगता।
- मौत होने पर आश्रितों की आर्थिक हानि।
- दर्द, तकलीफ़ और दूसरे नुकसान।
2019 संशोधन का एक और बदलाव: धारा 166(5) के अनुसार घायल व्यक्ति की बाद में मौत हो जाए, तो उसका दावा उसके कानूनी वारिसों को मिल जाता है, चाहे मौत का कारण उसी चोट से जुड़ा हो या नहीं।
6 महीने की समय-सीमा: अभी क्या स्थिति है?
सवालक्या 6 महीने बाद MACT दावा नहीं हो सकता?
जवाब: धारा 166(3) कहती है: हादसे के 6 महीने के अंदर आवेदन न किया जाए तो दावा स्वीकार नहीं होगा। यह सीमा 1994 में हटा दी गई थी और 2019 संशोधन से 1 अप्रैल 2022 से वापस आई। इसे संविधान के ख़िलाफ़ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका (Bhagirathi Dash v Union of India, W.P.(C) 166/2024) दायर है।
सबसे सुरक्षित सलाह: इंतज़ार न करें। हादसे के 6 महीने के अंदर दावा दाख़िल कर दें, ताकि बाद के किसी फ़ैसले से नुकसान न हो।
MACT दावे के लिए ज़रूरी काग़ज़
सवालMACT दावे के लिए कौन-से काग़ज़ चाहिए?
जवाब: FIR की कॉपी और पुलिस की दुर्घटना रिपोर्ट।; अस्पताल के रिकॉर्ड, इलाज के बिल, दवाइयों की रसीदें।; चोट/विकलांगता का मेडिकल सर्टिफ़िकेट; मौत होने पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र।; पीड़ित की उम्र और आमदनी के प्रमाण (सैलरी स्लिप, ITR, आदि)।; दावेदारों के पहचान पत्र और मृतक से रिश्ते के प्रमाण।; टक्कर मारने वाली गाड़ी का नंबर और, अगर पता हो, बीमा की जानकारी।।
- FIR की कॉपी और पुलिस की दुर्घटना रिपोर्ट।
- अस्पताल के रिकॉर्ड, इलाज के बिल, दवाइयों की रसीदें।
- चोट/विकलांगता का मेडिकल सर्टिफ़िकेट; मौत होने पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र।
- पीड़ित की उम्र और आमदनी के प्रमाण (सैलरी स्लिप, ITR, आदि)।
- दावेदारों के पहचान पत्र और मृतक से रिश्ते के प्रमाण।
- टक्कर मारने वाली गाड़ी का नंबर और, अगर पता हो, बीमा की जानकारी।
अगर गाड़ी का पता ही न चले
अगर टक्कर मारने वाली गाड़ी की पहचान नहीं हो सकी, तो MACT का दावा संभव नहीं होता। ऐसे में हिट-एंड-रन योजना 2022 के तहत ज़िला प्रशासन के ज़रिए तय मुआवज़ा मिलता है।
मुफ़्त क़ानूनी मदद
जो परिवार वकील का ख़र्च नहीं उठा सकते, वे ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की हेल्पलाइन 15100 है।
जब टक्कर मारकर भाग जाए: हिट-एंड-रन मुआवज़ा
सवालअगर टक्कर मारने वाली गाड़ी का पता न चले तो मुआवज़ा मिलता है?
जवाब: कई हादसों में टक्कर मारने वाला वाहन पकड़ा नहीं जाता। ऐसे पीड़ितों के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने 25 फ़रवरी 2022 को "Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022" अधिसूचित की, जो 1 अप्रैल 2022 से पुरानी सोलेशियम योजना, 1989 की जगह लागू है।
| स्थिति | पहले (सोलेशियम योजना) | अब (2022 योजना) |
|---|---|---|
| मृत्यु | ₹25,000 | ₹2,00,000 |
| गंभीर चोट | ₹12,500 | ₹50,000 |
कैसे आवेदन करें:
- हादसे की FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी लें, जिसमें लिखा हो कि वाहन का पता नहीं चला।
- इलाज के काग़ज़, मेडिकल रिपोर्ट और (मृत्यु के मामले में) पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र संभालकर रखें।
- योजना में दावा “Claims Enquiry Officer” के पास तय फ़ॉर्म में किया जाता है; मंज़ूरी “Claims Settlement Commissioner” देते हैं और राशि सीधे बैंक खाते में आती है। अपने इलाक़े के सही दफ़्तर की जानकारी पुलिस थाने या ज़िला प्रशासन से लें।
- बैंक खाते का विवरण और पहचान पत्र साथ रखें।
मंत्रालय के अनुसार आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है। अगर बाद में वाहन पकड़ा जाता है, तो मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में अलग से दावा भी किया जा सकता है।
मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं
हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि “पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे”। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए। इनके अनुसार नेकनीयती से आपात मदद करने वाले व्यक्ति पर घायल की चोट या मौत के लिए दीवानी या आपराधिक कार्रवाई नहीं होती।
| मदद करने वाले का अधिकार | इसका मतलब |
|---|---|
| तुरंत जाने की छूट | पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं |
| पहचान बताना ज़रूरी नहीं | पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता |
| अस्पताल का ख़र्च नहीं | अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता |
| पावती (रसीद) | नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है |
| गवाह बनना मर्ज़ी से | गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है |
नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।
गाड़ी का बीमा: कौन-सा ज़रूरी, कौन-सा समझदारी
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत सार्वजनिक जगह पर कोई भी गाड़ी चलाने के लिए कम से कम थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है। यह बीमा उन लोगों के नुक़सान के लिए है जिन्हें आपकी गाड़ी से चोट या नुक़सान पहुँचे। 2019 संशोधन के बाद बिना बीमा गाड़ी चलाने पर पहली बार ₹2,000 जुर्माने का प्रावधान किया गया (राज्यों में कंपाउंडिंग की रक़म अलग हो सकती है)।
| बीमा का प्रकार | किसका नुक़सान कवर | ज़रूरी? |
|---|---|---|
| थर्ड-पार्टी | दूसरों को चोट, मौत या संपत्ति का नुक़सान | हाँ, क़ानूनन |
| ओन डैमेज / कॉम्प्रिहेंसिव | आपकी अपनी गाड़ी का नुक़सान (हादसा, आग, चोरी आदि, पॉलिसी के अनुसार) | नहीं, लेकिन समझदारी |
| पर्सनल एक्सीडेंट कवर | चालक/मालिक को चोट या मृत्यु | पॉलिसी के अनुसार |
ध्यान रखने की बातें:
- पॉलिसी की तारीख़ याद रखें; एक दिन की देरी में हुआ हादसा भारी पड़ सकता है।
- CNG किट या कोई बड़ा बदलाव हो, तो बीमा कंपनी को बताएँ।
- पॉलिसी में “Exclusions” (किन हालात में क्लेम नहीं मिलेगा) एक बार ज़रूर पढ़ें।
- हादसे या खड़ी गाड़ी को नुक़सान होने पर तुरंत बीमा कंपनी को सूचना दें और तस्वीरें लें।

निष्कर्ष
हादसे के बाद का समय परिवार के लिए सबसे मुश्किल होता है, लेकिन सही रास्ता चुनना और समय पर दावा दाख़िल करना लाखों रुपये का फ़र्क़ डाल सकता है। काग़ज़ शुरू से संभालें और 6 महीने के अंदर दावा करें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
हादसे के तुरंत बाद परिवार तक ख़बर पहुँचना भी उतना ही ज़रूरी है। गाड़ी पर Rakshak Code QR लगा हो तो मौके पर मौजूद व्यक्ति उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को कॉल या WhatsApp कर सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 25 अक्टूबर 2026
स्रोत (Sources)
- LiveLaw, New Motor Vehicles Act Provisions Effective From April 1: Limitation For MACT Claims, Removal Of 2nd Schedule & More (31 मार्च 2022): https://www.livelaw.in/know-the-law/new-motor-vehicles-act-provisions-effective-from-april-1-limitation-for-mact-claims-removal-of-2nd-schedule-more-195450
- LiveLaw, No Motor Accident Claim Should Be Dismissed As Time-Barred: Supreme Court’s Interim Order In Plea Challenging S.166(3) MV Act (7 नवंबर 2025): https://www.livelaw.in/top-stories/no-motor-accident-claim-should-be-dismissed-as-time-barred-supreme-court-interim-order-s1663-mv-act-309095
- Indian Kanoon, Section 166 in The Motor Vehicles Act, 1988: https://indiankanoon.org/doc/136948773/
- Bar & Bench, Supreme Court stays 6-month deadline to file motor accident claims: https://www.barandbench.com/news/supreme-court-stays-6-month-deadline-to-file-motor-accident-claims-orders-macts-hcs-not-to-reject-petitions-on-ground-of-delay
- PIB, हिट-एंड-रन पीड़ितों के मुआवज़े की नई योजना (25 फ़रवरी 2022): https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1801698
- PIB, लोकसभा उत्तर: हिट-एंड-रन मुआवज़ा और Motor Vehicle Accident Fund: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1845885
- PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
- MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (धारा 146) (India Code): https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/9460/1/a1988-59.pdf
- PIB/MoRTH, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 के प्रमुख प्रावधान (30 जुलाई 2019): https://parivahan.gov.in/sites/default/files/NOTIFICATION%26ADVISORY/30-July-2019.pdf
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. धारा 164 में कितना मुआवज़ा है?
मौत पर ₹5 लाख और गंभीर चोट पर ₹2.5 लाख, बिना ग़लती साबित किए।
2. MACT दावा कितने समय में करना चाहिए?
क़ानून में 6 महीने की सीमा है; सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2025 के अंतरिम आदेश के बावजूद, 6 महीने के अंदर दाख़िल करना सबसे सुरक्षित है।
3. क्या दावा मेरे शहर के MACT में हो सकता है?
हाँ, दावा उस MACT में भी हो सकता है जिसके क्षेत्र में दावेदार रहता है या कारोबार करता है।
4. घायल की बाद में मौत हो जाए तो दावे का क्या होगा?
धारा 166(5) के अनुसार दावा कानूनी वारिसों को मिल जाता है।
5. क्या धारा 164 और धारा 166 दोनों में पैसा ले सकते हैं?
नहीं। धारा 165(1) के नए प्रावधान के अनुसार धारा 164 का मुआवज़ा स्वीकार करने पर उसी हादसे का क्लेम पिटीशन ख़त्म हो जाता है, इसलिए दोनों में से एक रास्ता सोच-समझकर चुनें।


