सीधा जवाब: बुधवार, 23 सितंबर 2026 की रात लगभग 11:20 बजे ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एक बस में आग लग गई। PTI (ThePrint) के अनुसार हादसे में 9 यात्रियों की मौत हुई और 20 से ज़्यादा यात्रियों को सुरक्षित बचाया गया। बस में 35 यात्री थे। शुरुआती जाँच में बस के AC सिस्टम में स्पार्क या धमाके की आशंका जताई गई है, जिससे इंजन का लुब्रिकेंट तेल जल उठा और आग तेज़ी से फैली। ड्राइवर और कंडक्टर हिरासत में हैं। सबसे बड़ी सीख: बस में बैठते ही निकास द्वार और इमरजेंसी हैमर देख लीजिए।
घटना एक नज़र में
| बात | जानकारी (PTI/ThePrint, 24 सितंबर 2026) |
|---|---|
| कब | बुधवार, 23 सितंबर 2026, रात लगभग 11:20 बजे |
| कहाँ | यमुना एक्सप्रेसवे, 33 किमी माइलस्टोन के पास, जेवर थाना क्षेत्र, ग्रेटर नोएडा |
| बस | कश्मीरी गेट (दिल्ली) से महोबा, 35 यात्री |
| मौतें | 9 यात्री (जलने या दम घुटने से) |
| बचाए गए | 20 से ज़्यादा |
| संभावित वजह | AC सिस्टम में स्पार्क/शॉर्ट सर्किट (शुरुआती जाँच) |
| कार्रवाई | FIR दर्ज, ड्राइवर और कंडक्टर हिरासत में |
मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार के अनुसार सूचना मिलते ही पुलिस, रेस्क्यू टेंडर, जेवर टोल प्लाज़ा पर तैनात फ़ायर टेंडर और चार अन्य फ़ायर टेंडर मौक़े पर पहुँचे और आग बुझाई। धुएँ के बीच बस में घुसने पर 9 लोग अंदर मृत मिले।
शुरुआती जाँच में क्या आया?
सवालयमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे में आग कैसे लगी?
जवाब: अग्निशमन अधिकारी के अनुसार शुरुआती जाँच से लगता है कि बस के AC सिस्टम में स्पार्क या धमाके से इंजन का लुब्रिकेंट तेल जल उठा और आग तेज़ी से फैली। ADM अजीत कुमार सिंह ने कहा कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी। एक घायल यात्री ने बताया कि आग ड्राइवर की तरफ़ से शुरू हुई, बस में धुआँ भर गया और लोग जान बचाने के लिए बस से कूदने लगे।

बस में चढ़ते ही क्या देखें?
सवालबस में चढ़ते ही कौन सी चीज़ें देखें?
जवाब: आग लगने पर बचने के लिए सिर्फ़ कुछ सेकंड मिलते हैं, और धुएँ में कुछ दिखाई नहीं देता। इसलिए सीट पर बैठते ही 30 सेकंड की यह जाँच कीजिए: निकास द्वार: आगे और पीछे के दरवाज़े, और इमरजेंसी एग्ज़िट (अक्सर पीछे या छत पर) कहाँ है।; इमरजेंसी हैमर: खिड़की के पास शीशा तोड़ने वाला हैमर लगा है या नहीं।
- निकास द्वार: आगे और पीछे के दरवाज़े, और इमरजेंसी एग्ज़िट (अक्सर पीछे या छत पर) कहाँ है।
- इमरजेंसी हैमर: खिड़की के पास शीशा तोड़ने वाला हैमर लगा है या नहीं।
- रास्ता साफ़: गलियारे में सामान, बोरे या अतिरिक्त सीटें तो नहीं रखी हैं।
- अपनी सीट से रास्ता: आँख बंद करके भी निकास तक कैसे पहुँचेंगे, एक बार सोच लें।
आग लगे तो क्या करें?
सवालचलती बस में आग लगे तो क्या करें?
जवाब: धुआँ या जलने की गंध आते ही ड्राइवर को ज़ोर से बताएँ और बस रुकवाएँ।; सामान छोड़ दें; सबसे पहले बाहर निकलें।; धुएँ में नीचे झुककर चलें, क्योंकि नीचे हवा थोड़ी साफ़ होती है; नाक-मुँह कपड़े से ढकें।; दरवाज़ा न खुले तो हैमर से खिड़की का शीशा उसके कोने पर मारकर तोड़ें।; बाहर निकलकर बस से दूर हटें, सड़क के बीच न खड़े हों, और 112 पर कॉल करें।।
- धुआँ या जलने की गंध आते ही ड्राइवर को ज़ोर से बताएँ और बस रुकवाएँ।
- सामान छोड़ दें; सबसे पहले बाहर निकलें।
- धुएँ में नीचे झुककर चलें, क्योंकि नीचे हवा थोड़ी साफ़ होती है; नाक-मुँह कपड़े से ढकें।
- दरवाज़ा न खुले तो हैमर से खिड़की का शीशा उसके कोने पर मारकर तोड़ें।
- बाहर निकलकर बस से दूर हटें, सड़क के बीच न खड़े हों, और 112 पर कॉल करें।
| करें | न करें |
|---|---|
| तुरंत निकलें, नीचे झुककर | सामान समेटने में समय गँवाना |
| बच्चों, बुज़ुर्गों की मदद | दरवाज़े पर धक्का-मुक्की |
| बस से दूर, सुरक्षित जगह | एक्सप्रेसवे की तेज़ लेन में खड़े होना |
बस संचालकों की ज़िम्मेदारी
सवालबस संचालकों की क्या ज़िम्मेदारी है?
जवाब: बस में काम करने वाले एक्सटिंग्विशर, खुलने लायक़ इमरजेंसी एग्ज़िट, हर खिड़की के पास हैमर, नियमित वायरिंग और AC सिस्टम की जाँच, और गलियारे को खाली रखना, ये बुनियादी ज़रूरतें हैं। ड्राइवर और कंडक्टर को आग लगने पर यात्रियों को निकालने की ट्रेनिंग होनी चाहिए।
मदद करने वाले के अधिकार: डरिए नहीं
सवालघायल की मदद करने पर क्या पुलिस परेशान कर सकती है?
जवाब: हादसे की जगह पर कई लोग इसलिए रुकते नहीं कि "पुलिस के चक्कर में पड़ जाएँगे"। यह डर दूर करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में धारा 134A जोड़ी गई, और सड़क परिवहन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2020 को गुड समैरिटन (नेक मददगार) के अधिकारों के नियम प्रकाशित किए।
| मदद करने वाले का अधिकार | इसका मतलब |
|---|---|
| तुरंत जाने की छूट | पुलिस को सूचना देने या घायल को अस्पताल पहुँचाने के बाद आप जा सकते हैं |
| पहचान बताना ज़रूरी नहीं | पुलिस या कोई और व्यक्ति नाम, पता, फ़ोन नंबर बताने को मजबूर नहीं कर सकता |
| अस्पताल का ख़र्च नहीं | अस्पताल आपसे भर्ती की औपचारिकता या इलाज का ख़र्च नहीं माँग सकता |
| पावती (रसीद) | नाम बताना चाहें तो अस्पताल लिखित पावती दे सकता है |
| गवाह बनना मर्ज़ी से | गवाह बनना या न बनना आपकी पसंद है |
नियमों के मुताबिक़ हर सरकारी और निजी अस्पताल को इन अधिकारों का चार्टर हिंदी, अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा में प्रवेश द्वार या साफ़ दिखने वाली जगह पर और अपनी वेबसाइट पर लगाना होता है। अगर कोई अस्पताल या कर्मचारी परेशान करे, तो शांति से इन नियमों का ज़िक्र कीजिए। याद रखिए: आपकी कुछ मिनट की मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है।
जब टक्कर मारकर भाग जाए: हिट-एंड-रन मुआवज़ा
कई हादसों में टक्कर मारने वाला वाहन पकड़ा नहीं जाता। ऐसे पीड़ितों के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने 25 फ़रवरी 2022 को “Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022” अधिसूचित की, जो 1 अप्रैल 2022 से पुरानी सोलेशियम योजना, 1989 की जगह लागू है।
| स्थिति | पहले (सोलेशियम योजना) | अब (2022 योजना) |
|---|---|---|
| मृत्यु | ₹25,000 | ₹2,00,000 |
| गंभीर चोट | ₹12,500 | ₹50,000 |
कैसे आवेदन करें:
- हादसे की FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी लें, जिसमें लिखा हो कि वाहन का पता नहीं चला।
- इलाज के काग़ज़, मेडिकल रिपोर्ट और (मृत्यु के मामले में) पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र संभालकर रखें।
- योजना में दावा “Claims Enquiry Officer” के पास तय फ़ॉर्म में किया जाता है; मंज़ूरी “Claims Settlement Commissioner” देते हैं और राशि सीधे बैंक खाते में आती है। अपने इलाक़े के सही दफ़्तर की जानकारी पुलिस थाने या ज़िला प्रशासन से लें।
- बैंक खाते का विवरण और पहचान पत्र साथ रखें।
मंत्रालय के अनुसार आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है। अगर बाद में वाहन पकड़ा जाता है, तो मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में अलग से दावा भी किया जा सकता है।

निष्कर्ष
बस में आग का हादसा कुछ ही मिनटों का होता है। निकास का रास्ता पहले से पता हो, तो वही कुछ सेकंड जान बचा सकते हैं। यात्री सजग रहें और संचालक सुरक्षा उपकरणों से समझौता न करें। इस विषय की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी पुरानी गाइड REASONS FOR ROAD ACCIDENT IN INDIA भी पढ़ सकते हैं।
हादसे के समय परिवार तक जल्दी ख़बर पहुँचे, इसके लिए गाड़ी पर Rakshak Code QR लगाइए: मदद करने वाला उसे स्कैन करके आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुँच सकता है, आपका नंबर देखे बिना।
सुरक्षित चलाइए, और पहुँच में रहिए।
आख़िरी अपडेट: 25 सितंबर 2026
स्रोत (Sources)
- ThePrint (PTI), “Nine killed, more than 20 rescued as bus catches fire on Yamuna Expressway in Greater Noida” (24 सितंबर 2026): https://theprint.in/india/nine-killed-more-than-20-rescued-as-bus-catches-fire-on-yamuna-expressway-in-greater-noida/3051891/
- MoRTH, Road Safety: https://morth.gov.in/en/road-safety
- PIB, “Rules published for protection of Good Samaritans” (GSR 594(E), 29 सितंबर 2020): https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1660551
- MoRTH, Good Samaritan नियम (प्रेस नोट/पाठ): https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/GOOD%20SAMARITIAN%20%28PRESS%20RELEASE%29.pdf
- PIB, हिट-एंड-रन पीड़ितों के मुआवज़े की नई योजना (25 फ़रवरी 2022): https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1801698
- PIB, लोकसभा उत्तर: हिट-एंड-रन मुआवज़ा और Motor Vehicle Accident Fund: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1845885
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसा कहाँ हुआ?
PTI के अनुसार ग्रेटर नोएडा में जेवर थाना क्षेत्र में, एक्सप्रेसवे के 33 किमी माइलस्टोन के पास।
2. हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
9 यात्रियों की मौत हुई; 20 से ज़्यादा को बचाया गया।
3. आग किस वजह से लगी?
शुरुआती जाँच में AC सिस्टम में स्पार्क या शॉर्ट सर्किट की आशंका है; जाँच जारी है।
4. बस में आग लगे तो सबसे पहले क्या करें?
सामान छोड़कर तुरंत नीचे झुककर निकास की ओर जाएँ; दरवाज़ा न खुले तो हैमर से खिड़की तोड़ें।
5. क्या घायल को अस्पताल पहुँचाने वाले को अपना नाम बताना ज़रूरी है?
नहीं। गुड समैरिटन नियमों (2020) के अनुसार पुलिस या कोई और व्यक्ति मदद करने वाले को नाम, पता या दूसरी निजी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता; बताना या गवाह बनना उसकी अपनी मर्ज़ी है।


